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Friday, April 29, 2011






भ्रष्ट ता·तों पर ·सता शि·ंजा
·लमाड़़़ी · जेल और ·निमोझी पर आरोप पत्र
हृ प्रमोद भार्गव
देश ·ी अवाम ·े लिए यह ए· अच्छी खबर है ·ि न्यायि· स·्रियता ·े चलते भ्रष्ट ता·तवरों ·े जेल जाने ·ा सिलसिला शुरु हो गया है। ‘समरथ ·ो नहीं दोष गुसाईं’ ·ा भारतीय परंपरा में प्रचलित मिथ· अब टूट रहा है। 2 जी स्पेक्टम घोटाले से जुड़े मंत्री ए राजा और उन·े सहयोगी अधि·ारी पहले ही जेल ·ी हवा खा रहे हैं। स्पेक्टम ·ा लाभ उठाने वाली ·ुछ चुनिंदा निजी ·ंपनियों ·े मालि· और महाप्रबंध· भी सींखचों ·े पीछे हैं। राजनीति· दृष्टि से सबसे ज़्यादा संवेदनशील माना जाने वाला ए· नया आरोपपत्र सीबीआई ने अदालत में दाखिल ·िया है। इसमें तमिलनाडू ·े मुख्यमंत्री एम ·रुणानिधि ·ी राज्यसभा सदस्य बेटी ·निमोझी ·ा नाम षड्यंत्र रचने ·े सह आरोपियों में दर्ज है। ·रुणानिधि ·ी पत्नी दयालु अम्मल भी इस लपेटे में ·ालांतर में आ जाएंगी, ऐसी उम्मीद है। इधर बहु प्रतिक्षित राष्ट्र्रमण्डल खेल आयोजन समिति ·े पूर्व अध्यक्ष सुरेश ·लमाडी ·ो भी जेल ·ा रास्ता दिखा देने से यह ज़ाहिर हुआ है ·ि जन अपेक्षाओं ·े अनुरुप अब विधायि·ा और ·ार्यपालि·ा ·ी भी इच्छाशक्ति मजबूत हो रही है। क्यों·ि ऐसी अट·लें जताई जा रही हैं ·ि सुरेश ·लमाड़ी ·ी गिर$फ्तारी और ·निमोझी ·ा आरोपपत्र में नामज़दी प्रधानमंत्री ·ार्यालय ·ी सहमति ·े बाद ही संभव हुए।
इस समय देश में भ्रष्टाचार ·े विरुद्ध जैसा $गुस्से ·ा माहौल है, उससे लगता है ·ि अब सींखचों ·े पीछे न ·ेवल आम आदमी बल्·ि उच्च पद और उंची राजनीति· श$िख्सयतें भी पहुंचती रहेंगी। क्यों·ि जेल में अब त· आर्थि· दृष्टि से वंचित और लाचारों ·ो ही ठूंसा जाता रहा है। बड़ी मछलियां अक्सर ·ानून ·े दायरे से बच नि·लती हैं, यह धारणा अब खंडित हो रही है। क्यों·ि अब राजनीति, प्रशासन और व्यापार क्षेत्र ·े ए· से ए· तीसमार$खां जेल में हैं।
गठजोड़ ·ी यही वह त्रिलेल है जो छोटे से ले·र बड़े से बड़े भ्रष्टाचार ·ा षड्यंत्र रच ·रोड़ों, अरबों ·े वारे-न्यारे ·र ·ानून और समाज ·ो ठेंगा दिखाते हुए भ्रष्ट ·माई से सामाजि· आर्थि· प्रतिष्ठा हासिल ·रती रही है। इस गठजोड़ में संलग्न लोगों ·ी गिर$फ्तारी से यह वातावरण निर्मित होने लगा है, ·ि संविधान ·ी सर्वोच्चता और न्यायि· शासन व्यवस्था ·ो ·ोई चुनौती नहीं है।
बशर्ते हमारे संविधान ·े सभी अंग इच्छाबल और बिना ·िसी प्रलोभन ·े ·र्तव्य पालन में जुटे रहें। वैसे भी हमारा संविधान दुनिया ·े सर्वश्रेष्ठ संविधानों ·ी सूची में दर्ज है। क्यों·ि इसमें लो·तंत्र ·ो जीवंत बनाने वाले चारों स्तंभ अलग-अलग ·ार्य विभाजन से जुड़े रहते हुए संवैधानि· व्यवस्था ·ो मज़बूत बनाए रखने ·ी पृष्ठभूमि तैयार ·रते हैं। ले·िन वैश्वि· उदारवाद ·े प्रभाव ·े चलते $खासतौर से विधायि·ा और ·ार्यपालि·ा में अतिरिक्त भ्रष्टाचार ·े प्रति आसक्ति देखने में आ रही है। नतीजतन न्यायपालि·ा और चौथे स्तंभ ·ो सामान्य से ·ुछ अधि· स·्रियता दिखानी पड़ रही है। इस नाते इन स्तंभों पर संतुलन गड़बड़ा देने ·े भी आरोप लगते रहे हैं। ·िंतु क्या यह सही नहीं है ·ि यदि न्यायपालि·ा और चौथा स्तंभ भी अपने ·र्तव्य से विमुख हो जाते तो क्या 2जी स्पेक्टम, राष्ट्रमण्डल खेल और आदर्श सोसायटी जैसे घोटाले सामने आ पाते ? यदि सभी संतभों में परस्पर संतुलन बनाए रखना है तो ज़रूरी है ·ि संविधान ·े सभी स्तंभ ·ानून ·ी मंशा और जन अपेक्षाओं ·े अनुसार ·ाम ·रें। अन्यथा अन्य स्तंभों ·ो सामाजि· सर·ारों से जुड़े मुद्दे उठा·र अंजाम त· पहुंचाने ·े लिए न्यायि· और समाचारि· स·्रियता ·ा हिस्सा बनना पड़ेगा। ·ांग्रेस सांसद सुरेश ·लमाडी ·ो स्·ोर परिणाम दिखाने वाली घडिय़ों ·ी $खरीद में ·िए घोटाले में हिरासत में लिया गया है। इस ठे·े में नियमों ·ी इस हद त· धज्जियां उड़ाई गईं ·ि जिस स्विस टाइम·ीपिंग ·ंपनी ·ो ठे·ा देना था, ·ेवल उसी ·ी निविदा ·ा लि$फ$फा खोला गया। बां·ी निविदादाताओं ·ो दर·िनार ·रते हुए उन·े लि$फा$फे ही नहीं खोले गए। स्पेन ·ी ·ंपनी ·ी भी निविदा बंद लि$फा$फे में पड़ी रही। मसलन दरों ·ी प्रतिस्पर्धा में शामिल दावेदारों ·ी दरों ·ी मूल्यां·न हेतु सारिणी भी नहीं बनाई गई और 141 ·रोड़ ·ी अं·ों ·े स्·ोर ·ा हिसाब रखने वाली घडिय़ां बालाबाला $खरीद ली गईं। यह निर्णय $खरीद समिति ने सुनियोजित ढंग से साजि़शन लिया और ·रोड़ों ·ी रिश्वत ली। इसी मामले में आयोजन समिति ·े महासचिव ललित भनोत और वी·े वर्मा पहले से ही सलाखों ·े पीछे हैं। यदि सर्वोच्च न्यायालय ·ी फट·ार से आगे बढऩे वाली सीबीआई जांच ·ुछ ·दम और आगे बढ़ती है तो खेलों में पैसे ·ा खेल खेलने वाले और भी आला नेता व अ$फसर फंदे में आएंगे। क्यों·ि शुंगलू जांच समिति ने तो दिल्ली ·े उपराज्यपाल तेजिन्दर खन्ना एवं मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ·ो भी आरोपों ·े घेरे में लिया है। ·िंतु अभी त· इन दोनों राजनीति· श$िख्सयतों से पूछताछ ही शुरु नहीं हुई। दरअसल प्रत्यक्षअप्रत्यक्ष घोटालेबाज़ों ·ी जबत· पूरी श्रृंखला च·नाचूर नहीं होगी तब त· भ्रष्टाचार ·ो निर्मूल ·रना मुश्·िल है। 1 लाख 76 हज़ार ·रोड़ रुपये ·े राजस्व हानि वाले 2जी स्पेक्टम घोटाले में सीबीआई ने जांच में पाया है ·ि डीबी रियल्टी नाम· ·ंपनी और उससे जुड़ी अन्य ·ंपनियों ने ·रुणानिधि ·े परिवार ·ी ·लिअंगर टीवी ·ंपनी ·ो विभिन्न माध्यमों से 200 ·रोड़ रुपये ·ी धनराशि हस्तांतरित ·ी। इस आरोप ·ी आंच ने ·रुणानिधि ·े पूरे परिवार ·ो झुलसा दिया है। ·लिअंगर टीवी में ·्रमश: 20 और 60 प्रतिशत ·ा हिस्सा ·निमोझी और 80 साल ·ी उन·ी सौतेली मां दयालु अम्मल ·ा है। 20 $फीसदी हिस्सा चैनल ·े प्रबंध निदेश· शरद ·ुमार ·ा है। इतनी बड़ी राशि ·ी हिस्सेदार होने ·े बावजूद दयालु अम्मल ·ा नाम $िफलहाल आरोपपत्र में शामिल नहीं है। इस पर हैरानी लाजि़मी है ·ि वे सीबीआई ·े घेरे से क्यों बचा ली गई ? इसमें ए· आशं·ा यह जताई जा रही है ·ि वे वयोवृद्ध हैं और तमिल ·े अलावा दूसरी ·ोई भाषा नहीं जानती। इसलिए उन्होंने पारिवारि· सदस्यों ·े भरोसे ही वित्तीय लेनदेन ·े दस्तावेज़ों पर दस्तखत ·र दिए होंगे। ये सभी दस्तावेज़ अंग्रेज़ी में हैं। इससे ज़ाहिर है हमारे देश में अंग्रेजी अपारदर्शिता ·ो बढ़ाने ·ा ·ाम भी ·र रही है। दयालु अम्मल ·े नाम ·ो तत्·ाल आरोपपत्र में न लिए जाने ·े पीछे ए· अट·ल यह भी लगाई जा रही है ·ि ·ेंद्र संप्रग सर·ार में ·रुणानिधि ·े दल द्रविड़ मुनेत्र ·षमग ·े 18 सांसदों ·ी अहम भागीदारी है। इसलिए ·ांग्रेस, द्रमु· द्वारा समर्थन वापिस लेने ·ी स्थिति में गठबंधन सर·ार चलाने ·े वि·ल्प नहीं तलाश लेती तब त· दयालु अ मल ·ी आरोपपत्र में नामज़दगी टाली जाती रहेगी। अलबत्ता सर्वोच्च न्यायालय ·ी लताड़ ज़रूर दयालु अम्मल पर ·हर बरपा स·ती है। बहरहाल ·लमाड़ी और ·निमोझी ·े ·ानून ·े घेरे में आ जाने से आमजन में यह उम्मीद तो जगी है ·ि भ्रष्टाचारियों ·े गठजोड़ ·ी श्रृंखला अब टूटेगी। इन·ी ·ाली·माई वसूलने ·ा सिलसिला और शुरु हो जाता है तो उम्मीद ·ी जा स·ती है ·ि भ्रष्टाचारियों ·ा सामाजि· बहिष्·ार भी शुरु हो जाएगा।




पीएसी · नज़र में पीएमओ दोषी, प्रधानमंत्री निर्दोष
नई दिल्ली। 30 अप्रैल ·ो पब्लि· ए·ाउण्ट्स ·मेटी (पीएसी) ·ा ·ार्य·ाल $खत्म होने जा रहा है। ·ार्य·ाल खत्म होने से पहले उसे अपनी वह महत्वपूर्ण रिपोर्ट लो·सभा अध्यक्ष ·ो सौंपनी है जिसमें वह टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले ·ी जांच ·र रहा है। वैसे तो पीएसी ·ी रपटों ·ा ·ोई $खास महत्व नहीं होता, ले·िन टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में पीएसी ·ी रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गयी है।
रिपोर्ट बा·ायदा $फाइनल ·ी जाएगी गुरुवार ·ो 22 सदस्यों ·ी बैठ· में। ले·िन इस बैठ· से ए· दिन पहले रिपोर्ट ·े ·ुछ हिस्से ली· हो गये हैं जो बता रहे हैं ·ि ट्जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पीएम पूरी तरह से निर्दोष हैं। पीएम मनमोहन सिंह ·ो निर्दोष मानने ·े पीछे पीएसी ·ा तर्· है ·ि संचार मंत्री ए राजा ने प्रधानमंत्री ·ो अंधेरे में रखा। हां, भले ही पीएसी प्रधानमंत्री ·ो निर्दोष ·रार दे रही हो, ले·िन पहली बार टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में पी चिदम्बरम पर सवाल ज़रूर उठाया है। पीएसी ·ी रिपोर्ट ·हती है ·ि तत्·ालीन वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने प्रधानमंत्री से ·हा था ·ि वे अब इस मामले ·ो क्लोज़ समझ लें।
हालां·ि पीएसी प्रधानमंत्री ·ार्यालय ·ो पूरी तरह से निर्दोष नहीं मानती है। रिपोर्ट ·हती है ·ि 10 जनवरी 2008 ·ो स्पेक्ट्रम आवंटित ·िये गये। इससे पहले 3 जनवरी ·ो प्रधानमंत्री ·ार्यालय द्वारा संचार मंत्रालय जो $फाइल भेजी गयी उसमें सं·ेत ·िया गया था ·ि प्रधानमंत्री $फार्मल ·म्युनि·ेशन नहीं चाहते हैं। और पीएमओ ने अपने आप·ो इस आवंटन में आर्म्स लेन्थ मानने ·ी सलाह दी थी। यह आर्म्स लेन्थ अंग्रेज़ी ·ा ऐसा मुहावरा है जिस·ा मतलब होता है ·ि आप जो ·रेंगे हम उसमें आप·े विश्वसनीय साझीदार हैं। अब पीएसी इसी शब्द पर आपत्ति ·र रही है और पीएमओ ·ो दोषी ·रार दे रही है ·ि ऐसा शब्द लिख·र पीएमओ ने राजा ·ो मनमानी ·रने ·ी छूट दे दी। पीएसी ·ा ·हना है ·ि प्रधानमंत्री से राजा ने आधा सच और आधा झूठ ज़रूर ·हा ले·िन ऐसा लगता है ·ि प्रधानमंत्री ·ार्यालय ने ·ानून मंत्रालय ·ी सलाह ·ो दर·िनार ·रते हुए संचार मंत्रालय ·े निर्णय ·ो ही आखिरी मान लिया।
प्रधानंत्री ·ार्यालय पर श· ·ी सूई घुमाते हुए रिपोर्ट ·हती है ·ि प्रधानमंत्री ·ार्यालय ने या तो अनजाने में ऐसा ·िया, या फिर जानबूझ·र उसने ऐसा हो जाने दिया। पीएसी ने अपनी रिपोर्ट में माना है ·ि नियंत्र· एवं महालेखा परीक्ष· ·ी रिपोर्ट बिल्·ुल सही है, और स्पेक्ट्रम आवंटन से सर·ारी खजाने ·ो 1। 76 लाख ·रोड़ ·ी चपत लगी है। पीएसी ·ा ·हना है ·ि इसे देखते हुए सभी 2जी लाइसेन्स रद्द ·र दिये जाने चाहिए। आगे से ऐसी घपलेबाज़ी ·ो रो·ने ·े लिए पीएसी ने अपनी रिपोर्ट में मशवरा दिया है ·ि टेलि·ाम रेगुलेटरी अथारिटी ·ो और अधि· मज़बूत बनाये जाने ·ी ज़रूरत है और भविष्य में ऐसे लाइसेन्स ट्राई ·े ज़रिए ही आवंटित ·िये जाएं। पीएसी ·े सदस्यों ·े बीच गुरूवार ·ो इस रिपोर्ट ड्रा$फ्ट पर चर्चा ·ी जाएगी।
पीएसी पर भारी ता· सर·ारी!
स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में प्रधानमंत्री ·ार्यालय ·ो आड़े हाथों लेने और प्रधानमंत्री पर परोक्ष आक्षेप ·रने वाली लो· लेखा समिति (पीएसी) ·ी रिपोर्ट पर गुरूवार अप्रैल 28 ·ो जम·र हंगामा हुआ और समिति ·ी बैठ· में नाट·ीय घटना·्रम ·े बाद उसे स्वी·ार नहीं ·िया जा स·ा। ·ेंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ·े $खेमे ·ा दावा है ·ि रिपोर्ट ·े मसौदे ·ो बहुमत से $खारिज ·र दिया गया। ले·िन विपक्षी खेमे ·े मुताबि· मसौदा समिति ·े अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ·े पास है, बैठ· में इस पर आधि·ारि· रूप से मतदान नहीं ·िया गया। समिति में विपक्ष ·े सदस्यों ने जोशी ·ो यह रिपोर्ट लो·सभा अध्यक्ष ·े ·ार्यालय में पेश ·रने ·ा मशविरा दिया है। संसदीय ·ार्यवाही ·े मुताबि· यदि सदन ·ा सत्र नहीं चलता है तो समिति ·ी रिपोर्ट लो·सभा अध्यक्ष ·े समक्ष प्रस्तुत ·ी जा स·ती है। पीएसी ·ी बैठ· में आज दो धड़ों ·े बीच गंभीर आरोप प्रत्यारोप और बहस मुबाहिसे ·े दौर चलते रहे। ले·िन नाट· चरम पर तब पहुंचा, जब जोशी ने बैठ· ·ो $खत्म घोषित ·र दिया। उस·े बाद भी संप्रग ·े सदस्य वहां रु·े रहे और उन्होंने ·ांग्रेस ·े राज्य सभा सदस्य सैफुद्दीन सोज ·ो पीएसी ·ा नया अध्यक्ष चुन लिया और उस·े $फौरन बाद रिपोर्ट ·े मसौदे ·ो खारिज ·रने ·ा प्रस्ताव भी पारित ·र लिया। हालां·ि इस बात ·ा इल्म तो पहले से था ·ि पीएसी ·ी बैठ· में जम·र ताल ठो·ी जाएगी, क्यों·ि उसमें शामिल ·ांग्रेसी सदस्य जोशी ·े इस्ती$फे ·ी मांग ·र चु·े थे। उन·ा ·हना था ·ि रिपोर्ट पक्षपात और दुर्भावना से भरी है। सुबह जैसे ही बैठ· शुरू हुई, संप्रग सदस्यों ने शोर मचाया और रिपोर्ट ·ो $खारिज ·रने ·ी मांग ·ी। पीएसी ·े 21 सदस्यों में से 11 इसे $खारिज ·रने ·े पक्ष में थे। इनमें ·ांग्रेस ·े 7 और द्रविड़ मुन्नेत्र ·षगम (द्रमु·) ·े 2 सदस्यों ·े अलावा समाजवादी पार्टी (सपा) ·े रेवती रमण सिंह तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ·े बलिराम ·श्यप भी शामिल थे। जोशी ·ो ·ेवल 9 सदस्यों ·ा साथ मिला। ए· पद अभी खाली है। सपा और बसपा ·े सदस्यों ·ो ·ांग्रेस नेताओं ने चि_िïयां दीं, जो उन्होंने जोशी ·ो सौंप दीं। इन चि_िïयों में मसौदे ·ो खारिज ·रने ·ी बात थी और आरोप लगाया गया था ·ि रिपोर्ट ·ो जोशी ने अपने मन से बाहरी इशारे पर बनाया है। संप्रग सदस्यों ·ा आरोप था ·ि रिपोर्ट में जगह-जगह पर विसंगतियां हैं। उन·ा यह भी ·हना था ·ि 270 पन्नों ·ी रिपोर्ट पढऩे ·े लिए उन्हें पूरा समय नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी ·हा ·ि पूर्व संचार मंत्री ए राजा ·ी पेशी ·ी उन·ी मांग ·ो भी न·ार दिया गया। संप्रग सदस्यों ने यह सवाल भी उठाया ·ि आखिर पीएसी ·ी रिपोर्ट ·ो हड़बड़ी में पेश क्यों ·िया गया। विपक्षी $खेमे ने भी रियायत नहीं बरती और उसने मीडिया में रिपोर्ट ली· होने पर सवाल उठाया। उसने यह भी पूछा ·ि रिपोर्ट ·े बारे में ·ांग्रेस सांसद ·े एस राव ने संवाददता सम्मेलन ·ैसे ·िया और ·ांग्रेस ·े ही सांसद नवीन जिंदल ए· टीवी चैनल में इस गोपनीय रिपोर्ट पर चर्चा ·रते ·ैसे दिखे। संप्रग सदस्यों ने दलील दी ·ि 2जी ·ी जांच अभी पूरी नहीं हुई है, ले·िन विपक्ष ने ·हा ·ि रिपोर्ट ·ा मसौदा बांट दिया गया है यानी जांच पूरी हो गई है।
सैफुद्दीन सोज़ बने अघ्यक्ष
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर संसद ·ी लो· लेखा समिति (पीएसी) ·ी बैठ· में स्थिति तब बे·ाबू हो गई जब सत्ता और विपक्षी सदस्यों ·े बीच हाथापाई ·ी नौबत आ गई। पीएसी ·े अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी बैठ· छोड़·र चले गए। जोशी ·े जाने ·े बाद ·ांग्रेस ·े सदस्यों ने सै$फुद्दीन सोज़ ·ो पीएसी ·ा नया अध्यक्ष बना दिया। इससे पहले 2जी स्पेक्ट्रम रिपोर्ट पर पीएसी बैठ· में सदस्य दो धड़ों में बंट गए। गुरुवार ·ो बैठ· शुरू होने ·े बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ·े नेताओं ने ·ांग्रेस व द्रमु· ·ा साथ देने ·ा $फैसला ·िया। ·ांग्रेस व द्रमु· समेत सपा और बसपा ·े सदस्य पीएसी रिपोर्ट पर वोटिंग ·ी मांग ·र रहे थे। शाम चार बजे जैसे ही दोबारा बैठ· शुरू हुई तो महज़ ढाई मिनट में ही पीएसी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी बैठ· छोड़·र चले गए। ·ांग्रेस व द्रमु· रिपोर्ट पर वोटिंग ·े लिए ज़ोर डाल रहे थे। ·ांग्रेस व द्रमु· ·े साथ सपा और बसपा ·े आने से रिपोर्ट ·े विपक्ष में ·ुल 11 सदस्य हो गए थे, जब·ि पक्ष में सि$र्फ 10 ही रह गए थे। 21 सदस्यीय समिति में दोनों पक्षों ·ा संतुलित प्रतिनिधित्व है और सपा तथा बसपा ·े ए·-ए· सदस्य ·ी भूमि·ा अहम होगी। पीएसी में ·ांग्रेस ·े सात सदस्य, भाजपा ·े चार, अन्नाद्रमु· तथा द्रमु· ·े दो-दो और शिवसेना, बीजद, जदयू, सपा, बसपा व मा·पा ·े ए·-ए· सदस्य हैं। भाजपा ·े सदस्यों ने ·ांग्रेस ·े सदस्यों पर आरोप लगाया है ·ि ·ांग्रेस ने संसदीय मर्यादा ·ा उल्लंघन ·रते हुए पूर्व नियोजित षडय़ंत्र ·े तहत इस बैठ· में व्यवधान पैदा ·िया। दूसरी तर$फ ·ांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है ·ि पीएसी ·े ज़रिए भाजपा गंदी राजनीति ·र रही है।

Saturday, April 23, 2011


दिग्विजय ·ी प्रदेश वापसी शिवराज ·े लिए $खतरे ·ी घंटी
हृ चंद्रशेखर सिंह

भोपाल (म.प्र.)।
लगभग ए· दश· बाद मप्र में ·ांग्र्रेस ने अपने होने ·ा एहसास ·राया है। ·ांतिलाल भूरिया ·े प्रदेश ·ांग्रेस ·ी बागडोर संभालने ·े बाद जिस तरह से प्रदेश ·ांग्रेस ·े ·ार्य·त्र्ताओं में ए·जुटता व जोश दिख रहा है, य·ीनन उससे शिवराज सिंह चौहान ·ी ङ्क्षचताएं बढ़ गई हैं।
हैडिंग में ‘दिग्विजय ·ी मप्र वापसी’ पर पाठ· ज़रूर हैरान हो रहे होंगे, ·ि ऐसा तो ·ुछ नहीं, दिग्विजय तो पहले ·ी तरह अब भी ·ेंद्र ·ी राजनीति में अंगद ·े पांव ·ी तरह जमे हुए हैं। दरअसल पिछले पखवाड़े चाहे वो राहुल भैया उ$र्फ अजयसिंह ·ा नेता प्रतिपक्ष ·ा चयन हो, या ·ांतिलाल भूरिया ·ी प्रदेश ·ांगेस ·ी ताजपोशगी, दोनों ही नेताओं ·ा चयन ·ुल मिला·र दिग्विजय ·ी जीत है। अजयङ्क्षसंह ‘राहुल’ और भूरिया दोनों ही दिग्विजय ·े दो बाज़ू हैं, जो अब मप्र ·ी भाजपा सर·ार ·ो नेस्तानाबूद ·रने ·े लिए उठ खड़े हुए है।
$खबरयार अपने पिछले अं·ों में इस बात ·ो ले·र लिखता रहा है, ·ि शिवराज ङ्क्षसंह सर·ार इतने सारे भ्रष्ट मामलों में लिप्त होने ·े बावजूद यदि बची हुई है, तो उस·ा ·ारण ·ांग्रेस है, जो अब त· आपसी खींचतान से ही उबर नहीं पा रही थी। असलम शेर $खान ने भी अपने ·ांग्रेसी साथियों ·ो आगाह ·िया था, ·ि ए· हो जाओ, वरना मप्र ·ो भी दूसरा बिहार बनते देर नहीं लगेगी। सुरेश पचौरी ·े अध्यक्षीय ·ाल में ऐसा ·भी नहीं हुआ ·ि ·ांग्रेस ·ार्य·र्ताओं में ·ोई ए·जुटता दिखी हो। उन·े समय में ·मलनाथ, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सहित सारे नेता अपनी अपनी गुटबाज़ी में लीन थे, ए· दूसरे ·ी टांग खींचने से ही $फुर्सत नहीं मिल रही थी उन्हें। ये ज़रूर समझ से बाहर है ·ि सुरेश पचौरी से इन नेताओं ·ी ऐसी क्या खुंद· है, ·ि उन·े अध्यक्ष रहते ·िसी ने भी उन·े साथ होने ·ी ·ोशिश नहीं ·ी। पार्टी ·ा सर्मठ, अनुशासित सिपाही होने ·ा दावा ·रने वाले ये नेता ·मज़ोर होती ·ांग्रेस ·ो और ·मज़ोर होता क्यों ·र देखते रहे। अब जो ए·ता ए·जुटता दिख रही है, उससे तो यही लगता है ·ि ए· ·मज़ोर गुट हार गया, और ए· मज़बूत गुट अब प्रभावशील बन गया है। सवाल उठता है, ·ि ये गुटबाज़ी ·ी राजनीति ·ब $खत्म होगी, बहरहाल ये दिग्विजय गुट ·ी विजय मानी जाएगी। इसमें ·ोई दो राय नहीं ·ि ये गुट शुरू से, स्व: अर्जुन सिंह ·े समय से ता·तवर रहा है, ·भी इसमें प्रमुख ठा·ुर साहब ही रहे थे। दिग्विजय सिंह ·ो मुख्यमंत्री बनवाने में उस वक्त ·ेंद्र ·ी राजनीति में $खास अर्जुनसिंह ·ा ही हाथ था। आज वही दिग्विजय सिंह दिल्ली में बैठ·र मप्र ·ी चालें चल रहे हैं। इसमें ·ोई श· नहीं, हाल ·े दिनों में ·मलनाथ, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह ‘राहुल’ ज्योतिरादित्य सिंधिया और ·ांतिलाल भूरिया व$गैरा में जो ए·जुटता दिखाई दी है, उससे मप्र में ·ांग्रेस ·ी ·मज़ोर ·ाया में जान फुं·ती दिख रही है। भाजपा ·ी भ्रष्टाचारों में फंसी शिवराज सर·ार ·ो यदि ·ांग्रेस ·ी ये ए·जुटता गिराने ·ी ·ोशिश ·रती है, तो अगले चुनावों में ए· बार फिर ·ांगे्रस उठ खड़ी होगी,यह य·ीनन है।








इण्डिया अगेन्स्ट ·रपशन

देश भर में भ्रष्टाचार · $िखला$ अन्ना हज़ारे · महाअभियान
बनारस से शुरू होगा रैलियों · सिलसिला
ए· ओर भले ही अन्ना हज़ारे ·े भूषणों ·ो ले·र दिल्ली में राजनीति· खींचतान चल रही हो, ले·िन दूसरी ओर इंडिया अगेन्स्ट ·रप्पशन ·ी योजनाओं पर ·ाम जारी है. इस बैनर ·े तहत अन्ना हज़ारे ·ी देशभर में रैलियां आयोजित ·रने ·े लिए तैयारियां पूरी ·र ली गयी हैं, और आगामी 29 अप्रैल ·ो देश में अन्ना हज़ारे ·ी पहली रैली ·ाशी (बनारस) में होगी। इस संबंध में बुधवार अप्रैल 20 ·ो दिल्ली में इंडिया अगेन्स्ट ·रप्शन से जुड़ी संस्थाओं और व्यक्तियों ·ी ए· बैठ· दिल्ली में हुई, जिसमें अन्ना हज़ारे ·े ·ार्यक्रमों ·े बारे में विस्तार से चर्चा हुई, और ·ुछ रैलियों ·ी तिथियां निर्धारित ·ी गयी। ऐसी पहली रैली बनारस में होगी। इस रैली ·े लिए पूर्व सूचना आयुक्त ओपी ·ेजरीवाल ·ो संयोज· बनाया गया है।
जंतर मंतर पर अनशन ·ो समाप्त ·रते हुए अन्ना हज़ारे ने घोषणा ·ी थी ·ि ए· ओर जहां जनलो·पाल ·े लिए उन·ा अभियान जारी रहेगा, वहीं दूसरी ओर वे देशभर में यात्राएं और सभा ·रेंगे। इसी ·ड़ी में बनारस में उन·ी पहली सार्वजनि· सभा रखी गयी है। बनारस ·े बाद वे अगले दिन सुल्तानपुर में होंगे और 30 अप्रैल ·ो सुल्तानपुर में रैली ·ो संबोधित ·रेंगे। इस·े अगले दिन यानी 1 मई ·ो अन्ना हज़ारे लखनऊ में होंगे और ए· रैली ·ो संबोधित ·रेंगे। 2 मई ·ो दिल्ली में लो·पाल ·े लिए बैठ· निर्धारित है, जिसमें शामिल होने ·े बाद अन्ना हज़ारे गुवाहाटी चले जाएंगे, जहां 3 मई ·ो रैली प्रस्तावित है।
अन्ना हज़ारे से जुड़े लोगों ·ा ·हना है, ·ि अन्ना हज़ारे इस·े बाद देश ·ी हर राजधानी में रैलियों ·ो संबोधित ·रेंगे।

Friday, April 15, 2011







जनलो·पाल विधेय· समिति पर मण्डराता भ्रष्टाचार · साया
भोपाल। लो·पालवादियों · भूख हड़ताल आन्दोलन · सफलता पर जयजय·ार और बधाईयों · आदान प्रदान · अभी · सप्ताह भी नहीं गुज़रा, ·ि इस में शामिल लो·पालवादियों · आचार-व्यवहार, विचार एवं शिष्टाचार · विभिन्न प्र·ार से आलोचनाओं · · · बाद · ·· श्रंृखला ही बनने गली। पहिले ही दिन उन· अपने तथाथित सहयोगी बाबा राम देव ने समिति · सदस्यों पर ·िन्तु ·िया। राजनैति· दलों · तपे तपाये राजनेताओं ने उन पर सवाल दा$गने शुरू · दिये, अन्ना जी बतायें! इस आन्दोलन · चलाने हेतु जो लाखों, बल्·ि ·रोड़ों · $खर्चा ·िया गया, वह ·हां से आया? अन्ना लगभग हर नेता अधि·ारी · ईमानदारी पर · ·रते हुये अपने लच्छेदार भाषणों · बल पर वह जनता · बीच हीरो बन गये हैं। क्या हर ·िसी · उनसे ईमानदारी · प्रमाण पत्र लेना ज़रूरी है। इससे पिछले अं· में $खबरयार द्वारा लो· पाल बिल · पास होने पर शं· जताते हुये खुलासा ·िया गया था, ·ि आम जनता पर राज ·रने वाले नेता, अधि·ारी बड़े उद्योगपति घराने क्यों चाहेंगे ·ि आम आदमी उन· द्वारा हड़प · जा रही सुख सुविधाओं में से हिस्सा बटा ·ें। समिति · गठन · तुरन्त पश्चात् जो बातें सामने रही हैं, उन्हें बता रहे हैं $खबरयार · सहयोगी जे.पी.सिंह एवं अन्य :-
·रप्शन ·िंग शांति भूषण
हृ जेपी सिंह
अन्ना हज़ारे ·े धरना स्थल पर मौजूद शांति भूषण ·ो लो·पाल ·े लिए गठितसंयुक्त समिति ·ा ·ो-चेयर बनाया गया है।
शांति भूषण और प्रशांत भूषण ने इलाहाबाद में बीस ·रोड़ ·ी संपत्ति ·ा एग्रीमेन्ट टू सेल ए· लाख रूपये में हासिल ·िया। लखनऊ और इलाहाबाद से प्र·ाशित होनेवाले हिन्दी दैनि· डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट ने खुलासा ·िया है, ·ि बाप बेटे ·ी यह जोड़ी संपत्तियां बनाने और स्टांप ड्यूटी बचाने ·े मामले में ·रप्शन ·िंग हैं।
इलाहाबाद ·े सिविल लाइंस जैसे पॉश इला·े में 12 अक्टूबर 2010 ·ो देश ·े पूर्व ·ानून मंत्री शान्ति भूषण, उन·े वरिष्ठ व·ील पुत्र प्रशान्त भूषण, उन·े द्वितीय पुत्र जयंत भूषण एवं उन·ी पुत्री शेफाली भूषण ·े नाम बंगला नम्बर 19 (पुराना) 77/29 (नया) तथा 19-ए (पुराना) 79/31 (नया) एल्गिन रोड, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग ·ी ·ुल भूमि 7818 वर्ग मीटर है। भूमि सहित बने हुए बंगले ·ी ‘एग्रीमेंट टू सेल’ रजिस्ट्री मात्र ए· लाख रुपये में ·ी गयी है। यह ‘एग्रीमेंट टू सेल’ हरिमोहन दास टंडन, सुधीर टंडन एवं सतीश टंडन ने 12 अक्टूबर 2010 ·ो दो हज़ार रुपये ·े स्टाम्प पेपर पर मात्र पांच हज़ार रुपये ·ा भुगतान ले·र ·िया है।
$गौरतलब है ·ि इस बंगले में शांति भूषण वर्षों से ·िरायेदार हैं, और इस·ा विवाद भी ·चहरी में चल रहा था। ले·िन सूट नम्बर 516/2000 में 5 अक्टूबर 2010 ·ो दोनों पक्षों में समझौता दा$िखल हुआ तथा प्रथम पक्ष हरिमोहन दास टंडन 7818 वर्गमीटर भूमि जिसमें बंगला निर्मित है, ·ो दूसरे पक्ष शांतिभूषण एवं अन्य ·ो मात्र ए· लाख रुपये में बंगले ·ो ज़मीन सहित बेचने ·े लिए राज़ी हो गये। इस·े साथ ही दोनों पक्षों में ·िराये ·े ब·ाये और बेदखली ·े विरुद्घ दायर वाद नम्बर 11/2001 ·ो भी वापस लेने पर सहमति हो गयी जिस·ी तारीख 18 अक्टूबर 2010 ·ो नियत थी। दोनों पक्षों ने जब त· सेलडीड न हो तब त· ‘एग्रीमेंट टू सेल’ ·ा पंजी·रण ·राने ·ा निर्णय लिया।
·रप्शन ·िंग शांति भूषण
तदनुसार द्वितीय पक्ष शांतिभूषण ने ·ेवल 5000 रुपये ·ा भुगतान ·र·े एग्रीमेंट टू सेल अपने एवं अपने परिजनों ·े पक्ष में ·रा लिया। यह सारा खेल सूट नम्बर 516/2000 में 5 अक्टूबर 2010 ·ो दाखिल समझौते ·ी आड़ में खेला गया, जिसमें दोनों पक्ष ए· लाख में ज़मीन व बंगला $खरीदने और बेचने पर राज़ी हो गये। ‘एग्रीमेंट टू सेल’ ·ी प्रति ‘डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट’ ·े पास है, जिसमें पृष्ठï नौ ·े बिन्दु दो पर लिखा गया है, ·ि 5000 रुपये एडवांस 2 सितम्बर 1966 ·ो दिये गये तथा शेष 95,000 रुपये सेलडीड एवं उस·े ·्रियान्वयन ·े समय देने ·ा ·रार ·िया गया है, जो 31 दिसम्बर 2010 त· हो जानी थी। अब पता चला है ·ि सेलडीड ·ी रजिस्ट्री हो गयी है। ‘एग्रीमेंट टू सेल’ में यह भी ·रार ·िया गया है ·ि यदि प्रथम पक्ष यानी हरिमोहन दास टंडन सेलडीड ·रने में असफल रहते हैं तो दूसरा पक्ष यानी शांतिभूषण एवं उन·े परिजन सूट नम्बर 516/2000 में एसीजेएम ·े ·ोर्ट से हुई डिक्री ·े आधार पर सेलडीड ·राने ·े लिए अधि·ृत होंगे। $गौरतलब है ·ि इस भूमि ·ा फ्रीहोल्ड 8 जून 2000 ·ो ·राया गया था, जिस·े लिए ·ुल शुल्· 26 लाख 97 हज़ार 663 रुपये ·ा ट्रेज़री चालान 7 अप्रैल 2000 ·ो सर·ारी $खज़ाने में जमा ·िया गया था। ज्ञातव्य है ·ि यह ‘एग्रीमेंट टू सेल’ अक्टूबर 2010 में हुआ और उसी समय इसी भूखण्ड ·े अन्य ·ई प्लाटों ·ी भी अलग-अलग रजिस्ट्री हुई, जिन·ा ·ुल र·बा लगभग चार हज़ार वर्गमीटर था और इतनी रजिस्ट्री में ·ुल 12 ·रोड़ रुपये ·ी मालियत ·े आधार पर सर्·िल रेट ·ेहिसाब से स्टाम्प शुल्· अदा ·िया गया, और 12 ·रोड़ रुपये ·ा भुगतान भवन स्वामी हरिमोहन दास टंडन ·ो ·िया भी गया। इस तरह यदि 4,000 वर्गमीटर ·ा सर्·िल रेट ·े अनुसार 12 ·रोड़ रुपये से अधि· मूल्य होता है, तो फिर जो भूमि एवं बंगला शांति भूषण एवं उन·े परिजनों ·े पक्ष में ‘एग्रीमेंट टू सेल’ ·र·े बेचा जा रहा है उस·ी ·ीमत 20 ·रोड़ रुपये से अधि· ·ी है। यही नहीं वर्तमान में इस क्षेत्र ·ा सर्·िल रेट 31 हज़ार रुपये प्रतिवर्ग मीटर से अधि· हो गया है। ऐसे में इस·ी ·ीमत 20 ·रोड़ रुपये से भी ·ा$फी अधि· हो गयी है। ‘एग्रीमेंट टू सेल’ में उ.प्र. स्टाम्प एक्ट 2008 ·े अनुसार स्टाम्प शुल्· या भुगतान नहीं ·िया गया है। एक्ट ·ी अनुसूची (उ.प्र. स्टाम्प अधिनियम ·े अधीन लिखतों पर स्टाम्प शुल्·) ·ी धारा 24 स्पष्टी·रण ए· में ·हा गया है ·ि इस अनुच्छेद में प्रयोजनों ·े लिए ·िसी स्थावर सम्पत्ति ·े विक्रय ·े ·रार ·े मामलों में जहां निष्पादन ·े पूर्व या निष्पादन ·े समय ·ब्ज़ा दे दिया जाय, या हस्तांतरण पत्र ·ा निष्पादन ·िये बिना ·ब्जा दे दिये जाने ·ा ·रार ·िया गया हो, वहां ·रार ·ो हस्तांतरण पत्र समझा जायेगा और उस पर तदनुसार स्टाम्प शुल्· देय होगा। चूं·ि दोनों पक्षों में ·िरायेदारी विवाद चल रहा था और शांतिभूषण उक्त सम्पत्ति व हैसियत ·िरायेदार ·ब्ज़े में है, इसलिए ‘एग्रीमेंट टू सेल’ ·े समय ·ुल मूल्य ·ा 7 प्रतिशत स्टाम्प शुल्· दिया जाना चाहिए जो, ·ि नहीं दिया गया है। यही नहीं जिस भूमि ·े फ्री होल्ड ·ेलिए 26 लाख रुपये से अधि· ·ा भुगतान ·िया गया, उस·े लगभग दो तिहाई हिस्से ·ो महज़ ए· लाख रुपये में शांति भूषण ·ुनबे ·ो दिया जाना गले से नीचे नहीं उतर रहा है।
जनलो·पाल या धनलो·पाल?
जनलो·पाल यदि वास्तव में जनता ·ा हो, तो इस·े $फायदे सन्देह से परे हैं। यद्यपि जनलो·पालवादियों ने अब त· इस पद पर नियुक्ति ·े जो प्रस्ताव दिए हैं, उसमें यह $खतरा है ·ि प्रस्तावित जनलो·पाल बहुसंख्य· ‘$गरीब जन’ द्वारा नियुक्ति नहीं ·िया जाएगा, अल्पसंख्य· ‘अमीरजन’ द्वारा नियुक्त होगा और अमीरजन ·ी ओर से सर·ार, संसद और न्यायपालि·ा पर शासन ·रेगा। भ्रष्टाचार में शामिल भारत ·े ·िसी भी बड़े उद्योगपति ·ो ·भी भी सज़ा नहीं हो पायी, नेताओं और अधि·ारियों ·ो दण्डित ·रने ·े हज़ारों उदाहरण मौजूद हैं। जनलो·पालवादी इस पद पर नियुक्ति ·ा जो प्रस्ताव दे रहे हैं, उसमें इस बात ·ी ·ोई व्यवस्था नहीं है ·ि जनलो·पाल ·ा पद धन ·ी धम·ी और मीडिया ·ी धम·ी से ·ैसे मुक्त होगा? धनवानों व मीडियावानों ·ी धम·ी में आ जाने ·े ·ारण ही सीबीआई, राज्यों ·ा पुलिस मह·मा, आय·र विभाग, विजिलेंस विभाग...... सभी विभाग भ्रष्टाचार ·ो रो·ने में अब त· असहाय साबित हुए हैं। इन विभागों ·े ईमानदार व ·र्त्तव्यपरायण ·र्मचारियों ·ी हमेशा से शि·ायत रही है ·ि नेता लोग उन·े ·ाम में द$खल देते हैं; इसलिए मजबूर हो·र ये ·र्मचारी भ्रष्ट लोगों ·ो सुबूतों ·े बावजूद दण्डित नहीं ·रवा पाते। नेताओं से अगर पूछो ·ि वे लोग ऐसा क्यों ·रते हैं। तो अक्सर तो वे इस सवाल ·ा जवाब टाल जाते हैं। यदि आप·ो वह अतिविश्वसनीय मानता हो और उसे यह विश्वास हो जाये, ·ि उस·ा नाम गोपनीय रह जाएगा, तब वह बताता है ·ि प्राय सभी पार्टियों ·े सभी अधि·ार पार्टियों ·े अध्यक्षों ·े हाथ में हैं। पार्टियों ·ा संविधान ही ऐसा होता है। पार्टियों ·े अध्यक्ष उन उद्योगपतियों ·ो भ्रष्टाचार ·े आरोप में दण्डित होने से बचाते हैं, जो उद्योगपति पार्टी अध्यक्ष ·ो अरबों-खरबों रुपया चन्दा देते हैं।
अन्ना हज़ारे अनशन · सुपारीबाज़
अन्ना ·ा अनशन $खत्म हुए उतना समय तो बीत ही गया है जितने समय वे अनशन पर बैठे रहे, ले·िन अन्ना हज़ारे ·े अनशन ने न ·ेवल मीडिया, एनजीओ और आंदोलन पर बेहस छेड़ दी है, बल्·ि राजनीति· रूप से भी $गलतबयानियों ·ा सिलसिला जारी है. अन्ना हज़ारे ·े अनशन ·ी आड़ में ·ांग्रेस और भाजपा दोनों ही अन्ना हज़ारे ·ा समर्थन भी ·र रही है और विरोध भी। खुल·र तो नहीं ले·िन ·ांग्रेस समर्थ· अन्ना ·ो भाजपाई बताने में लगे हुए हैं, तो भाजपा ·े नेता अंदरखाने में उन्हें ·ांग्रेस ·ा एजंट साबित ·रने ·ी ·ोशिश ·र रहे हैं। अनशन ·े वक्त ही सपा ·े नेता रामगोपाल यादव ने अन्ना हज़ारे ·े अनशन पर सवाल उठाया था, ले·िन उन·ी बोली नक्कारखाने में तूती साबित हुई, ले·िन अनशन ·ा क्रम और घटनाक्रम ऐसा रहा, ·ि ·ांग्रेस और भाजपा दोनों ही अन्ना ·ा समर्थन ·रते हुए दिखना चाहते हैं, ले·िन उन·े ऊपर अपना ठप्पा लगाने से भी बच रहे हैं। दिल्ली ·े राजनीति· गलियारों में चलनेवाली थ्योरी देखिए. अन्ना ने यह आंदोलन ·ांग्रेस ·ो $फायदा पहुंचाने ·े लिए ·िया और इस·े लिए दिग्विजिय सिंह से अन्ना हज़ारे ·ी नजदी·ियों ·ा सहारा लिया गया। फिर दूसरी थ्योरी, नहीं अन्ना ·ा आंदोलन तो अपने आप ही शुरू हुआ, ले·िन उस·ा $फायदा ·ांग्रेस ने उठा लिया और चार राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनावों में अन्ना ·े अनशन ·ो अपने पक्ष में इस्तेमाल ·र लिया। तीसरी थ्योरी, अन्ना ·ा अनशन आरएसएस ·ी ओर से प्रायोजित ·िया गया था, ले·िन ·िरण बेदी तथा रामदेव ·ो ·िनारे ·र·े ·ांग्रेस ने इस अनशन ·ो हाईजै· ·र लिया। इन थ्यौरियों ·े अलावा बयानबाज़ी मामले ·ो और उलझा रही है। दिग्विजय सिंह भले ही अन्ना हज़ारे ·े ·रीबी ·हे जा रहे हों, ले·िन उन्होंने अन्ना हज़ारे ·ो चुनाव मैदान में उतर·र ईमानदार बने रहने ·ी धम·ी दे दी है। ·ांग्रेस सिब्बल तो पहले ही अन्ना ·ो ·मतर ·रने ·ी ·ोशिश ·र चु·े हैं। ले·िन भाजपा भी विरोधाभासी बयान देने में पीछे नहीं है। पार्टी प्रमुख गड़·री अन्ना ·े आंदोलन ·ा समर्थन ·र रहे हैं, तो मध्य प्रदेश भाजपा ·े अध्यक्ष प्रभात झा ने बयान दिया है ·ि मैं उन·े इस बयान से बिल्·ुल भी इत्त$फा· नहीं रखता ·ि देश ·े सभी राजनेता भ्रष्ट हैं। उन्होंने राष्ट्रहित में जो बीड़ा उठाया है, वह स्वागत योग्य व सराहनीय है। ले·िन इस·ा यह मतलब नहीं ·ि अन्ना स्वयं ईमानदारी ·े विश्वविद्यालय हैं और उन·े प्रमाण-पत्र से ही ·िसी राजनेता ·ो सच्चा व ईमानदार ·हलाने ·ा अधि·ार मिलेगा। रही सही ·सर अन्ना हज़ारे द्वारा मोदी ·ो ·िये गये धन्यवाद ने पूरी ·र दी है. गुजरात ·े मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अन्ना हज़ारे ·ी तारी$फ ·ी तो वहां ·ांग्रेसी जो अब त· अन्ना ·ा समर्थन ·र रहे थे उन·े विरोध में खड़े हो गये. दिल्ली में ब्लाग लिख·र गुजरात पहुंचे लाल·ृष्ण आडवाणी भी अन्ना ·े सवाल पर $खामोश ही नज़र आये। अब सवाल यह ·ि अन्ना आ$िखर ·िस·े राजनीनीति· एजंट हैं? भाजपा ·े या ·ांग्रेस ·े? या फिर अपनी सुविधाअनुसार दोनों ·े? या फिर दोनों ·े नहीं? वैसे अन्ना हज़ारे ·ो मुंबई ·ी राजनीति· गलियारों में अनशन ·ा सुपारीबाज़ ·हा जाता है। वह शायद इसलीए क्यो·ि वहां वे आज इस पार्टी ·े नेता ·े $िखला$फ अनशन ·रते हैं, तो ·ल उस पार्टी ·े नेता ·े $िखला$फ। जब सभी पार्टियां देखती हैं, ·ि वह तो ·िसी ·ो नहीं छोड़ रहा है, तो अपनी सुविधा ·े लिए उन्हें अनशन ·ा सुपारीबाज़ ·हना शुरू ·र दिया। अब दिल्लीवाले उन·ा क्या नाम·रण ·रेंगे?


क्या अन्ना · अनशन समाप्ति · राज़ है सोनिया
अन्ना हजारे ·ा अनशन भले ही उन·ी सारी शर्ते मानने ·े साथ $खत्म हो गया हो, ले·िन इस अनशन से ·ांग्रेस ·े अंदर ·ी राजनीति भी खुल·र सामने आ गयी है। पीएम और सोनिया ·े बीच जारी सत्ता संघर्ष ·ा ही नतीजा है ·ि, अन्ना ·े अनशन ·े मसले पर पीएम बतौर मुखौटा ही नज़र आये, सारी ·मान सोनिया गांधी ने $खुद अपने हाथ में ले रखी थी।
प्रधानमंत्री ·े सोचने-विचारने से पहले ही ·ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अन्ना ·े उठाए मुद्दे ·ा समर्थन ·िया और अनशन तोडऩे ·ी अपील ·ी। तभी सर·ार ने आनन-फानन में अनशन तुड़वाने ·ी पहल ·ी। अन्ना ·े प्रतिनिधियों से बातचीत ·े दौरान भले ·पिल सिब्बल और वीरप्पा मोईली प्रधानमंत्री से मिले, ले·िन उन्हें इस मसले पर पार्टी आला·मान से सीधा निर्देश था, ·ि अन्ना हज़ारे ·ी शर्तें मान ·र समझौता ·राना है।
पार्टी सूत्रों ·े मुताबि· प्रधानमंत्री और उन·ा द$फ्तर अन्ना ·ी ·ई शर्तों पर सहमत नहीं था। 7 मार्च ·ो अन्ना से मुला·ात ·े दौरान अन्ना से अपनी असहमतियों ·ो प्रधानमंत्री ने व्यक्त भी ·र दिया था। वे नहीं चाहते थे ·ि प्रधानमंत्री ·ा पद लो·पाल ·े दायरे में आए, पर ·ांग्रेस नेताओं ·ी मंशा ·ुछ और थी। तभी समझौता हो जाने ·े बाद वीरप्पा मोईली ने बयान दिया, ·ि उन्होंने प्रधानमंत्री से ·हा था, ·ि इसे प्रतिष्ठा ·ा प्रश्न नहीं बनाया जाए। इस·ा सीधा मतलब है ·ि प्रधानमंत्री ट·राव ·े मूड में थे। ·ांग्रेस नेताओं ने यह बात भी फैलाई है ·ि मनमोहन सिंह एनसीपी नेता शरद पवार ·े असर में हैं और अन्ना ·े मामले में पवार ·ी $फीडबै· पर ·ाम ·र रहे हैं। वैसे भी सर·ार ·े भीतर ·ी जोर आज़माइश में प्रधानमंत्री ·ो पवार ·ा समर्थन है। इस पर भी ·ांग्रेस ·े आला नेता प्रधानमंत्री से $खफा हैं।
·ांग्रेस नेताओं ·ी नाराजगी इस बात ·ो ले·र भी थी, ·ि प्रधानमंत्री ने इस मसले ·ो ठी· से हैंडल नहीं ·िया। उन·ा ·हना था ·ि 7 मार्च ·ो सीधे प्रधानमंत्री ·ो अन्ना हज़ारे से नहीं मिलना चाहिए था। अन्ना पहले ही प्रधानमंत्री से मिल चु·े थे, इसलिए जब 28 मार्च ·ो प्रधानमंत्री ने उनसे अपने मंत्रियों से मिलने ·ो ·हा, तो अन्ना हज़ारे ने मना ·र दिया। अगर अन्ना हज़ारे पहले मंत्रियों से मिलते और बाद में प्रधानमंत्री से उन·ी मुला·ात होती, तो अनशन ·ी नौबत नहीं आती। ऐसा ·ांग्रेस नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी ·ो समझाया। तभी इस मसले पर पहल प्रधानमंत्री ·े हाथ से नि·ल गई और पार्टी आला·मान ·े निर्देश पर मामूली फेरबदल ·े साथ अन्ना ·ी सारी शर्तें मान ली गर्इं। सिब्बल और मोईली ने इस पूरे प्र·रण में अपनी उपयोगिता साबित ·ी।

Saturday, April 9, 2011






$िखर क्यों पास ·रेगी संसद लो·पाल विधेय·!
इन दिनों प्रसिद्ध गांधीवादी, समाज सेवी अन्ना हज़ारे · अनशन पर बैठने · $खबरें $खबार और इलैक्ट्रॉनि· मीडिया · सुर्खियों में छाई हुई हैं। हज़ारे ने भ्रष्टाचार · शि·ायत और उन· जांच · वास्ते लो·पाल विधेय· · मसौदे बनाने · लिए संयुक्त समिति · गठन ·रने से सर·ार · इन·ार ·रने · बाद अपना अनशन शुरू ·िया है। ७२ वर्षीय हज़ारे ने राजघाट पर महात्मा गांधी · श्रद्धांजलि देने · बाद अनशन शुरू ·िया। उन· ·हना है ·ि सर·ार इस विधेय· · मसौदा बनाने वाली समिति में ५० प्रतिशत सर·ारी अधि·ारी और शेष में नागरि· और विद्वान शामिल ·िए जाएं। ·ेन्द्र स्तर पर लो·ायुक्त ·ेवल सलाह·ार · भूमि· में होंगे यही स्थिति राज्यों में लो·ायुक्त · होगी, यानी हाथी · दांत खाने · और दिखाने · और। आज ऊपर से ले· नीचे · हर स्तर पर भ्रष्टाचार · बोलबाला है, ऐसे में महज़ परामर्श देने वाले लो·पाल · आने से देश · रसूखदारों, भ्रष्ट नेता और अधि·ारियों पर क्यों· ·ोई $फर्· पड़ेगा। ·ुल मिला· यह लो·पाल नाम · होग, ·ाम · नहीं। क्या इस बार भी लो·पाल विधेय· हर बार · तरह सहमति-असहमति, मतभेद और मनभेद · भंवर में उलझ · रह जाएगा, या फिर इस बार मनमोहन सर·ार लो·पाल विधेय· · पास ·रवाने · अग्निपरीक्षा में खरी उतरेगी। ऐसे ही पेचीदा सवालों · ओर-छोर और सटी· उत्तर जानने · ·ोशिश · गई है।
अभी · · संसदीय इतिहास पर नज़र डालें तो सा$ हो जाता है ·ि जब बात सांसदों-विधाय·ों · वेतन भत्ते अथवा अधि·ार बढ़ाने · होती है तो क्या पक्ष क्या विपक्ष सब ·-दूसरे · सुर में सुर मिलाते नज़र आते हैं। नतीजा ऐसे विधेय· आनन-$फानन में ही पारित · दिए जाते हैं। इससे इतर जब बात जन·ल्याण · होती है या राजनेताओं और रसू$खदारों पर शि·ंजा ·सने · लिए संसद में ·ोई विधेय· लाया जाता है तो सब· सहमति तो दूर, दो सांसदों · · सुर नहीं मिलते।

हृ जैनेन्द्र ·ुमार
·हां से आई लो·पाल ·ी अवधारणा। सन १९६६ से राज्य और ·ेन्द्र ·ी सर·ारों और नौ·रशाही पर लगाम ·सने ·े साथ ही उन्हें अपने पद ·े प्रति जि़म्मेदाराना रवैया अख़्ितयार ·रने ·े लिए दबाव डालने ·ी मंशा से स्विट्ज़रलैंड ·े ओम्बूड्समैन ·ी तजऱ् पर भारत में ·ेन्द्र स्तर पर लो·पाल और राज्य स्तर पर लो·ायुक्त ·ी व्यवस्था भारत में ·रने ·ी अवधारणा ने जन्म लिया। इतिहास गवाह है लो·पाल विधेय· ·ो ·ई सर·ारों ने अपने अपने तरी·े से लो·सभा में पेश ·िया, ले·िन हर बार यह विधेय· त·नी·ी जटिलताओं, ·ानूनी पेचीदगियों और पक्ष-विरोध ·े भंवर में डूबता-उतराता रहा, ले·िन अब त· पास नहीं हो पाया है। ए· बार फिर मनमोहन सर·ार ने लो·पाल विधेय· ·ो लो·सभा में पेश ·रने ·े लिए हिम्मत दिखाई है। हालां·ि, इस बार सर·ार द्वारा तैयार ·िया गया लो·पाल बिल भी ·ा$फी लचर नज़र आता है। तीन सदस्यीय लो·पाल होगा, जिस·े सभी सदस्य रिटायर्ड जज होंगे। इस नज़रिए से देखा जाए तो सभी सदस्य सर·ार ·ी दया पर निर्भर ·रेंगे और जब सदस्य सर·ार ·ी अनु·ंपा से लो·पाल ·े सदस्य होंगे तो ·िस प्र·ार वे सर·ार में भ्रष्ट्राचार $फैलाने वाले मंत्रियों और अधि·ारियों पर क्यों और ·िस तरह लगाम ·स पाएंगे? इन सदस्यों ·ी चयन समिति में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, दोनों सदनों ·े नेता पक्ष और नेता प्रतिपक्ष, ·ानून मंत्री और गृहमंत्री ·े होने से ये परोक्ष रूप से सर·ार द्वारा लो·पाल, सर·ार ·ा लो·पाल और सर·ार ·े लिए लो·पाल ही बन·र रह जाएगा, ऐसे में ·िसी इंसा$फ या दोषी ·ो सज़ा मिलने ·ा तो सवाल ही नहीं उठता। मंत्रियों, सांसदों ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·सभा/राज्यसभा अध्यक्ष ·ी अनुमति ज़रूरी होगी, अब जब सारा भ्रष्टाचार बड़े आ·ाओं ·ी शह पर ही होता है तो वे क्यों ·र अपने अधीनस्थ रह·र भ्रष्टाचार ·े ज़रिए उन·ी जेब भरने वाले ·े $िखला$फ जांच ·ी अनुमति लो·पाल ·ो देंगे? यह संदेह ·े घेरे में नज़र आता है। प्रधानमंत्री तो लो·पाल से ऊपर होगा ऐसे में लो·पाल ·ी ·ार्रवाई ·े दौरान प्रधानमंत्री अपने चहेतों ·ो बचाने ·े लिए लो·पाल पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दबाव नहीं डालेंगे, ऐसे आसार ·म ही नज़र आते हैं। सीवीसी, सीबीआई लो·पाल ·े अधीन नहीं होंगे, ऐसे में इन्हें तो खुले तौर पर भ्रष्टाचार ·रने ·ी छूट मिल जाएगी। यह तो रही सर·ार ·े लो·पाल/लो·ायुक्तों ·ी असली सूरत। अब दूसरा मुद्दा यह है ·ि अगर जन लो·पाल विधेय· ·ो लाया जाए तब-तब चयन समिति में सीएजी, जाने-माने ·ानूनविद, मुख्य चुनाव आयुक्त और नोबल और मैगसेसे जैसे अंतराष्ट्रीय पुरस्·ारों से सम्मानित। इस·े साथ ही प्रधानमंत्री, मंत्रियों, सांसदों ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·पाल/लो·ायुक्त ·ी अनुमति ज़रूरी होगी। स्वत:सज्ञान ·ा भी अधि·ार होगा। सीवीसी और सीबीआई ·ेन्द्र में लो·पाल और राज्यों में लो·ायुक्त ·े अधीन होंगे। ऐसा होने पर रसूख रखने वाले धनि·ों और उनपर छत्रछाया रखने वाले राजनेताओं ·े साथ ही सीवीसी और सीबीआई पर भी नज़र रहेगी और ·ुछ गड़बड़ी होने पर उन·े $िखला$फ ·ार्रवाई ·ा भय भी रहेगा। बहरहाल इस विधेय· ·ो भी संसद में पारित होने ·े लिए रखा जाएगा और उसे पास ·रने वाले सांसदों में से ज्य़ादातर ·े दामन पा·-सा$फ नहीं ·हे जाते। तो फिर इर विधेय· ·ो ·ोई क्यों पास ·रेगा और क्यों ·िसी प्र·ार ·ी आम सहमति बनाने ·े लिए सर·ार और नेता प्रतिपक्ष ·ोशिश ·रेंगे। ·ुल मिला·र नहीं लगता ·ि अन्ना हज़ारे ·ा ये अनशन रंग ला पाएगा। अभी त· ·े संसदीय इतिहास पर नज़र डालें तो सा$फ हो जाता है ·ि जब बात सांसदों-विधाय·ों ·े वेतन भत्ते अथवा अधि·ार बढ़ाने ·ी होती है तो क्या पक्ष क्या विपक्ष सब ए·-दूसरे ·े सुर में सुर मिलाते नज़र आते हैं। नतीजा ऐसे विधेय· आनन-$फानन में ही पारित ·र दिए जाते हैं। इससे इतर जब बात जन·ल्याण ·ी होती है या राजनेताओं और रसू$खदारों पर शि·ंजा ·सने ·े लिए संसद में ·ोई विधेय· लाया जाता है तो सब·ी सहमति तो दूर, दो सांसदों त· ·े सुर नहीं मिलते।
क्या है मामला
वर्तमान व्यवस्था क्या है-लो·पाल है ही नहीं। लो·ायुक्त सलाह·ार ·ी भूमि·ा में। लो·ायुक्त ·ी नियुक्ति मुख्यमंत्री हाई·ोर्ट ·े चीफ जस्टिस और नेता प्रतिपक्ष ·ी सहमति से ·रता है। मंत्रियों, सांसद ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·सभा अध्यक्ष ·ी अनुमति ज़रूरी। सीबीआई और सीवीसी सर·ार ·े अधीन। जजों ·े $िखला$फ जांच ·े लिए ची$फ जस्टिस ·ी अनुमति ज़रूरी। सर·ार द्वारा तैयार लो·पाल बिल लो·पाल तीन सदस्यीय होगा। सभी रिटायर्ड जज। चयन समिति में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, दोनों सदनों ·े नेता पक्ष और नेता प्रतिपक्ष, ·ानून मंत्री और गृहमंत्री। मंत्रियों, सांसदों ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·सभा/राज्यसभा अध्यक्ष ·ी अनुमति ज़रूरी। प्रधानमंत्री ·े $िखला$फ जांच ·ी अनुमति नहीं। सीवीसी, सीबीआई,लो·पाल/लो·ायुक्त ·े अधीन नहीं। लो·ायुक्त ·ेवल सलाह·ार ·ी भूमि·ा में। ए$फआईआर से ले·र मु·दमा चलाने ·ी प्र·्रिया पर विधेय· मौन। जजों ·े $िखला$फ ·ार्रवाई पर मौन। क्या है आपत्ति जजों ·ो रिटायर होने ·े बाद सर·ार से उप·ृत होने ·ी आशा रहने से निष्पक्षता प्रभावित होगी। भ्रष्टाचार ·े आरोपियों ·े ही चयन समिति में रहने से ईमानदार लोगों ·ा चयन होने में संदेह। बो$फोर्स, जेएमएम सांसद $खरीद ·ांड, लखूभाई पाठ· ·ेस जैसे मामलों में प्रधानमंत्री ·ी भूमि·ा ·ी जांच ही नहीं हो पाएगी। राजनीति· हस्तक्षेप ·ी संभावना रहेगी। लो·ायुक्त भी सीवीसी ·ी तरह बिना दांत ·े शेर ·ी तरह रहेगा। ·ेजी बाल·ृष्णन जैसे जजों ·े $िखला$फ ·ार्रवाई संभव नहीं होगी। जनलो·पाल विधेय· ग्यारह सदस्यीय लो·पाल। चार ·ा लीगल बै·ग्राउंड ज़रूरी, अन्य दूसरे क्षेत्रों से। चयन समिति में सीएजी, जाने-माने ·ानूनविद, मुख्य चुनाव आयुक्त और नोबल और मैगसेसे जैसे अंतराष्ट्रीय पुरस्·ारों से सम्मानित। प्रधानमंत्री, मंत्रियों, सांसदों ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·पाल/लो·ायुक्त ·ी अनुमति ज़रूरी। स्वत:सज्ञान ·ा भी अधि·ार। सीवीसी और सीबीआई ·ेन्द्र में लो·पाल और राज्यों में लो·ायुक्त ·े अधीन। जजों ·े $िखला$फ जांच ·े लिए लो·पाल/लो·ायुक्त ·े अधि·ार। पेश हुआ बार-बार पर पास नहीं हो पाया लो·पाल विधेय· भारत में लो·पाल/लो·ायुक्त ·ी स्थापना संबंधी विधेय· ·ी अवधारणा सबसे पहले १९६६ में सामने आई। इस·े बाद यह बिल लो·सभा में आठ बार पेश ·िया जा चु·ा है, ले·िन आज त· पारित नहीं हो पाया। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र·ुमार गुजराल ·े ·ार्य·ाल ·े दौरान ए· बार १९९६ में और अटलबिहारी वाजपेयी ·े ·ार्य·ाल में दो बार१९९८ और २००१ में इसे लो·सभा में लाया गया। सन २००४ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लो·पाल विधेय· जल्द ही संसद में पेश ·रने ·ा वादा ·िया। इस विधेय· ·े तहत प्रधानमंत्री ·ो लाया जाए या नहीं यह निरंतर विवाद ·ा विषय रहा। इस पर ·ोई आम सहमति आज त· नहीं बन पाई है।





·ांतिलाल भूरिया बने प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष
भोपाल। जनजातीय मामलों ·े ·ेन्द्रीय मंत्री एवं आदिवासी नेता ·ांतिलाल भूरिया ·ो मध्यप्रदेश ·ांग्रेस ·ा नया अध्यक्ष बनाया गया है। वे सुरेश पचौरी ·ी जगह लेंगे। भूरिया प्रदेशाध्यक्ष बनने ·े बाद नेता प्रतिपक्ष ·ा पद सामान्य वर्ग ·े खाते में जाना तय है। सामान्य वर्ग से इस पद ·े लिए उप नेता प्रतिपक्ष चौधरी रा·ेश सिंह चतुर्वेदी और अजय सिंह ‘राहुल’ प्रबल दावेदार हैं। इनमें से ·िसी ए· ·ी नियुक्ति हो स·ती है। ·ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ·ी स्वी·ृति ·े बाद पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बुधवार ·ो भूरिया ·ी नियुक्ति ·ी घोषणा ·ी। उन्होंने बताया ·ि मध्यप्रदेश ·ांग्रेस ·मेटी ने सर्व सम्मति से ए· प्रस्ताव पारित ·र नए अध्यक्ष ·ी नियुक्ति ·े लिए श्रीमती गांधी ·ो अधि·ृत ·र दिया था। दिल्ली में पिछले ·ुछ दिनों से इसे ले·र ·वायद चल रही थी और प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष पचौरी भी वहां डेरा डाले हुए थे। पचौरी ने प्रदेश अध्यक्ष ·ी ·ुर्सी छोडऩे ·ी इच्छा ज़ाहिर ·रते हुए हाई·मान से ·िसी आदिवासी नेता ·ो अध्यक्ष बनाने ·ा आग्रह ·िया था। भाजपा द्वारा आदिवासी वोट बैं· ·ो अपनी तर$फ खींचने ·ी ·ोशिशों ·े चलते और वरिष्ठ आदिवासी नेता जमुना देवी ·े निधन ·े ·ारण प्रदेश में आई आदिवासी नेता ·ी रिक्तता ·ी पूर्ति ·े लिए भूरिया ·े नाम पर हाई·मान ने मोहर लगाई। भूरिया ·ी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ·े समर्थ·ों में गिनती होती है। उन·े अध्यक्ष बनने से सिंह खेमे में $खुशी ·ी लहर दौड़ गई। भूरिया वर्ष 2009 में चौथी बार सांसद चुने हैं। वे 1993 में दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल में ·ैबिनेट मंत्री रहे हैं। साठ वर्षीय भूरिया ·ेंद्र में जनजातीय मामलों ·े मंत्री हैं। सूत्र बताते हैं ·ि भूरिया ने मंत्री पद पर बने रहने ·ी इच्छा व्यक्त ·ी है, ता·ि राज्य सर·ार से मु·ाबला ·रना आसान रहे। भूरिया ·ी ताजपोशी होने पर पचौरी ·ो ·ेंद्र में बेहतर जि़म्मेदारी मिलने ·ी संभावना है। एआईसीसी में उन्हें महासचिव बनाया जा स·ता है। पचौरी वर्ष 2008 में प्रदेश ·ांग्रेस ·े अध्यक्ष बनाए गए थे। उन्होंने राज्य में वर्ष 2008 में हुए विधानसभा और 2009 में हुए लो·सभा चुनाव में पार्टी ·ा नेतृत्व ·िया था। प्रदेश ·ांग्रेस ·े 34 वें अध्यक्ष नामां·ित हुए भूरिया दिग्विजय सर·ार में आदिम जाति ·ल्याण मंत्री थे, वे ·ेंद्र में पहले राज्यमंत्री और फिर ·ैबिनेट मंत्री बने। ·ांग्रेस ·े पारंपरि· गढ़ झाबुआ में लंबे समय त· दो भूरिया- दिलीप सिंह और ·ांतिलाल में से ·ोई ए· ही चुना जाता रहा था। ·ांग्रेस में आदिवासी मुख्यमंत्री ·ी मुहिम में असफल होने ·े बाद दिलीप सिंह भूरिया भाजपा में चले गए थे। इस·े बाद पृथ· छत्तीसगढ़ बनने ·े बाद ·े मप्र में ·ांतिलाल भूरिया आदिवासी नेतृत्व ·ा निर्विवाद चेहरा बन गए थे। उन्हें पार्टी और गुट में सीधी सपाट निष्ठा ·ा प्रतिफल मिला है।
सवर्ण वर्ग ·े पचौरी ·ी जगह प्रदेश अध्यक्ष पद पर भूरिया ·ी नियुक्ति से अब यह स्पष्ट हो गया है ·ि ·ांग्रेस विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ·ा पद सवर्ण विधाय· ·ो देगी। ऐसा हुआ तो दिग्विजय समर्थ· अजय सिंह ·ो यह पद मिल स·ता है।
पार्टी मेंसही मैनेजमेंट’ · ज़रूरत: भूरिया
सचिन देव नई दिल्ली नवनियुक्त म.प्र.·ांग्रेस अध्यक्ष और ·ेंद्रीय जनजातीय ·ार्यमंत्री ·ांतिलाल भूरिया ·ा मानना है ·ि प्रदेश ·ांग्रेस में गुटबाज़ी नाम ·ी ·ोई चीज नहीं है, महज़ ज़रूरत है तो ‘सही मैनेजमेंट’ ·ी। उन·ा मानना है ·ि ·ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ·े नेतृत्व में गांव ·े ·ार्य·र्ता से ले·र दिल्ली में बैठे प्रदेश ·े दिग्गज नेताओं ·ो ए·जुट ·र चुनावी रण में उतरने से वर्ष 2013 में मप्र में ·ांग्रेस ·ो सत्तासीन होने से ·ोई नहीं रो· स·ता।
पेश हैं प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति ·े बाद मीडिया से भूरिया ·ी बातचीत ·े अंश-
बतौर प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष आप·ी पहली प्राथमि·ता क्या है?
·ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी ने मुझमें विश्वास जता·र प्रदेश ·ी ·मान सौंपी है। ऐसे में सर्वप्रथम प्राथमि·ता पार्टी नेतृत्व ·ी अपेक्षाओं पर खरा उतर·र वर्ष 2013 में म.प्र. में ·ांग्रेस ·ो सत्तासीन ·रना है।
प्रदेश ·ी शिवराज सर·ार में व्याप्त भ्रष्टाचार, अत्याचार और बिगड़ी ·ानून-व्यवस्था से आम जनता ·ो निजात दिलाना है साथ ही मनमोहन सर·ार द्वारा संचालित ·ेंद्रीय योजनाओं ·ा लाभ गांव-गांव त· वास्तवि· ह·दार ·ो दिलाना है।
पार्टी नेतृत्व ·ई मौ·ों पर मप्र ·ांग्रेस में गुटबाजी पर चिंता जता चु·ा है। ऐसे में गुटबाजी से पार पाने ·ी आप·ी क्या रणनीति है?
अव्वल मेरा मानना है ·ि ·ांग्रेस में ए· ही नेता है और वह है ‘सोनिया गांधी’। ऐसे में गुटबाजी ·ा ·ोई सवाल ही नहीं है। ज़रूरत है तो ‘सही मैनेजमेंट’ ·ी। मप्र ·ांग्रेस ·ा ·ार्य·र्ता में आज भी ·ा$फी ऊर्जा है, महज़ ज़रूरत है तो उसे सम्मान और सही दिशा देने ·ी। सोनियाजी ·े नेतृत्व में गांवों ·े ·ार्य·र्ताओं से ले·र दिल्ली में बैठे प्रदेश ·े सभी नेताओं ·ो साथ ले·र ए·जुट हो·र ·ाम ·रेंगे।
क्या प्रदेश ·ांग्रेस ·ी ·मान संभालने ·े साथ ·ेंद्र में मंत्री भी बने रहेंगे?
थोड़ा स·ुचाते हुए, मुझे अभी ·ांग्रेस नेतृत्व ·ी ओर से प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष पद पर नियुक्ति संबंधी पत्र प्राप्त हुआ है। भविष्य में देश ·ी सेवा ·े साथ-साथ म.प्र. में ·ांग्रेस ·ी सर·ार बनाने ·े लिए वरिष्ठ नेताओं ·े सहयोग से आगे बढ़ेंगे।
बतौर प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष भोपाल ·ब जा रहे हैं?
अभी ·ुछ तय नहीं है। पहले दिल्ली में प्रदेश ·े तमाम ·ेंद्रीय नेताओं से मुला·ात ·र विचार-विमर्श ·े बाद आगे ·ा ·ार्य·्रम बनाऊंगा।



·ुशाभाउ ठा·रे ट्रस्ट · दी ज़मीन · आवंटन रद्द
नई दिल्ली। सुप्रीम ·ोर्ट ने भाजपा ·े दिवंगत नेता ·ुशाभाउ ठा·रे ·े नाम पर ए· ट्रस्ट ·ो ज़मीन आवंटित ·िए जाने ·े मध्यप्रदेश सर·ार ·े $फैसले ·ो बुधवार अप्रैल 6 ·ो रद्द ·र दिया।
न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए·े गांगुली ·ी पीठ ने ट्रस्ट ·ो ·रीब 30 ए·ड़ भूमि आवंटित ·िए जाने से संबंधित राज्य सर·ार ·ी अधिसूचना ·ो रद्द ·र दिया।
ट्रस्ट ·े न्यासियों में वरिष्ठ भाजपा नेता लाल·ृष्ण आडवाणी, एम. वें·ैया नायडू और मुरली मनोहर जोशी शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने संबंधित प्राधि·रण ·ो ज़मीन ·ा ·ब्ज़ा लेने ·े आदेश दिए जो 25 सितंबर 2004 ·ो उमा भारती ·े नेतृत्व वाली तत्·ालीन भाजपा सर·ार द्वारा आवंटित ·ी गई थी। न्यायालय ने यह $फैसला मध्यप्रदेश में पंजी·ृत उपभोक्ता सोसायटी अखिल भारतीय उपभोक्ता ·ांग्रेस ·ी याचि·ा पर दिया। याचि·ा में सर·ार ·े $फैसले ·ो यह ·ह·र चुनौती दी गई थी ·ि ·ानून ·ा उल्लंघन ·र ट्रस्ट ·ो बसवाडिय़ा गांव स्थित ज़मीन बहुत ·म ·ीमत पर दी गई। मध्यप्रदेश हाई·ोर्ट द्वारा ज़मीन आवंटन रद्द ·रने से इं·ार ·िए जाने ·े बाद उपभोक्ता सोसायटी ने शीर्ष अदालत में याचि·ा दायर ·ी। शीर्ष अदालत ने उपभोक्ता सोसायटी और राज्य सर·ार ·े तर्· सुनने ·े बाद 19 जनवरी ·ो अपना $फैसला सुरक्षित रख लिया था।
ज़मीन आवंटन ·े अपने $फैसले ·े बचाव में राज्य सर·ार ने तर्· दिया था, ·ि राजनीति· नेताओं ·े नाम वाले ट्रस्टों ·ो ज़मीन आवंटन ·रने में ·ुछ भी $गलत नहीं है, क्यों·ि ·ेंद्र और ·ई राज्य सर·ारों ने बीते समय में मशहूर राजनीति· हस्तियों ·े नाम वाले अने· ट्रस्टों ·ो ·ा$फी भूमि आवंटित ·ी है। राज्य सर·ार ने ·हा था ·ि यदि सभी ट्रस्टों ·े लिए समान मान· लागू ·िए जाते हैं, तो फिर ·ेंद्र सर·ार द्वारा ·िए गए इस तरह ·े सभी आवंटन शीर्ष अदालत ·ी पड़ताल ·ा विषय होंगे। $गौरतलब है ·ि शहर ·े बीचोबीच बेश·ीमती 30 ए·ड़ ज़मीन आवंटित ·ी गई थी,जिसे ए· रुपया सालाना लीज़ पर ·ुशाभाऊ ठा·रे ट्रस्ट ·ो दिया गया था। सुप्रीम ·ोर्ट ·े $फैसले से भाजपा सर·ार ·ो झट·ा लगा है। आवंटित ज़मीन ·ो 15 दिन ·े अंदर वापस ·रने ·े निर्देश सुप्रीम ·ोर्ट द्वारा ट्रस्ट ·ो दिए हैं।

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