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Saturday, April 2, 2011






ढोंगी बाबा ·ा हसीन संसार
बाबा राम देव योगाचार्या है, आयुर्वेद्याचार्य है, सन्यासी है, या महान् सियासी शख़्िसयत है, इस·ी असलियत तो शीघ्र दुनिया ·े सामने आ ही जाएगी। $खबरयार ·े सूत्रों से प्राप्त जान·ारी ·े आधार पर माह मार्च ·े अं· ·्र.06 दिनां· : 04-03-2011 में बाबा राम देव उ$र्फ राम ·िशन यादव ·ी स्·ूली शिक्षा से ले·र उस·ी राजनैति· महत्वा·ांक्षा ·ा वर्णन ·िया गया था। इसी संदर्भ में हमारे सहयोगी लिमटी खरे द्वारा उस·े हर्बल औषधि प्रेम, ·े पीछे उस·ी व्यापरि· गतिविधियों हेतु पतांजली नर्सरी व ·ारखानों हेतु चन्दे ·े धन्धे से धन व भूमि ए·त्र ·रने ·ी लालसा ·ा जि़·्र ·िया गया, मार्च ·े अं· ·्र.08 दिनां· 18-03-2011 में। अब इस अं· में हम प्रस्तुत ·र रहे हैं हमारी ए· अन्य सहयोगी पत्र·ार सरिता अरगरे द्वारा चित्रित देश ·े ·रोड़ों भोले भाले लोगों ·ी भावनाओं से खिलवाड़ ·रने वाले, मध्यप्रदेश ·े मुखिया शिवराज सिंह चौहान ·े साध्य श्रद्धेय, राम देव योगी बाबा ·ा चरित्र चित्रण।
हृ सरिता अरगरे
बाबा रामदेव, देश ·े जाने माने योग गुरू और आयुर्वेदि· दवाओं ·े सबसे बड़े उभरते व्यापारी पर सवाल तो तब भी उठते थे, जब वे पतंजलि योगपीठ ·ी स्थापना ·र·े अपने फैलाव ·र रहे थे, ले·िन उस दिन से उन·ी विश्वसनीयता ही संदेह ·े घेरे में आ गयी, जिस दिन से उन·े स$फेद बाल दिखने शुरू हो गये। पूरे मानवीय समाज ·ो ना$खून रगड़·र योग ·ी शिक्षा देनेवाले योगा गुरू ·े ·ाले बाल स$फेद क्यों होने लगे? बात बहुत छोटी है, ले·िन खुलासा बहुत बड़ा है। क्या बाबा रामदेव जो योगा सिखा रहे हैं, वह लोगों ·ी बजाय उन·े अपने ही मोक्ष ·ा रास्ता खोल रहा है? सरिता अरगरे ·े सवाल-
योग गुरु: पीटी मास्टर
रामदेव नाम ·ा ढोंगी बाबा देश ·े ·रोड़ों लोगों ·ी भावनाओं से खेल रहा है। अपना हित साधने वाले नेताओं ने उसे आधुनि· युग ·ा विवे·ानंद बता·र भारतीय मनीषियों और महापुरुषों ·ा भी अपमान ·िया है। विवे· शून्य समाज ·ो नये सिरे से यह समझाने ·ी ज़रुरत है ·ि ढोल· ·ी थाप पर मंच पर उछल ·ूद,योग नहीं होता। रामदेव ·े योग ·े दावों ·ी पोल $खुद बाबा ·ी दाढ़ी ·े सफ़ेद बाल खोल रहे हैं। योगी ·े तौर पर इमेज बिल्डिंग ·े दौरान यह बाबा हर शिविर में ना$खून रगडऩे ·ी पैरवी ·रता था ,और इस·ा दावा था ·ि इस ·्रिया से गंजे ·े सिर पर बाल आ जाते हैं। इतना ही नहीं साठ साल ·े बुढ्ढे ·ी सूखे भूसे सी दाढ़ी भी साल-छह महीने में स्याह ·ाली हो जाती है। अगर यह सच है तो बाबा ·ी दाढ़ी बढ़ती उम्र ·ी चुगली क्यों ·र रही है।
दुनिया भर ·े दिल ·े मरीज़ों ·ा इलाज अपने योग से ·रने ·ा दावा ठो·ने वाले बाबाजी ·े सबसे ·रीबी ·ी मौत दिल ·ा दौरा पडऩे से हो गई, और ए· दिन पहले त· साथ घूमने वाला योगाचार्य अपने साथी ·े दिल ·े हाल ·ो भाँप भी नहीं स·ा? दर असल यह बाबा देश ·ी भोली भाली जनता ·ो बरगला ·र अपना उल्लू सीधा ·र रहा है। आ$िखर ए· योगी ·ो जेड़ श्रेणी ·ी सुरक्षा ·ी क्या ज़रुरत? योग तो लोगों ·ा भय दूर ·रता है। जो व्यक्ति इतना डरा हुआ हो, वो दुनिया ·ा डर ·ैसे दूर ·र स·ता है ? सही मायनों में यह ए· ढोंगी बाबा है। आसाराम बापू ·ा ही परिष्·ृत रुप है रामदेव बाबा।
·ाले धन पर ·ाली छाया
·ाले धन और भ्रष्टाचार से भारत ·ो आज़ादी दिलाने ·ी बात ·रता है, ले·िन क्या वह इस बात ·ो ·हने ·ा नैति· बल रखता है? इसने मध्यप्रदेश ·ी राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री ·ी बाँह मरोड़·र बेश·ीमती ज़मीन मुफ़्त में आवंटित ·राई है। अपना ·ारोबार जमाने ·े लिये सर·ारी ज़मीन हड़पना क्या भ्रष्टाचार नहीं है। मप्र सर·ार भी जवाब दे ·ि ·िस हैसियत से जनता ·ी संपत्ति ए· दवा ·ारोबारी ·ो सौंपी गई है ? लोगों ·ो याद रखना चाहिये ·ि साधुता ए· प्रवृत्ति है और हर गेरुए ·पड़े पहनने वाला साधु नहीं होता। रावण ने भी सीता हरण ·े लिये गेरुआ चोला ही धारण ·िया था। इस लुटेरे साधु ·ी असलियत उजागर होना बेहद ज़रुरी है। वैसे अभी त· तो यह भी तय नहीं हो स·ा है ·ि रामदेव साधु है या बाबा है या संत है या फिर स्वामी।
अभी वो यह भी ठी· से तय नहीं ·र पाये हैं ·ि उन्हें योगी बनना है या भोगी ? ·भी ·भी तो लगता है ·ि अचान· हाथ आयी माया ने उन्हें रोगी भी बना दिया है। आने वाला वक्त बतायेगा ·ि ·ारुँ ·े $खज़ाने ·ो हासिल ·रने वाले बाबाजी दिल ·े रोगी होंगे या मनोरोगी। यह भी $खूब है ·ि भ्रष्ट तंत्र ·ी मदद से भ्रष्ट आचरण ·े नये-नये ·ीर्तिमान बनाने वाला ही भ्रष्टाचार ·े समूल नाश ·ा दावा ·र रहा है। बाबाजी शायद भूल गये ·ि महज़ पंद्रह सालों में ·माई अ·ूत दौलत इसी भ्रष्ट तंत्र ·ी बदौलत ही है , वरना जिस देश में लोगों ·ो खाने ·े भी लाले हों, वहाँ क्या ·ोई ईमानदारी ·ी ·माई से तीन और पाँच हज़ार रुपये ·ा टि·ट ले·र योग ·े नाम पर उछल ·ूद ·रते बाबा ·ो देखने ·ा साहस जुटा स·ता है। बाबाजी जान लीजिये ·ि इस देश में भ्रष्टाचार से ही ·ाला धन है और ·ाला धन है तभी आप·ा रात दिन फलता फूलता योग ·ा ·ारोबार है। बेहतर तो यही होगा ·ि आप ·ारोबारी ही बने रहें। और यदि वास्तव में भ्रष्टाचार मिटाने ·ी चाहत है तो इस महाठगिनी माया से पीछा छुड़ा·र आगे बढिय़े। वरना जब योग ·ा मुलम्मा उतरेगा तो ,फिर जनता आप·ो इस लूट खसोट से जोड़ी गई दौलत ·ो भोगने ·ा समय भी नहीं देगी। बाबा रामदेव सफल हैं, योग अज्ञानी भारतीय समाज ·ो उल्टा सीधा ·ुछ भी सिखा·र मशहूर ज़रूर हो गये हैं, ले·िन असल में उन·े अपने मन में इतनी ·ालिख जमी है, जिसे सा$फ ·रने ·े लिए उन्हें योग ·ा अभ्यास ·रना ज़रूरी है। निश्चित रूप से योग और दवाइयों ·े साम्राज्य ·ो फैलाते हुए पीटी टीचर यह भूल गया, ·ि असल में वह जो सिखा रहा है, न तो वह योग है और धर्म उस·ी समझ से बाहर ·ा विषय है। रामदेव ए· व्यापारि· समुदाय ·े मुखौटे हैं, जो ·ि अपना हित सुरक्षित रखने ·े लिए अब राजनीति ·े मैदान में ·ूद पड़े हैं। भारत ·ी भोली भाली और सा$फ मन ·ी जनता ·ो मूर्ख बना·र धंधा ·रते बाबा रामदेव ·ो प्रायश्चित स्वरूप लंबी साधना ·ी ज़रूरत है, ता·ि उन·े मन ·ा मैल सा$फ हो और वे सन्यासी ·े अनु·ूल आचरण ·र स·ें।
भोपाल में भ्रष्टाचार
·ाले धन और भ्रष्टाचार ·ा राग अलापने वाले बाबा रामदेव ·े पतंजलि योग संस्थान पर भी उंगलियाँ उठती रही हैं। हाल ही में मध्यप्रदेश विधानसभा ·े बजट सत्र में पतंजलि योग संस्थान द्वारा दवा बिक्री में ·र चोरी ·ा मामला गूँजा। ·ांग्रेस ·े वरिष्ठ विधाय· डॉ. गोविंदसिंह ने आरोप लगाया, ·ि बाबा रामदेव और उन·े रिश्तेदारों द्वारा चलाए जा रहे पतंजलि पीठ द्वारा दवाई बि·्री में सेल टैक्स ·ी चोरी ·ी जा रही है। डॉ. सिंह ने आय-व्यय· पर सामान्य चर्चा ·े दौरान टैक्स चोरी ·रने वाले ऐसे संस्थानों ·ो सस्ती ज़मीन दिए जाने ·ो ले·र सर·ार ·ो आड़े हाथों लिया। उन्होंने राजनीति· और $गैर राजनीति· संस्थाओं ·े साथ ही पतंजलि पीठ ·ो रियायती ज़मीन देने पर भी सवाल उठाया। हालां·ि नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने आरोपों पर आपत्ति ·ी और बाबा रामदेव ·ो साधु-संत बता·र मामले ·ो आया-गया ·रने ·ी ·ोशिश ·ी। इस पर गोविंद सिंह ने ·हा ·ि वे संत नहीं है, राजनीति में आ रहे है , और जल्द चुनाव भी लड़ेंगे। उन्होंने बाबाजी ·ी सम्पत्ति ·ी जाँच ·रने ·ी माँग त· ·र डाली। हाल ही में भोपाल में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ·े ·रीब भौंरी में पतंजलि योगपीठ ·ो राज्य सर·ार द्वारा रियायती दर पर ज़मीन दी गई है। $गौरतलब है ·ि आवंटित ज़मीन ·े आसपास ·ई राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान जैसे स्·ूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्·िटेक्चर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एजु·ेशन एंड रिसर्च, पुलिस अ·ादमी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन डिज़ाइनिंग ·े अलावा फ़ोरेंसि· लैब सहित ·ई पॉश रिहाइशी ·ॉलोनियाँ भी वि·सित हो रही हैं। डेवलपर यहाँ छह सौ से हज़ार रुपये स्क्वेयर फ़ुट से प्लॉट बेच रहे हैं,जब·ि योग व्यवसायी बाबा रामदेव ·ो ·ौडिय़ों ·े दाम ·ई ए·ड़ ज़मीन सर·ार ने मुहैया ·राई है।
भाजपा ·े बिछड़े हुए भाई
प्रदेश ·ी बीजेपी सर·ार ·ा बाबा रामदेव प्रेम ·ोई नया नहीं है। वर्ष 2007 में योग शिविर ·े सिलसिले में जबलपुर गये रामदेव ·ो नर्मदा तीरे ·ी आबोहवा ·ुछ ऐसी रास आई ·ि उन्होंने वहाँ हर्बल पार्· बनाने ·ा इरादा ·र लिया। बाबाजी ·ी सेवा में ·रबध्द मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तुरत-फ़ुरत ही जबलपुर में पतंजलि योगपीठ ·ो तीन सौ हेक्टेयर ज़मीन देने ·ी ·वायद शुरु ·र दी। बाद में विपक्ष ने मामले ·ो विधानसभा में उठाया और इस मुद्दे पर जम·र हँगामा ·िया। तत्·ालीन राजस्व मंत्री ·मल पटेल ने सदन ·ो बताया था, ·ि पतंजलि ट्रस्ट ने सारदा, हरगढ़, दारौलीखुर्द और घुघरा में 655 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन ·ी माँग ·ी थी। साथ ही लम्हेटाघाट में नर्मदा ·े ·िनारे 48.88 हैक्टेयर ज़मीन चाही थी। सर·ारी रि·ॉर्ड में जाँच पड़ताल ·े बाद ग्रामीण इला·ों में ·रीब 262.48 हैक्टेयर और लम्हेटाघाट में 45.43 हैक्टेयर ज़मीन आवंटित ·र दी गई। बहरहाल आदिवासियों और ग्रामीणों ·ी खेती योग्य ज़मीन छीन·र रामदेव ·ो देने और जंगल तथा पर्यावरण ·ो नु·सान ·ी आशं·ा ·े चलते जबलपुर हाई·ोर्ट में सर·ारी फ़ैसले ·े $िखलाफ़ जनहित याचि·ा लगने से मामला फि़लहाल खटाई में पड़ा हुआ है। मगर भोपाल ·ी बेश·ीमती ज़मीन पर गुपचुप तरी·े से पतंजलि योगपीठ ·ा ·ाम शुरु हो चु·ा है। बहरहाल भारतीय जनमानस ·ी गेरुए वस्त्रों ·े प्रति आस्था ·ो भुनाने में महारत रखने वाले इस योगाचार्य ·ो अपनी दिनोंदिन बढ़ती ब्राँड वेल्यू और मार्·ेट ·ैपिटल ·ा ब$खूबी अंदाज़ा है। तभी तो छद्म हिदुत्व ·ी राजनीति ·रने वाली भाजपा ·ो ·ाशाय वस्त्रों में लिपटे इस छद्म योगऋ षि ·ा साथ $खूब भाता है। हिन्दुत्व ·ा फ़ार्मूला लगा·र लो·तंत्र ·े गणितीय प्रमेय ·ो सिद्ध ·रने ·े लिये बाबा ·ो साधने ·ी चाह में भाजपा सर·ारी खज़ाने ·ो लुटाने में भी पीछे नहीं है। घाट-घाट ·ा पानी पी चु·े बाबा रामदेव भी अब राजनीति· पार्टियों ·ी दुखती र$ग ·ो प·ड़ चु·े हैं। दो बिल्लियों ·ी लड़ाई में मौज उड़ाते बंदर ·ी तरह बाबाजी ·भी तो ·ेन्द्र सर·ार ·ी सब्सिडी ले·र फ़ूड पार्· बनाते हैं। ·भी उसी भ्रष्ट सर·ार ·ा दामन थाम गंगा ·े सफ़ाई अभियान में जुट जाते हैं। और फिऱ हिन्दू वोट बैं· ·ा डर दिखा·र बीजेपी से भी सौदेबाज़ी ·रते हैं। मध्यप्रदेश में पतंजलि योगपीठ ·ी गतिविधियों ·ा फ़ैलता दायरा इस बात ·ी तस्दी· ·रता है।



भाजपा ·े प्रमुख शस्त्र
झूठ, पाखण्ड व षडय़ंत्र

·ेन्द्र से ले·र जि़ला और तहसील स्तर त·, इस पर आरएसएस ·ा पूरा नियंत्रण
हृ वीरेन्द्र जैन
वि·ीलीक्स ·े दिन ब दिन हो रहे खुलासों से वे सारे राजनेता और राजनीति· दल सं·ट में घिरते जा रहे हैं, जो दोहरे चरित्र ·े हैं और जिन·े मन व वचन में अंतर है। अरुण जैटली द्वारा गत 6 मई 2005 ·ो अमेरि·ी राजनयि· से ·हा गया था, ·ि हिन्दू राष्ट्रवाद हमेशा बात ·रने ·े लिए ए· अच्छा प्वाइंट है। उस राजनयि· ने 10 मई ·ो भेजे ·ेबल में अरुण जेटली ·े हवाले से ·हा ‘‘यह [हिन्दू राष्ट्रवाद] सम्भावनाओं से भरा मुद्दा है।’’ अरुण जेटली ·ा उक्त खुलासा उन लोगों ·े लिए ए· मुद्दा हो स·ता है, जो साम्प्रदायि·ता ·े $िखला$फ ·ेवल ज़बानी जमा$खर्च ·रते हैं, और उस·े $खतरे ·ो गम्भीरता से नहीं लेते। साम्प्रदायि·ता ·े $खतरे ·ो समझने वाले लोग उस·ा विरोध ·ेवल चुनावी सम्भावनाओं ·े अनुसार न ·र·े उस·े $िखला$फ निरंतर संघर्षरत रहते हैं। वे जानते हैं, संघ परिवार हमेशा ही दुहरे मापदण्ड अपनाता रहा है, और उस·े खाने और दिखाने ·े दाँत सदैव ही अलग अलग रहे हैं। आरएसएस ·ा जन्म हिटलर ·े सिद्धांतों ·े अनुसार ही हुआ था। उस·ी ड्रैस समेत ए· सैनि· संगठन गठित ·रने त· ·े सारे तरी·े उसने हिटलर से ही सीखे हैं, और भारतीय धोती, लुंगी, ·ुर्ता ·ी जगह हा$फ पैंट, ·मीज़ और ·ाली टोपी उन·ा गणवेश होता है। इतना ही नहीं इतिहास ·ो तोड़ मरोड़ ·र पेश ·रने ·े साथ साथ, झूठ ·ो प्रचारित ·रने ·े गोएबल्स ·े सिद्धांत ·े अनुसार वे बार बार उसे दुहराते रहते हैं, और तर्·ों से बचते हैं।
असल में तो वे जानते हैं, ·ि उन·े विचार देश ·ी जनता ·ो स्वी·ार नहीं होंगे, इसलिए वे अपने विचारों ·ी जगह ए· झूठा मुखौटा लगा ·र जनता ·े सामने प्र·ट होते हैं, और इसी द्वन्द में वे निरंतर षडय़ंत्र·ारी और पाखण्डी बने रहते हैं। अंग्रेज़ों ·ी सर·ार से आज़ादी ·े लिए अपनी तरह ·ा अनूठा अहिंस· स्वतंत्रता संग्राम चलाने वाले सबसे बड़े योद्धा महात्मा गान्धी ·े सबसे बड़े विरोधी थे। उन·ा विरोध गान्धी ·े मार्ग से नहीं था, अपितु आज़ादी ·े विचार से ही उन·ा विरोध था।
इसलिए आरएसएस से जुड़े ·िसी भी व्यक्ति ने अपनी तरह से भी ·ोई स्वतंत्रता आन्दोलन नहीं चलाया। उनसे जुड़ा ·ोई भी व्यक्ति आज़ादी ·े लिए जेल त· नहीं गया। इस·े बाबजूद भी जब देश ·ो आज़ादी मिल गयी, तो महात्मा गांधी ·ी हत्या ·रने वाला इन्हीं ·े परिवार से प्रेरित हो·र नि·ला था, जिसने हाथ जोड़ते हुए प्रणाम ·ी झूठी मुद्रा बना ·र, हाथ में छुपायी हुयी पिस्तौल से गान्धी जी ·े सीने में तीन गोलियां उतार दी थीं। गान्धी ·ी मृत्यु ·े बाद आरएसएस ने पहले ·हा था, ·ि वह इन·ा सदस्य नहीं था, और जब उस·े प्रमाण सामने आये, तब इन्होंने ·हा ·ि हमने उसे बहुत पहले संघ से नि·ाल दिया था। बिल्·ुल ऐसा ही प्रमाण अभी भी देखने ·ो मिला, जब असीमानन्द ·े बयान ·े बाद अपनी सम्बद्धता छुपा स·ने में असमर्थ हो जाने ·े बाद सर संघचाल· मोहन भागवत ·ा बयान आया, ·ि संघ ने उग्रवादी विचार वाले लोगों ·ो संघ छोड़ ·र चले जाने ·ो ·हा था। इस·े विपरीत जब जाँच एजेंसियों ·ो संघ परिवार ·े विभिन्न संगठनों द्वारा उग्रवादियों ·ी मदद ·े पक्के सबूत मिलने लगे, तो उन्होंने जाँच एजेंसियों और सच्चाई ·ो उद्घाटित ·रने वाले मीडिया ·े $िखला$फ ही हल्ला बोल दिया। लो·तंत्र में सभी ·ो अपने अपने विचार व्यक्त ·रने और अपने पसन्द ·ा समाज बनाने ·े लिए प्रचार ·रने ·ा अधि·ार होता है और जो ·ानून ·ा उल्लंघन ·रते हुए भी अपने विचार सामने रखते हैं ,वे ·ानून द्वारा दी जाने वाली सज़ा ·ो स्वी·ार ·रते हुए भी अपनी विचार ·ी स्वतंत्रता ·ा उपयोग ·रते हैं, इसमें संघ परिवार से जुड़े संगठन ही अपवाद हैं ,जो निरंतर $गैर·ानूनी ·ाम ·रते हैं, और ·ानून ·े रन्ध्रों से नि·लने ·ी ·ोशिश ·रते हुए निरंतर झूठ बोलते रहते हैं।
भाजपा, जिस·े बचपन ·ा नाम जनसंघ था, ·ा जन्म भी ए· झूठ से ही हुआ था। गान्धीजी ·ी हत्या ·े बाद जब संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था, तब उस प्रतिबन्ध ·ो उठाने ·े लिए वे तत्·ालीन गृहमंत्री सरदार पटेल ·े आगे निरंतर गुहार लगा रहे थे, और उन्हें तरह तरह ·े आश्वासन दे रहे थे, तब सरदार पटेल ने उन·े प्रस्ताव ·ो आगे बढ़ाते हुए उनसे, उन·े ·हे अनुसार ·ेवल ए· सांस्·ृति· संगठन ·ी तरह ही ·ाम ·रने ·ी शर्त रखी थी, जिसे उन्होंने स्वी·ार ·र ली थी। ·िंतु उस·े बाद उन्होंने जनसंघ ·े नाम से, जिसमें संघ ·ा नाम भी जुड़ा हुआ था, ए· नया दल बनाने ·े लिए अपने चार स्वयं सेव· भेजे जिनमें अटलबिहारी वाजपेयी, लाल·ृष्ण आडवाणी जैसे प्रचार· भी सम्मलित थे। उस·े बाद उसने अपना राजनीति· ·ार्य जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी ·े छद्म नाम से ·िया, तथा सार्वजनि· रूप से अपने ·ो उससे अलग बताती रही। इस·े विपरीत सच यह है ·ि ‘‘आज ·ी भाजपा में ·ेन्द्र से ले·र जिला और तहसील स्तर त· ·ी समितियों में संगठन सचिव ·ा पद आरएसएस ·े प्रचार· ·े लिए आरक्षित रहता है और इस तरह भाजपा पर संघ ·ा पूरा नियंत्रण रहता है।’’ जिन्ना से सम्बन्धित बयान ·े बाद आडवाणी जैसे सर्वोच्च ·द ·े नेता ·ो भी पार्टी अध्यक्ष ·े पद से स्ती$फा देना पड़ा था जब·ि सिवाय संघ ·े ·ार्य·ारिणी ·े ·िसी भी सदस्य ने उनसे स्ती$फा नहीं मांगा था। ‘‘·िसी प्रदेश में मंत्रिमण्डल ·े गठन से ले·र ·ोई भी महत्वपूर्ण $फैसला संघ ·ी अनुमति बिना नहीं होता, फिर भी जनता ·े सामने वे यही ·हते रहते हैं, ·ि भाजपा स्वतंत्र संगठन है और उस पर उन·ा ·ोई नियंत्रण नहीं है।’’
भाजपा ·ा गठन जनता पार्टी ·े विघटित होने ·े बाद उसमें सम्मलित हुए जनसंघ ·े सदस्यों द्वारा ·िया गया था, जो जनता पार्टी में अपनी पार्टी ·ो विलीन ·रने ·े झूठ प·ड़े जाने ·े ·ारण ही विघटन ·े ·गार पर पहुँची थी, और वे सब ·े सब यथावत वापिस नि·ल आये थे। उन·े स्वयं ·ो विलीन ·रने ·े झूठ ·े ·ारण ही देश में पहली बार बनी $गैर ·ांग्रेस सर·ार ·ो अपने ·ार्य·ाल से पूर्व ही भंग होना पड़ा था, और देश में ए· दूसरी मध्यम मार्गी पार्टी ·ी सम्भावना ·ी भ्रूणहत्या हो गयी थी। अपनी पार्टी ·ा नाम·रण ·रने में भी इन्होंने जनता पार्टी ·ी लो·प्रियता ·ो भुनाने ·े लिए ही अपना पुराना नाम जनसंघ न रख·र भारतीय जनता पार्टी रखा तथा अपने सिद्धांतों में गान्धीवादी समाजवाद जोडऩे ·ा छद्म भी ·िया, जिसे 1985 ·े चुनावों में हार ·े बाद छोड़ दिया।
जब इन·े थिं· टैं· हिन्दूवाद से प्रभावित लोगों ·े बीच में होते हैं, तो उदार दिखने वाले अटल बिहारी ·ो मुखौटा ·ह ·र अपने ·ो हिन्दुत्ववादी सिद्ध ·रते हैं, और जब इन·े नेता अमेरि·ा ·े राजनयि·ों ·े सामने होते हैं, तो हिन्दुत्व ·ो तात्·ालि· अवसरवाद ·हते हैं।
एनडीए ·े गठन ·े समय अयोध्या, धारा 370, और समान नागरि· आचार संहिता ·ो दरी ·े नीचे छुपा ·र रख देते हैं, पर चुनाव ·े आते ही फिर से राम मन्दिर ·ा मुद्दा उठा लेते हैं और अयोध्या में ए· छोटी सी पुलिया ·े उद्घाटन ·े लिए देश ·े प्रधानमंत्री अटल बिहारी ·ो ले जाते हैं। भाजपा से बाहर नि·लने ·े बाद उस·े तत्·ालीन वरिष्ठ उपाध्यक्ष ·ल्याण सिंह ने ·हा ही था, ·ि इन्होंने भगवान राम ·ो पोलिंग एजेंट बना दिया है। अपनी पार्टी ·े बारे में ए· वरिष्ठ उपाध्यक्ष से अधि· ज्ञान और ·िस·ो हो स·ता है। उमाभारती ने पार्टी से बाहर आने ·े बाद ·हा था ·ि सच्ची रामभक्त वे हैं और भाजपाई झूठे राम भक्त हैं।
पूरे देश में रथयात्रा नि·ाल·र आडवाणीजी बाबरी मस्जिद ध्वंस ·े लिए हज़ारों लोगों ·ो बह·ा ·र अयोध्या ले जाते हैं और बाबरी मस्जिद तुड़वाने ·े बाद ·हते हैं ·ि इससे उन्हें बहुत दुख हुआ और वे तो उन लोगों ·ो रो· रहे थे, पर उन·ी भाषा ·ो न समझ पाने वाले लोग उन·ी बात नहीं समझ पाये। दूसरी ओर उन·े साथ ·े सहाभियुक्त पूर्व सांसद वेदांती ·हते हैं, ·ि हमने मस्जिद नहीं पुराने मन्दिर ·े खण्डहर ·ो पुनर्निर्माण ·े लिए तोड़ा है।
असल में झूठ पाखण्ड और षडय़ंत्र भाजपा ·े प्रमुख हथियार हैं, जिन·े बिना उन्हें अपने अस्तित्त्व ·ा ज्ञान है और वे सत्ता ·े लाभों ·े इतने आदी हो चु·े हैं, ·ि सत्ता पाने ·े लिए ·िसी से भी ·ैसा भी समझौता ·रना, विधाय·ों ·ी $खरीद $फरोख़्त, भ्रष्टाचार, बेईमानी, या लो·प्रिय व्यक्तित्त्वों और जातिवादी नेताओं से प्रचार ·े सौदे ·रने से बाज़ नहीं आते। अरुण जेटली तो इस हँडिया ·ा इ·लौता चावल हैं, जब·ि इसमें ऐसे ऐसे ही लोग भरे पड़े हैं।

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