जनलो·पाल विधेय· समिति पर मण्डराता भ्रष्टाचार ·ा साया
भोपाल। लो·पालवादियों ·े भूख हड़ताल आन्दोलन ·ी सफलता पर जयजय·ार और बधाईयों ·े आदान प्रदान ·ो अभी ए· सप्ताह भी नहीं गुज़रा, ·ि इस में शामिल लो·पालवादियों ·े आचार-व्यवहार, विचार एवं शिष्टाचार ·ी विभिन्न प्र·ार से आलोचनाओं ·ी ए· ·े बाद ए· ·र·े श्रंृखला ही बनने गली। पहिले ही दिन उन·े अपने तथा-·थित सहयोगी बाबा राम देव ने समिति ·े सदस्यों पर ·िन्तु ·िया। राजनैति· दलों ·े तपे तपाये राजनेताओं ने उन पर सवाल दा$गने शुरू ·र दिये, अन्ना जी बतायें! इस आन्दोलन ·ो चलाने हेतु जो लाखों, बल्·ि ·रोड़ों ·ा $खर्चा ·िया गया, वह ·हां से आया? अन्ना लगभग हर नेता व अधि·ारी ·ी ईमानदारी पर श· ·रते हुये अपने लच्छेदार भाषणों ·े बल पर वह जनता ·े बीच हीरो बन गये हैं। क्या हर ·िसी ·ो उनसे ईमानदारी ·ा प्रमाण पत्र लेना ज़रूरी है। इससे पिछले अं· में $खबरयार द्वारा लो· पाल बिल ·े पास होने पर शं·ा जताते हुये खुलासा ·िया गया था, ·ि आम जनता पर राज ·रने वाले नेता, अधि·ारी व बड़े उद्योगपति घराने क्यों चाहेंगे ·ि आम आदमी उन·े द्वारा हड़प ·ी जा रही सुख सुविधाओं में से हिस्सा बटा स·ें। समिति ·े गठन ·े तुरन्त पश्चात् जो बातें सामने आ रही हैं, उन्हें बता रहे हैं $खबरयार ·े सहयोगी जे.पी.सिंह एवं अन्य :-
·रप्शन ·िंग शांति भूषण
हृ जेपी सिंह
अन्ना हज़ारे ·े धरना स्थल पर मौजूद शांति भूषण ·ो लो·पाल ·े लिए गठितसंयुक्त समिति ·ा ·ो-चेयर बनाया गया है।
शांति भूषण और प्रशांत भूषण ने इलाहाबाद में बीस ·रोड़ ·ी संपत्ति ·ा एग्रीमेन्ट टू सेल ए· लाख रूपये में हासिल ·िया। लखनऊ और इलाहाबाद से प्र·ाशित होनेवाले हिन्दी दैनि· डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट ने खुलासा ·िया है, ·ि बाप बेटे ·ी यह जोड़ी संपत्तियां बनाने और स्टांप ड्यूटी बचाने ·े मामले में ·रप्शन ·िंग हैं।
इलाहाबाद ·े सिविल लाइंस जैसे पॉश इला·े में 12 अक्टूबर 2010 ·ो देश ·े पूर्व ·ानून मंत्री शान्ति भूषण, उन·े वरिष्ठ व·ील पुत्र प्रशान्त भूषण, उन·े द्वितीय पुत्र जयंत भूषण एवं उन·ी पुत्री शेफाली भूषण ·े नाम बंगला नम्बर 19 (पुराना) 77/29 (नया) तथा 19-ए (पुराना) 79/31 (नया) एल्गिन रोड, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग ·ी ·ुल भूमि 7818 वर्ग मीटर है। भूमि सहित बने हुए बंगले ·ी ‘एग्रीमेंट टू सेल’ रजिस्ट्री मात्र ए· लाख रुपये में ·ी गयी है। यह ‘एग्रीमेंट टू सेल’ हरिमोहन दास टंडन, सुधीर टंडन एवं सतीश टंडन ने 12 अक्टूबर 2010 ·ो दो हज़ार रुपये ·े स्टाम्प पेपर पर मात्र पांच हज़ार रुपये ·ा भुगतान ले·र ·िया है।
$गौरतलब है ·ि इस बंगले में शांति भूषण वर्षों से ·िरायेदार हैं, और इस·ा विवाद भी ·चहरी में चल रहा था। ले·िन सूट नम्बर 516/2000 में 5 अक्टूबर 2010 ·ो दोनों पक्षों में समझौता दा$िखल हुआ तथा प्रथम पक्ष हरिमोहन दास टंडन 7818 वर्गमीटर भूमि जिसमें बंगला निर्मित है, ·ो दूसरे पक्ष शांतिभूषण एवं अन्य ·ो मात्र ए· लाख रुपये में बंगले ·ो ज़मीन सहित बेचने ·े लिए राज़ी हो गये। इस·े साथ ही दोनों पक्षों में ·िराये ·े ब·ाये और बेदखली ·े विरुद्घ दायर वाद नम्बर 11/2001 ·ो भी वापस लेने पर सहमति हो गयी जिस·ी तारीख 18 अक्टूबर 2010 ·ो नियत थी। दोनों पक्षों ने जब त· सेलडीड न हो तब त· ‘एग्रीमेंट टू सेल’ ·ा पंजी·रण ·राने ·ा निर्णय लिया।
·रप्शन ·िंग शांति भूषण
तदनुसार द्वितीय पक्ष शांतिभूषण ने ·ेवल 5000 रुपये ·ा भुगतान ·र·े एग्रीमेंट टू सेल अपने एवं अपने परिजनों ·े पक्ष में ·रा लिया। यह सारा खेल सूट नम्बर 516/2000 में 5 अक्टूबर 2010 ·ो दाखिल समझौते ·ी आड़ में खेला गया, जिसमें दोनों पक्ष ए· लाख में ज़मीन व बंगला $खरीदने और बेचने पर राज़ी हो गये। ‘एग्रीमेंट टू सेल’ ·ी प्रति ‘डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट’ ·े पास है, जिसमें पृष्ठï नौ ·े बिन्दु दो पर लिखा गया है, ·ि 5000 रुपये एडवांस 2 सितम्बर 1966 ·ो दिये गये तथा शेष 95,000 रुपये सेलडीड एवं उस·े ·्रियान्वयन ·े समय देने ·ा ·रार ·िया गया है, जो 31 दिसम्बर 2010 त· हो जानी थी। अब पता चला है ·ि सेलडीड ·ी रजिस्ट्री हो गयी है। ‘एग्रीमेंट टू सेल’ में यह भी ·रार ·िया गया है ·ि यदि प्रथम पक्ष यानी हरिमोहन दास टंडन सेलडीड ·रने में असफल रहते हैं तो दूसरा पक्ष यानी शांतिभूषण एवं उन·े परिजन सूट नम्बर 516/2000 में एसीजेएम ·े ·ोर्ट से हुई डिक्री ·े आधार पर सेलडीड ·राने ·े लिए अधि·ृत होंगे। $गौरतलब है ·ि इस भूमि ·ा फ्रीहोल्ड 8 जून 2000 ·ो ·राया गया था, जिस·े लिए ·ुल शुल्· 26 लाख 97 हज़ार 663 रुपये ·ा ट्रेज़री चालान 7 अप्रैल 2000 ·ो सर·ारी $खज़ाने में जमा ·िया गया था। ज्ञातव्य है ·ि यह ‘एग्रीमेंट टू सेल’ अक्टूबर 2010 में हुआ और उसी समय इसी भूखण्ड ·े अन्य ·ई प्लाटों ·ी भी अलग-अलग रजिस्ट्री हुई, जिन·ा ·ुल र·बा लगभग चार हज़ार वर्गमीटर था और इतनी रजिस्ट्री में ·ुल 12 ·रोड़ रुपये ·ी मालियत ·े आधार पर सर्·िल रेट ·ेहिसाब से स्टाम्प शुल्· अदा ·िया गया, और 12 ·रोड़ रुपये ·ा भुगतान भवन स्वामी हरिमोहन दास टंडन ·ो ·िया भी गया। इस तरह यदि 4,000 वर्गमीटर ·ा सर्·िल रेट ·े अनुसार 12 ·रोड़ रुपये से अधि· मूल्य होता है, तो फिर जो भूमि एवं बंगला शांति भूषण एवं उन·े परिजनों ·े पक्ष में ‘एग्रीमेंट टू सेल’ ·र·े बेचा जा रहा है उस·ी ·ीमत 20 ·रोड़ रुपये से अधि· ·ी है। यही नहीं वर्तमान में इस क्षेत्र ·ा सर्·िल रेट 31 हज़ार रुपये प्रतिवर्ग मीटर से अधि· हो गया है। ऐसे में इस·ी ·ीमत 20 ·रोड़ रुपये से भी ·ा$फी अधि· हो गयी है। ‘एग्रीमेंट टू सेल’ में उ.प्र. स्टाम्प एक्ट 2008 ·े अनुसार स्टाम्प शुल्· या भुगतान नहीं ·िया गया है। एक्ट ·ी अनुसूची (उ.प्र. स्टाम्प अधिनियम ·े अधीन लिखतों पर स्टाम्प शुल्·) ·ी धारा 24 स्पष्टी·रण ए· में ·हा गया है ·ि इस अनुच्छेद में प्रयोजनों ·े लिए ·िसी स्थावर सम्पत्ति ·े विक्रय ·े ·रार ·े मामलों में जहां निष्पादन ·े पूर्व या निष्पादन ·े समय ·ब्ज़ा दे दिया जाय, या हस्तांतरण पत्र ·ा निष्पादन ·िये बिना ·ब्जा दे दिये जाने ·ा ·रार ·िया गया हो, वहां ·रार ·ो हस्तांतरण पत्र समझा जायेगा और उस पर तदनुसार स्टाम्प शुल्· देय होगा। चूं·ि दोनों पक्षों में ·िरायेदारी विवाद चल रहा था और शांतिभूषण उक्त सम्पत्ति व हैसियत ·िरायेदार ·ब्ज़े में है, इसलिए ‘एग्रीमेंट टू सेल’ ·े समय ·ुल मूल्य ·ा 7 प्रतिशत स्टाम्प शुल्· दिया जाना चाहिए जो, ·ि नहीं दिया गया है। यही नहीं जिस भूमि ·े फ्री होल्ड ·ेलिए 26 लाख रुपये से अधि· ·ा भुगतान ·िया गया, उस·े लगभग दो तिहाई हिस्से ·ो महज़ ए· लाख रुपये में शांति भूषण ·ुनबे ·ो दिया जाना गले से नीचे नहीं उतर रहा है।
जनलो·पाल या धनलो·पाल?
जनलो·पाल यदि वास्तव में जनता ·ा हो, तो इस·े $फायदे सन्देह से परे हैं। यद्यपि जनलो·पालवादियों ने अब त· इस पद पर नियुक्ति ·े जो प्रस्ताव दिए हैं, उसमें यह $खतरा है ·ि प्रस्तावित जनलो·पाल बहुसंख्य· ‘$गरीब जन’ द्वारा नियुक्ति नहीं ·िया जाएगा, अल्पसंख्य· ‘अमीरजन’ द्वारा नियुक्त होगा और अमीरजन ·ी ओर से सर·ार, संसद और न्यायपालि·ा पर शासन ·रेगा। भ्रष्टाचार में शामिल भारत ·े ·िसी भी बड़े उद्योगपति ·ो ·भी भी सज़ा नहीं हो पायी, नेताओं और अधि·ारियों ·ो दण्डित ·रने ·े हज़ारों उदाहरण मौजूद हैं। जनलो·पालवादी इस पद पर नियुक्ति ·ा जो प्रस्ताव दे रहे हैं, उसमें इस बात ·ी ·ोई व्यवस्था नहीं है ·ि जनलो·पाल ·ा पद धन ·ी धम·ी और मीडिया ·ी धम·ी से ·ैसे मुक्त होगा? धनवानों व मीडियावानों ·ी धम·ी में आ जाने ·े ·ारण ही सीबीआई, राज्यों ·ा पुलिस मह·मा, आय·र विभाग, विजिलेंस विभाग...... सभी विभाग भ्रष्टाचार ·ो रो·ने में अब त· असहाय साबित हुए हैं। इन विभागों ·े ईमानदार व ·र्त्तव्यपरायण ·र्मचारियों ·ी हमेशा से शि·ायत रही है ·ि नेता लोग उन·े ·ाम में द$खल देते हैं; इसलिए मजबूर हो·र ये ·र्मचारी भ्रष्ट लोगों ·ो सुबूतों ·े बावजूद दण्डित नहीं ·रवा पाते। नेताओं से अगर पूछो ·ि वे लोग ऐसा क्यों ·रते हैं। तो अक्सर तो वे इस सवाल ·ा जवाब टाल जाते हैं। यदि आप·ो वह अतिविश्वसनीय मानता हो और उसे यह विश्वास हो जाये, ·ि उस·ा नाम गोपनीय रह जाएगा, तब वह बताता है ·ि प्राय सभी पार्टियों ·े सभी अधि·ार पार्टियों ·े अध्यक्षों ·े हाथ में हैं। पार्टियों ·ा संविधान ही ऐसा होता है। पार्टियों ·े अध्यक्ष उन उद्योगपतियों ·ो भ्रष्टाचार ·े आरोप में दण्डित होने से बचाते हैं, जो उद्योगपति पार्टी अध्यक्ष ·ो अरबों-खरबों रुपया चन्दा देते हैं।
अन्ना हज़ारे अनशन ·ा सुपारीबाज़
अन्ना ·ा अनशन $खत्म हुए उतना समय तो बीत ही गया है जितने समय वे अनशन पर बैठे रहे, ले·िन अन्ना हज़ारे ·े अनशन ने न ·ेवल मीडिया, एनजीओ और आंदोलन पर बेहस छेड़ दी है, बल्·ि राजनीति· रूप से भी $गलतबयानियों ·ा सिलसिला जारी है. अन्ना हज़ारे ·े अनशन ·ी आड़ में ·ांग्रेस और भाजपा दोनों ही अन्ना हज़ारे ·ा समर्थन भी ·र रही है और विरोध भी। खुल·र तो नहीं ले·िन ·ांग्रेस समर्थ· अन्ना ·ो भाजपाई बताने में लगे हुए हैं, तो भाजपा ·े नेता अंदरखाने में उन्हें ·ांग्रेस ·ा एजंट साबित ·रने ·ी ·ोशिश ·र रहे हैं। अनशन ·े वक्त ही सपा ·े नेता रामगोपाल यादव ने अन्ना हज़ारे ·े अनशन पर सवाल उठाया था, ले·िन उन·ी बोली नक्कारखाने में तूती साबित हुई, ले·िन अनशन ·ा क्रम और घटनाक्रम ऐसा रहा, ·ि ·ांग्रेस और भाजपा दोनों ही अन्ना ·ा समर्थन ·रते हुए दिखना चाहते हैं, ले·िन उन·े ऊपर अपना ठप्पा लगाने से भी बच रहे हैं। दिल्ली ·े राजनीति· गलियारों में चलनेवाली थ्योरी देखिए. अन्ना ने यह आंदोलन ·ांग्रेस ·ो $फायदा पहुंचाने ·े लिए ·िया और इस·े लिए दिग्विजिय सिंह से अन्ना हज़ारे ·ी नजदी·ियों ·ा सहारा लिया गया। फिर दूसरी थ्योरी, नहीं अन्ना ·ा आंदोलन तो अपने आप ही शुरू हुआ, ले·िन उस·ा $फायदा ·ांग्रेस ने उठा लिया और चार राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनावों में अन्ना ·े अनशन ·ो अपने पक्ष में इस्तेमाल ·र लिया। तीसरी थ्योरी, अन्ना ·ा अनशन आरएसएस ·ी ओर से प्रायोजित ·िया गया था, ले·िन ·िरण बेदी तथा रामदेव ·ो ·िनारे ·र·े ·ांग्रेस ने इस अनशन ·ो हाईजै· ·र लिया। इन थ्यौरियों ·े अलावा बयानबाज़ी मामले ·ो और उलझा रही है। दिग्विजय सिंह भले ही अन्ना हज़ारे ·े ·रीबी ·हे जा रहे हों, ले·िन उन्होंने अन्ना हज़ारे ·ो चुनाव मैदान में उतर·र ईमानदार बने रहने ·ी धम·ी दे दी है। ·ांग्रेस सिब्बल तो पहले ही अन्ना ·ो ·मतर ·रने ·ी ·ोशिश ·र चु·े हैं। ले·िन भाजपा भी विरोधाभासी बयान देने में पीछे नहीं है। पार्टी प्रमुख गड़·री अन्ना ·े आंदोलन ·ा समर्थन ·र रहे हैं, तो मध्य प्रदेश भाजपा ·े अध्यक्ष प्रभात झा ने बयान दिया है ·ि मैं उन·े इस बयान से बिल्·ुल भी इत्त$फा· नहीं रखता ·ि देश ·े सभी राजनेता भ्रष्ट हैं। उन्होंने राष्ट्रहित में जो बीड़ा उठाया है, वह स्वागत योग्य व सराहनीय है। ले·िन इस·ा यह मतलब नहीं ·ि अन्ना स्वयं ईमानदारी ·े विश्वविद्यालय हैं और उन·े प्रमाण-पत्र से ही ·िसी राजनेता ·ो सच्चा व ईमानदार ·हलाने ·ा अधि·ार मिलेगा। रही सही ·सर अन्ना हज़ारे द्वारा मोदी ·ो ·िये गये धन्यवाद ने पूरी ·र दी है. गुजरात ·े मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अन्ना हज़ारे ·ी तारी$फ ·ी तो वहां ·ांग्रेसी जो अब त· अन्ना ·ा समर्थन ·र रहे थे उन·े विरोध में खड़े हो गये. दिल्ली में ब्लाग लिख·र गुजरात पहुंचे लाल·ृष्ण आडवाणी भी अन्ना ·े सवाल पर $खामोश ही नज़र आये। अब सवाल यह ·ि अन्ना आ$िखर ·िस·े राजनीनीति· एजंट हैं? भाजपा ·े या ·ांग्रेस ·े? या फिर अपनी सुविधाअनुसार दोनों ·े? या फिर दोनों ·े नहीं? वैसे अन्ना हज़ारे ·ो मुंबई ·ी राजनीति· गलियारों में अनशन ·ा सुपारीबाज़ ·हा जाता है। वह शायद इसलीए क्यो·ि वहां वे आज इस पार्टी ·े नेता ·े $िखला$फ अनशन ·रते हैं, तो ·ल उस पार्टी ·े नेता ·े $िखला$फ। जब सभी पार्टियां देखती हैं, ·ि वह तो ·िसी ·ो नहीं छोड़ रहा है, तो अपनी सुविधा ·े लिए उन्हें अनशन ·ा सुपारीबाज़ ·हना शुरू ·र दिया। अब दिल्लीवाले उन·ा क्या नाम·रण ·रेंगे?
क्या अन्ना ·े अनशन समाप्ति ·ा राज़ है सोनिया
अन्ना हजारे ·ा अनशन भले ही उन·ी सारी शर्ते मानने ·े साथ $खत्म हो गया हो, ले·िन इस अनशन से ·ांग्रेस ·े अंदर ·ी राजनीति भी खुल·र सामने आ गयी है। पीएम और सोनिया ·े बीच जारी सत्ता संघर्ष ·ा ही नतीजा है ·ि, अन्ना ·े अनशन ·े मसले पर पीएम बतौर मुखौटा ही नज़र आये, सारी ·मान सोनिया गांधी ने $खुद अपने हाथ में ले रखी थी।
प्रधानमंत्री ·े सोचने-विचारने से पहले ही ·ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अन्ना ·े उठाए मुद्दे ·ा समर्थन ·िया और अनशन तोडऩे ·ी अपील ·ी। तभी सर·ार ने आनन-फानन में अनशन तुड़वाने ·ी पहल ·ी। अन्ना ·े प्रतिनिधियों से बातचीत ·े दौरान भले ·पिल सिब्बल और वीरप्पा मोईली प्रधानमंत्री से मिले, ले·िन उन्हें इस मसले पर पार्टी आला·मान से सीधा निर्देश था, ·ि अन्ना हज़ारे ·ी शर्तें मान ·र समझौता ·राना है।
पार्टी सूत्रों ·े मुताबि· प्रधानमंत्री और उन·ा द$फ्तर अन्ना ·ी ·ई शर्तों पर सहमत नहीं था। 7 मार्च ·ो अन्ना से मुला·ात ·े दौरान अन्ना से अपनी असहमतियों ·ो प्रधानमंत्री ने व्यक्त भी ·र दिया था। वे नहीं चाहते थे ·ि प्रधानमंत्री ·ा पद लो·पाल ·े दायरे में आए, पर ·ांग्रेस नेताओं ·ी मंशा ·ुछ और थी। तभी समझौता हो जाने ·े बाद वीरप्पा मोईली ने बयान दिया, ·ि उन्होंने प्रधानमंत्री से ·हा था, ·ि इसे प्रतिष्ठा ·ा प्रश्न नहीं बनाया जाए। इस·ा सीधा मतलब है ·ि प्रधानमंत्री ट·राव ·े मूड में थे। ·ांग्रेस नेताओं ने यह बात भी फैलाई है ·ि मनमोहन सिंह एनसीपी नेता शरद पवार ·े असर में हैं और अन्ना ·े मामले में पवार ·ी $फीडबै· पर ·ाम ·र रहे हैं। वैसे भी सर·ार ·े भीतर ·ी जोर आज़माइश में प्रधानमंत्री ·ो पवार ·ा समर्थन है। इस पर भी ·ांग्रेस ·े आला नेता प्रधानमंत्री से $खफा हैं।
·ांग्रेस नेताओं ·ी नाराजगी इस बात ·ो ले·र भी थी, ·ि प्रधानमंत्री ने इस मसले ·ो ठी· से हैंडल नहीं ·िया। उन·ा ·हना था ·ि 7 मार्च ·ो सीधे प्रधानमंत्री ·ो अन्ना हज़ारे से नहीं मिलना चाहिए था। अन्ना पहले ही प्रधानमंत्री से मिल चु·े थे, इसलिए जब 28 मार्च ·ो प्रधानमंत्री ने उनसे अपने मंत्रियों से मिलने ·ो ·हा, तो अन्ना हज़ारे ने मना ·र दिया। अगर अन्ना हज़ारे पहले मंत्रियों से मिलते और बाद में प्रधानमंत्री से उन·ी मुला·ात होती, तो अनशन ·ी नौबत नहीं आती। ऐसा ·ांग्रेस नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी ·ो समझाया। तभी इस मसले पर पहल प्रधानमंत्री ·े हाथ से नि·ल गई और पार्टी आला·मान ·े निर्देश पर मामूली फेरबदल ·े साथ अन्ना ·ी सारी शर्तें मान ली गर्इं। सिब्बल और मोईली ने इस पूरे प्र·रण में अपनी उपयोगिता साबित ·ी।

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