
बार फिर हुई संसद में रस्में वायदों की अदायगी
जी.डी.गोयल नई दिल्ली। 26 जनवरी 1950 के दिन जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति बाबू राजेंन्द्र प्रसाद ने संसद के प्रथम सत्र को संबोधित किया था, तब अपने भाषण में नेहरू सरकार की योजनाओं और वायदों का जि़क्र किया था। उन वायदों पर भारत की जनता ने भी पूरा विश्वास किया था। तब से लगा कर आज तक संसद के हर नये सत्र के प्रारम्भ में राष्ट्रपति अपने भाषण में सरकार की नई योजनाओं और वायदों का जि़क्र करते रहे हैं। लेकिन साल दर साल जैसे-जैसे हमारे देश के नेता भ्रष्टाचार की दलदल में ध्ंांसते गए, सरकारी योजनायें का$गज़ों में पुरोने लगीं, और जनता से किये गये वायदे खोखले साबित होते गए। इस बार भी जब बजट सत्र प्रारम्भ हुआ तो परम्परा के अनुसार राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने जब अपना भाषण पढ़ा तो उसमें वायदों की रस्म अदायगी भी की गई, जिसमें पहला वायदा किया गया, मंहगाई को नियंत्रित करने का। यह बात अब जनता को अच्छी तरह से समझ में आ गई है, कि देश में ना तो चीनी की कमी है और ना दालों की, उसके बावजूद जो मंहगाई बढ़ी है उसके लिए जि़म्मेदार है नेताओं, अधिकारियों और काले बाज़ारियों का काकस, जिसे ना तो कोई सरकार तोड़ पाई है, और ना तोड़ पायेगी। जहां तक सोनिया गांधी की वर्तमान सरकार का सवाल है, तो जब से वह सत्ता में आई है मंहगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ी है, जबकि अभी तक उनकी सरकार उस पर काबू नहीं कर पाई, तो अब उनके पास ऐसी कौन सी मिसाईल आ गई है, जिसे दा$गते ही इस बजट के बाद जमा$खोरों के गोदामों के ताले और दिल पिघल जायेंगे, और जनता को सारा सामान सस्ते दरों पर मिल जायेगा।
दूसरा वायदा किया गया है, कि नई पीढ़ी को 18 वर्ष की उम्र तक मुफ़्त शिक्षा प्रदान की जायेगी। यह बात संविधान के द्वारा प्रदत्त मूलभूत अधिकारों में भी कही गई है। लेकिन आज़ादी के बाद से देश की हर सरकार ने सबसे कम बजट शिक्षा पर ही $खर्च किया है। एक सत्य-कथा है कि मध्यप्रदेश की एक ऐसी रियासत, जिसकी अधिकांश भूमि पर घने जंगल थे और उनमें शेर जैसे वन्य जीव बहुतायत में थे, ना तो वहां पर खेती की कोई $खास गुंजाईश थी और ना ही कर-कारखाने थे। ज्य़ादा तर जनता की सेवा में थी और शिकार के शौकीन राजा के शिकार के समय केवल रोटी की मज़दूरी पर हांका लगाने का काम करती थी। राजा के पास एक व्यापारी का मुनीम प्रस्ताव लेकर पहुंचा कि अगर वह उन्हें अपनी बंजर ज़मीन पर एक बड़ा कारखाना लगाने की अनुमति प्रदान कर दे, तो उसकी प्रजा को रोज़गार भी मिलेगा और राज्य की आमदनी भी बढ़ेगी। राजा को उसका प्रस्ताव पसंद आ गया, और मुनीम ने सौदे के अनुसार राजा को पांच लाख रूपया पेशगी भी दे दिया। रात को जब राजा की मह$िफल जमी तो राजा ने उस सौदे की जानकारी मुसाहिबों को दी, जिसे सुन कर एक मुसाहिब ने कहा कि हुकम, ये ठीक है कि जनता को रोज़गार भी मिलेगा और धन भी मिलेगा, लेकिन उसके बाद हांके को मज़दूर नहीं मिलेंगे, बस फिर क्या था राजा ने तुरंत अतिथि शाला में ठहरे मुनीम को तलब किया, और हुक्म सुनाया कि सुबह होने से पहले रियासत की सीमा से बाहर चला जाय, वर्ना उसकी जान की $खैर नहीं होगी। नतीजा यह हुआ कि वो कारखाना पड़ोसी राज्य में लग गया, और उस रियासत के लोग आज भी $गरीबी की हालत में दूसरे राज्यों में मज़दूरी कर अपना गुज़ारा कर रहे हैं।
उस राज़े की ही तरह हमारे नेताओं के मुसाहिबों ने भी उनको समझा दिया, कि अगर पीडिय़ों तक चुनाव जीत कर हुकूमत करनी है, तो संविधान में कुछ भी लिखा हो, इस बात का ख्य़ाल रखना कि यथा सम्भव जनता को शिक्षित नहीं होने देना। वर्ना जात धर्म भाषा और क्षेत्र के नाम उसे मन मजऱ्ी से हांक कर वोट नहीं ले पाओगे, और उन्होंने ऐसा ही किया। कहा गया है, कि बिना शिक्षित प्रजा के कोई भी प्रजातंत्र टिक ही नहीं सकता। अगर कहीं ऐसा हो तो वह प्रजातंत्र नहीं भीड़ तंत्र होगा, और हमारे ऐसा ही प्रजातंत्र चल रहा है। वो तो $गनीमत है कि जनता की मांग को देख कर व्यापारियों ने शिक्षा का व्यापार शुरू कर दिया और लगभग चालीस प्रतिशत लोग शिक्षित नज़र आने लगे। इसी का परिणाम है कि अब देश के नेता पूरी तरह लोगों को हांक कर सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, और देश में मिली-जुली सरकारें बन रही हैं।
इनके अलावा भी बहुत से वायदे किए गए, जिनमें कुछ पुराने थे जो आज तक पूरे नहीं हुए और कुछ नए थे, जिनके पूरे होने का जनता को भरोसा नहीं है, क्योंकि अब लोग इस बात को समझ चुके हैं, कि सरकारें राष्ट्रपति के मुंह से वायदे पढ़वाती हैं, वे केवल वायदों की रस्म अदायगी ही होती है, ह$की$कत नहीं। शिक्षा से लेकर रोजगार तक आज देश में जो विकास हुआ है, वह जनता ने अपने संसाधनों और प्रयासों से किया है। इस देश में जो उद्योगधंधे पनपे हैं उसका श्रेय भारतीय व्यापारियों को दिया जा सकता है, जिन्होंने अपने मुना$फे के लिए ही सही, करोड़ों लोगों को रोज़गार मुहैया कराया है, और देश को आर्थिक समृद्धि प्रदान की है, वर्ना सरकार मेें चुन कर गए नेताओं ने, जितना हो सका है जनता को लूटने का ही प्रयास किया है, भले ही वे अब इस का श्रेय लेकर अपनी पीठ थपथपाते रहें।
लोक निर्माण विभाग बना भ्रष्टाचार का पर्याय फास्ट ट्रेक योजना में ब्लेक टाप रिनिवल कार्यों में 114 लाख का भ्रष्टाचार उजागर महालेखाकार की रिपोर्ट से हुआ खुलासा, जांच व कार्यवाही की मांग अनूप सक्सेना राजगढ़। जि़ले में लोकनिर्माण विभाग के द्वारा गत वर्षों में फास्ट ट्रेक योजना केे तहत 5 कार्यों में ब्लेक टाप रिनीवल के कार्य जो 527 लाख के थे 114 लाख का अधिक भुगतान ठेकेदारों को कार्यपालन यंत्रियों द्वारा भ्रष्टाचार में सह भागिता कर किया गया इस अनावश्यक व्यय से कार्यों की लागत असामान्य रूप से बढ़ गयी। जि़ले के समाज सेवी पत्रकार अनूप सक्सेना व इश्तियाक नवी $खान द्वारा लोकनिर्माण मंत्री नागेन्द्र सिंह व प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग प्रभूदयाल मीना तथा महामहिम राज्यपाल महोदय से भेंट कर 114 लाख की बढ़ी तित्तीय व तकनीकी अनियमितता के लिये जवाबदेह अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही व आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
उक्त पांच कार्य जो एग्रीमेंट नं. 13, 20, 21, 22, 23 के द्वारा ठेकेदारों को जारी किये गये थे महालेखाकार ने इन पांचों कार्यों (1) पचोर-माचलपुर मार्ग फलोदी कंस्ट्रक्शन कम्पनी लागत 136 .86 लाख (2) शुजालपुर-पचोर मार्ग शिव कंस्ट्रक्शन लागत 100 लाख (3) पड़ाना-तलेन मार्ग दिलीप कंस्ट्रक्शन 80.60 लाख (4) ब्यावरा सिटी पोरशान तिरूपति कंस्ट्रक्शन 75.23 लाख (5) छापीहैडा-नलखेड़ा मार्ग तिरूपति कंस्ट्रक्शन 134.52 लाख के थे। महालेखाकार ने उक्त कार्यों में निम्न प्रमुख वित्तीय अनियमितताएं उजागर की। बिल्ट अप स्पे्रग्राऊट के (बेसकोर्स के रूप में उपयोग की जाने के लिये दानेदार गिट्टी के साथ डामर प्रयुक्त करते हुए दो परतों के साथ 75 मि.मी. सहविकृत तथा प्रत्येक परत के बाद डामर एवं दूसरी परत पर गिट्टी बिल्ट अप स्प्रेग्राऊट का निर्माण होता है) नियम विरूद्ध कार्य से उक्त पांचों कार्यों की अतिरिक्त लागत 96.14 लाख बढ़ी जो शासन को आर्थिक क्षति व ठेकेदारों को अनुचित लाभ है।
निर्धारित मापदण्डों से अधिक महंगी सामग्री का उपयोग कर करवाये गये टेककोट (टी. सी.) कार्य से सामूहिक अतिरिक्त लागत 17.88 लाख बढ़ी जो भी शासन को आर्थिक क्षति है।
उक्त पांच कार्यों में से दो कार्य जो ब्यावरा सिटी पोरशान तथा छापीहैडा-नलखेड़ा मार्ग के ब्लेक टाप रिनेवल के थे एजेंसी तिरूपति कंस्ट्रक्शन कम्पनी थी। उक्त कम्पनी द्वारा गुणवत्ताहीन स्थानीय स्तर पर क्रय किया डामर (12861 रू. प्रति मेट्रिक टन) इस्तेमाल कर जहां कार्यों को गुणवत्ताहीन बनाया वहीं शासन को 17.90 लाख की आर्थिक क्षति पहुंचायी व अनुचित लाभ प्राप्त किया। शासन द्वारा निर्धारित श्रेष्ठ गुणवत्ता का डामर 14996 रूपये प्रति मीट्रिक टन की दर से क्रय किया जाना था जो कम्पनी द्वारा उपयोग न कर गंभीर वित्तीय अनियमितता की गयी।
कोटेशन प्राक्लन व तकनीकी स्वीकृति में उल्लेखित निर्धारित मात्रा से बहुत कम मात्रा में डामर का उपयोग कर कार्य संपादन किये जाने से ठेकेदारों को अनावश्यक अधिक भुगतान 19.29 लाख का हुआ। फास्ट ट्रेक योजना के तहत बी.टी.रिनेवल कार्य में जो कार्य 75.23 लाख का ब्लेक टाप रिनेवल ब्यावरा सिटी पोरशन के लिये किया गया इस कार्य में विशिष्टता व मापदण्डों के अनुसार 234.856 मीट्रिक टन डामर का उपयोग होना था, परंतु तिरूपति कंस्ट्रक्शन कम्पनी द्वारा उक्त कार्य में मात्र 155.985 मेट्रिक टन डामर का उपयोग कर कार्य पूर्ण किया गया, इसी प्रकार फलोदी कंस्ट्रक्शन कम्पनी जो कार्य पचोर-माचलपुर मार्ग के ब्लेक टाप रिनवेल का मिला था, इस 136.86 लाख के कार्य में फलोदी कंस्ट्रक्शन कम्पनी को प्रावधान मापदण्डों के अनुसार 407.678 मीट्रिक टन डामर लगाया जाना था, इसके विपरीत कम्पनी द्वारा मात्र 357.93 मेट्रिक टन डामर ही उपयोग कर कार्य पूर्ण किया।
महालेखाकार द्वारा अभियंताओं के जवाबों को अमान्य लोकनिर्माण विभाग के राजगढ़ जि़ले के कार्यों पर गंभीर टिप्पणी कर निरीक्षण प्रतिवेदन में लिखा गया कि नियम प्रावधान से कार्य करवा पाने में लोकनिर्माण विभाग असफल रहा।
समाज सेवी पत्रकार अनूप सक्सेना इश्तिकार नवी $खान की पहल पर महामहिम राज्यपाल श्री बलराम जाखड़ द्वारा 24/3/2009 को पत्र कं्र. 1310 राजभवन द्वारा प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग म.प्र. को कार्यवाही की जाने के निर्देश दिये हैं।
जर्क से सिटी फटी, कर्मचारी झुलसा प्लांट के अधिकारियों की लापरवाही से हुआ हादसा गोस्वामी सारनी(बैतूल)। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में बीते सोमवार $फरवरी 22 के दिन सुबह पावर हाउस के स्वीच यार्ड में जर्क से सिटी के फटने से मंडल का एक कर्मचारी आग की चपेट में आने से झुलस गया, जिसे गंभीर अवस्था में नागपुर रिफर किया गया। प्रदेश के बिजली उत्पादन करने वाले पावर प्लांटों में शामिल सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट में महज़ बीते दो माह में करीब 26 बार ट्यूब लीकेज होने के कारण एक के बाद एक इकाईयों के बंद होने का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था, कि सोमवार सुबह 9 बजे के लगभग पावर हाउस क्रमांक एक के 220 के.व्ही. स्वीच यार्ड में अचानक जर्क आने के कारण सिटी भष्ट हो गई और मंडल में कार्यरत विद्युतकर्मी बाबूराव माकोड़े बुरी तरह आग से झुलस जाने के कारण उसे तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए मंडल के स्थानीय चिकित्सालय में उपचार के लिए लाया गया, जिसे डाक्टरों ने घायल कर्मचारी की हालत नाज़ुक होने के कारण उसे तत्काल नागपुर के लिए रिफर कर दिया । मंडल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 220 के.व्ही. में मेंटनेंस कार्य तपस्या इंजीनियरिंग के संचालक द्वारा परमिट वर्क आर्डर लेकर किया जा रहा था। तभी अचानक प्लांट में भारी जर्क होने के कारण दो सिटी भष्ट हो गईं। उक्त समय घटना स्थल से अधिकारी नदारत थे। तभी इलेक्ट्रिकल दो नंबर में कार्य करने वाले विद्युतकर्मी बाबूराव माकोड़े निवासी सुपर ई 571 स्टेट बैंक कालोनी अर्थ राड लेकर जा रहा था कि तभी सिटी फट गई और विद्युतकर्मी बुरी तरह से झुलस गया। मंडल सूत्रों ने बताया कि दो नंबर इलेक्ट्रिकल विभाग में पदस्थ अधिकारियों की लापरवाही कार्यप्रणाली के कारण यह घटना घटी। बताया यह भी जाता है कि जैसे ही सिटी फटी तो 62.5 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाली छोटी पांचों इकाईयां करीब 15 से 20 मिनिट तक बंद रहीं। सूत्रों की मानें तो स्वयं को बचाने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी विद्युतकर्मी की $खामियां बता रहे हंै। जबकि सवाल यह उठता है कि यदि परमिट लेकर कार्य किया जा रहा था, तो अर्थ लगाते वक्त हादसा कैसे हुआ। यदि उक्त घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है तो कई दोषी अधिकारियों के चेहरों पर से नकाब उठ सकता है। वेतन लेकर सुख सुविधाओं को भोगने वाले अधिकारियों की कार्य के प्रति लापरवाह रहकर मंडल को लााखों रूपये की चपत लगाने में कामयाब होते जा रहे हंै। ऐसे मगरमच्छों पर कठोरात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए। मंडल सूत्रों की मानें तो करंट से झुलसा विद्युतकर्मी को उक्त अधिकारी बचाना ही नहीं चाहते। यदि विद्युतकर्मी बच जाता हैं, तो जि़म्मेदार अधिकारियों के काले कारनामें पूरी तरह उजागर हो जाएंगे और उन्हें संभवत: मंडल को संपति का दुरूप्रयोग करने पर जेल भी हो सकती है। सनद रहे इस घटना से मंडल को लाखों रूपये का नुकसान तो हुआ ही, साथ में सारे अधिकारी सकते में आ गए हैं। $खैर जो भी हो, उक्त घटना को दबाने में अधिकारी एडी चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं। उक्त घटना के पीछे प्लांट के एक जि़म्मेदार अधिकारी की लापरवाही होना बताया जा रहा है। बहरहाल घायल कर्मचारी का गंभीर अवस्था में नागपुर के एक अस्पताल में उपचार चल रहा है, जिसके पूर्ण स्वास्थ्य होने के पश्चात ही खुलासा हो पाएगा।



