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Friday, February 26, 2010




बार फिर हुई संसद में रस्में वायदों की अदायगी
जी.डी.गोयल नई दिल्ली। 26 जनवरी 1950 के दिन जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति बाबू राजेंन्द्र प्रसाद ने संसद के प्रथम सत्र को संबोधित किया था, तब अपने भाषण में नेहरू सरकार की योजनाओं और वायदों का जि़क्र किया था। उन वायदों पर भारत की जनता ने भी पूरा विश्वास किया था। तब से लगा कर आज तक संसद के हर नये सत्र के प्रारम्भ में राष्ट्रपति अपने भाषण में सरकार की नई योजनाओं और वायदों का जि़क्र करते रहे हैं। लेकिन साल दर साल जैसे-जैसे हमारे देश के नेता भ्रष्टाचार की दलदल में ध्ंांसते गए, सरकारी योजनायें का$गज़ों में पुरोने लगीं, और जनता से किये गये वायदे खोखले साबित होते गए। इस बार भी जब बजट सत्र प्रारम्भ हुआ तो परम्परा के अनुसार राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने जब अपना भाषण पढ़ा तो उसमें वायदों की रस्म अदायगी भी की गई, जिसमें पहला वायदा किया गया, मंहगाई को नियंत्रित करने का। यह बात अब जनता को अच्छी तरह से समझ में आ गई है, कि देश में ना तो चीनी की कमी है और ना दालों की, उसके बावजूद जो मंहगाई बढ़ी है उसके लिए जि़म्मेदार है नेताओं, अधिकारियों और काले बाज़ारियों का काकस, जिसे ना तो कोई सरकार तोड़ पाई है, और ना तोड़ पायेगी। जहां तक सोनिया गांधी की वर्तमान सरकार का सवाल है, तो जब से वह सत्ता में आई है मंहगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ी है, जबकि अभी तक उनकी सरकार उस पर काबू नहीं कर पाई, तो अब उनके पास ऐसी कौन सी मिसाईल आ गई है, जिसे दा$गते ही इस बजट के बाद जमा$खोरों के गोदामों के ताले और दिल पिघल जायेंगे, और जनता को सारा सामान सस्ते दरों पर मिल जायेगा।
दूसरा वायदा किया गया है, कि नई पीढ़ी को 18 वर्ष की उम्र तक मुफ़्त शिक्षा प्रदान की जायेगी। यह बात संविधान के द्वारा प्रदत्त मूलभूत अधिकारों में भी कही गई है। लेकिन आज़ादी के बाद से देश की हर सरकार ने सबसे कम बजट शिक्षा पर ही $खर्च किया है। एक सत्य-कथा है कि मध्यप्रदेश की एक ऐसी रियासत, जिसकी अधिकांश भूमि पर घने जंगल थे और उनमें शेर जैसे वन्य जीव बहुतायत में थे, ना तो वहां पर खेती की कोई $खास गुंजाईश थी और ना ही कर-कारखाने थे। ज्य़ादा तर जनता की सेवा में थी और शिकार के शौकीन राजा के शिकार के समय केवल रोटी की मज़दूरी पर हांका लगाने का काम करती थी। राजा के पास एक व्यापारी का मुनीम प्रस्ताव लेकर पहुंचा कि अगर वह उन्हें अपनी बंजर ज़मीन पर एक बड़ा कारखाना लगाने की अनुमति प्रदान कर दे, तो उसकी प्रजा को रोज़गार भी मिलेगा और राज्य की आमदनी भी बढ़ेगी। राजा को उसका प्रस्ताव पसंद आ गया, और मुनीम ने सौदे के अनुसार राजा को पांच लाख रूपया पेशगी भी दे दिया। रात को जब राजा की मह$िफल जमी तो राजा ने उस सौदे की जानकारी मुसाहिबों को दी, जिसे सुन कर एक मुसाहिब ने कहा कि हुकम, ये ठीक है कि जनता को रोज़गार भी मिलेगा और धन भी मिलेगा, लेकिन उसके बाद हांके को मज़दूर नहीं मिलेंगे, बस फिर क्या था राजा ने तुरंत अतिथि शाला में ठहरे मुनीम को तलब किया, और हुक्म सुनाया कि सुबह होने से पहले रियासत की सीमा से बाहर चला जाय, वर्ना उसकी जान की $खैर नहीं होगी। नतीजा यह हुआ कि वो कारखाना पड़ोसी राज्य में लग गया, और उस रियासत के लोग आज भी $गरीबी की हालत में दूसरे राज्यों में मज़दूरी कर अपना गुज़ारा कर रहे हैं।
उस राज़े की ही तरह हमारे नेताओं के मुसाहिबों ने भी उनको समझा दिया, कि अगर पीडिय़ों तक चुनाव जीत कर हुकूमत करनी है, तो संविधान में कुछ भी लिखा हो, इस बात का ख्य़ाल रखना कि यथा सम्भव जनता को शिक्षित नहीं होने देना। वर्ना जात धर्म भाषा और क्षेत्र के नाम उसे मन मजऱ्ी से हांक कर वोट नहीं ले पाओगे, और उन्होंने ऐसा ही किया। कहा गया है, कि बिना शिक्षित प्रजा के कोई भी प्रजातंत्र टिक ही नहीं सकता। अगर कहीं ऐसा हो तो वह प्रजातंत्र नहीं भीड़ तंत्र होगा, और हमारे ऐसा ही प्रजातंत्र चल रहा है। वो तो $गनीमत है कि जनता की मांग को देख कर व्यापारियों ने शिक्षा का व्यापार शुरू कर दिया और लगभग चालीस प्रतिशत लोग शिक्षित नज़र आने लगे। इसी का परिणाम है कि अब देश के नेता पूरी तरह लोगों को हांक कर सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, और देश में मिली-जुली सरकारें बन रही हैं।
इनके अलावा भी बहुत से वायदे किए गए, जिनमें कुछ पुराने थे जो आज तक पूरे नहीं हुए और कुछ नए थे, जिनके पूरे होने का जनता को भरोसा नहीं है, क्योंकि अब लोग इस बात को समझ चुके हैं, कि सरकारें राष्ट्रपति के मुंह से वायदे पढ़वाती हैं, वे केवल वायदों की रस्म अदायगी ही होती है, ह$की$कत नहीं। शिक्षा से लेकर रोजगार तक आज देश में जो विकास हुआ है, वह जनता ने अपने संसाधनों और प्रयासों से किया है। इस देश में जो उद्योगधंधे पनपे हैं उसका श्रेय भारतीय व्यापारियों को दिया जा सकता है, जिन्होंने अपने मुना$फे के लिए ही सही, करोड़ों लोगों को रोज़गार मुहैया कराया है, और देश को आर्थिक समृद्धि प्रदान की है, वर्ना सरकार मेें चुन कर गए नेताओं ने, जितना हो सका है जनता को लूटने का ही प्रयास किया है, भले ही वे अब इस का श्रेय लेकर अपनी पीठ थपथपाते रहें।


लोक निर्माण विभाग बना भ्रष्टाचार का पर्याय
फास्ट ट्रेक योजना में ब्लेक टाप रिनिवल कार्यों में 114 लाख का भ्रष्टाचार उजागर महालेखाकार की रिपोर्ट से हुआ खुलासा, जांच व कार्यवाही की मांग अनूप सक्सेना राजगढ़। जि़ले में लोकनिर्माण विभाग के द्वारा गत वर्षों में फास्ट ट्रेक योजना केे तहत 5 कार्यों में ब्लेक टाप रिनीवल के कार्य जो 527 लाख के थे 114 लाख का अधिक भुगतान ठेकेदारों को कार्यपालन यंत्रियों द्वारा भ्रष्टाचार में सह भागिता कर किया गया इस अनावश्यक व्यय से कार्यों की लागत असामान्य रूप से बढ़ गयी। जि़ले के समाज सेवी पत्रकार अनूप सक्सेना व इश्तियाक नवी $खान द्वारा लोकनिर्माण मंत्री नागेन्द्र सिंह व प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग प्रभूदयाल मीना तथा महामहिम राज्यपाल महोदय से भेंट कर 114 लाख की बढ़ी तित्तीय व तकनीकी अनियमितता के लिये जवाबदेह अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही व आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
उक्त पांच कार्य जो एग्रीमेंट नं. 13, 20, 21, 22, 23 के द्वारा ठेकेदारों को जारी किये गये थे महालेखाकार ने इन पांचों कार्यों (1) पचोर-माचलपुर मार्ग फलोदी कंस्ट्रक्शन कम्पनी लागत 136 .86 लाख (2) शुजालपुर-पचोर मार्ग शिव कंस्ट्रक्शन लागत 100 लाख (3) पड़ाना-तलेन मार्ग दिलीप कंस्ट्रक्शन 80.60 लाख (4) ब्यावरा सिटी पोरशान तिरूपति कंस्ट्रक्शन 75.23 लाख (5) छापीहैडा-नलखेड़ा मार्ग तिरूपति कंस्ट्रक्शन 134.52 लाख के थे। महालेखाकार ने उक्त कार्यों में निम्न प्रमुख वित्तीय अनियमितताएं उजागर की। बिल्ट अप स्पे्रग्राऊट के (बेसकोर्स के रूप में उपयोग की जाने के लिये दानेदार गिट्टी के साथ डामर प्रयुक्त करते हुए दो परतों के साथ 75 मि.मी. सहविकृत तथा प्रत्येक परत के बाद डामर एवं दूसरी परत पर गिट्टी बिल्ट अप स्प्रेग्राऊट का निर्माण होता है) नियम विरूद्ध कार्य से उक्त पांचों कार्यों की अतिरिक्त लागत 96.14 लाख बढ़ी जो शासन को आर्थिक क्षति व ठेकेदारों को अनुचित लाभ है।
निर्धारित मापदण्डों से अधिक महंगी सामग्री का उपयोग कर करवाये गये टेककोट (टी. सी.) कार्य से सामूहिक अतिरिक्त लागत 17.88 लाख बढ़ी जो भी शासन को आर्थिक क्षति है।
उक्त पांच कार्यों में से दो कार्य जो ब्यावरा सिटी पोरशान तथा छापीहैडा-नलखेड़ा मार्ग के ब्लेक टाप रिनेवल के थे एजेंसी तिरूपति कंस्ट्रक्शन कम्पनी थी। उक्त कम्पनी द्वारा गुणवत्ताहीन स्थानीय स्तर पर क्रय किया डामर (12861 रू. प्रति मेट्रिक टन) इस्तेमाल कर जहां कार्यों को गुणवत्ताहीन बनाया वहीं शासन को 17.90 लाख की आर्थिक क्षति पहुंचायी व अनुचित लाभ प्राप्त किया। शासन द्वारा निर्धारित श्रेष्ठ गुणवत्ता का डामर 14996 रूपये प्रति मीट्रिक टन की दर से क्रय किया जाना था जो कम्पनी द्वारा उपयोग न कर गंभीर वित्तीय अनियमितता की गयी।
कोटेशन प्राक्लन व तकनीकी स्वीकृति में उल्लेखित निर्धारित मात्रा से बहुत कम मात्रा में डामर का उपयोग कर कार्य संपादन किये जाने से ठेकेदारों को अनावश्यक अधिक भुगतान 19.29 लाख का हुआ। फास्ट ट्रेक योजना के तहत बी.टी.रिनेवल कार्य में जो कार्य 75.23 लाख का ब्लेक टाप रिनेवल ब्यावरा सिटी पोरशन के लिये किया गया इस कार्य में विशिष्टता व मापदण्डों के अनुसार 234.856 मीट्रिक टन डामर का उपयोग होना था, परंतु तिरूपति कंस्ट्रक्शन कम्पनी द्वारा उक्त कार्य में मात्र 155.985 मेट्रिक टन डामर का उपयोग कर कार्य पूर्ण किया गया, इसी प्रकार फलोदी कंस्ट्रक्शन कम्पनी जो कार्य पचोर-माचलपुर मार्ग के ब्लेक टाप रिनवेल का मिला था, इस 136.86 लाख के कार्य में फलोदी कंस्ट्रक्शन कम्पनी को प्रावधान मापदण्डों के अनुसार 407.678 मीट्रिक टन डामर लगाया जाना था, इसके विपरीत कम्पनी द्वारा मात्र 357.93 मेट्रिक टन डामर ही उपयोग कर कार्य पूर्ण किया।
महालेखाकार द्वारा अभियंताओं के जवाबों को अमान्य लोकनिर्माण विभाग के राजगढ़ जि़ले के कार्यों पर गंभीर टिप्पणी कर निरीक्षण प्रतिवेदन में लिखा गया कि नियम प्रावधान से कार्य करवा पाने में लोकनिर्माण विभाग असफल रहा।
समाज सेवी पत्रकार अनूप सक्सेना इश्तिकार नवी $खान की पहल पर महामहिम राज्यपाल श्री बलराम जाखड़ द्वारा 24/3/2009 को पत्र कं्र. 1310 राजभवन द्वारा प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग म.प्र. को कार्यवाही की जाने के निर्देश दिये हैं।

जर्क से सिटी फटी, कर्मचारी झुलसा प्लांट के अधिकारियों की लापरवाही से हुआ हादसा गोस्वामी सारनी(बैतूल)। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में बीते सोमवार $फरवरी 22 के दिन सुबह पावर हाउस के स्वीच यार्ड में जर्क से सिटी के फटने से मंडल का एक कर्मचारी आग की चपेट में आने से झुलस गया, जिसे गंभीर अवस्था में नागपुर रिफर किया गया। प्रदेश के बिजली उत्पादन करने वाले पावर प्लांटों में शामिल सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट में महज़ बीते दो माह में करीब 26 बार ट्यूब लीकेज होने के कारण एक के बाद एक इकाईयों के बंद होने का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था, कि सोमवार सुबह 9 बजे के लगभग पावर हाउस क्रमांक एक के 220 के.व्ही. स्वीच यार्ड में अचानक जर्क आने के कारण सिटी भष्ट हो गई और मंडल में कार्यरत विद्युतकर्मी बाबूराव माकोड़े बुरी तरह आग से झुलस जाने के कारण उसे तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए मंडल के स्थानीय चिकित्सालय में उपचार के लिए लाया गया, जिसे डाक्टरों ने घायल कर्मचारी की हालत नाज़ुक होने के कारण उसे तत्काल नागपुर के लिए रिफर कर दिया । मंडल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 220 के.व्ही. में मेंटनेंस कार्य तपस्या इंजीनियरिंग के संचालक द्वारा परमिट वर्क आर्डर लेकर किया जा रहा था। तभी अचानक प्लांट में भारी जर्क होने के कारण दो सिटी भष्ट हो गईं। उक्त समय घटना स्थल से अधिकारी नदारत थे। तभी इलेक्ट्रिकल दो नंबर में कार्य करने वाले विद्युतकर्मी बाबूराव माकोड़े निवासी सुपर ई 571 स्टेट बैंक कालोनी अर्थ राड लेकर जा रहा था कि तभी सिटी फट गई और विद्युतकर्मी बुरी तरह से झुलस गया। मंडल सूत्रों ने बताया कि दो नंबर इलेक्ट्रिकल विभाग में पदस्थ अधिकारियों की लापरवाही कार्यप्रणाली के कारण यह घटना घटी। बताया यह भी जाता है कि जैसे ही सिटी फटी तो 62.5 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाली छोटी पांचों इकाईयां करीब 15 से 20 मिनिट तक बंद रहीं। सूत्रों की मानें तो स्वयं को बचाने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी विद्युतकर्मी की $खामियां बता रहे हंै। जबकि सवाल यह उठता है कि यदि परमिट लेकर कार्य किया जा रहा था, तो अर्थ लगाते वक्त हादसा कैसे हुआ। यदि उक्त घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है तो कई दोषी अधिकारियों के चेहरों पर से नकाब उठ सकता है। वेतन लेकर सुख सुविधाओं को भोगने वाले अधिकारियों की कार्य के प्रति लापरवाह रहकर मंडल को लााखों रूपये की चपत लगाने में कामयाब होते जा रहे हंै। ऐसे मगरमच्छों पर कठोरात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए। मंडल सूत्रों की मानें तो करंट से झुलसा विद्युतकर्मी को उक्त अधिकारी बचाना ही नहीं चाहते। यदि विद्युतकर्मी बच जाता हैं, तो जि़म्मेदार अधिकारियों के काले कारनामें पूरी तरह उजागर हो जाएंगे और उन्हें संभवत: मंडल को संपति का दुरूप्रयोग करने पर जेल भी हो सकती है। सनद रहे इस घटना से मंडल को लाखों रूपये का नुकसान तो हुआ ही, साथ में सारे अधिकारी सकते में आ गए हैं। $खैर जो भी हो, उक्त घटना को दबाने में अधिकारी एडी चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं। उक्त घटना के पीछे प्लांट के एक जि़म्मेदार अधिकारी की लापरवाही होना बताया जा रहा है। बहरहाल घायल कर्मचारी का गंभीर अवस्था में नागपुर के एक अस्पताल में उपचार चल रहा है, जिसके पूर्ण स्वास्थ्य होने के पश्चात ही खुलासा हो पाएगा।

Friday, February 19, 2010

Thursday, February 11, 2010

यारों का यार


नेता, अफ़सर और ठेकेदार
सब खाने में मस्त

पकड़े गए तो शिवराज ने पिलाई डांट

जी.डी.गोयल

नई दिल्ली।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कई आई.ए.एस. अधिकारियों के यहां छाप-मारी में सैंकड़ों करोड़ रूपयों की अवैध सम्पत्ति ज़प्त की गई व उनके पिता सेवा निवृत्त पुलिस महानिरीक्षक एच.एम.जोशी है। भोपाल में सबसे अधिक धन आई.ए.एस. दम्पत्ति अरविंद जोशी और उनकी पत्नि टीना जोशी के यहां से बरामद की गई हैं। उनके यहां से तो लगभग 25 लाख रूपयों की विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई है। इनके अलावा लोक निर्माण विभाग के प्रभारी मुख्य अभियंता दीपक असाई और इसी विभाग के कार्यपालन यंत्री रामदास चौधरी तथा पूर्व आई.एस. अधिकारी एम.ए.$खान के यहां भी भारी मात्रा में अवैध सम्पत्ति ज़प्त की गई है। इन अधिकारियों के साथ ही साथ भोपाल के एक व्यापारी पवन अग्रवाल के यहां से भी 500 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति मिलने के समाचार आ रहे हैं। इन अधिकारियों के बैंक लॉकरों से कई किलोग्राम सोना व चांदी के आभूषण व अकूल सम्पत्ति के दस्तावेज़ एवं नकदी भी ज़प्त की गई है।
काली कमाई को स$फेद करने के नायाब तरीके से इन अधिकारियों द्वारा आई.सी.आई.सी.आई पू्रडैंश्यिल की शाखा प्रबंधक सीमा जायसवाल को भी अपने वर्ग के मिला लिया। बीमा एजेंट से एक दम शाखा प्रबंधक बनी सीमा जायसवाल का लॉकर खुलवाया गया, तो उसमें से साढ़े 14 लाख नकद ज़ब्त किये गये।
छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि सचिव ने तो भ्रष्टाचार काली कमाई को छुपाने के कीर्तिमान ही स्थापित कर दिए। अग्रवाल ने एक ही बैंक, यूनियन बैंक में 250 खाते खोल लिए और वो खाते खोले खरोड़ा के उन $गरीब किसानों के नाम, जिनके पास ढंग से दो जून की रोटी खने का इंतज़ाम भीनहीं था। अग्रवाल ने अपने एक चार्टेड अकाउंटेंट मित्र की मदद से उन ग्रामीणों के पैन कार्ड भी बनवाये और उनके नाम से खाते खोल कर दस-दस, पंाच लाख रूपए जमा करवा कर काली कमाई के करोड़ों रूपये इकठ्े कर लिए। मध्यप्रदेश में ही कटनी के एक बोक्साईट खदानों के मालिक मित्तल ने मध्यप्रदेश खनिज निगम के अधिकारियों की सांठ-गांठ से निगम के करोड़ों रूपयों के शेयर बाज़ार में बेच कर और पुन: $खरीद कर करोड़ों की हेरा फेरी कर डाली। छापों की इन कार्यवाहियों से समाचार पत्रों के मुख पृष्ठ रंग गए। टेलीवीज़न के समाचार चैनलों ने अपनी बे्रकिंग न्यज़ में इन समाचाारों को प्रमुखताओं से दिखाया। चौराहों और चौपालों में इनकी चट$खारे लेकर चर्चाएं भी हुईं, जिनका समापन यहीं आकर हुआ, कि देखाना, कुछ नहीं होगा इन लोगों को थोड़ा से धन का नुकसान होगा और कुछ दिन पूछतांछ की परेशानी होगी। ये लोग जो आज भ्रष्टाचार के आरोप मेें पकड़े गए हैं, कल भ्रष्टाचार की मदद से ही छूट भी जायेंगे और यही हमारे देश में होता भी आ रहा है। ऐसा नहीं है कि ये कोई पहली बार हो रहा है। आज़ाद भारत के इतिहास में अब तक सैंकड़ों नेता अधिकारी और दो नम्बरिए धंधेबाज़ ठेकेदार भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े जा चुके हैं, और यह सिलसिला आज भी जारी है।
कुछ ही महीने पहले झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के यहा इतनी समपत्ति बरामद हुई कि सारा देश अचम्भित रह गया। वे आज कल जेल में हैं। लेकिन कब तक रहेंगे? इससे पहले भी बिहार के ही पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हज़ारों करोड़ के चारा घोटाले में पकड़े गए थे। उन्हें मुख्यमंत्री पद से भी हटा दिया गया था, और वे जेल भी गए थे। लेकिन उसके बाद उनका क्या हुआ। यह सबके सामने है। एक बार जेल से ज़मानत होने के बाद उन्होंने राजनीति की ऊंचाई छुईं और आज भी वे देश के प्रतिष्ठित नेता हैं। मध्यप्रदेश के ही एक आई.ए.एस. अधिकारी अजीत जोगी जब इंदौर के कलेक्टर थे, तब कोलार बांध के भ्रष्टाचारों के आरोप में फंसे थे। लेकिन उन्होंने तुरंत सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और राजनीति में प्रवेश कर गए। सब जानते हैं, कि उनकी इन्क्वायरी की फाईलें धूल खाती रह गईं और वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने और आज भी कांग्रेस के सम्माननीय नेता हैं।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई बड़े शराब मा$िफयाओं और ठेकेदारों के $िखला$फ काला धन जमा करने और टैक्स चोरी करने के मामले पकड़े गए। कुछ दिन तक उनकी चर्चा भी रही। बाद में सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया। इस बार भी कुछ ऐसा ही होने की संभावना है।
उधर सी.बी.आई. ने भ्रष्ट ठेकेदारों को नकेल डालते हुए भोपाल और इंदौर मेें छापामारी करके सेन्ट्रल बैंक ऑ$फ इण्डिया से $फजऱ्ी गृह ऋण के प्रकरण पकड़े, जिनमें तीस से अधिक $फजऱ्ी नामों से $गह ऋण दिये गये थे। यह करीब ढाई करोड़ का $फज़ीवाड़ा किया गया था।
आंध्रप्रदेश विधानसभा के सचिव द्वारा करोड़ों की काली कमाई एकत्र कर के एक रिकार्ड बनाया गया और उसके ठिकानों से भी करोड़ों रूपये बरामद हुये।
आजादी के बाद जिन जन प्रतिनिधियों के हवाले देशवासियों की किस्मत सौंपी गई थी, और जिन्हें जनगणमन का भाग्य विधाता कहा गया था, उनसे उम्मीद की गई थी, कि आज़ादी दिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सैनिकों की तरह, वे भी देशवासियों की भलाई के लिए सेवा भाव से काम करेंगे और देश को विकास के मार्ग पर ले जा कर उन्हें सुख और सर्मद्धि प्रदान करेंगे। जनता की इस सेवा के कारण उन्हें स्वयं के परिवार के पालन के लिए कहीं और नौकरियां या व्यापार ना करना पड़े इसकी जि़म्मेदारी देशवासियों पर डाली गई, जिसके तहत उन्हें रहने को मकान, मोटी तन$खाह और कई प्रकार की विशेष सुविधायें प्रदान की गईं। भले ही उनका चुनाव केवल पांच वर्षों के लिए किया जाता हो, लेकिन एक बार अगर जनता ने उनको चुन लिया, तो आजीवन तन$खाह दिए जाने की भी व्यवस्था प्रदान की गई। उन्हें इतने अधिकार प्रदान किए गए, कि अंग्रेज़ी शासन से विरासत में मिली अ$फसर शाही पर नियंत्रण रख सकें।
लेकिन इन सारी सुविधाओं के बाद जब उन्हें सत्ता के अधिकार भी मिले तो बहुत जल्दी वे अपने पथ से भटकने लगे। चालाक अ$फसर शाही और बेईमान व्यापारियों ने उन्हें भ्रष्टाचार का ऐसा स्वाद चखाया, कि वे देश भक्ति और जन सेवा जैसे शब्दों को किताबों में बंद करके इनके साथ मिल कर भ्रष्टाचार के गंदे नाले में $गोते लगाने लगे। नतीजा यह हुआ कि देखते ही देखते सारा देश भ्रष्टाचार के $गर्त में समा गया। इन तीनों ने मिल कर देश की सारी व्यवस्था इस तरह की बना दी कि बिना रिश्वत के कोई काम हो ही ना पाये। भ्रष्टाचार के माध्यम से इन लोगों ने देश को इतना लूटा है, कि देश की पूरी सम्पत्ति का 40 प्रतिशत हिस्सा इनकी तिजोरियों मेें समा चुका है।
पिछले साठ सालों में भ्रष्टाचारियों का यह गिरोह इतना मज़बूत हो चुका है, कि अगर उनमें से किसी के भी $िखला$फ कोई कार्यवाही होती है, तो अंदर ही अंदर एक दूसरे की मदद करके उसे सा$फ बचा ले जाते हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार करने वाले, उसे पकडऩे वाले और उसे बचाने वाले सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। रही बात आम जनता की, तो वह अब ऐसी $खबरों को सुन कर ना तो चकित होती है, ना प्रसन्न, क्योंकि वह अब इस बात को अच्छी तरह समझ चुकी है, कि उसका हश्र क्या होना है।

कुछ शर्म करो
अभी हाल ही में आयकर विभाग के द्वारा भ्रष्टाचारियों के अड्डों पर छापामारी में मध्यप्रदेश के करीब दर्जन भर आई.ए.एस. अ$फसर अकूत सम्पत्ति व काली कमाई के दोषी पाये गये, जिनकी क्लास प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने लेते हुये कहा ''कुछ शर्म करोÓ।


सट्टा फिर अपने शबाब पर
संजय शर्मा

रायगढ़ (छ.ग.)।
एक ओर जहां पुलिस चुनावी ड्यूटी में व्यस्त है, तो दूसरी ओर इसका भरपूर $फायदा शहर के सट्टा व्यवसाय से जुड़े लोग उठा रहे हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि पुलिस महकमे के अधिकारी- कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी के अलावा अन्य दीगर जगहों पर तैनाती हो जाने से एक बार फिर शहर का सट्टा बाज़ार सरगर्म हो गया है। जगह-जगह सट्टे के कारोबारी फिर खड़े होने लगे हैं। शहर के तमाम चौक- चौराहों में ओपन-क्लोज़ शुरू हो गया है।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जि़ले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के कारण पुलिस विभाग के तमाम थानों में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लग जाने से इसका भरपूर $फायदा सट्टा खाईबाज़ उठा रहे हैं। सट्टे पर अभी तक ऐसा कोई लगाम भी नहीं लगाया जा सका है। इस धंधे से जुड़े लोगों के आदमी एक बार फिर पेन, डायरी, मोबाईल लेकर शहर के तमाम चौक-चौराहों में खड़े होकर निडरता के साथ मुंबई, कल्याण, भूतनाथ के साथ सट्टे को कारोबार कर रहे हैं। ऊपर से क्रिकेट के शुरू हो जाने के बाद सट्टा खाईवालों के पो-बारह हो गये हैं। सट्टे में रोज़ाना शहर में 20 से 30 लाख रूपये की खाईवाली की $खबर हमारे अपने सूत्रों ने दी है।
इस बेलगाम व्यवसाय से जहां कई लोग रातों-रात लाखों रूपये कमा रहे हैं, तो कई घर बर्बाद भी हो रहे हैं। जि़ले के युवा, तेज़ तर्रार एस.पी. राहुल शर्मा को चाहिये इस बेलगाम धंधे पर जल्द से जल्द अपना शिकांजा कसें, ताकि इसके कारण बर्बाद हो चुके तथा बर्बादी के कगार पर खड़े परिवारों को बचाया जा सके।



जाब कार्ड बनाने में फजऱ्ीवाड़ा
केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ का फर्जी जाब कार्ड
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के खरगौन में एक केन्द्रीय मंत्री के रिश्तेदारों के नाम रोज़गार गारंटी योजना (नरेगा) के लिए जाब कार्ड में पाए जाने के बाद अब छिंदवाड़ा में भी केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री नानाभाऊ मोहोड़ और दो विधायकों के नाम से जाब कार्ड जारी होने का मामला प्रकाश में आया है। जि़ले में नरेगा के लिए बनाए गए जाब कार्ड संबंधी दस्तावज़ों को खगालने से पता लगा है, कि जि़ले में उपरोक्त के अलावा ऐसे 82 जनप्रतिनिधियों के नाम से जाब कार्ड बने हैं, जो जि़ला व जनपद पंचायत के वर्तमान और पूर्व सदस्य हैं। हालांकि यह बात दूसरी है कि अधिकांश जनप्रतिनिधियों को यह भी नहीं पता है कि उनके नाम से जाब कार्ड बनाए गए हैं। कमलनाथ और नाना मोहोड़ ही नहीं, बल्कि विधायक दीपक सक्सेना एवं मेरसिंह, जि़ला पंचायत अध्यक्ष नवोदिता ढोबले, पूर्व मंत्री रेवनाथ चैरे की पत्नी कमला बाई, पूर्व विधायक अजय चैरे, निगम अध्यक्ष नारायण सिंह बंजारा, जि़ला पंचायत अध्यक्ष विश्वनाथ अङ्क्षक्टे जैसे जाने माने जनप्रतिनिधियों के नाम से भी जाब कार्ड जारी किए गए हैं। जिले के अधिकारी इस $गलती से पल्ला झाड़कर इसका दोष जाब कार्ड बनाने वाली एजेंसी पर डाल रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत से जाब कार्ड बनाने के लिए एजेंसी तय की गई थी और उस एजेंसी ने लक्ष्य पूरा करने के लिए गांव की वोटर लिस्ट और राशन कार्ड के आधार पर जाब कार्ड बना दिये।
प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री नाना भाउ मोहोड ने अपने नाम से जाब कार्ड जारी किए जाने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपने नाम से जाब कार्ड जारी होने की कोई सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि न तो स्वयं उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने जाब कार्ड बनाने के लिए आवेदन दिया है। उधर कांग्रेस विधायक दीपक सक्सेना ने उनके नाम से जाब कार्ड बनाए जाने को $फजऱ्ीवाडा बताते हुए कहा कि जाब कार्ड बनाए जाने के मामले की बारीकी से जांच होनी चाहिये।
इस सबंध में पूछे जाने पर छिंदवाड़ा जि़ला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीनिवास शर्मा ने कहा कि गांव में रहने वाले किसी भी व्यक्ति का जाब कार्ड बनाया जा सकता है, लेकिन जहां तक केन्द्रीय मंत्री, विधायक या किसी अन्य जनप्रतिनिधि के नाम से जाब कार्ड जारी होने की बात है, तो उसकी जांच कराई जायेगी। जि़ला पंचायत के सीईओ एवं नरेगा प्रभारी आईएस ठाकुर ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन के दौरान सबसे पहले गांव में कार्ड बनाने के लिए एजेंसी की नियुक्ति की गई थी, और प्रारंभिक तौर पर ऐसा लगता है कि मतदाता सूची के आधार पर कार्ड बना दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद दोषियों की जवाबदेही तय की जायेगी।

Friday, February 5, 2010





नेता समझते हैं
जनता को खिलौना
अपनी $गजऱ् पर मराठी अलगाववाद के $िखला$फ बोले

हृ जी.डी.गोयल
नई दिल्ली। धीरे-धीरे अब यह बात जनता को समझ में आती जा रही है, कि हमारे देश के नेता उसे क्रिकेट की बॉल की तरह एक खिलौने की भांति स्तेमाल करने लगे हैं। अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए जब उन्हें जैसी आवश्यकता होती है, वे उससे उसी तरह खेलने लगते हैं। अब जब कि बिहार और उत्तर प्रदेश में आम चुनाव होने जा रहे हैं, तो उन्होंने अपनी चाल के अनुसार इस बार भी वहां की जनता के दर्द को भुनाना शुरू कर दिया है। वह दर्द है उनकी रोटी रोज़गार के प्रमुख केन्द्र मुम्बई से मराठी अस्मिता के नाम पर उनकी बेद$खली की कोशिश। कल तक शिव सेना के सहारे केन्द्र में सरकार चलाने वाली भारतीय जनता पार्टी हो या मनसे के राज ठाकरे को शिवसेना के मुकाबले अपनी मराठी राजनीति जमाने का अवसर देने वाली कांग्रेस, दोनों ही अब एक सुर मेें उत्तर भारतीयों के $िखला$फ महाराष्ट्र में की जा रही ठाकरे परिवार की इस राजनीति के $िखला$फ आवाज़ उठा रहे हैं। एक भारतीय जनता पार्टी के मराठी मूल के ही नए अध्यक्ष नितिन गड़करी भाषण दे रहे हैं कि संविधान के अनुसार भारत के हर नागरिक का अधिकार है कि वह देश के किसी भी हिस्से में जाकर रह सकता है, वहां रोज़गार कर सकता है, तो दूसरी तर$फ केन्द्र में सत्ताधारी कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और उनके पुत्र कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी चेतावनी दे रहे हैं, कि अगर महारष्ट्र में उत्तर भारतीयों के $िखला$फ की जा रही कार्यवाहियां नहीं रूकीं, तो कड़ी कार्यवाही की जायगी। आज़ादी के बहुत पहले से ही मुंबई व्यापार का एक बहुत बड़ा केन्द्र बना हुआ था। भारत के हर प्रान्त से उस महानगर में जाकर रोटी रोज़ी कमाने के लिए भारी तादाद में लोग जाते थे और अधिकांशत: वहीं के होकर रह जाते थे। इनमें सबसे अधिक तादाद थी उत्तर भारत, विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश से जाने वाले लोगों की। अपनी मेहनत और लगन से इन लोगों ने लोगों की आम जि़ंदगी से जुड़े कामों, जैसे कि दूध बेचना, बस और टैक्सी चलाना या $फुटपाथों पर दुकानें लगा कर रोज़मर्रा की चीज़ें उपलब्ध करवाना, पर अपना विशेष स्थान बना लिया था। विश्व भर में सबसे अनोखी खाने का डिब्बा पहुंचाने वाली व्यवस्था इन्हीं उत्तर भारतीयों की देन है। ये लोग मुबई के स्थानीय लोगों में कुछ इस तरह घुलमिल गए थे, कि उन्हें वहां भैया कहा जाने लगा था। लेकिन इन नेताओं की राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं ने अब इनके बीच ऐसी खाई खोद दी है कि वे एक दूसरे को अपना शत्रु समझने लगे हैं। शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने मराठी अलगाव वाद के सहारे जो राजनीति शुरू की थी, वो धीरे-धीरे इतनी घातक होती जा रही है, कि उससे देश की अखंडता को ही $खतरा पैदा हो गया है। क्षेत्रीय अलगाव वाद की इस आग में घी डालने का काम किया बालठाकरे के ही भतीजे राज ठाकरे ने। अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा के कारण जब उन्होंने शिवसेना को छोड़कर मनसा के नाम से अपनी अलग पार्टी बनाई तो मराठी अलगाव वाद को हर पहलू से भुनाना शुरू कर दिया। $गैर मराठा टैक्सी ड्राईवरों को पीटना, रेलवे अथवा दूसरी सरकारी नौकरियों के लिए इंटरव्यू देने आने वाले लोगों को पीटना आदि रोज़मर्रा के काम हो गए थे। राजठाकरे ने इस अगलाव वाद के सहारे पिछले विधान सभा चुनाव मेें 13 सीटें भी प्राप्त कर ली थीं। शिवसेना से कहीं ज्य़ादा राज ठाकरे और उनके समर्थकों ने महाराष्ट्र के मुम्बई और नासिक जैसे नगरों में एैसा आतंक जैसा माहोल बना दिया था, कि कश्मीर के पंडितों की तरह उत्तर भारतीयों ने पलायन शुरू कर दिया था। इनकी इन हरकतों के $िखला$फ जिसने भी मुंह खोला या बोलने का साहस किया, उस पर हिंसक आक्रमण करना उन्होंने अपना अधिकार समझ लिया था, फिर चाहे वो अभिताभ बच्चन जैसा अभिनेता हो या मीडिया। अब तो उन्होंने सामान्य बातचीत को लेकर भी लोगों को धमकाना शुरू कर दिया था, जैसे कि क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर ने जब यह कहा कि वे पहले भारतीय हैं बाद मेें कुछ और, तो उनकी इस बात पर ही एतराज़ जताया गया, कि उन्होंने $खुद को पहले मराठी क्यों नहीं कहा। इन नेताओं ने अब ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं, कि केवल मुबई ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण महाराष्ट्र ही भारत से अलग नज़र आने लगा है।
देर आयद दुरूस्त आयद
इतना सब कुछ होने के बावजूद देश की दोनों बड़ी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने इसके विरोध मेें अपना मुंह नहीं खोला। केवल उत्तर प्रदेश तथा बिहार के स्थानीय नेता ही इसके विरोध मेें अपनी आवाज़ उठाते रहे। लेकिन चंूकि अब इन दोनों राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और यह भी तय है कि इसमें सबसे संवेदनशील मुद्दा महाराष्ट्र में वहां के लोगों के $िखला$फ हो रही कार्यवाहियां ही होगा, जिसको लेकर स्थानीय पार्टियां कांगे्रस और भाजपा दोनों को ही कटघरे मेें खड़ा करने में कामयाब हो जायेंगी। अत: इन दोनों के ही सामने यह मजबूरी थी वे इस अन्याय के $िखला$फ आवाज़ उठायें। वजह कुछ भी हो, लेकिन मराठी अलगाववाद के $िखला$फ जो एक मत से विरोध जताया जा रहा है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए, और इसे $गनीमत ही मानना चाहिए कि देर से ही सही, ये पार्टियां इस संवेदनशील मामले पर चेती तो सहीं। लेकिन डर यही है कि यह आवाज़ कहीं चुनाव के बाद बंद ना हो जाये, क्योंकि अब समय आ गया है कि इस समस्या का कोई ऐसा स्थाई हल तलाश कर लिया जाये, जिससे मराठियों के भी हितों की रक्षा हो सके और देश की अखंडता की रक्षा भी हो सके। वर्ना अलगाव का यह विष भारत की स्वतंत्रा अखंडता के लिए घातक बन जायेगा।


पुलिसिया बर्ताव का एक ऐसा रूप भी
हृ विन्ध्य से मुनीन्द तिवारी
जिस पुलिस से समाज एवं कानून के शासन में व्यापक अधिकार दिये जाने के साथ जि़म्मेदारियां दी गई हों, उन्हीें जि़म्मेदारियों के दायित्व निर्वहन के बहाने पुलिसिया मनमानी व बर्बरता का एक और मामला ऐसा सामने आया है। विन्ध्य क्षेत्र के सीधी जि़ले के मझौली थाने में पुलिसिया प्रताडऩा से तंग एक टैक्सी मालिक को ज़हरीला पदार्थ निगल मौत को गले लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना ने एक बार पुन: विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया, हालांकि घटना के बाद उत्पन्न तनाव को देखते हुए टी.आई. को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन इस घटना से थानों में होने वाले पुलिसिया अमानवीय प्रताडऩाओं के इस्तेमाल का भी पता चलता है। बताया जाता है कि पंचायत चुनाव के दौरान उसकी अधिग्रहित टैक्सी का लगातार उपयोग किया जाता रहा। बाद में परमिट न होने के बहाने मालिक के $िखला$फ प्रकरण पंजीबद्ध करने संबंधी कार्यवाही की गई, उसे मुक्त करने हेतु पुलिसिया सुविधा शुल्क की मांग की जाने पर हफ़्तों तक जब वाहन नहीं छोड़ा गया, तो वाहन मालिक ने थाने में टी.आई. के सामने ही इंडो सल्फास नामक ज़हर निगल लिया, जहां हालात गंभीर होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजा गया। इसके बाद जि़ला अस्पताल रैफऱ हुआ, किंतु पहुंंचते ही उसने दम तोड़ दिया, बवाल शुरू होने पर तनाव पूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस कप्तान सुश्री मीनाक्षी शर्मा ने आरक्षी बल की भारी भरकम व्यवस्था की, और थाना के टी.आई. को निलंबित करने के आदेश दिए, क्योंकि अधिग्रहण के बाद कुछ का$गज़ात नहीं थे, उधर चालान तैयार किया गया था, किंतु न्यायालय में पेश नहीं किया गया, जिससे संदेहों की पुष्टि होती है। फि़लहाल जांच के आदेश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इसी थाने में डेढ़ माह पूर्व एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। तब से पुलिस की कार्यप्रणाली सुर्खियों में चली आ रही है। इसके अलावा भी तमाम मानव अधिकारों के तहत पुलिस पर अंकुश लगाये जाने की बंदिशों के बावजूद पुलिसिया मानमानी के नमूने आए दिन सामने आते रहते हैं। इसके बावजूद भी कारगर नियंत्रण व परिणाम परिलक्षित होता दिखाई नहीं देता। आ$िखर क्यों?


मधुशाला-पाठशाला साथ-साथ
हृ रामबिहारी पाण्डेय
सीधी। सीधी मुख्यालय स्थित शा.प्रा. कन्या पाठशाला अमहा में विगत 45 वर्षों से पाठशाला व मधुशाला साथ-साथ एक ही कैम्पस में संचालित हो रहे हैं। प्रशासन के नाक के नीचे यह सब विगत कई वर्षों से छात्राओं के अभिभावकों द्वारा बार बार शिकायत के बावजूद, इन शिकायतों को दर किनार करते हुए, मौजूदा हालत में पदस्थ किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जैसा कि म.प्र. शासन से स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शासकीय शालाओं में घटती छात्रों की संख्या को देखते हुए अधिक से अधिक सुविधा, जैसे छात्राओं को साइकल वितरण, नि:शुल्क पुस्तक एवं कापियां, बच्चों को आकर्षित करने के लिये रूचिकर भोजन आदि आकर्षक योजनायें चला रहा है, वहीं पर इस शाला में $गरीब अभिभावकों के बच्चे जिनके पास अच्छे स्कूलों में पढ़ाने के लिये पैसे नहीं हैं। मजबूरी वश मै$खाना से लगी इस पाठशाला में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यहां तक कि पाठशाला की दीवार की खिड़कियों से हाथ डालकर वेयर-हाउस में रखी बोतलों को खिड़कियों से निकाला जा सकता हैं, और खिड़कियों से सारे दिन छात्राएं वेयर-हाउस में हो रहे देशी शराब का भंडारण, वितरण एवं खनखनाती बोतलों से व रख रखाव में टूट गई बोतलों की शराब के गंध से छोटी-छोटी बालिकायें अचेत हो जाती हैं। अधिकांशत: $गरीब परिवार सेे नव निहाल बालिकायें जो पढ़ाई के क,ख, ग से अपने जीवन की शुरूआत की प्रथम पायदान की शिक्षा लेने के बजाय मुधशाला के बोतलों की खनक से अपनी सीनियर छात्राओं से शराब के बारे में जान जाती हैं, अभिभावकों ने मांग की है कि देशी शराब के इस वेयर-हाउस को स्कूल एवं शहर से बाहर अन्य किसी गोदाम में स्थानांतरित कर दिया जावे।
मैं इसकी जांच करवाऊंगा, जांच के उपरांत ही बता पाऊंगा क्या हो सकता है।
एस.पी.एस. सलूजा
कलेक्टर, सीधी
वेयर-हाउस स्कूल खुलने के पहले देश आज़ाद होने के बाद ही खुल गया था। पाठशाला वहा $गलत खोली गयी है।
टी.सी.शिव
जि़ला आबकारी अधिकारी, सीधी
यहां स्कूल खुली है जिसमें बालिकायें शिक्षा ग्रहण करती हैं हमें मालूम है कि छात्राओं के ऊपर इसका अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा, किंतु मैं स्कूल एवं वेयर-हाउस से संबंधित कोई कार्यवाही नहीं कर सकता। कारण, दोनों संस्थायें शासन की हैं। इसमें शासन को ही कुछ करना होगा।
राय सिंह
जि़ला शिक्षा अधिकारी, सीधी
यहां 1966 से यह पाठशाला संचालित है। पुराना भवन गिरने के बाद पुन: वेयर-हाउस से लगा भवन पाठशाला को दे दिया गया। इसमें पढ़ रही बच्चियों के ऊपर $गलत प्रभाव पड़ रहा है। कई बार तो देशी शराब की गंध से बच्चियां अचेत भी हो जाती हैं। इसकी शिकायत मैंने अधिकारियों से की है, किंतु प्रशासन इसमें ध्यान नहीं दे रहा है।
$खुर्शीद खान
अध्यक्ष पालक शिक्षक संघ

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