

बाबाजी का सत्ता मोह
आज देश के जो हालात हैं, उन्हें देखते हुुए देश का हर नागरिक यह चाहता है कि कोई तो ऐसा देवदूत सामने आये, जो इस व्यवस्था में सुधार कर दे। ऐसे में अगर बाबा रामदेव ही वैसा देवदूत बन कर आनेे का दावा करते हैं, तो उनका स्वागत होना चाहिए, और संभवत: ऐसा ही होगा भी। आम जनता में उनकी जो पहचान है, उसे देखते हुए हो सकता है कि संसद में वर्तमान नेताओं का पूरी तरह स$फाया करके बाबा रामदेव की सरकार का कब्ज़ा हो जाये। लेकिन प्रश्न यह है कि जिस देश का बच्चा-बच्चा यह गुनगुनाता रहता है कि 'सौ में से निन्यावनें बेईमान, फिर भी मेरा देश महानÓ इस देश में बाबा जी 544 ऐसे नेता कहां से लायेंगे जो वर्तमान नेताओं की तरह कुर्सी पर बैठने के बाद बेईमान नहीं होंगे। मान लिया कि बाबा रामदेव स्वयं ईमानदार हैं, लेकिन अकेले चने की तरह वे भ्रष्टाचार की इस भाड़ को फोड़ सकेंगे?
हृ जी.डी.गोयल
नई दिल्ली। भारत में हज़ारों लोग योग सीखते है। कुछ आध्यात्मक के सहारे साधु या योगाचार्य के वेश में, तो कुछ अंग्रेज़ी वेशधारण करके पांच सितारा तरीकों से, लेकिन बाबा राम देव ने योग सिखाने से जितनी अपार सम्पत्ति और ख्याति एकत्र की है, उसका अभी तक कोई मु$काबला नहीं कर सका है। अगर यह कहा जाये, तो सम्भवत: अतिश्योक्ति नहीं होगी, कि आज केवल भारत में ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में योग सिखाने का जो विशाल बाज़ार बना है, उसका श्रेय केवल बाबा रामदेव को ही दिया जा सकता है। इसी बाबा रामदेव को भारत का योग एम्बेसडर भी कहा जाता है। बाबा के इस आभा-मंडल और आर्थिक विकास में सरकारों ने भी बहुत सहयोग प्रदान किया है। हरिद्वार में बाबा के भव्य आश्रम की स्थापना में जिस तरह उत्तराखंड की सरकार ने सहयोग दिया है, उसी तरह अब मध्यप्रदेश सरकार भी उन्हें राज्य में आश्रम और दवा कारखाना स्थापित करने में सहयोग प्रदान कर रही है। राज्य सरकार से बाबा को मदद करने के लिए उनके द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं में भी भारी भरकम राशि के विज्ञापन दे करके यथा सम्भव आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने अपने विभाग से बाबा के दवा कारखाने को लगभग 50 करोड़ रूपयों का अनुदान प्रदान किया है। बाबा को मिल रही सरकारी सहायताओं की एक लम्बी $फैहरिस्त है, लेकिन बाबा की योग प्रचार और जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए की गई सेवाओं को देखते हुए शायद ही किसी को इन सहयोगों पर कोई एतराज़ होगा।बाबा रामदेव कई बार अपने बयानों में इस बात की चर्चा कर चुके थे, कि देश की जनता की वर्तमान दुर्दशा की उन्हें बहुत चिंता है, और अपने योग कार्यक्रमों तथा दवा बनाने के कामों के साथ ही अब वे उसके लिए कुछ करना चाहते हैं। उसके लिए उन्होंने सोचा कि जब तक देश की वर्तमान राजनीति में बदलाव नहीं होगा और भ्रष्ट नेताओं को सत्ता से नहीं हटाया जायेगा, तब तक देश और देशवासियों का उद्धार नहीं होगा। अब बाबा रामदेव ने स्वयं राजनीति में उतर कर देश की सत्ता पर आसीन होने का मन बना लिया है। उन्होंने अपनी पार्टी की घोषणा भी कर दी है। साथ ही साथ यह घोषणा भी कर दी है कि वे संसद की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेंगे। उनका यह $फैसला ठीक भी है, ताकि संसद में उनके पास इतना बहुमत हो, कि देश की व्यवस्था को सुधारने का जो भी वे निर्णय लें, उसे कोई रोक ना पाये।
आज देश के जो हालात हैं, उन्हें देखते हुुए देश का हर नागरिक यह चाहता है कि कोई तो ऐसा देवदूत सामने आये, जो इस व्यवस्था में सुधार कर दे। ऐसे में अगर बाबा रामदेव ही वैसा देवदूत बन कर आनेे का दावा करते हैं, तो उनका स्वागत होना चाहिए, और संभवत: ऐसा ही होगा भी। आम जनता में उनकी जो पहचान है, उसे देखते हुए हो सकता है कि संसद में वर्तमान नेताओं का पूरी तरह स$फाया करके बाबा रामदेव की सरकार का कब्ज़ा हो जाये। लेकिन प्रश्न यह है कि जिस देश का बच्चा-बच्चा यह गुनगुनाता रहता है कि 'सौ में से निन्यावनें बेईमान, फिर भी मेरा देश महानÓ इस देश में बाबा जी 544 ऐसे नेता कहां से लायेंगे जो वर्तमान नेताओं की तरह कुर्सी पर बैठने के बाद बेईमान नहीं होंगे। मान लिया कि बाबा रामदेव स्वयं ईमानदार हैं, लेकिन अकेले चने की तरह वे भ्रष्टाचार की इस भाड़ को फोड़ सकेंगे? भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री की ईमानदारी पर कोई उंगली नहीं उठाता है, जितने भी सर्वे हुए हैं, उनमें उन्हें भारत का सबसे ईमानदार नेता बताया गया है, लेकिन उनकी सरकार में जो कुछ हो रहा है, सबको मालूम है। उनके मंत्री और अधिकारी बेईमानी की सभी सीमायें लांघते दिखाई दे रहे हैं, और बेचारे मनमोहन सिंह सरकार बचाये रखने के चक्कर में उनका कोई विरोध नहीं कर पा रहे हैं। इनसे पहले एक और प्रधानमंत्री हुए थे अटल बिहारी बाजपेई, जिनकी स्वच्छ छवि दिखा कर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई थी। उनकी सरकार में भी मंत्रियों और नेताओं ने खुल कर भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित किए थे।
ऐसे हालात में क्या यह सोचा भी जा सकता है, कि बाबा की पार्टी के सभी नेता उनकी तरह ही ईमानदार होंगे, शायद नहीं। यह नहीं माना जा सकता है, कि इस सच्चाई को बाबा रामदेव नहीं जानते होंगे। वे इसी भूमि के हंै, और यहां के हालात से पूरी तरह वाकि$फ हैं। फिर उन्होंने ऐसा $फैसला क्यों किया। कहीं ऐसा तो नहीं है, अपार धन और लोकप्रियता प्राप्त करने के बाद अब बाबा रामदेव के मन में सत्ता का मोह उत्पन्न हो गया हो, और वे अपने इसी धन और ख्याति के सहारे सत्ता पर आसीन होना चाहते हों। यह कोई आश्चर्य की या नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई साधु संतों ने इस प्रकार के प्रयास किए थे, जिनमें से कई असफल हुए और कई सफल इसका प्रमाण हैं। उत्तराखंड के ही संत यशपाल महाराज, जिनके प्रति वहां के लोगों की अपार श्रद्धा है, जिसकी वजह से ही वे आज वहां से कांग्रेस पार्टी के संासद हेै। सच है, यह तो तभी पता चलेगा, जब बाबा रामदेव चुनाव जीत कर सत्ता पर काबिज़ हो जायेंगे।
2006 के सूखा राहत कार्यों में लाखों की अनियमितताएं उजागर
हृ अनूप सक्सेना
राजगढ़। वर्ष 2005 की $फसल कटाई प्रयोग के आधार पर सूखा प्रभावित घोषित राजगढ़ तहसील में कराये गये 181 कार्यों में व्यय की गयी 718.17 लाख रूपये की राशि के आधार पर तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व एवं राहत आयुक्त श्री पुखराज मारू द्वारा मुख्य तकनीकी परीक्षक सतर्कता म.प्र. को पत्र क्र. एफ44/रा.अ./लेखा-2/2006/887 दिनांक 8/11/2006 लिखकर माना था कि राहत कार्यों में जि़ला राजगढ़ में तकनीकी, प्रशासकीय, व मूल्यांकन आदि दृष्टिय से अनियमितताएं व्याप्त होती हैं अत: सलग्न 181 कार्यों की जांच एक माह में की जाकर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध करायें।
इस आधार पर राजगढ़ तहसील में कराये गये 181 कार्यों में 10 प्रतिशत कार्यों (18 कार्य)का रेण्डमली चयन कर 18 कार्यों में 4 कार्यों में विस्तृत निरीक्षण प्रतिवेदन (निस्तारी तालाब ग्राम काचरी, निस्तारी तालाब ग्राम करनवास, निस्तारी तालाब ग्राम पाडल्याखेड़ी, निस्तारी तालाब मनोहरपुरा) तैयार किया तथा शेष 14 ग्रामों में हुए कार्यों का सामान्य निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार किया। मुख्य तकनीकी परीक्षक सतर्कता की टीम जिसमें श्री पी.के. तिवारी कार्यपालन यंत्री तथा प्रकाश शिन्दे सहायक यंत्री शामिल थे ने 8/12/2006 को ग्राम पाडल्याखेड़ी में निर्मित निस्तारी तालाब (लागत 4.96 लाख जिसकी एजेंसी ग्राम पंचायत पाडल्याखेड़ी के सरपंच तथा निर्माणकर्ता उपयंत्री संजय राय जो मूल्यांकनकर्ता अधिकारी भी थे) का निरीक्षण विस्तृत निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार करने के लिये किया। इस निस्तारी तालाब में मुख्य तकनीकी परीक्षक सतर्कता के जांच दल को गंभीर अनियमिताएं दस्तावेज़ी साक्ष्य के रूप में मिलीं। जांच दल ने अपने प्रतिवेदन में लिखा कि पिट मेज़रमेंट करके मिट्टी का नाप लिया गया है। बांध स्थल पर जहां मिट्टी डाली गयी है वहां पर बड के सेक्शन के नाप नहीं लिये गये हैं। पिट मेज़रमेंट द्वारा माप लेने की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है। पिचिंग कार्य में 22 से.मी.गहराई का प्रावधान था। स्थल पर पिचिंग 10 से 14 से.मी. की जाना पाया गया। पिचिंग के पत्थर की लीड का प्रावधान तकनीक स्वीकृति प्राक्लन में नहीं किया गया। किंतु लीड का भुगतान 6842 रूपये किया गया। टे्रक्टर द्वारा बाहर से बुलायी मिट्टी का रिकार्ड उचित रूप से नहीं रखा गया कितने ट्रैक्टर मिट्टी आयी ट्राली का माप क्या था यह रिकार्ड नहीं है। केवल ट्रिप की संख्या के मान से भुगतान किया जाना अनुचित है। मिट्टी की स्टेकिंग किया जाना उचित नहीं है इस तरह स्टेकिंग के कार्य पर 7303 का व्यर्थ व्यय किया गया । स्थल पर पिचिंग की मात्रा 430.25 वर्ग मीटर पायी गयी तथा पिचिंग की औसत गहराई 13 से.मी. पायी गयी। माप पुस्तिका में पिचिंग की मात्रा 378.35 वर्ग मीटर 22 से.मी. गहराई के साथ दर्ज की गयी इसको जांच दल ने गंभीर अनियमितता मानकर 73545 रूपये के व्यय को अनियमित ठहराया। अर्थ वर्क के अपस्ट्रीम डाऊन स्ट्रीम स्लोप व टापविडप (ऊपरी चौड़ाई) निर्धारित प्रोफाईल में नहीं पायी गयी। काम्पेक्शन(वाटर) में कमी परिलक्षित हुई किनारों में कटाव नज़र आया 3 (1)(2)(3) तथा नियम 21 एवं कार्य विभाग मेन्यूअल अध्याय 7 की धारा 7.003 धारा 3 पेरा 7.009 परिशिष्ट -7.02 के क्रम संख्या 3(क)(ख)(ग)6 (ग) के विपरीत होकर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियत्रंण अपील) नियम 1966 के तहत दण्डनीय माना ऐसे ही आरोप पत्र आयुक्त द्वारा अन्य कार्यपालन यंत्री पी.एस.बघेल, अनुविभागीय अधिकारी राजगढ(जल संसाधन) एन.यू.कुरैशी, उपयंत्री एन.एस.चानना तथा अमीन गौरीशंकर सक्सेना को दिये गये।
नवम्बर 2008 में इन दोषी पांचों अधिकारियों पर की जाने वाली विभागीय कार्यवाही को लेकर आयुक्त पुखराज मारू द्वारा प्रकरण तत्कालीन प्रमुख सचिव जल संसाधन विभाग अरविंद जोशी के पास भेज दिया था और अपनी भ्रष्ट कार्यप्रणाली के चलते करोड़ों रूपयों की दौलत चल अचल सम्पत्ति बरामद होने के कारण सुर्खियों में रहे प्रमुख सचिव अरविंद जोशी (अब निलंबित)इस प्रमाणित भ्रष्टाचार के मामले को भी एक वर्ष से भी अधिक समय तक दबाये रहे तथा भ्रष्टाचार को सरंक्षण दिया। दस मार्च को प्रमुख सचिव जल संसाधन विभाग श्री राधेश्याम जुलानिया से आंचलिक पत्रकार संघ के पदाधिकारियों द्वारा बल्लभ भवन में भेंट कर राजगढ़ जि़ले के भ्रष्टाचार के इस प्रमाणित मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग की है।
कच्ची शराब बनी कलयुगी यमराज
हृ ज्ञानगिरी गोस्वामी
उकवा (बालाघाट)। बैहर एक आदिवासी बाहुल्य तहसील मानी जाती है, जहां आदिवासियों का घनत्व है एवं शासन द्वारा महुआ की कच्ची शराब बनाने में कुछ हद तक छूट भी दी गई है। किंतु तहसील में निवास कर रहे कुछ आदिवासियों की आड़ में अन्य वर्गों के लोगों ने इसे धंधा बना लिया है, एवं मिलावट की इस दुनिया में शराब में भी मिलावट कर पैसा कमाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
$खबरयार संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार बैहर तहसील की उकवा ग्राम एवं आसपास के ग्रामों में यह गोरखधंध अपने चरम सीमा पर है, जिससे कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है, एवं कई लोग आज भी कई घातक बीमारियों से पीडि़त हैं।
कच्ची शराब बनाने का ज्य़ादातर काम उकवा से लगे राजपुर , पिण्डकेपार, समाफर तथा पोण्डी में धड़ल्ले से चल रहा है। कच्ची शराब बनाने वाले शराब की क्वालिटी अच्छी बनाने के उद्देश्य से शराब में यूरिया, नशीले केप्सूल नौसादर एवं धतुरा के बीज पीसकर मिलाते हैं, एवं बेचते हैं, $गरीब मज़दूर लोग कच्ची शराब सस्ती होने के कारण इसका सेवन करते हैं, एवं अंधे, अपंग, एवं कई प्रकार की बीमारी के शिकार होकर मौत के गाल में समा जाते हैं। कच्ची शराब बनाने वाले शराब बनाने का काम सरेआम ब$गैर किसी डर के कर रहे हैं। इनको न तो पुलिस का डर है और न ही आबकारी अ$फसरों का। इनका कहना है यदि पकड़े गये तो क्या होगा? 500 रूपये का जुर्माना होगा, भर देंगे और छूट जायेंगे। कच्ची शराब के सेवन से प्रतिवर्ष कई लोग काल के गाल में समा जाते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुये कंपनी के प्रबंधक श्री उमेश शुक्ला ने क्षेत्रिय जनता से अपील की है कि वैध लायसेंस धारी दुकान से ही शराब $खरीद कर सेवन करें, और घातक बीमारी एवं मौत से बचें। कच्ची शराब बनाने वालों को पकड़वाने में प्रशासन का सहयोग करेंं। कच्ची शराब बनाने वालों की सूचना देने वालों को उचित इनाम भी दिया जायेगा और नाम, पता गुप्त रखा जावेगा।



