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Friday, March 26, 2010

यारों का यार

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बाबाजी का सत्ता मोह
आज देश के जो हालात हैं, उन्हें देखते हुुए देश का हर नागरिक यह चाहता है कि कोई तो ऐसा देवदूत सामने आये, जो इस व्यवस्था में सुधार कर दे। ऐसे में अगर बाबा रामदेव ही वैसा देवदूत बन कर आनेे का दावा करते हैं, तो उनका स्वागत होना चाहिए, और संभवत: ऐसा ही होगा भी। आम जनता में उनकी जो पहचान है, उसे देखते हुए हो सकता है कि संसद में वर्तमान नेताओं का पूरी तरह स$फाया करके बाबा रामदेव की सरकार का कब्ज़ा हो जाये। लेकिन प्रश्न यह है कि जिस देश का बच्चा-बच्चा यह गुनगुनाता रहता है कि 'सौ में से निन्यावनें बेईमान, फिर भी मेरा देश महानÓ इस देश में बाबा जी 544 ऐसे नेता कहां से लायेंगे जो वर्तमान नेताओं की तरह कुर्सी पर बैठने के बाद बेईमान नहीं होंगे। मान लिया कि बाबा रामदेव स्वयं ईमानदार हैं, लेकिन अकेले चने की तरह वे भ्रष्टाचार की इस भाड़ को फोड़ सकेंगे?
हृ जी.डी.गोयल
नई दिल्ली। भारत में हज़ारों लोग योग सीखते है। कुछ आध्यात्मक के सहारे साधु या योगाचार्य के वेश में, तो कुछ अंग्रेज़ी वेशधारण करके पांच सितारा तरीकों से, लेकिन बाबा राम देव ने योग सिखाने से जितनी अपार सम्पत्ति और ख्याति एकत्र की है, उसका अभी तक कोई मु$काबला नहीं कर सका है। अगर यह कहा जाये, तो सम्भवत: अतिश्योक्ति नहीं होगी, कि आज केवल भारत में ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में योग सिखाने का जो विशाल बाज़ार बना है, उसका श्रेय केवल बाबा रामदेव को ही दिया जा सकता है। इसी बाबा रामदेव को भारत का योग एम्बेसडर भी कहा जाता है। बाबा के इस आभा-मंडल और आर्थिक विकास में सरकारों ने भी बहुत सहयोग प्रदान किया है। हरिद्वार में बाबा के भव्य आश्रम की स्थापना में जिस तरह उत्तराखंड की सरकार ने सहयोग दिया है, उसी तरह अब मध्यप्रदेश सरकार भी उन्हें राज्य में आश्रम और दवा कारखाना स्थापित करने में सहयोग प्रदान कर रही है। राज्य सरकार से बाबा को मदद करने के लिए उनके द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं में भी भारी भरकम राशि के विज्ञापन दे करके यथा सम्भव आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने अपने विभाग से बाबा के दवा कारखाने को लगभग 50 करोड़ रूपयों का अनुदान प्रदान किया है। बाबा को मिल रही सरकारी सहायताओं की एक लम्बी $फैहरिस्त है, लेकिन बाबा की योग प्रचार और जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए की गई सेवाओं को देखते हुए शायद ही किसी को इन सहयोगों पर कोई एतराज़ होगा।बाबा रामदेव कई बार अपने बयानों में इस बात की चर्चा कर चुके थे, कि देश की जनता की वर्तमान दुर्दशा की उन्हें बहुत चिंता है, और अपने योग कार्यक्रमों तथा दवा बनाने के कामों के साथ ही अब वे उसके लिए कुछ करना चाहते हैं। उसके लिए उन्होंने सोचा कि जब तक देश की वर्तमान राजनीति में बदलाव नहीं होगा और भ्रष्ट नेताओं को सत्ता से नहीं हटाया जायेगा, तब तक देश और देशवासियों का उद्धार नहीं होगा। अब बाबा रामदेव ने स्वयं राजनीति में उतर कर देश की सत्ता पर आसीन होने का मन बना लिया है। उन्होंने अपनी पार्टी की घोषणा भी कर दी है। साथ ही साथ यह घोषणा भी कर दी है कि वे संसद की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेंगे। उनका यह $फैसला ठीक भी है, ताकि संसद में उनके पास इतना बहुमत हो, कि देश की व्यवस्था को सुधारने का जो भी वे निर्णय लें, उसे कोई रोक ना पाये।
आज देश के जो हालात हैं, उन्हें देखते हुुए देश का हर नागरिक यह चाहता है कि कोई तो ऐसा देवदूत सामने आये, जो इस व्यवस्था में सुधार कर दे। ऐसे में अगर बाबा रामदेव ही वैसा देवदूत बन कर आनेे का दावा करते हैं, तो उनका स्वागत होना चाहिए, और संभवत: ऐसा ही होगा भी। आम जनता में उनकी जो पहचान है, उसे देखते हुए हो सकता है कि संसद में वर्तमान नेताओं का पूरी तरह स$फाया करके बाबा रामदेव की सरकार का कब्ज़ा हो जाये। लेकिन प्रश्न यह है कि जिस देश का बच्चा-बच्चा यह गुनगुनाता रहता है कि 'सौ में से निन्यावनें बेईमान, फिर भी मेरा देश महानÓ इस देश में बाबा जी 544 ऐसे नेता कहां से लायेंगे जो वर्तमान नेताओं की तरह कुर्सी पर बैठने के बाद बेईमान नहीं होंगे। मान लिया कि बाबा रामदेव स्वयं ईमानदार हैं, लेकिन अकेले चने की तरह वे भ्रष्टाचार की इस भाड़ को फोड़ सकेंगे? भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री की ईमानदारी पर कोई उंगली नहीं उठाता है, जितने भी सर्वे हुए हैं, उनमें उन्हें भारत का सबसे ईमानदार नेता बताया गया है, लेकिन उनकी सरकार में जो कुछ हो रहा है, सबको मालूम है। उनके मंत्री और अधिकारी बेईमानी की सभी सीमायें लांघते दिखाई दे रहे हैं, और बेचारे मनमोहन सिंह सरकार बचाये रखने के चक्कर में उनका कोई विरोध नहीं कर पा रहे हैं। इनसे पहले एक और प्रधानमंत्री हुए थे अटल बिहारी बाजपेई, जिनकी स्वच्छ छवि दिखा कर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई थी। उनकी सरकार में भी मंत्रियों और नेताओं ने खुल कर भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित किए थे।
ऐसे हालात में क्या यह सोचा भी जा सकता है, कि बाबा की पार्टी के सभी नेता उनकी तरह ही ईमानदार होंगे, शायद नहीं। यह नहीं माना जा सकता है, कि इस सच्चाई को बाबा रामदेव नहीं जानते होंगे। वे इसी भूमि के हंै, और यहां के हालात से पूरी तरह वाकि$फ हैं। फिर उन्होंने ऐसा $फैसला क्यों किया। कहीं ऐसा तो नहीं है, अपार धन और लोकप्रियता प्राप्त करने के बाद अब बाबा रामदेव के मन में सत्ता का मोह उत्पन्न हो गया हो, और वे अपने इसी धन और ख्याति के सहारे सत्ता पर आसीन होना चाहते हों। यह कोई आश्चर्य की या नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई साधु संतों ने इस प्रकार के प्रयास किए थे, जिनमें से कई असफल हुए और कई सफल इसका प्रमाण हैं। उत्तराखंड के ही संत यशपाल महाराज, जिनके प्रति वहां के लोगों की अपार श्रद्धा है, जिसकी वजह से ही वे आज वहां से कांग्रेस पार्टी के संासद हेै। सच है, यह तो तभी पता चलेगा, जब बाबा रामदेव चुनाव जीत कर सत्ता पर काबिज़ हो जायेंगे।



2006 के सूखा राहत कार्यों में लाखों की अनियमितताएं उजागर
हृ अनूप सक्सेना
राजगढ़। वर्ष 2005 की $फसल कटाई प्रयोग के आधार पर सूखा प्रभावित घोषित राजगढ़ तहसील में कराये गये 181 कार्यों में व्यय की गयी 718.17 लाख रूपये की राशि के आधार पर तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व एवं राहत आयुक्त श्री पुखराज मारू द्वारा मुख्य तकनीकी परीक्षक सतर्कता म.प्र. को पत्र क्र. एफ44/रा.अ./लेखा-2/2006/887 दिनांक 8/11/2006 लिखकर माना था कि राहत कार्यों में जि़ला राजगढ़ में तकनीकी, प्रशासकीय, व मूल्यांकन आदि दृष्टिय से अनियमितताएं व्याप्त होती हैं अत: सलग्न 181 कार्यों की जांच एक माह में की जाकर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध करायें।
इस आधार पर राजगढ़ तहसील में कराये गये 181 कार्यों में 10 प्रतिशत कार्यों (18 कार्य)का रेण्डमली चयन कर 18 कार्यों में 4 कार्यों में विस्तृत निरीक्षण प्रतिवेदन (निस्तारी तालाब ग्राम काचरी, निस्तारी तालाब ग्राम करनवास, निस्तारी तालाब ग्राम पाडल्याखेड़ी, निस्तारी तालाब मनोहरपुरा) तैयार किया तथा शेष 14 ग्रामों में हुए कार्यों का सामान्य निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार किया। मुख्य तकनीकी परीक्षक सतर्कता की टीम जिसमें श्री पी.के. तिवारी कार्यपालन यंत्री तथा प्रकाश शिन्दे सहायक यंत्री शामिल थे ने 8/12/2006 को ग्राम पाडल्याखेड़ी में निर्मित निस्तारी तालाब (लागत 4.96 लाख जिसकी एजेंसी ग्राम पंचायत पाडल्याखेड़ी के सरपंच तथा निर्माणकर्ता उपयंत्री संजय राय जो मूल्यांकनकर्ता अधिकारी भी थे) का निरीक्षण विस्तृत निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार करने के लिये किया। इस निस्तारी तालाब में मुख्य तकनीकी परीक्षक सतर्कता के जांच दल को गंभीर अनियमिताएं दस्तावेज़ी साक्ष्य के रूप में मिलीं। जांच दल ने अपने प्रतिवेदन में लिखा कि पिट मेज़रमेंट करके मिट्टी का नाप लिया गया है। बांध स्थल पर जहां मिट्टी डाली गयी है वहां पर बड के सेक्शन के नाप नहीं लिये गये हैं। पिट मेज़रमेंट द्वारा माप लेने की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है। पिचिंग कार्य में 22 से.मी.गहराई का प्रावधान था। स्थल पर पिचिंग 10 से 14 से.मी. की जाना पाया गया। पिचिंग के पत्थर की लीड का प्रावधान तकनीक स्वीकृति प्राक्लन में नहीं किया गया। किंतु लीड का भुगतान 6842 रूपये किया गया। टे्रक्टर द्वारा बाहर से बुलायी मिट्टी का रिकार्ड उचित रूप से नहीं रखा गया कितने ट्रैक्टर मिट्टी आयी ट्राली का माप क्या था यह रिकार्ड नहीं है। केवल ट्रिप की संख्या के मान से भुगतान किया जाना अनुचित है। मिट्टी की स्टेकिंग किया जाना उचित नहीं है इस तरह स्टेकिंग के कार्य पर 7303 का व्यर्थ व्यय किया गया । स्थल पर पिचिंग की मात्रा 430.25 वर्ग मीटर पायी गयी तथा पिचिंग की औसत गहराई 13 से.मी. पायी गयी। माप पुस्तिका में पिचिंग की मात्रा 378.35 वर्ग मीटर 22 से.मी. गहराई के साथ दर्ज की गयी इसको जांच दल ने गंभीर अनियमितता मानकर 73545 रूपये के व्यय को अनियमित ठहराया। अर्थ वर्क के अपस्ट्रीम डाऊन स्ट्रीम स्लोप व टापविडप (ऊपरी चौड़ाई) निर्धारित प्रोफाईल में नहीं पायी गयी। काम्पेक्शन(वाटर) में कमी परिलक्षित हुई किनारों में कटाव नज़र आया 3 (1)(2)(3) तथा नियम 21 एवं कार्य विभाग मेन्यूअल अध्याय 7 की धारा 7.003 धारा 3 पेरा 7.009 परिशिष्ट -7.02 के क्रम संख्या 3(क)(ख)(ग)6 (ग) के विपरीत होकर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियत्रंण अपील) नियम 1966 के तहत दण्डनीय माना ऐसे ही आरोप पत्र आयुक्त द्वारा अन्य कार्यपालन यंत्री पी.एस.बघेल, अनुविभागीय अधिकारी राजगढ(जल संसाधन) एन.यू.कुरैशी, उपयंत्री एन.एस.चानना तथा अमीन गौरीशंकर सक्सेना को दिये गये।
नवम्बर 2008 में इन दोषी पांचों अधिकारियों पर की जाने वाली विभागीय कार्यवाही को लेकर आयुक्त पुखराज मारू द्वारा प्रकरण तत्कालीन प्रमुख सचिव जल संसाधन विभाग अरविंद जोशी के पास भेज दिया था और अपनी भ्रष्ट कार्यप्रणाली के चलते करोड़ों रूपयों की दौलत चल अचल सम्पत्ति बरामद होने के कारण सुर्खियों में रहे प्रमुख सचिव अरविंद जोशी (अब निलंबित)इस प्रमाणित भ्रष्टाचार के मामले को भी एक वर्ष से भी अधिक समय तक दबाये रहे तथा भ्रष्टाचार को सरंक्षण दिया। दस मार्च को प्रमुख सचिव जल संसाधन विभाग श्री राधेश्याम जुलानिया से आंचलिक पत्रकार संघ के पदाधिकारियों द्वारा बल्लभ भवन में भेंट कर राजगढ़ जि़ले के भ्रष्टाचार के इस प्रमाणित मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग की है।



कच्ची शराब बनी कलयुगी यमराज
हृ ज्ञानगिरी गोस्वामी
उकवा (बालाघाट)। बैहर एक आदिवासी बाहुल्य तहसील मानी जाती है, जहां आदिवासियों का घनत्व है एवं शासन द्वारा महुआ की कच्ची शराब बनाने में कुछ हद तक छूट भी दी गई है। किंतु तहसील में निवास कर रहे कुछ आदिवासियों की आड़ में अन्य वर्गों के लोगों ने इसे धंधा बना लिया है, एवं मिलावट की इस दुनिया में शराब में भी मिलावट कर पैसा कमाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
$खबरयार संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार बैहर तहसील की उकवा ग्राम एवं आसपास के ग्रामों में यह गोरखधंध अपने चरम सीमा पर है, जिससे कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है, एवं कई लोग आज भी कई घातक बीमारियों से पीडि़त हैं।
कच्ची शराब बनाने का ज्य़ादातर काम उकवा से लगे राजपुर , पिण्डकेपार, समाफर तथा पोण्डी में धड़ल्ले से चल रहा है। कच्ची शराब बनाने वाले शराब की क्वालिटी अच्छी बनाने के उद्देश्य से शराब में यूरिया, नशीले केप्सूल नौसादर एवं धतुरा के बीज पीसकर मिलाते हैं, एवं बेचते हैं, $गरीब मज़दूर लोग कच्ची शराब सस्ती होने के कारण इसका सेवन करते हैं, एवं अंधे, अपंग, एवं कई प्रकार की बीमारी के शिकार होकर मौत के गाल में समा जाते हैं। कच्ची शराब बनाने वाले शराब बनाने का काम सरेआम ब$गैर किसी डर के कर रहे हैं। इनको न तो पुलिस का डर है और न ही आबकारी अ$फसरों का। इनका कहना है यदि पकड़े गये तो क्या होगा? 500 रूपये का जुर्माना होगा, भर देंगे और छूट जायेंगे। कच्ची शराब के सेवन से प्रतिवर्ष कई लोग काल के गाल में समा जाते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुये कंपनी के प्रबंधक श्री उमेश शुक्ला ने क्षेत्रिय जनता से अपील की है कि वैध लायसेंस धारी दुकान से ही शराब $खरीद कर सेवन करें, और घातक बीमारी एवं मौत से बचें। कच्ची शराब बनाने वालों को पकड़वाने में प्रशासन का सहयोग करेंं। कच्ची शराब बनाने वालों की सूचना देने वालों को उचित इनाम भी दिया जायेगा और नाम, पता गुप्त रखा जावेगा।

Monday, March 22, 2010




बड़ा लुटेरा कौन?
नेता या बाबा
नेताओं, अधिकारियों और धनियों के द्वारा महिमा मंडित इन बाबाओं ने ईश्वर को तो पर्दे के पीछे कर दिया और स्वयं भगवान बन कर पुजने लगे। आम आदमी की यह प्रवृत्ति रही है कि जिसे बड़े आदमी पूजते हैं, उसे महान मानकर उस पर अंध विश्वास करने लगता है। अगर मीडिया या पुलिस उनकी काली करतूतों को उजागर कर भी दे, तो उन पर सहज ही विश्वास नहीं करता है।
जी.डी.गोयल
नई दिल्ली। हमारे देश में नेता उसे कहा जाता था जो अवाम की रहनुमाई करता था, देश और देशवासियों की भलाई के लिए संघर्ष करता था, बलिदान करता था और उसे सही रास्ता दिखाता था। नेता का धर्म हुआ करता था, सेवा और त्याग। आज़ादी के पहले भारत में उसी प्रकार के हुआ करते थे, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और समाज की भलाई के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया था। जिनमें से महात्मा गांधी, सुभाचन्द्र बोस, शहीद भगत सिंह ,चन्द्रशेखर आज़ाद जैसे अनगिनत नाम आज भी लोगों के ज़हन में रहते हैं।
ठीक उसी तरह से सदियों से धर्म गुरूओं, साधुओं और संतों की भी बलिदान की गाथा थी। महावीर और बुद्ध जैसे त्यागी महात्माओंं ने हिंसा, असत्य लोभ ,मोह, और पाप के विरूद्ध मनुष्यों को शिक्षा दी और सत्कर्मों के लिए प्रेरित किया और हर प्रकार से देश और समाज की भलाई के लिए काम किया।
ऐसे नेताओं और संतों के प्रयासों से जब एक लम्बी लडा़ई के बाद गुलामी की ज़ंजीरों में पिस रहे नागरिकों ने आज़ादी की सांस ली, तो उनके मन इनके प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा थी। लेकिन स्वतंत्रता के बाद जैसे-जैसे देश का विकास होता गया, न त्याग नेताओं के उत्तराधिकारी नेता जिनके हाथ में भारत की जनता ने देश की बागडोर और अपना भाग्य सौंपा था सत्ता और धन के मोह की दलदल में धंसते चले गए। परिणाम यह हुआ कि सड़क से संसद तक देश की सम्पूर्ण व्यवस्था भ्रटाचार की गर्त में समा गई। नेतागीरी जो कभी सेवा और बलिदान का मार्ग थी, आज़ाद भारत में मोटी कमाई का धंधा बन गई। इन नेताओं के काले कारनामों की वजह से देश भर मेें असुरक्षा और अनिश्चितता का माहोल बन गया। कानून पुलिस और सरकार से निराश देश के हर वर्ग का आदमी अपने भविष्य और वर्तमान की सुरक्षा के लिए भगवान की 'शरण में जाने लगा । और देश की इस स्थिति का $फायदा उठाने के लिए अवसरवादी, चालाक और अपराधी प्रवृति के लोग साघु, संतों और बाबाओं का वेश बदलकर अपनी दुकानें खोलकर बैठ गए ।
क्योंकि बेइमान नेताओं का राजनैतिक जीवन, भ्रष्ट अघिकारियों के दिल में व्याप्त पकड़े जाने का भय व काले धंधों के रास्ते धन कमाने वाले धंधेबाज़ों के दिल में अधिक से अधिक धन कमाने की चाह ने इस वर्ग को भी संतों का वेश धारी बाबाओं की शरण में पहुंचा दिया, जिससे इनको भारी धन राजनैतिक और प्रशासकीय संरक्षण और ख्याति प्राप्त होती गई। हमारे देश में ऐसे बाबा कानून से भी ऊपर हो गए, तो इनकी सम्पत्ति का कोई हिसाब मांगा गया और ना उन पर कोई नियंत्रण ही रखा गया, नतीजा यह हुआ कि दुनियां को माया मोह और भोग विलास का उपदेश देने वाले ये बाबा स्वयं भोग और विलास की गंदगी में लिपट गए। सोने के सिंघासनों पर विराज कर सभी प्रकार की भोग विलास की वस्तुओं का उपयोग करने वाले ये बाबा वासना की गोद में भी जा बैठे। महिलाओं के साथ बलात्कार या बहला फुसला कर उनका देहिक शोषण तो किया ही साथ ही, साथ देह व्यापार में भी लिप्त हो गए। पिछले कुछ ही दिनों में दक्षिण से लगा कर उत्तर तक ऐसे कई बाबाओं का पर्दा $फाश हुआ है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण चित्रकूट के इच्छाधारी बाबा से दिया जा सकता है।
नेताओं, अधिकारियों और धनियों के द्वारा महिमा मंडित इन बाबाओं ने ईश्वर को तो पर्दे के पीछे कर दिया और स्वयं भगवान बन कर पुजने लगे। आम आदमी की यह प्रवृत्ति रही है कि जिसे बड़े आदमी पूजते हैं, उसे महान मानकर उस पर अंध विश्वास करने लगता है। अगर मीडिया या पुलिस उनकी काली करतूतों को उजागर कर भी दे, तो उन पर सहज ही विश्वास नहीं करता है। अक्सर होता यह है, कि कुछ दिन तक तो इन बाबाओं की छीछालेदार होती है। लेकिन कुछ ही दिनों में अपने धन, राजनैतिक सम्पर्कों और इनकी कृपा चाहने वाले अधिकारियों की मदद से या तो ये बरी हो जाते हैं, या इनकी $फाईलें सरकारी आलमारियों में बंद हो जाती हैं। और कुछ दिन के बाद वे पहिले से भी अधिक प्रष्ठिता के साथ पुजने लगते हैं। हमारे देश में जो बाबा या नेता ज्य़ादा भीड़ इक_ा कर सकता है, वही बड़ा माना जाता है, जैसे कि लालू प्रसाद यादव और मायावती, दोनों पर ही आर्थिक मामलों को लेकर कई तरह की जांच और मुकदमें चल रहे हैं, लेकिन भीड़ जुटाने की कला के कारण ही वे आज भी बड़े नेता बने हुए हैं। मायावती ने तो हाल ही में लखनऊ में लाखों की भीड़ जुटा कर सरेआम करोड़ों रूपयों की माला पहन कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया ही है। यही हाल बाबाओं का भी है। कृपालु महाराज, आशाराम बापू जैसे बाबा केवल भीड़ जुटाने के कारण ही कई अपराधिक मामलों में फंसे होने के बाद भी पूजे जा रहे हैं। किसी ज़माने में जबलपुर के इग, बनारस के बटमार, और चंबल के डाकू ही जनता को लूूटते थे। लेकिन नेताओं बाबाओं नेे पीछे उन्हें छोड़ दिया है। अब तो यह तय करना मुश्किल हो गया है, कि इस देश की जनता को नेता अधिक लूट रहे हैं, या बाबा।




मालिक मकबूज़ा के नाम पर दलाल मालामाल
मो.बशीर खां
बैहर (बालाघाट)। मध्यप्रदेश में वनमंत्री सरताज सिंह वनों को बचाने वनों को बढ़ाने चाहे जितनी बयानबाज़ी करें वास्तविकता इसके विपरीत है। मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह रहे हों या वर्तमान में शिवराज सिंह हो आदिवासी अंचल क्षेत्र बैहर तहसील के वनों की कटाई मालिक मकबूज़ा के नाम पर बदस्तूर जारी है। अब तो यहां तक हो रहा है कि मालिक मकबूज़ा के अंतर्गत काटे गये वृक्षों को बिना अनुमति, बिना टी.पी., बिना हेम्बर के ही बाला बाला माल10 चक्का में ढोया जा रहा है और किसी को कानों कान $खबर तक नहीं, टी.पी. कहीं ओर की और माल कहीं और का उठाया जा रहा है। हेम्बर टी.पी. ज़ारी नहीं हुई और जलाऊ चट्टे उठा लिये जाते हैं। वन विभाग, राजस्व विभाग की जि़म्मेदारी बताकर पल्लाझाड़ रहा है तो राजस्व विभाग, वन विभाग की जि़म्मेदारी बताकर पल्लाझाड़ कर मामले को र$फा-द$फा करने में लगा है। मालिक मकबूज़ा के नाम पर आदिवासियों की निजि भूमि पर लगे बेशकीमती बीजा साल प्रजाति के वृक्षों को औने पौने दाम किसानों को देकर दलालों, बिचौलियों के द्वारा संबंधित विभागों से बिना अनुमति प्राप्त किये ही धड़ल्ले से अधिकारियों से सांठगांठ कर कटवाया जा रहा है, जिसका ज्वलंत प्रमाण धरमसिंग मेरावी पिता दुल्लमसिंग मेरावी ग्राम रोढाटोला वार्ड क्रमांक 2 नगर पंचायत क्षेत्र बैहर प.ह.नम्बर 17/1 की निजि भूमि पर लगे बीजा प्रजाति के 41, 42 वृक्षों को कटवा दिया गया। शासन के द्वारा बनाये गये नियम जिसके तहत धार्मिक स्थलों, गौठानो, मरघट पर लगे वृक्षों को नहीं कटवाया जा सकता, नदी, नालों, पगडंडी के किनारे लगे वृक्षों को काटना शासकीय वन क्षेत्र में बनाये गये वन सीमा के मुनारो से कितनी दूरी के वृक्षों को नहीं कटवाया जा सकता के नियमों कायदों के बावजूद धरमसिंग की भूमि से सभी बीजा वृक्षों को नाला के अंदर नाला के किनारे काटा गया है। काटे गये लठ्ठों का मौके पर ही हाथ आरा से नियम विरूद्ध चिरान कराया जा रहा है जो शासन द्वारा बनाये गये नियम का खुला उलंघन है। राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों को इस गोरखधंधे की पूर्ण जानकारी होने के बाद भी सभी की मूक स्वीकृति बिचौलियों को प्राप्त है क्योंकि सभी को उनके पद और कद के अनुसार हिस्सा उन्हें मिल जाता है।
एक तर$फ पर्यावरण का बखान कर वृक्षों को बचाने की बात बढ़चढ़ कर की जाती है तो दूसरी तर$फ ऐसे खोखले बयान बाज़ी करने वाले नेता अधिकारी इस गोरखधंधे में बराबर के हिस्सेदार बने हुये हैं। एक वृक्ष तो लगा नहीं रहे हैं यदि लगा और लगवा भी रहे है तो उन्हें बचा नहीं पा रहे हैं, किंतु प्राकृतिक धरोहर को जड़ मूल से नष्ट करने में सभी लगे हुये हैं। कुछ वर्षों पूर्व जिस स्थान पर बड़े बड़े वृक्षों का घना जंगल हुआ करता था आज वहां पर मैदान नज़र आता है। इन सबके लिये वन एवं राजस्व के अधिकारी पूर्ण रूपेण जि़म्मेदार हैं। यहां तो यह हाल है कि रेंजर के अधिकारी जो बैहर नगर के ही रहने वाले हैं यही पर रेंजर जैसे जि़म्मेदार पद पर पदस्थ होकर नाते रिश्तेदारी निभाकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं, जिसका परिणाम ही है कि अनुमति बिना टी.पी. बिना हेम्बर लगे ही बीजा जैसे बेश कीमती लकडिय़ों को बिचौलिये ट्रकों पर लादकर जाने में कामयाब हो रहे हैं। 'सांप निकल गया ढ़ोसर को पीटने वाली कहावत को अधिकारी, कर्मचारी चरितार्थ करने में लगे हैं। सब कुछ जानते हुये भी आला अधिकारी मौन साधे हुये हैं क्यों?
वैसे देखा यह जाता है कि वन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता वनों की कटाई से कुछ ज्य़ादा ही जि़म्मेदार है, उन्हें तो अपनी जेबों की चिंता ज्य़ादा है। यदि वृक्षों का विनाश हो तो उनका भला और वनों को विकास हो तो उनका भला याने वृक्ष लगाये जायें तो उसमें गोलमाल और कटवाये जाये तो उसमें गोलमाल याने कुछ भी हो माल उनकी जेबों में आना ही है।

जिंदल समेत 8 उद्योगों ने किये अवैध कब्ज़े: अमर
संजय शर्मा
रायपुर (छग)। राजस्व मंत्री अमर अग्रवाल ने बताया कि जिंदल स्टील पावर लिमिटेड समेत 8 उद्योग समूहों ने छोटे झाड़ के जंगल समेत सड़क रास्ते जैसे शासकीय भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। इनके विरूद्ध छ.ग. भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत कार्यवाही की जा रही है।
कांग्रेस विधायक डॉ. शकाजीत नायक के प्रश्नों के लिखित उत्तर में श्री अग्रवाल ने बताया कि सालासार स्पंज-पॉवर लिमिटेड गेरवानी ने 0.049 हेक्टेयर छोटे-झाड़ की जंगल भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इंड एग्रो सिनर्जी ने कोटमार में 1.532 हेक्टेयर एवं महापल्ली में 0.263 हेक्टेयर छोटे झाड़ कही जंगल भूमि पर कब्ज़ा किया है। शिवशक्ति स्टील लिमिटेड चक्रधरपुर ने कुल पौने 11 हेक्टेयर छोटे झाड़ के जंगल पर एमएसपी स्टील-पॉवर लिमिटेड जामगांव में पौने दो हेक्टेयर, जिंदल स्टील-पॉवर लिमिटेड ने पतरापाली में 1 एकड़ 129 डिसमिल सड़क भूमि पर तथा रामेश्वर स्टील झाड़ की जंगल भूमि पर कब्ज़ा किया है।
दो साल में मिलावट के 139 प्रकरण, 9 में चालान पेश अमर स्वास्थ्य मंत्री, अमर अग्रवाल ने विधानसभा में बताया कि विगत दो वर्षों के दौरान प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के कुल 139 प्रकरण बनाये गये। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष के 90 प्रकरणों में से 9 मामलों में अदालत में चालान पेश किया गया है। शेष 81 प्रकरणों की विवेचना जारी है कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह के प्रश्नों के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य में खाद्य निरीक्षकों को 38 पद स्वीकृत हंै, जिनमें से 37 रिक्त व एक पद संविदा के तहत भरा गया है, इसके अतिरिक्त 2 लैब टेक्निशियन, खाद्य निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। जि़ला स्तर पर निरीक्षक के पद नहीं हैं। बाकी पदों को भरने लगातार प्रयास किये जा रहे हैं, पीएससी को भी प्रस्ताव भेजा गया है।

खबरयार

Saturday, March 6, 2010

यारों का यार



बाबागिरी की आड़ में अय्याशी के धंधे

दरअसल भारत में ऐसे बाबाओं को पनपने में सबसे अहम भूमिका हमारे नेताओं ने निभाई है। चूंकि नेतागिरी बहुत मुना$फे का होने के साथ ही साथ बहुत ही अनिश्चितताओं का धंधा है, पार्टी का टिकिट ही नहीं, चुनाव जीतेंगे या नहीं, जीत भी गए तो मंत्री, मुंख्यमंत्री बनेंगे या नहीं सब कुछ अनिश्चित होता है। इसे सुनिचित करने के लिए नेता लोग बाबाओं का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
जी.डी.गोयल
नई दिल्ली। डाके डालने हो, मादक पदार्थ बेचने हो, राजनैतिक दलाली करनी हो वैश्यावृति का रैकेट चलाना हो या कोई और अपराध करना हो, तो उसके लिए आज कल सबसे सुरक्षित रास्ता है बाबागिरी का। एक बार बाबा बन कर पुज गए, तो बस सारे अपराधों पर पर्दा पड़ गया। अब जब इन बाबाओं का चरणामृत पीने के लिए भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और प्रदेशों के मुख्यमंत्री पहुंचेंगे तो अपराध खोजने वाले अधिकारियों की भला क्या हिम्मत कि उनके गिरेबानों में झांक सकें। अव्वल तो ऐसे बाबा पकड़े ही नहीं जाते। अगर कभी किसी वजह से पकड़े भी जाते हैं तो कुछ दिन के तमाशे के बाद बा-ईज्ज़त बरी हो जाते हैं, या उनकी $फाईलें आलमारियों में द$फन हो जाती हैं। कुछ मामले जो अदालत पंहुच भी जाते हैं और कानून उन पर हाथ डालने की कोशिश करता है, तो इनका निजी सुरक्षा तंत्र इनके भक्तों को भड़का कर ऐसी हिंसा फैलाता है, कि कानून को भी पीछे हटना पड़ता है। इसके सबसे ताज़ा उदाहरण हैं, पंजाब का डेरा सच्चा सौदा के बाबा की एक हत्या के प्रकरण में गिरफ़्तारी, जिसके विरोध में पंजाब के कई शहरों में दंगे भड़क गए और दूसरा उदाहरण है, आशाराम बापू की गिरफ़्तारी का, जिन पर मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करने का साहस नहीं कर पा रही है। जबकि वे खुले आम चुनौती देते हैं, कि हिम्मत है तो पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करने का साहस करके देखे। इनके अलावा कुछ ऐसे बाबा भी हैं, जिनको बलात्कार जैसे मामलों में पुलिस ने गिरफ़्तार कर भी लिया, लेकिन जब उनकी बाबागिरी परवान चढ़ी, तो उनके मामले $फाईलों में द$फन हो गए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, वृंदावन के कृपालू महाराज, जिन्हें का$फी समय पूर्व नागपुर पुलिस ने गिरफ़्तार भी किया था, और उन पर मुकदमा भी चला, लेकिन बाद में वह सारा मामला र$फा द$फा हो गया और कृपालू महाराज आज भी पुज रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने आर.के.पुरम के एक मंदिर के बाबा इच्छाधारी संत स्वामी भीमानन्द जी महाराज चित्रकूट वाले को जिस्मफरोशी का धंधा करवाने के आरोप में गिरफ़्तार किया है। उसके साथ छ: लड़कियां भी पकड़ी गई हैं, जिनमें चार एयर होस्टेस हैं, और दो स्थानीय गार्गी कॉलेज की पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की छात्रायें हैं। दिल्ली पुलिस के डी. सी. पी. साउथ एस. जीत्रण्सत्रधालीवाल के बताये अनुसार, इस बाबा को पहले भी एक बार 1997 दिल्ली के जपत नगर में वैश्यावृति के मामले में गिरफ़्तार किया गया था। उसके बाद दिल्ली के ही बदरपुर थाने में सन 1998 में डकैती के मामले में गिरफ़्तार किया गया था। उस केस में उसे पांच साल की सज़ा भी सुनाई गई थी। उसके अलावा सन 2003 में नोएडा उत्तर प्रदेश के सैक्टर 24 के थाने मे वैश्यावृति और गैंगस्टर के दो मामले दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार यह बाबा वैश्याओं की आउट सोर्सिंग भी करता है, भारत के किसी भी शहर में अपने ग्राहकों के लिए लड़कियां उपलब्ध करवा देता था। पुलिस के अनुसार इस बाबा ने इसी धंधे में करीब 100 करोड़ की सम्पत्ति अर्जित कर ली है, जिसकी मदद से वह चित्रकुट के चमरोहा गांव में साईं बाबा का एक भव्य मंदिर और अस्पताल बनवा रहा है। वहां इसे शिव पूरन वेदी महाराज के नाम से जाना जाता है। वहीं से इसने अपना रायफल का लायसेंस भी बनवा लिया है। मज़े की बात यह है, कि बाकायदा सज़ा या$फता होने के बाद और कई मामलों में अपराधी होने के बावजूद भी वहां से इसका राय$फल का लायसेंस भी बना दिया गया। ये बाबागिरी का ही परिणाम है। इन पक्तियों के लिखे जाने के ही बीच टी.वी.पर एक समाचार आना शुरू हो गया, जिसमें बताया जा रहा है कि दक्षिण भारत के एक बाबा स्वामी नित्यानंद की एक सीडी सामने आई है, जिसमें बाबा जी अपने कक्ष में एक अभिनेत्री के साथ अश्लील नृत्य करते दिखाई दे रहे हैं।
दरअसल भारत में ऐसे बाबाओं को पनपने में सबसे अहम भूमिका हमारे नेताओं ने निभाई है। चूंकि नेतागिरी बहुत मुनाफे का होने के साथ ही साथ बहुत ही अनिश्चितताओं का धंधा है, पार्टी का टिकिट ही नहीं, चुनाव जीतेंगे या नहीं, जीत भी गए तो मंत्री, मुंख्यमंत्री बनेंगे या नहीं सब कुछ अनिश्चित होता है। इसे सुनिचित करने के लिए नेता लोग बाबाओं का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं और जब उनके आशीर्वाद के बाद वे अपना स्वार्थ साध लेते हैं तो उनके चरणों में लौट जाते हैं, और उसे चमत्कार मानकर नेताओं की दुकान-दारी चल पड़ती है, और उन पर हर तर$फ से धन की वर्षा होने लगती है। उसका सबसे अच्छा उदाहरण मध्यप्रदेश के ही रावतपुरा सरकार का दिया जा सकता है। एक सत्र पूरा करने के बाद जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दोबारा चुनाव मैदान में उतरे तो मीडिया और राजनेता मान रहे थे कि इस बार वे चुनाव हार जायेंगे। लेकिन कहा जाता है कि किसी की सलाह पर वे रावतपुरा सरकार के दरबार में पहुंचे तो बाबा ने आशीर्वाद दिया कि ना केवल वे चुनाव जीतेंगे, वरण पुन: मुख्यमंत्री भी बनेंगे। लेकिन उसके बाद उन्हें इसी दरबार में अपना सर मुंड़वाना पड़ेगा। चुनाव के बाद बाबा की वांणी सत्य हुई और न केवल मुख्यमंत्री, बल्कि उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों $खास-$खास चाटुकारों और कुछ अधिकारियों ने सामूहिक रूप से बाबा के सामने अपना मुंडन करवाया। स्वाभाविक था कि उसके बाद बाबा चमत्कारिक मान लिए गए। उसके बाद नया राज्य बनने के बाद जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने भी बाबा के आशीर्वाद के बदले में वहां भारी मात्रा में भूमि प्रदान कर दी। इस तरह प्रभाव इतना बढ़ गया कि क्या थे और कोई अपराध करते हैं या नहीं इस बात की जांच करने का साहस पुलिस या कोई जांच अधिकारी करने का साहस कर सकेगा। हालांेिक अभी तक उनके $िखला$फ कोई बात सामने भी नहीं आई है। उनका उदाहरण तो केवल यह बताने के लिए दिया गया है कि नेता किस तरह बाबाओं को रातों रात पुजवा देते हैं। अब अगर कोई बाबा अपराधी पृवत्ति का हो, तो इसी प्रभाव का दुरूपयोग $गलत तरीकों से धन कमाने के लिए भी कर सकता है। आये दिन दिखाई पड़ रहा है।



वाणिज्य कर विभाग में मंत्री के जांच निर्देश भी बेअसर
अनूप सक्सेना
राजगढ़।
जि़ले में वाणिज्यक कर विभाग के अधिकारी की शासन निर्देशों में लापरवाही व बढ़े बकायादारों की सम्पत्ति कुर्क कर के नीलामी के ज़रिये शासन को हो रही आर्थिक क्षति की पूर्ति कर राजस्व वसूली में गंभीर उदासीनता बरतने से 3.50 करोड़ रूपये की राजस्व वसूली लंबित है। राजगढ़ जि़ले के ब्यावरा जैसे उद्योग प्रधान नगर में बकायादारों की सम्पत्ति को $खरीदने वाला कोई न मिलने का वाणिज्यिक कर विभाग के नुमांंइदों का बार-बार दस्तावेज़ों में किया उल्लेख स्वयं ही विभागीय कार्यप्रणाली को शंकास्पद व भ्रष्टाचार को सरंक्षण देने व दोषी बकायादारों को कड़ी कार्यवाही से बचाने वाला साबित कर रहा है वहां दूसरी ओर वाणिज्य कर चोरी में लिप्त व्यवसायी वर्ग दूसरे नामों से पंजीयन करवाकर अपनी व्यवसायिक गतिविधियों को बेखौफ विभाग के सरंक्षण में चला रहा है। वाणिज्यक कर विभाग में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं को ठीक करवा कर शासन हित में 3.50 करोड़ की वसूली सुनिश्चित करवाने के उद्देश्य से समाजवादी पार्टी के जि़लाध्यक्ष इश्तियाक नबी खान ने दस्तावेज़ी प्रमाणों के साथ 10/7/2009 को वाणिज्य कर मंत्री श्री राघवजी से भेंट कर अवगत कराया मंत्री जी ने आयुक्त वाणिज्यिक कर विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। आयुक्त महोदय के निर्देश पर शाजापुर के सहायक आयुक्त वाणिज्यिक कर आर.के. तिवारी को राजगढ़ के वाणिज्यिक कर अधिकारी राजेन्द्र सिंह बास्केल की कार्यप्रणाली की जांच का जि़म्मा सौंपा गया। सहायक आयुक्त आर.के.तिवारी द्वारा पत्र लिखकर शिकायतकर्ता श्री खान को 14/10/2009 को आवश्यक प्रमाणों के साथ शाजापुर बुलाये जाने पर सपा जि़लाध्यक्ष श्री खान द्वारा 14/10/2009 को श्री तिवारी से भेंट कर कुछ और जांच कार्य में आवश्यक दस्तावेज़ सहायक आयुक्त को सौंपे। सहायक आयुक्त आर.के. तिवारी ने भेंट के दौरान शीघ्र राजगढ़ आकर बिंदूवार नीलामी प्रक्रिया का सूक्ष्म अध्ययन कर सभी बकायादारों की सम्पत्ति राजसात कर नीलामी के ज़रिये वसूली सुनिश्चित की जाने का तथा दोषी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही का आश्वासन श्री खान को दिया, इसके बाद लगभग पांच माह का समय निकल जाने के बाद भी जि़ला वाणिज्यिक कर अधिकारी की जांच करने सहायक आयुक्त श्री तिवारी राजगढ़ नहीं आये हैं। दूरभाष पर श्री तिवारी से इस अवधि में तीन चार बार चर्चा की गयी हर बार श्री तिवारी दो चार दिन में राजगढ़ आने का आश्वासन देते रहे। शिकायत की जाने के दौरान वाणिज्यक कर विभाग के राजगढ़ जि़ले के बकायादारों की स्थिति निम्न प्रकार थी (1) पूनम ट्रेडर्स ब्यावरा 82.63 लाख (2) भोपाल पेपर बोर्ड लि. पचोर 68.34 लाख (3) अंजलि साल्वेंट इंडिया लिमिटेड कचबादिया 29.99 लाख (4) शंकर टे्रडर्स ब्यावरा 23.33 लाख (5) भंडारी ट्रेडर्स नरसिंहगढ़ 16.89 लाख (6) मे. अजय टे्रडर्स ब्यावरा 12.74 लाख (7) मे. श्याम टे्रडर्स पचोर 9.91 लाख (8) मे. विपणन सहकारी समिति जीरापुर 9.45 लाख (9) काकाणी ब्रदर्स पचोर 9.45 लाख (10) में.रामगोपाल राजेन्द्र कुमार पचोर 8.83 लाख (11) में.मॉ कल्याणी ट्रेडर्स ब्यावरा 8.58 लाख (12) में. विश्वनाथ ट्रेडर्स पचोर 8.40 लाख (13) में. धनराज रमणलाल खुजनेर 8.28 लाख (14) में. गणेश टे्रडिंग कम्पनी खुजनेर 8.05 लाख (15) में. एकता टे्रडर्स ब्यावरा 7.52 लाख (16) में. श्रीनाथ टे्रडर्स नरसिंहगढ़ 7.27 लाख (17) फलोदी ब्रदर्स बोडा 6.59 लाख (18) मनोज टे्रडर्स ब्यावरा 5.64 लाख (19) कृष्णा आईल एक्स लि. पचोर 5.37 लाख (20) फूलचंद हरीकिशन जीरापुर 5.27 लाख (21) शक्ति टे्रडर्स सुठालिया 5.21 लाख (22) मोहनलाल गोपीलाल जीरापुर 5.18 लाख (23) अनिल शर्मा ठेकेदार ब्यावरा 4.18 लाख (24) हनुमान ट्रेडिंग कं. छापीहेडा 4.12 लाख (25) रामेश्वर मुंशीलाल बोडा 4.05 लाख (26) विजयराक डीलर्स पचोर 4.02 लाख।
करोड़ों रूपयों की शासन हित में राजस्व वसूली सुनिश्चित करने में सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी के द्वारा जांच कार्य से परहेज कर भ्रष्टाचार को प्रश्रय देने से जहां विभाग में गहराई से पेठ जमा चुका अनियमितताओं को संरक्षण देने का वरिष्ठ अधिकारियों का यह अंतहीन सिलसिला परिलक्षित होता है। वहां प्रदेश के मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के जगह-जगह किये जा रहे दावे भी खोखले साबित होते हैं।

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