VISITORS

Saturday, April 9, 2011






$िखर क्यों पास ·रेगी संसद लो·पाल विधेय·!
इन दिनों प्रसिद्ध गांधीवादी, समाज सेवी अन्ना हज़ारे · अनशन पर बैठने · $खबरें $खबार और इलैक्ट्रॉनि· मीडिया · सुर्खियों में छाई हुई हैं। हज़ारे ने भ्रष्टाचार · शि·ायत और उन· जांच · वास्ते लो·पाल विधेय· · मसौदे बनाने · लिए संयुक्त समिति · गठन ·रने से सर·ार · इन·ार ·रने · बाद अपना अनशन शुरू ·िया है। ७२ वर्षीय हज़ारे ने राजघाट पर महात्मा गांधी · श्रद्धांजलि देने · बाद अनशन शुरू ·िया। उन· ·हना है ·ि सर·ार इस विधेय· · मसौदा बनाने वाली समिति में ५० प्रतिशत सर·ारी अधि·ारी और शेष में नागरि· और विद्वान शामिल ·िए जाएं। ·ेन्द्र स्तर पर लो·ायुक्त ·ेवल सलाह·ार · भूमि· में होंगे यही स्थिति राज्यों में लो·ायुक्त · होगी, यानी हाथी · दांत खाने · और दिखाने · और। आज ऊपर से ले· नीचे · हर स्तर पर भ्रष्टाचार · बोलबाला है, ऐसे में महज़ परामर्श देने वाले लो·पाल · आने से देश · रसूखदारों, भ्रष्ट नेता और अधि·ारियों पर क्यों· ·ोई $फर्· पड़ेगा। ·ुल मिला· यह लो·पाल नाम · होग, ·ाम · नहीं। क्या इस बार भी लो·पाल विधेय· हर बार · तरह सहमति-असहमति, मतभेद और मनभेद · भंवर में उलझ · रह जाएगा, या फिर इस बार मनमोहन सर·ार लो·पाल विधेय· · पास ·रवाने · अग्निपरीक्षा में खरी उतरेगी। ऐसे ही पेचीदा सवालों · ओर-छोर और सटी· उत्तर जानने · ·ोशिश · गई है।
अभी · · संसदीय इतिहास पर नज़र डालें तो सा$ हो जाता है ·ि जब बात सांसदों-विधाय·ों · वेतन भत्ते अथवा अधि·ार बढ़ाने · होती है तो क्या पक्ष क्या विपक्ष सब ·-दूसरे · सुर में सुर मिलाते नज़र आते हैं। नतीजा ऐसे विधेय· आनन-$फानन में ही पारित · दिए जाते हैं। इससे इतर जब बात जन·ल्याण · होती है या राजनेताओं और रसू$खदारों पर शि·ंजा ·सने · लिए संसद में ·ोई विधेय· लाया जाता है तो सब· सहमति तो दूर, दो सांसदों · · सुर नहीं मिलते।

हृ जैनेन्द्र ·ुमार
·हां से आई लो·पाल ·ी अवधारणा। सन १९६६ से राज्य और ·ेन्द्र ·ी सर·ारों और नौ·रशाही पर लगाम ·सने ·े साथ ही उन्हें अपने पद ·े प्रति जि़म्मेदाराना रवैया अख़्ितयार ·रने ·े लिए दबाव डालने ·ी मंशा से स्विट्ज़रलैंड ·े ओम्बूड्समैन ·ी तजऱ् पर भारत में ·ेन्द्र स्तर पर लो·पाल और राज्य स्तर पर लो·ायुक्त ·ी व्यवस्था भारत में ·रने ·ी अवधारणा ने जन्म लिया। इतिहास गवाह है लो·पाल विधेय· ·ो ·ई सर·ारों ने अपने अपने तरी·े से लो·सभा में पेश ·िया, ले·िन हर बार यह विधेय· त·नी·ी जटिलताओं, ·ानूनी पेचीदगियों और पक्ष-विरोध ·े भंवर में डूबता-उतराता रहा, ले·िन अब त· पास नहीं हो पाया है। ए· बार फिर मनमोहन सर·ार ने लो·पाल विधेय· ·ो लो·सभा में पेश ·रने ·े लिए हिम्मत दिखाई है। हालां·ि, इस बार सर·ार द्वारा तैयार ·िया गया लो·पाल बिल भी ·ा$फी लचर नज़र आता है। तीन सदस्यीय लो·पाल होगा, जिस·े सभी सदस्य रिटायर्ड जज होंगे। इस नज़रिए से देखा जाए तो सभी सदस्य सर·ार ·ी दया पर निर्भर ·रेंगे और जब सदस्य सर·ार ·ी अनु·ंपा से लो·पाल ·े सदस्य होंगे तो ·िस प्र·ार वे सर·ार में भ्रष्ट्राचार $फैलाने वाले मंत्रियों और अधि·ारियों पर क्यों और ·िस तरह लगाम ·स पाएंगे? इन सदस्यों ·ी चयन समिति में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, दोनों सदनों ·े नेता पक्ष और नेता प्रतिपक्ष, ·ानून मंत्री और गृहमंत्री ·े होने से ये परोक्ष रूप से सर·ार द्वारा लो·पाल, सर·ार ·ा लो·पाल और सर·ार ·े लिए लो·पाल ही बन·र रह जाएगा, ऐसे में ·िसी इंसा$फ या दोषी ·ो सज़ा मिलने ·ा तो सवाल ही नहीं उठता। मंत्रियों, सांसदों ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·सभा/राज्यसभा अध्यक्ष ·ी अनुमति ज़रूरी होगी, अब जब सारा भ्रष्टाचार बड़े आ·ाओं ·ी शह पर ही होता है तो वे क्यों ·र अपने अधीनस्थ रह·र भ्रष्टाचार ·े ज़रिए उन·ी जेब भरने वाले ·े $िखला$फ जांच ·ी अनुमति लो·पाल ·ो देंगे? यह संदेह ·े घेरे में नज़र आता है। प्रधानमंत्री तो लो·पाल से ऊपर होगा ऐसे में लो·पाल ·ी ·ार्रवाई ·े दौरान प्रधानमंत्री अपने चहेतों ·ो बचाने ·े लिए लो·पाल पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दबाव नहीं डालेंगे, ऐसे आसार ·म ही नज़र आते हैं। सीवीसी, सीबीआई लो·पाल ·े अधीन नहीं होंगे, ऐसे में इन्हें तो खुले तौर पर भ्रष्टाचार ·रने ·ी छूट मिल जाएगी। यह तो रही सर·ार ·े लो·पाल/लो·ायुक्तों ·ी असली सूरत। अब दूसरा मुद्दा यह है ·ि अगर जन लो·पाल विधेय· ·ो लाया जाए तब-तब चयन समिति में सीएजी, जाने-माने ·ानूनविद, मुख्य चुनाव आयुक्त और नोबल और मैगसेसे जैसे अंतराष्ट्रीय पुरस्·ारों से सम्मानित। इस·े साथ ही प्रधानमंत्री, मंत्रियों, सांसदों ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·पाल/लो·ायुक्त ·ी अनुमति ज़रूरी होगी। स्वत:सज्ञान ·ा भी अधि·ार होगा। सीवीसी और सीबीआई ·ेन्द्र में लो·पाल और राज्यों में लो·ायुक्त ·े अधीन होंगे। ऐसा होने पर रसूख रखने वाले धनि·ों और उनपर छत्रछाया रखने वाले राजनेताओं ·े साथ ही सीवीसी और सीबीआई पर भी नज़र रहेगी और ·ुछ गड़बड़ी होने पर उन·े $िखला$फ ·ार्रवाई ·ा भय भी रहेगा। बहरहाल इस विधेय· ·ो भी संसद में पारित होने ·े लिए रखा जाएगा और उसे पास ·रने वाले सांसदों में से ज्य़ादातर ·े दामन पा·-सा$फ नहीं ·हे जाते। तो फिर इर विधेय· ·ो ·ोई क्यों पास ·रेगा और क्यों ·िसी प्र·ार ·ी आम सहमति बनाने ·े लिए सर·ार और नेता प्रतिपक्ष ·ोशिश ·रेंगे। ·ुल मिला·र नहीं लगता ·ि अन्ना हज़ारे ·ा ये अनशन रंग ला पाएगा। अभी त· ·े संसदीय इतिहास पर नज़र डालें तो सा$फ हो जाता है ·ि जब बात सांसदों-विधाय·ों ·े वेतन भत्ते अथवा अधि·ार बढ़ाने ·ी होती है तो क्या पक्ष क्या विपक्ष सब ए·-दूसरे ·े सुर में सुर मिलाते नज़र आते हैं। नतीजा ऐसे विधेय· आनन-$फानन में ही पारित ·र दिए जाते हैं। इससे इतर जब बात जन·ल्याण ·ी होती है या राजनेताओं और रसू$खदारों पर शि·ंजा ·सने ·े लिए संसद में ·ोई विधेय· लाया जाता है तो सब·ी सहमति तो दूर, दो सांसदों त· ·े सुर नहीं मिलते।
क्या है मामला
वर्तमान व्यवस्था क्या है-लो·पाल है ही नहीं। लो·ायुक्त सलाह·ार ·ी भूमि·ा में। लो·ायुक्त ·ी नियुक्ति मुख्यमंत्री हाई·ोर्ट ·े चीफ जस्टिस और नेता प्रतिपक्ष ·ी सहमति से ·रता है। मंत्रियों, सांसद ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·सभा अध्यक्ष ·ी अनुमति ज़रूरी। सीबीआई और सीवीसी सर·ार ·े अधीन। जजों ·े $िखला$फ जांच ·े लिए ची$फ जस्टिस ·ी अनुमति ज़रूरी। सर·ार द्वारा तैयार लो·पाल बिल लो·पाल तीन सदस्यीय होगा। सभी रिटायर्ड जज। चयन समिति में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, दोनों सदनों ·े नेता पक्ष और नेता प्रतिपक्ष, ·ानून मंत्री और गृहमंत्री। मंत्रियों, सांसदों ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·सभा/राज्यसभा अध्यक्ष ·ी अनुमति ज़रूरी। प्रधानमंत्री ·े $िखला$फ जांच ·ी अनुमति नहीं। सीवीसी, सीबीआई,लो·पाल/लो·ायुक्त ·े अधीन नहीं। लो·ायुक्त ·ेवल सलाह·ार ·ी भूमि·ा में। ए$फआईआर से ले·र मु·दमा चलाने ·ी प्र·्रिया पर विधेय· मौन। जजों ·े $िखला$फ ·ार्रवाई पर मौन। क्या है आपत्ति जजों ·ो रिटायर होने ·े बाद सर·ार से उप·ृत होने ·ी आशा रहने से निष्पक्षता प्रभावित होगी। भ्रष्टाचार ·े आरोपियों ·े ही चयन समिति में रहने से ईमानदार लोगों ·ा चयन होने में संदेह। बो$फोर्स, जेएमएम सांसद $खरीद ·ांड, लखूभाई पाठ· ·ेस जैसे मामलों में प्रधानमंत्री ·ी भूमि·ा ·ी जांच ही नहीं हो पाएगी। राजनीति· हस्तक्षेप ·ी संभावना रहेगी। लो·ायुक्त भी सीवीसी ·ी तरह बिना दांत ·े शेर ·ी तरह रहेगा। ·ेजी बाल·ृष्णन जैसे जजों ·े $िखला$फ ·ार्रवाई संभव नहीं होगी। जनलो·पाल विधेय· ग्यारह सदस्यीय लो·पाल। चार ·ा लीगल बै·ग्राउंड ज़रूरी, अन्य दूसरे क्षेत्रों से। चयन समिति में सीएजी, जाने-माने ·ानूनविद, मुख्य चुनाव आयुक्त और नोबल और मैगसेसे जैसे अंतराष्ट्रीय पुरस्·ारों से सम्मानित। प्रधानमंत्री, मंत्रियों, सांसदों ·े $िखला$फ जांच और मु·दमे ·े लिए लो·पाल/लो·ायुक्त ·ी अनुमति ज़रूरी। स्वत:सज्ञान ·ा भी अधि·ार। सीवीसी और सीबीआई ·ेन्द्र में लो·पाल और राज्यों में लो·ायुक्त ·े अधीन। जजों ·े $िखला$फ जांच ·े लिए लो·पाल/लो·ायुक्त ·े अधि·ार। पेश हुआ बार-बार पर पास नहीं हो पाया लो·पाल विधेय· भारत में लो·पाल/लो·ायुक्त ·ी स्थापना संबंधी विधेय· ·ी अवधारणा सबसे पहले १९६६ में सामने आई। इस·े बाद यह बिल लो·सभा में आठ बार पेश ·िया जा चु·ा है, ले·िन आज त· पारित नहीं हो पाया। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र·ुमार गुजराल ·े ·ार्य·ाल ·े दौरान ए· बार १९९६ में और अटलबिहारी वाजपेयी ·े ·ार्य·ाल में दो बार१९९८ और २००१ में इसे लो·सभा में लाया गया। सन २००४ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लो·पाल विधेय· जल्द ही संसद में पेश ·रने ·ा वादा ·िया। इस विधेय· ·े तहत प्रधानमंत्री ·ो लाया जाए या नहीं यह निरंतर विवाद ·ा विषय रहा। इस पर ·ोई आम सहमति आज त· नहीं बन पाई है।





·ांतिलाल भूरिया बने प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष
भोपाल। जनजातीय मामलों ·े ·ेन्द्रीय मंत्री एवं आदिवासी नेता ·ांतिलाल भूरिया ·ो मध्यप्रदेश ·ांग्रेस ·ा नया अध्यक्ष बनाया गया है। वे सुरेश पचौरी ·ी जगह लेंगे। भूरिया प्रदेशाध्यक्ष बनने ·े बाद नेता प्रतिपक्ष ·ा पद सामान्य वर्ग ·े खाते में जाना तय है। सामान्य वर्ग से इस पद ·े लिए उप नेता प्रतिपक्ष चौधरी रा·ेश सिंह चतुर्वेदी और अजय सिंह ‘राहुल’ प्रबल दावेदार हैं। इनमें से ·िसी ए· ·ी नियुक्ति हो स·ती है। ·ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ·ी स्वी·ृति ·े बाद पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बुधवार ·ो भूरिया ·ी नियुक्ति ·ी घोषणा ·ी। उन्होंने बताया ·ि मध्यप्रदेश ·ांग्रेस ·मेटी ने सर्व सम्मति से ए· प्रस्ताव पारित ·र नए अध्यक्ष ·ी नियुक्ति ·े लिए श्रीमती गांधी ·ो अधि·ृत ·र दिया था। दिल्ली में पिछले ·ुछ दिनों से इसे ले·र ·वायद चल रही थी और प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष पचौरी भी वहां डेरा डाले हुए थे। पचौरी ने प्रदेश अध्यक्ष ·ी ·ुर्सी छोडऩे ·ी इच्छा ज़ाहिर ·रते हुए हाई·मान से ·िसी आदिवासी नेता ·ो अध्यक्ष बनाने ·ा आग्रह ·िया था। भाजपा द्वारा आदिवासी वोट बैं· ·ो अपनी तर$फ खींचने ·ी ·ोशिशों ·े चलते और वरिष्ठ आदिवासी नेता जमुना देवी ·े निधन ·े ·ारण प्रदेश में आई आदिवासी नेता ·ी रिक्तता ·ी पूर्ति ·े लिए भूरिया ·े नाम पर हाई·मान ने मोहर लगाई। भूरिया ·ी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ·े समर्थ·ों में गिनती होती है। उन·े अध्यक्ष बनने से सिंह खेमे में $खुशी ·ी लहर दौड़ गई। भूरिया वर्ष 2009 में चौथी बार सांसद चुने हैं। वे 1993 में दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल में ·ैबिनेट मंत्री रहे हैं। साठ वर्षीय भूरिया ·ेंद्र में जनजातीय मामलों ·े मंत्री हैं। सूत्र बताते हैं ·ि भूरिया ने मंत्री पद पर बने रहने ·ी इच्छा व्यक्त ·ी है, ता·ि राज्य सर·ार से मु·ाबला ·रना आसान रहे। भूरिया ·ी ताजपोशी होने पर पचौरी ·ो ·ेंद्र में बेहतर जि़म्मेदारी मिलने ·ी संभावना है। एआईसीसी में उन्हें महासचिव बनाया जा स·ता है। पचौरी वर्ष 2008 में प्रदेश ·ांग्रेस ·े अध्यक्ष बनाए गए थे। उन्होंने राज्य में वर्ष 2008 में हुए विधानसभा और 2009 में हुए लो·सभा चुनाव में पार्टी ·ा नेतृत्व ·िया था। प्रदेश ·ांग्रेस ·े 34 वें अध्यक्ष नामां·ित हुए भूरिया दिग्विजय सर·ार में आदिम जाति ·ल्याण मंत्री थे, वे ·ेंद्र में पहले राज्यमंत्री और फिर ·ैबिनेट मंत्री बने। ·ांग्रेस ·े पारंपरि· गढ़ झाबुआ में लंबे समय त· दो भूरिया- दिलीप सिंह और ·ांतिलाल में से ·ोई ए· ही चुना जाता रहा था। ·ांग्रेस में आदिवासी मुख्यमंत्री ·ी मुहिम में असफल होने ·े बाद दिलीप सिंह भूरिया भाजपा में चले गए थे। इस·े बाद पृथ· छत्तीसगढ़ बनने ·े बाद ·े मप्र में ·ांतिलाल भूरिया आदिवासी नेतृत्व ·ा निर्विवाद चेहरा बन गए थे। उन्हें पार्टी और गुट में सीधी सपाट निष्ठा ·ा प्रतिफल मिला है।
सवर्ण वर्ग ·े पचौरी ·ी जगह प्रदेश अध्यक्ष पद पर भूरिया ·ी नियुक्ति से अब यह स्पष्ट हो गया है ·ि ·ांग्रेस विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ·ा पद सवर्ण विधाय· ·ो देगी। ऐसा हुआ तो दिग्विजय समर्थ· अजय सिंह ·ो यह पद मिल स·ता है।
पार्टी मेंसही मैनेजमेंट’ · ज़रूरत: भूरिया
सचिन देव नई दिल्ली नवनियुक्त म.प्र.·ांग्रेस अध्यक्ष और ·ेंद्रीय जनजातीय ·ार्यमंत्री ·ांतिलाल भूरिया ·ा मानना है ·ि प्रदेश ·ांग्रेस में गुटबाज़ी नाम ·ी ·ोई चीज नहीं है, महज़ ज़रूरत है तो ‘सही मैनेजमेंट’ ·ी। उन·ा मानना है ·ि ·ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ·े नेतृत्व में गांव ·े ·ार्य·र्ता से ले·र दिल्ली में बैठे प्रदेश ·े दिग्गज नेताओं ·ो ए·जुट ·र चुनावी रण में उतरने से वर्ष 2013 में मप्र में ·ांग्रेस ·ो सत्तासीन होने से ·ोई नहीं रो· स·ता।
पेश हैं प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति ·े बाद मीडिया से भूरिया ·ी बातचीत ·े अंश-
बतौर प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष आप·ी पहली प्राथमि·ता क्या है?
·ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी ने मुझमें विश्वास जता·र प्रदेश ·ी ·मान सौंपी है। ऐसे में सर्वप्रथम प्राथमि·ता पार्टी नेतृत्व ·ी अपेक्षाओं पर खरा उतर·र वर्ष 2013 में म.प्र. में ·ांग्रेस ·ो सत्तासीन ·रना है।
प्रदेश ·ी शिवराज सर·ार में व्याप्त भ्रष्टाचार, अत्याचार और बिगड़ी ·ानून-व्यवस्था से आम जनता ·ो निजात दिलाना है साथ ही मनमोहन सर·ार द्वारा संचालित ·ेंद्रीय योजनाओं ·ा लाभ गांव-गांव त· वास्तवि· ह·दार ·ो दिलाना है।
पार्टी नेतृत्व ·ई मौ·ों पर मप्र ·ांग्रेस में गुटबाजी पर चिंता जता चु·ा है। ऐसे में गुटबाजी से पार पाने ·ी आप·ी क्या रणनीति है?
अव्वल मेरा मानना है ·ि ·ांग्रेस में ए· ही नेता है और वह है ‘सोनिया गांधी’। ऐसे में गुटबाजी ·ा ·ोई सवाल ही नहीं है। ज़रूरत है तो ‘सही मैनेजमेंट’ ·ी। मप्र ·ांग्रेस ·ा ·ार्य·र्ता में आज भी ·ा$फी ऊर्जा है, महज़ ज़रूरत है तो उसे सम्मान और सही दिशा देने ·ी। सोनियाजी ·े नेतृत्व में गांवों ·े ·ार्य·र्ताओं से ले·र दिल्ली में बैठे प्रदेश ·े सभी नेताओं ·ो साथ ले·र ए·जुट हो·र ·ाम ·रेंगे।
क्या प्रदेश ·ांग्रेस ·ी ·मान संभालने ·े साथ ·ेंद्र में मंत्री भी बने रहेंगे?
थोड़ा स·ुचाते हुए, मुझे अभी ·ांग्रेस नेतृत्व ·ी ओर से प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष पद पर नियुक्ति संबंधी पत्र प्राप्त हुआ है। भविष्य में देश ·ी सेवा ·े साथ-साथ म.प्र. में ·ांग्रेस ·ी सर·ार बनाने ·े लिए वरिष्ठ नेताओं ·े सहयोग से आगे बढ़ेंगे।
बतौर प्रदेश ·ांग्रेस अध्यक्ष भोपाल ·ब जा रहे हैं?
अभी ·ुछ तय नहीं है। पहले दिल्ली में प्रदेश ·े तमाम ·ेंद्रीय नेताओं से मुला·ात ·र विचार-विमर्श ·े बाद आगे ·ा ·ार्य·्रम बनाऊंगा।



·ुशाभाउ ठा·रे ट्रस्ट · दी ज़मीन · आवंटन रद्द
नई दिल्ली। सुप्रीम ·ोर्ट ने भाजपा ·े दिवंगत नेता ·ुशाभाउ ठा·रे ·े नाम पर ए· ट्रस्ट ·ो ज़मीन आवंटित ·िए जाने ·े मध्यप्रदेश सर·ार ·े $फैसले ·ो बुधवार अप्रैल 6 ·ो रद्द ·र दिया।
न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए·े गांगुली ·ी पीठ ने ट्रस्ट ·ो ·रीब 30 ए·ड़ भूमि आवंटित ·िए जाने से संबंधित राज्य सर·ार ·ी अधिसूचना ·ो रद्द ·र दिया।
ट्रस्ट ·े न्यासियों में वरिष्ठ भाजपा नेता लाल·ृष्ण आडवाणी, एम. वें·ैया नायडू और मुरली मनोहर जोशी शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने संबंधित प्राधि·रण ·ो ज़मीन ·ा ·ब्ज़ा लेने ·े आदेश दिए जो 25 सितंबर 2004 ·ो उमा भारती ·े नेतृत्व वाली तत्·ालीन भाजपा सर·ार द्वारा आवंटित ·ी गई थी। न्यायालय ने यह $फैसला मध्यप्रदेश में पंजी·ृत उपभोक्ता सोसायटी अखिल भारतीय उपभोक्ता ·ांग्रेस ·ी याचि·ा पर दिया। याचि·ा में सर·ार ·े $फैसले ·ो यह ·ह·र चुनौती दी गई थी ·ि ·ानून ·ा उल्लंघन ·र ट्रस्ट ·ो बसवाडिय़ा गांव स्थित ज़मीन बहुत ·म ·ीमत पर दी गई। मध्यप्रदेश हाई·ोर्ट द्वारा ज़मीन आवंटन रद्द ·रने से इं·ार ·िए जाने ·े बाद उपभोक्ता सोसायटी ने शीर्ष अदालत में याचि·ा दायर ·ी। शीर्ष अदालत ने उपभोक्ता सोसायटी और राज्य सर·ार ·े तर्· सुनने ·े बाद 19 जनवरी ·ो अपना $फैसला सुरक्षित रख लिया था।
ज़मीन आवंटन ·े अपने $फैसले ·े बचाव में राज्य सर·ार ने तर्· दिया था, ·ि राजनीति· नेताओं ·े नाम वाले ट्रस्टों ·ो ज़मीन आवंटन ·रने में ·ुछ भी $गलत नहीं है, क्यों·ि ·ेंद्र और ·ई राज्य सर·ारों ने बीते समय में मशहूर राजनीति· हस्तियों ·े नाम वाले अने· ट्रस्टों ·ो ·ा$फी भूमि आवंटित ·ी है। राज्य सर·ार ने ·हा था ·ि यदि सभी ट्रस्टों ·े लिए समान मान· लागू ·िए जाते हैं, तो फिर ·ेंद्र सर·ार द्वारा ·िए गए इस तरह ·े सभी आवंटन शीर्ष अदालत ·ी पड़ताल ·ा विषय होंगे। $गौरतलब है ·ि शहर ·े बीचोबीच बेश·ीमती 30 ए·ड़ ज़मीन आवंटित ·ी गई थी,जिसे ए· रुपया सालाना लीज़ पर ·ुशाभाऊ ठा·रे ट्रस्ट ·ो दिया गया था। सुप्रीम ·ोर्ट ·े $फैसले से भाजपा सर·ार ·ो झट·ा लगा है। आवंटित ज़मीन ·ो 15 दिन ·े अंदर वापस ·रने ·े निर्देश सुप्रीम ·ोर्ट द्वारा ट्रस्ट ·ो दिए हैं।

No comments:

Post a Comment

KHABARYAAR HINDI WEEKLY

खबरयार

खबरयार हिन्दी साप्ताहिक भोपाल
रंगीन पृष्ठ 16 रूपये 8 फी प्रति
शुल्क : वार्षिक रूपये 400/-
विज्ञापन दर प्रति वर्ग से. मी. : रूपये 20/- रंगीन रूपये 24/-

चिट्ठाजगत

चिट्ठाजगत

Followers