
दलितों के नाम पर दंगल
एक ज़माना था, जब कांग्रेस दलित उत्थान का दावा महात्मा गांधी के नाम पर करती थी और देश का दलित और अल्पसंख्यक वोट उसकी झोली में होता था। लगभग 40 साल तक गांधी के नाम पर कांग्रेस दलित वोट हथियाती रही, और दलित-दलित ही बनाए रखे गए। उसके बाद कांशीराम ने बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम पर कांग्रेस के दलित वोट बैंक में सेंध लगानी शुरू कर दी। उन्होंने धोती और सोटी वाले गांधी की जगह सूटबूटधारी टाई वाले बाबा साहेब अम्बेडकर को दलितों का मसीहा बना कर खड़ा कर दिया। जी.डी.गोयलनई दिल्ली। 14 अप्रैल का दिन उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगरवासियों के लिए अविस्मरणीय बन गया, उसकी वजह थी, देश के दो बड़े दलों के, दो बड़े नेताओं का एकाएक उभरा दलित प्रेम। ये नेता थे उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री, बसपा सुप्रिमो सुश्री मायावती और कांग्रेस के सांसद युवराज राहुल गांधी और दिन था बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की जंयती। इस दिन इन दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी रेलियां तय कर दीं। राहुल गांधी ने इस दिन को चुना उत्तर प्रदेश में निकाली जाने वाली कांग्रेस की चुनावी रथ यात्रा की शुरूआत के लिए। हालांकि रथ यात्रा शुरू होने वाली है सहारनपुर से, लेकिन मतलब तो केवल मायावती से राजनैतिक पंगा लेने से ही था, और इसके लिए बाबा अंबेडकर का जन्म दिन और स्वयं मायावती का गृह जि़ले से बेहतर और क्या हो सकता था।
राहुल गांधी की इस योजना का पुरज़ोर विरोध मायावती ने भी अपने ही ढंग से किया। पहले तो घोषणा कर दी गई, कि राहुल गांधी को बाबा साहेब अम्बेडकर की मूर्ति पर माला नहीं चढ़ाने दी जायेगी। लेकिन कांग्रेस ने उसका भी तोड़ निकाल लिया, उन्होंने बाबा साहेब अम्बेडकर का एक बड़ा चित्र सभा स्थल पर लगा लिया और उस माल्यार्पण करने की घोषणा कर दी। तब मायावती ने दूसरा दांव खेलते हुए देर रात में कांग्रेसी खेमे के पास जि़लाधिकारी का आदेश भिजवा दिया कि वे अपनी सभा मायावती की सभा समाप्त होने के दो घंटे बाद ही प्रारम्भ कर सकेंगे।
इन सारे दांव पेचों के बाद दोनों ही दलों ने जब अपनी-अपनी सभायें कीं, तो केवल एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का काम किया। मायावती ने कांग्रेस और भाजपा सहित दोनों पर आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद इन दलों की केन्द्र में और राज्यों में सरकारें रहीं, लेकिन इन लोगों ने दलित नेताओं के सम्मान के लिए कुछ नहीं किया। अब जब हमारी सरकार उनकी मूर्तियां स्थापित कर उन्हें सम्मानित करने की कोशिश कर रही है, तो ये लोग उसका विरोध कर रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि ये लोग दलितों के उद्धार की बात करते हैं, लेकिन उनके नेताओं का सम्मान तक नहीं करना चाहते। मायावती ने यह चेलेंज भी किया कि ये लोग कितना भी विरोध करें वे और उनकी सरकार दलित नेताओं के स्मारक और बनाने और मूर्तियां लगाने का काम करती रहेंगी।
मायावती के बाद जब राहुल गांधी का नम्बर आया तो, उन्होंने मायावती को हर तर$फ से कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से जितनी राशि दलितों और आदिवासियों के विकास के लिए भेजी जाती है, वो सब भ्रष्टाचार के रास्ते खा ली जाती है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण राज्य में भ्रष्टाचार व्याप्त है, और प्रदेश की जनता $खासतौर पर आदिवासी और दलित इस कुशासन से निदान चाहते हैं, और केवल कांग्रेस ही यह काम कर सकती है। एक ज़माना था, जब कांग्रेस दलित उत्थान का दावा महात्मा गांधी के नाम पर करती थी और देश का दलित और अल्पसंख्यक वोट उसकी झोली में होता था। लगभग 40 साल तक गांधी के नाम पर कांग्रेस दलित वोट हथियाती रही, और दलित-दलित ही बनाए रखे गए। उसके बाद कांशीराम ने बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम पर कांग्रेस के दलित वोट बैंक में सेंध लगानी शुरू कर दी। उन्होंने धोती और सोटी वाले गांधी की जगह सूटबूटधारी टाई वाले बाबा साहेब अम्बेडकर को दलितों का मसीहा बना कर खड़ा कर दिया। उसकी दो वजह थी, एक तो बाबा साहेब स्वयं उसी वर्ग से थे, दूसरे गांधी और उनमें एक अंतर था जहां गांधी दलितों के लिए न्याय की याचना करते नज़र आते थे, वहीं बाबा साहेब उन्हें अपने अधिकार छीनने की प्रेरणा देते नज़र आते थे। नतीजा यह रहा कि इस वर्ग को वह नेता अच्छा लगा जो उनसे अपने अधिकार छीनने की बात करता हो ना कि मांगने की और बस उसके साथ ही गांधी की जगह बाबा साहेब दलितों के मसीहा के नाम पर पुज गए और कांग्रेस के हाथ से दलित वोट बैंक खिसक कर कांशीराम की शिष्या मायावती की बहुजन समाज पार्टी के हाथ में पहुंच गया। अब कांग्रेस की भी यह मजबूरी हो गई है, कि वह दलित वोटों के लिए गांधी का सहारा छोड़ कर बाबा साहेब का पल्ला पकड़े, और इसी मजबूरी के कारण ही राहुल गांधी भी बाबा साहेब अम्बेडकर के जन्मदिन पर उनकी मूर्ति पर माला पहनाने जा पहुंचे। कुल मिलाकर यह सारा तमाशा इसीलिए हो रहा है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, और दोनों ही पार्टीयां इन चुनावों में अपनी सरकार बनाने की कोशिश कर रही हैं।
समन्वयक मण्डली रसातल में पहुंचा दी
मुनीन्द्र तिवारी शहडोल।
गांवों की प्राथमिक शिक्षा के बुनियादी स्तर को ऊपर उठाने के लिये विश्व प्रेरणा से भारत शासन के मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा शुरू की गयी सर्व शिक्षा अभियान योजना शहडोल जि़ले के ब्यौहारी जन स्त्रोत समन्वयक अजीत श्रीवास्तव व उनकी मण्डली ने मिलकर रसातल सहित बी.आर.सी. समन्वयक भोपाल और नगरों में सेटल हो गये हैं। और बच्चों का भविष्य और उद्देश्य नष्ट हो गया। इन सभी के महानगरों में सेटल होने के पीछे गत वर्षों सर्वशिक्षा अभियान योजना की राशि के क्रियान्वयन भ्रष्टाचार और का$गज़ी खाना पूर्तियों में बढ़ चढ़ा कर हड़प किये जाने के आरोप सदैव से लगते रहे हैं, लेकिन तीसरी बार लम्बे समय से ब्यौहारी बी.आर.सी. समन्वयक बनने में कामयाब अजीत श्रीवास्तव और उनके मण्डली के $िखला$फ प्रशासनिक बाहों में दम नहीं। सूत्रों का कहना है कि आज ब्यौहारी बी.आर.सी. कार्यालय को आवंटित महत्वपूर्ण सामग्रियां नदारत हंै मात्र बिलिंग और औचित्य हीन सामग्रियों का स्टाक मात्र भर शेष है। कार्यालय में मात्र छोटे स्तर के एकाध कर्मचारी ही पाए जाते है शेष मण्डली के सरगना सहित अपने उच्च कारोबारों में व्यस्त अधिकारी नदारत हंै। जानकार लोगों को दावा है कि उस तरह इस दौरान ब्यौहारी बी.आर.सी. के अंतर्गत शिक्षा के स्तर को उठाने के सामग्रियों भवन निर्माण की राशियों का मनमानी उपयोग किये जाने की पूरी छूट और शासन वरिष्ठ अधिकारियों को क्रियान्वयन शत प्रतिशत सही बताये जाने की जानकारी देने को लोग हास्यप्रद बता रहे हैं। ब्यौहारी उत्कृष्ट विद्यालय रसायनशास्त्र के अध्यापक अजीत श्रीवास्तव को रिक्त कर ब्यौहारी बी.आर.सी. तीसरी बार तैनात किये जाने के बाद भ्रष्टाचार गतिविधियों को संचालित किये जाने के दौरान उनकी गंभीर अनियमितताएं अधिकारियों के सामने आयीं, लेकिन अनियमितताओं के सामने आने के बाद प्रशासनिक हल्कों में कुछ दिनों ब्यौहारी बी.आर.सी. कार्यालय प्रमुख की कारगुज़ारियां सुर्खियों में रहने के बाद पता नहीं बिना माकूल कार्यवाही हुए ही दब जाती है क्यों। पूर्व में ज्ञात आय स्त्रोतों से कई गुना अधिक सामग्री सम्पत्ति ब्यौहारी भोपाल, सतना, रीवा में संचित किये जाने की शिकायत और म.प्र. विधानसभा में 35 अतिथि शिक्षकों को मानदेय $फजऱ्ी आहरण कर लिये जाने के मामले की जानकारी लम्बी जांच पश्चात गत दिनों अतिरिक्त कलेक्टर शहडोल डॉ.के वाशुकी द्वारा की गयी छापामार कार्यवाही के दौरान गंभीर प्रशासकीय और वित्तीय अनियमितताएं प्रकाश में आने के बाद आज तक कार्यवाही नहीं हुई। बताया जाता है संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आश्रम में वास्तविक उपस्थिति संख्या से कई गुना अधिक बताकर लगभग मार्च माह का उपयोग करते हुए सात लाख को बोगस बिल शामिल किये जाने की भनक प्रशासन को लगी थी। उल्लेखनीय है कि उक्त आश्रम के प्रभारी समन्वयक के रिश्ते के साले रीतेश श्रीवास्तव बताये जाते है। इसी तरह गुरू शिष्य पुत्र के तकनीकी निर्देशन नियंत्रण में पिछले वर्षों शाला माध्यमिक शालाओं अतिरिक्त कमरों किचन शेडों के निर्माण कामों में सा.शा. कर राशियां निकाल ली गयीं अब क्षेत्र की बिल्डिंग आधी अधूरी पड़ी है और जो पूरी हो भी गयी है वह भी धराशायी होने की स्थिति में हैं। क्षेत्र की बहुत बिल्डिंगों का निर्माण प्राक्कलन के विपरीत किया गया है उदाहरण के लिये कन्या मा.वि. भवन ब्यौहारी है। विडंबना यह है कि निर्माण के मानक मापदण्ड की घोर अनदेखी अनियमितता किये जाने के बावजूद संबंधी तकनीकी विशेषज्ञ अपने मूल विभाग से अपनी सेवाएं ग्रामीण यांत्रिक सेवा में करा ली है, जिसके कारनामों का खुलासा भी गत दिनों कलेक्टर के सामने आया है। लोगों का कहना है अजीत श्रीवास्तव इसके पूर्व अध्यापक के साथ लड़कों को ट्यूशन पढ़ा अपना घर चलाते थे। अब भाई अंजनी श्रीवास्तव की जि़ला सहकारी बैंक में बाबू की सेवा और अजीत श्रीवास्तव की सेवा से करोड़ों की दौलत कैसे?
ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजनामें लाखों का घोटाला
घनश्याम नामदेव
मुलताई (बैतूल)। भारत शासन द्वारा जनहित में लागू की गई रोज़गार गारंटी योजना का लाभ भले ही ग्रामीण जनता को हुआ हो या नहीं, लेकिन बेनामी ठेकेदार व अपनी राजनैतिक रसू$ख रखने वालों को अवश्य हुआ हैं। प्रभातपट्टन विकासखण्ड में सड़कों के निर्माण में ऐसे लोगों के नाम सरपंचों ने चेक काट दिये, जिनका न तो पेट्रोल पम्प है न डीज़ल पम्प है। इनका डीज़ल-पेट्रोल से काई भी मतलब नहीं है वे तो भ्रष्टाचार की $फसल काट रहे हैं।
सन् 2006 से 2008 तक प्रभातपट्टन ब्लाक में 65 ग्राम पंचायतें में 375 ग्रेवल सड़कों पर रोलर चलाने का जि़ला पंचायत से 900 रूपये प्रतिदिन का अनुबंध ब$गैर डीज़ल के विजय मुनरे प्रभातपट्टन से हुआ था। इन्हीं सड़कों पर पानी डालने के लिए टेंकर 700 प्रतिदिन की दर से अतुल ठाकरे बिसनुर से अनुबंध हुआ थ, जिसमें उन्हें सरपंचों को डीज़ल प्रदाय नहीं किया जाना था। किंतु इन ठेकेदारों के अलावा अन्य लोगों को भी रोड रोलर और पानी के टेंकर के बिलों के अलावा सरपंचों से लाखों रूपये का पेट्रोल व डीज़ल के बिलों का भुगतान करवा लिया। अधिकारी से मिलीभगत होने के कारण आडिटरों द्वारा भी आपत्ति नहीं लगाई गई। इस तरह डीज़ल के नाम पर 32 लाख 25 हज़ार तीन सौ रूपये का चूना शासन को लगाया गया। विजय मुनरे, अतुल ठाकरे ने डीज़ल के अलावा रोड रोलर पानी के बिलों का $फजऱ्ी प्राप्त कर लिया। डीज़ल का भुगतान अतुल ठाकरे को 10 लाख 83 हज़ार 700 सौ, विजय मुनरे को 17 लाख 97 हज़ार 8 सौ, मिथुन विश्वास को 45 हज़ार 3 सौ, $खलील भाई को 71 हज़ार नौ सौ, रामकिशन को 59 हज़ार 500 का अनियमित भुगतान किया गया। सरपंचों द्वारा ऐसे लोगों को डीज़ल के भुगतान के चेक काटे गये, जिनके पास डीज़ल पम्प नहीं हंै।

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