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Friday, April 2, 2010

यारों का यार खबरयार




अंधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपनों को देय

मिल बांट कर खा रहे हैं नेता
Justify Full जी.डी.गोयल नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के विधायकों और मंत्रियों ने विधानसभा सत्र में अपनी तन$ख्वाह और भत्ते बढ़ा लिए। अब मध्यप्रदेश के विधायकों को लगभग 50 हज़ार रूपये मिला करेंगे। यह $फैसला ऐसे समय में किया गया है, जब कि न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश में जनता बेरोज़गारी और महंगाई की मार से कराह रही है। केन्द्र और राज्य दोनों ही सरकारें, सरकारी खर्चा पूरा करने और सरकारी कंपनियों का घाटा पूरा करने के नाम पर टैक्स पर टैक्स बढ़ाये जा रही है। देश के लोग ऐसे समय में अपने नेताओं से त्याग और मदद की उम्मीद कर रहे हैं।
भारत की आज़ादी से पहले जिन नेताओं ने देश के लिए कुर्बानियां दी थी, उन्होंने उस काम के लिए देश की जनता से ना कोई तनख्वाह मांगी थी, और ना उनसे किसी भत्ते की उम्मीद की थी। सरदार भगत सिंह हो, चन्द्रशेखर आज़ाद हो, या सुभाष चन्द्र बोस, किसी ने भी अपनी जान इस लालच में नहीं दी थी कि आज़ाद होने के बाद देश की जनता उनकी मूर्तियां लगवायेगी या उनके परिवार वालों को उसका कोई मुआवज़ा देगी। उन्होंने ये कुर्बानियां देश और देश की जनता के सम्मान और सुखी भविष्य बनाने के लिए दी थीं। इसीलिए उन्हें नेता और रहनुमा कहा गया।
देश के आज़ाद होने के बाद भी यह प्रश्न उठा था, कि जिन लोगों के कंधों पर देश को चलाने की जि़म्मेदारी दी जायेगी, क्या वे उसके बदले में जनता से कुछ मांगेंगे? उस ज़माने के नेताओं ने एक स्वर से इस बात से इंकार किया था। उनकी नज़र में देश सेवा की कोई कीमत नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन हमारे समझदार नेताओं ने कहा कि अगर देश के रहनुमाओं को कुछ नहीं दिया गया, तो हो सकता है कि अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वे बेईमानी का रास्ता अपनाने और जनता के धन का दुरूपयोग करने लगें। इसलिए यह तय किया गया कि जितने दिन वे विधान सभा अथवा संसद में चुन कर रहेंगे और देश के लिए काम करेंगे, उतने दिन उन्हें जनता के धन से मानदेय और खर्चा मिलेगा। उस समय उन नेताओं को अंदाज़ा भी नहीं रहा होगा, कि अपने नेता इस मानदेय को अपना अधिकार ही बना लेेंगे और उसके बाद भी जनता को लूट कर खाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इतना ही नहीं इन नेताओं ने पहले तो यह कानून बना लिया कि अगर एक बार चुन गए, तो चाहे दो दिन विधायक रहें या 100 दिन, पूरी तन$ख्वाह और भत्तों के अधिकारी होंगे। उसके बाद भी जीवन भर उन्हें पेंशन मिलेगी। संसद हो या विधानसभा, देश और जनता की भलाई के लिए आने वाले हर बिल पर ये नेता सालों बहस करते रहें और उसके बाद भी कई बार तो वे पास भी नहीं होते, लेकिन जब इन नेताओं की तनख्वाह बढ़ाने या $खर्चे और सुविधायें बढ़ाने की बात की जाती है, तो उस बिल को पास होने में एक घंटा भी नहीं लगता।
सारे राजनैतिक मतभेद भुला कर, सारे नेता तुरत उसे पास करने के लिए सहमति में हाथ उठा देते हैं, जैसा कि अभी मध्यप्रदेश में हुआ है। दर असल हमारे संविधान निर्माताओं को यह $गलत $फहमी थी, कि जिस तरह देश को आज़ाद करने के लिए नेताओं में ईमानदारी और जन सेवा की भावना थी, उसी प्रकार आज़ादी के बाद के नेता भी सेवक और ईमानदार होंगे। बस यही परउनसे गलती हो गई उन्होंने आने वाली नेताओं की पीड़ी पर विश्वास करके जनता का धन उन्हें सौंप दिया, और जब $खज़ाने की चाबी उन्हें मिल ही गई, तो जब जितना जी चाहा मिलजुल कर बांट लिया। अब हालत यह हो गई कि देश का आम आदमी दाने दाने और पैसे पैसे को तरस रहा है, और उससे ही बटोरे गए धन को ये नेता मिल बांट कर खा रहे हैं।



आर.ई.एस. में भ्रष्टाचार चरम पर
नष्ट अनुपयोगी कुएं का किया सत्यापन दोषी अधिकारी पर कार्यवाही की मांग कमिश्नर से
हृ अनूप सक्सेना राजगढ़। जि़ले में ब्यावरा में जन भागीदारी योजना से शासकीय चिकित्सालय परिसर में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग को ऐजेंसी नियुक्त कर बनाये कुएं के निर्माणधीन अवस्था में लगभग समचा ही नष्ट हो जाने तथा नष्ट कुएं का ही सत्यापन तत्कालीन एस.डी.ओ. आर.ई.एस. ब्यावरा के.के. जैन द्वारा किये जाने, फलस्वरूप ठेकेदार को पूर्ण भुगतान कर देेने का सनसनी $खेज़ प्रमाणित भ्रष्टाचार का प्रकरण सामने आया है। जि़ले के जागरूक पत्रकारों ने इस मामले में गत दिवस जि़ला मुख्यालय पर आये कमिश्नर श्री पुखराज मारू साहब को अवगत करा दोषी अधिकारी पर कार्यवाही की मांग की है। अस्पताल परिसर ब्यावरा में कुआं निर्माण के लिये 2,00,000 रूपये की लागत तय कर, 1 लाख रूपये जनभागीदारी व 1 लाख रूपये निर्माण ऐजेंसी द्वारा व्यय किये जाने थे। मरीज़ों एवं परिजनों के लिये जल व्यवस्था की जाने के सम्बंध में यह कुआं निर्मित किया जाना था। आर.सी.सी. से यह कुआ निर्माण होना था। अत्याधिक गुणवत्ता-हीन निर्माण कार्य के चलते यह कुआं पूर्ण रूप से निर्मित होते ही धसक कर समूचा ही नष्ट हो गया और एक गड्डे के रूप में उसके अवशेष चिकित्सालय परिसर में मौजूद हंै। कुएं के समूल नष्ट हो जाने के बाद भी भ्रष्टाचार के निरूकुंश घोड़े पर सवार ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के एस.डी.ओ. के.के.जैन द्वारा 26/6/2009 को उक्त शासकीय धन की बर्बादी के जीवंत प्रतीक बने कुएं का सत्यापन कर दिया गया। इस आधार पर ठेकेदार ने अपना पूर्ण भुगतान 1,22,640 रूपये विभाग से 1/8/2009 को प्राप्त कर लिया। इस समूचे घटनाक्रम में भ्रष्टाचार को किसी हद तक जि़ले में पल्लवित पोषित किया जा रहा है, इसका प्रमाण भी मिलता है, कि दोषी अधिकारी के.के.जैन जिनको स्थानांतरण के चलते 1/7/2009 को ब्यावरा से जाना था, श्री जैन द्वारा जाते जाते इस नष्ट कुएं का सत्यापन कर ठेकेदार से कमीशन प्राप्ति का रास्ता सुगम कर ठेेकेदार का भुगतान कराया। अनुपायोगी नष्ट इस कूप की चिंता न तो रोगी कल्याण समिति चिकित्सालय ब्यावरा को है, न ही शासकीय राशि की निष्फल व्यय के रूप में हुई इस बर्बादी पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा दोषी अधिकारी के विरूद्ध किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक या विभागीय जांच जैसी कार्यवाही प्रचलित न करने से समूचे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अनियमितताओं के आदी रहने का प्रमाण मिलता है।
गत दिवस पत्रकारों ने जि़ला मुख्यालय पर आये आयुक्त भोपाल संभाग श्री पुखराज मारू को सप्रमाण शासकीय धन की इस कुएं के निर्माण में हुई बर्बादी के बारे में अवगत कराया, तथा दोषी अधिकारी के.के.जैन के विरूद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग, तथा तुरंत निलंबन की मांग की गई। आयुक्त श्री मारू द्वारा शीघ्र इस विषय पर एक्शन लेने का भरोसा पत्रकारों को दिया। देखना यह है इस सिद्ध भ्रष्टाचार के मामले में कब तक आयुक्त महोदय कार्यवाही कर पाते हैं।



पी.डी.एस.राशन में घोटाला ही घोटाला बड़े $गज़ब का है जि़म्मेवार अधिकारियों का खेल $गरीब न पायें चावल चीनी, न मिले मिट्टी तेल अफरा तफरी मामले में उच्चाधिकारी को बचा कर निम्न स्तर कर्मचारियों की बली
संजय शर्मा राययढ़ (छ.ग.)। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हुये लाखों के खाद्यान्न घोटाले में कलेक्टर द्वारा दो खाद्य निरीक्षकों को निलंबित तो कर दिया गया है, परंतु मुख्य दोषी प्रभारी जि़ला खाद्य अधिकारी राजेश जयसवाल ही है, उसे भी निलंबित करने की शिवसेना ने मांग की है।
शिवसेना के जि़ला प्रमुख राजेश जैन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुये कहा कि $गरीबों के हक के राशन की अफरा तफरी केवल रायगढ़ एवं पुसौर में ही नहीं हो रही है, बल्कि पूरे जि़ले में पीडीएस के राशन की कालाबाज़ारी धड़ल्ले से हो रही है और खाद्य विभाग के अधिकारी या तो इस ओर ध्यान देते ही नहीं हैं, अथवा जानबूझकर ध्यान देना नहीं चाहते हैं। केवल राशन ही नहीं $गरीबों को मिलने वाला नीला मिट्टी तेल भी उन तक पहुंच नहीं पाता है। श्री जैन ने कहा कि वर्तमान में 61 लाख रूपये के पीडीएस घोटाले के सामने आने के बाद भला हो पुलिस प्रशासन का जिन्होंने पूरी निष्पक्षता के साथ जांच कर दोषी लोगों पर कार्रवाई की अन्यथा खाद्य विभाग के भरोसे तो यह मामला भी पूर्व के अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता। पूर्व में खाद्य निरीक्षकों द्वारा उड़ीसा बाई-पास पर भारी मात्रा में अवैध रूप से मिट्टी तेल का भंडारण करने वाले एक व्यापारी को पकड़ा था, जिसके बाद खाद्य अधिकारी ने इस बात की जांच ही नहीं की कि आ$िखर ये केरोसीन आया कहां से, तथा कहां खपाया जा रहा है? रायगढ़ व पुसौर की 34 राशन दुकानों में खाद्यान्न की अफरा-तफरी के मामले में कलेक्टर द्वारा खाद्य निरीक्षक सी एस नेताम व श्वेता अग्रवाल को कार्य में लापरवाही का दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया है, परंतु यह कार्रवाई संतोषजनक नहीं है, चूंकि जांच करने का दायित्व अथवा अपने मातहत अधिकारियों से जांच करवाने का काम जि़ला खाद्य अधिकारी का है, तथा उन्होंने भी कभी स्वयं जांच करने में कोई रूचि नहीं दिखाई, आ$िखर क्यों? जि़ला प्रशासन ने एक तरह से इतने बड़े मामले में दो छोटे अधिकारियों को बली का बकरा बना कर जि़ला खाद्य अधिकारी राजेश जायसवाल को बचाया है, जो कि सरासर $गलत है। पूरे जि़ले में पीडीएस के राशन में घपला चल रहा है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच करवाया जाना चाहिये। वहीं शिवसेना जि़ला प्रमुख राजेश जैन ने खाद्य अधिकारी राजेश जायसवाल को भी निलंबित करने की मांग की है।

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