
मनमोहन की माया
आलोक तोमर
एक दिलचस्प और हृदय विदारक संयोग यह है कि झारखंड में भाजपा की मदद से सरकार चला रहे और अब तक लोकसभा के सदस्य बने हुए मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने लोकसभा में आ कर यूपीए के पक्ष में मतदान किया। भाजपा के नेता यह जानते थे और झारखंड में उथल पुथल नहीं हो, इसलिए खामोश बने रहे। मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी के और लालू प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल के कुल 26 सांसद हैं।
इन दोनों दलों ने कटौती प्रस्ताव पेश किए थे, मगर मतदान के समय वाक आउट कर के उन्होंने सरकार की मदद कर दी। मायावती, मुलायम सिंह और लालू, तीनों ने वही पुराना मुहावरा दोहराया, जिसके अनुसार वे सांप्रदायिक ताकतों यानी भाजपा को सत्ता में आते नहीं देखना चाहते हैं। इसके बावजूद यूपीए को बहुत मु$गालते में नहीं रहना चाहिए। उसे 289 वोट मिले, जो सदस्य संख्या के आधे यानी 272 से सि$र्फ 17 ज़्यादा हैं। ज़ाहिर है कि मायावती के 21 सांसद मदद नहीं करते और मुलायम और लालू वाक आउट नहीं करते तो सरकार संकट में फंस जाने वाली थी।
कांग्रेस के मैनेजरों ने इतना इंतज़ाम कर लिया कि भाजपा और वाम मोर्चा मिल कर बाकी दलों की मदद से कटौती प्रस्तावों को ले कर सरकार को जो संकट में डालने वाले थे, अपने इरादों में कामयाब नहीं हुए। एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने तो मंज़ूर भी किया कि बसपा के 21 सदस्य हमारे पक्ष में आए और इसका मतलब यह है कि हमारे पास अपने 272 सांसद नहीं हैं और जिस दिन सारा विपक्ष तय कर लेगा, सरकार गिर जाएगी।
देवेगौड़ा के जनता दल एस के यूपीए से निकल जाने के बाद यूपीए के पास 271 सदस्य रह गए हैं मगर देवेगौड़ा भी $गैर हाजि़र थे। तृणमूल एनसीपी और तीन सांसद दिल्ली समय पर नहीं पहुंच पाए, जबकि उन्हें पहले से पता था कि लोकसभा में करो या मरो की स्थिति हैं। कांग्रेस को उम्मीद थी कि छोटे दल भाजपा से निकाले गए जसवंत सिंह कटौती प्रस्तावों के $िखला$फ वोट डालेगी मगर ऐसा हुआ नहीं। पार्टी में आम राय थी कि बसपा के साथ समझौता करने से राजनैतिक लेन देन का आरोप लगेगा। मायावती ने समर्थन की घोषणा करते वक्त सांप्रदायिक ताकतों वाला मुहावरा ही इस्तेमाल किया और यह भी कह दिया कि उन्हें और उत्तर प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार अकारण परेशान कर रही है। लेकिन अब ज़ाहिर हो चुका है कि सरकार बनी रहे इसके लिए भी मायावती का समर्थन ज़रूरी है और मायावती ब$गैर दाम वसूले कोई काम नहीं करती। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मतदान के बाद राहत की मुद्रा में कहा, कि सदन ने मान लिया कि सरकार की नीतियां सही हैं।
असली दिक्कत लालू और मुलायम सिंह को होने वाली है क्योंकि $खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि इन लोगों ने यानी विपक्ष के तेरह पार्टियों के गठबंधन ने धमकियां दे कर पूरे एक महीने देश को और लोकतंत्र को बंधक बनाए रखा था। अब दिलचस्प स्थिति यह है कि भाजपा और वाम मोर्चा एक साथ हैं और बाकी विपक्ष बिखरा हुआ है। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार कटौती प्रस्तावों पर मतदान हुआ है।
मीरा कुमार से पहले कहा गया था कि वे कटौती प्रस्तावों को मंज़ूर ही न करे, लेकिन उन्होंने सांसदों के संवैधानिक अधिकार का हवाला दे कर इन्हें मंज़ूर किया। संसद सचिवालय के अधिकारियों ने जानबूझ कर किया या वाकई यह तकनीकी भूल थी कि मतदान के समय ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम $खराब हो गया। पहले सारे कटौती प्रस्ताव $गनीमत से $खरिज किए गए और फिर पर्चियों से मतदान करवाया गया। प्रणब मुखर्जी सबसे ज़्यादा सक्रिय थे और सोनिया गांधी खामोशी से तमाशा देख रही थी। ममता बनर्जी और आश्चर्यजनक रूप से सांसदों के बीच घूम कर असली मैनेजमेंट कर रहे थे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लगातार $खमोश बैठे रहे और उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं आया। वैसे भी उन्हें मतदान करने का अधिकार नहीं था क्योंकि वे राज्य सभा के सदस्य हैं।
कमाई का ज़रिया बनी मुख्यमंत्री कन्यादान योजना
महेश गोस्वामी
सारनी (बैतूल)। मुख्यमंंत्री कन्यादान योजना अधिकारियों के लिए वरदान साबित हो रही है। एक जोड़े के लिए 7500 रूपये का शासन अनुदान दे रही है, जो अधिकारियों के लिए कमाई का ज़रिया बन गया है। ऐसा ही एक मामला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी में बीते दिनों मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 207 जोड़ों का सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान वर वधु के परिवारों के भूखे पेट वापस जाने के अलावा सामग्री $खरीदी एवं व्यवस्थाओं में भारी अनियमित्ताएं होने का मामला उजागर हुआ है। बताया जाता है कि विकास खण्ड घोड़ाडोंगरी की जनपद पंचायत को मुख्य मंत्री कन्या दान योजना के लिए 15 लाख 57 हज़ार रूपये मिले थे। जिसमें 56 पंचायतों से 207 जोड़ों की शादियां कराईं गईं । शासन ने एक जोड़े के लिए 6500 रूपये एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए 1000 रूपये प्रति जोड़े के हिसाब से भुगतान किया था। जनपद पंचायत ने एक जोड़े को 1950 रूपये एक मंगलसूत्र एक ग्राम और 125 मिली ग्राम एवं 2900 रूपये का भारत पेट्रोलियम का एक गैस कनेक्शन देने के अलावा अन्य सामग्री प्रदान की है। इसके अलावा प्रत्येक जोड़े के परिवार के 14 लोगो को 25 रूपये प्रति थाली के हिसाब से खाना देने का प्रावधान है। लेकिन जनपद पंचायत घोड़ाडोंंगरी के द्वारा कराये गये सामुहिक विवाह में ऐसा कुछ देखने में नज़र नही आया बल्कि प्रत्येक जोड़े के परिवार से आए लोगों को खाना नही मिलने पर भूखे पेट वापस लौटना पड़ा। इतना ही नहीं व्यवस्था के नाम पर 45 टेंट लगाये थे। जिसका भुगतान करीबन 50 हज़ार रूपये किया गया है। जबकि 15 बाई 15 का टेंट मात्र दो सौ रूपए में लगता है। उसके अनुसार 45 टेंटों का भुगतान 9 से 10 हज़ार रूपए होना चाहिए था। आश्चर्य की बात तो यह है कि एक जोड़े को दिये गये रज़ाई गद्दे में रूई के स्थान पर जूट भरा हुआ है। वहीं एक नजऱ बाज़ार की ओर करें तो एक सोने का मंगलसूत्र ब$गैर मार्क का 1600 से 1700 रूपये, ग्रामीण क्षेत्रो के लिए एचपी गैस कनेक्शन 2500 से 2700 रूपए में मिल जाता है। लेकिन यह सभी सामग्री जनपद पंचायत ने अधिक दामों पर $खरीद की है। अगर इस सामूहिक विवाह मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाये तो जनपद पंचायत के अधिकारियों के कई चेहरों पर से नकाब उठ सकता है।
अधिकारी बोले:-
जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी के अंतर्गत जो सामुहिक विवाह आयोजन में जो अनियमित्ताए हुई हैं, उनकी जांच कराई जायेगी।
विजय आनंद कुरील, कलेक्टर बैतूल
इनका कहना है:-सामूहिक विवाह के लिए जो सेम्पल दिखाये गये थे, वो नहीं दिये गये हैं। इस कार्यक्रम के दौरान जो भी अनियमित्ताएं हुई हैं, उनकी जांच कराई जायेगी। भुगतान रोके जाने के संबंध में भी कार्यवाही की जावेगी।
मनीराम बरकड़े, अध्यक्ष जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी।

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