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Saturday, June 19, 2010




अब चैन से सो नहीं
पाएंगे शिवराज

गडकरी को यूपी के लिये सेनापति के रूप में उमाभारती ही उपयुक्त केन्डीडेट नज़र आती हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती दलित नेता हैं, लेकिन अब वो राजनीति कर रही हैं, उसमें उन्होंने सर्वणों को भी शामिल कर लिया है, ऊपर से अपनी मूर्तियां बनवाकर जगह-जगह स्थापित कर रही हैं और मंचों समारोहों में नोटों की मालायें धारण कर रही हैं। इसके कारण उनका दलित प्रेम अब लोगों को 'दौलत प्रेमÓ दिखने लगा है, जबकि उमा भारती शुरू से ही दलितों के ह$क के लिये लड़ती रही हैं।

चंद्रशेखर सिंह
उमा भारती की भाजपा में वापसी तय मानी जा रही है। हालांकि मध्यप्रदेश भाजपा के महारथी उनके प्रवेश में अड़चनें डाल रहे हैं, किंतु भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस वक्त सि$र्फ यूपी के आगामी चुनाव ही दिखाई दे रहे हैं। दरअसल यूपी में जिस तरह से बसपा सुप्रीमो मायावती और कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं, भाजपा के पास कोई ऐसा पत्ता नहीं है, जिसे वो 'तुरूपÓ की चाल के रूप में चल सके। यूपी में भले ही कलराज मिश्र, लालजी टंडन, वरूण गांधी और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह जैसे कद्दावर सिपाही हों, पर गडकरी केवल उनके बलबूते आने वाले विधानसभा चुनाव का रण नहीं लडऩा चाहते। गडकरी जानते हैं कि वरूण गांधी को छोड़कर बाकी नेता भले ही राजनीति के धुरंधर हों, पर इनमें से कोई भी चुनाव जिताऊ नहीं है। वरूण गांधी को ज़रूर राहुल गांधी के $िखला$फ प्रोजेक्ट किया जा सकता है। वे भीड़ भी जुटा लेते हैं। पर अक्सर वे अनर्गल व भड़काऊ बयानबाज़ी कर बैठते हैं जिसकी वजह से कई बार भाजपा को बैकफुट पर आना पड़ता है।
इसलिये गडकरी को यूपी के लिये सेनापति के रूप में उमा भारती ही उपयुक्त केन्डीडेट नज़र आती हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती दलित नेता हैं, लेकिन अब वो राजनीति कर रही हैं, उसमें उन्होंने सर्वणों को भी शामिल कर लिया है, ऊपर से अपनी मूर्तियां बनवाकर जगह-जगह स्थापित कर रही हैं और मंचों समारोह में नोटों की मालाएं धारण कर रही हैं। इसके कारण उनका दलित प्रेम अब लोगों को 'दौलत प्रेमÓ दिखने लगा है, जबकि उमा भारती शुरू से ही दलितों के ह$क के लिये लड़ती रही हैं। यूपी में बुंदेलखंड की मांग ज़ोरों से उठ रही है, ऐसे में उमा भारती को बुंदेलखंडी होने का अवश्य $फायदा मिलेगा। $कयास लगाया जा रहा है कि यदि गडकरी उमा को यूपी चुनाव की कमान सौंपते हैं, तो उमा बुंदेलखंड के संभावित नये राज्य को लेकर अवश्य ही कोई बड़ा अभियान चलायेंगी। भाजपा के विधानसभा चुनावी घोषण-पत्र में भी बुंदेलखंड को स्थान मिल सकता है। इसका $फायदा यकीनन भाजपा को मिलेगा। यही सब गणित लगाकर शिवराज सिंह चौहान और प्रभात झा के विरोध के बावजूद गडकरी उमा के लिये 'वेलकमÓ कह रहे हैं।
गडकरी ने शिवराज से कह दिया है कि यदि उमा वापस आती हैं, तो उनका कार्य क्षेत्र मध्यप्रदेश में नहीं होगा। वे राष्ट्रीय राजनीति के परिदृश्य में ही दिखाई देंगी। यूपी चुनाव के कारण पार्टी हित में अंतत: शिवराज और प्रभात झा सहित प्रदेश के भाजपा दिग्गजों की गडकरी की बात माननी ही पड़ेगी।
विश्लेषण करें तो पक्का है कि यदि उमा यूपी चुनाव में भाजपा की बागडोर संभालती हैं तो भाजपा, बसपा और कांग्रेस में मुकाबला दिलचस्प हो जायेगा। भाजपा दौड़ में वापस आ जायेगी, चूंकि सपा का लगभग सफाया हो गया, और जो बचा है उसे अमर सिंह खत्म करने का अभियान चलाये हुए हैं। यूपी में कांग्रेस के पास केवल एक राहुल गांधी मुख्य योद्धा हैं, पर सब जानते हैं कि वे सि$र्फ यूपी में कांग्रेस को बचाने के लिये ही इतनी कवायद कर रहे हैं, क्योंकि उनका लक्ष्य तो राष्ट्रीय राजनीति में सर्वोपरि पद पर विराजमान होना है।
उनके अलावा ऐसा कोई नेता नहीं है, जो दम दिखा सके। वैसे यूपी में महिला नेताओं की जंग होती दिख रही है। ऐसे में कांग्रेस के पास रीता बहुगुणा जोशी दमदार नेता मानी जाती हैं, किंतु वरूण गांधी स्टाईल में वो भी कुछ का कुछ बोल हमेशा मुसीबतें मोल लेती रहती हैं। ऐसे में मुख्य रूप से मायावती के आगे यदि कोई टिकता है, तो वो यकीनन उमा भारती हो सकती हैं और यदि उमा भारती भाजपा के रथ में सवार होकर मायावती पर $फतह पाती हैं, तो निश्चित रूप से उनका कद बढ़ेगा। उमा भारती जि़द्दी हैं और विरोधी उन्हें घायल शेरनी तक की उपमा देते हैं। उमा को जानने वाले कहते है कि यदि वे यूपी में भाजपा को सरकार बनाने की स्थिति में भी ले आती हैं, तो भी वे वहां कभी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी। उनकी नज़र हमेशा मध्यप्रदेश पर रहेगी। जब भी उनका कद बढ़ेगा, वे ताकतवर होकर उभरेंगी, वे ज़रूर मध्यप्रदेश लौटेंगी और अपने विरोधियों से चुन-चुन कर बदला लेंगी, जो उनके लिये मुसीबतें खड़ी करते रहे हैं, कर रहे हैं। शिवराज भी यह बात जानते हैं और इसीलिये वे उमा की वापसी की $िखला$फत किये जा रहे हैं। जिस दिन उमा भारती विधिवत रूप से भाजपा में शामिल हो जायेंगी, उसी दिन से शिवराज की आंखों से नींद उड़ जायेगी।

1 comment:

  1. ...प्रसंशनीय अभिव्यक्ति!!!

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