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Saturday, July 2, 2011







असहाय हुआ रेलवे टि· · दलाली · नासूर
वर्तमान हालात में आम आदमी ·ी हर तरफ से आफत है। ए· तरफ महंगाई ने आम आदमी ·ी ·मर तोड़ दी है तो दूसरी ओर उसे हर स्तर पर भ्रष्टाचार ने परेशान ·र रखा है। बच्चे ·ो अच्छे स्·ूल या ·ॉलेज में दाखिला दिलवाना है तो डोनेशन, रिटन और इंटरव्यू पास ·र लिया है तो पोस्टिंग ·े लिए डोनेशन... इतना ही नहीं, पिछले ·ई सालों से बढ़ते टूरिज्म ·े चलते रेलवे ·े टि·ट रिजर्वेशन में लगे दलालों ·ी पो-बारह हो गई है। आम आदमी ट्रेन से इसलिए सफर ·रता है ·ि बस और हवाई जहाज ·ी यात्रा ·ी अपेक्षा ट्रेन से सफर सस्ता पड़ता है, ले·िन अब इस सेक्टर में भी रेलवे ·े आला अधि·ारियों, ·र्मचारियों और दलालों ·ी मिलीभगत ·े चलते आम आदमी ·ो टि·ट अरक्षित ·रवाने ·े लिए मजबूरन दलालों ·ी शरण में जाना पड़ता है। इससे नतीजतन आम आदमी ·ी जेब पर प्रति टि·ट २०० से ५०० रुपए त· ·ा अतिरिक्त भार पड़ता है। टि·ट ·ो ब्लै· में बेचने वाले टि·ट ·ी दर आदमी ·ी जरूरत और हैसियत ·े हिसाब से तय ·रते हैं, इसी ·े चलते देशभर में ·ई रेलवे स्टेशनों पर ·ई बार सीबीआई ने छापामार ·र्रवाई ·ी, ले·िन नतीजा वही ढा· ·े तीन पात। अखिर ·ैसे होता है रेलवे ·ी दलाली ·ा खेल और इससे देश ·ी जनता ·ी जेब पर सालाना ·रोड़ों रुपए ·ा भार पड़ रहा है। यह भार अब जनता ·े लिए नासूर बन गया है। इन्हीं सब बातों ·ी पड़ताल इस लेख में ·ी गई है।
हाल ही सीबीआई ने जयपुर जंक्शन, ढेहर ·े बालाजी, गांधीनगर स्टेशन, एजेंट फर्म हेमेंद्र श्रीमाल, भर्तरी व जी.एस. लु बा फर्म पर अचान· जांच और ·ार्रवाई ·ी। सीबीआई ·ी ओर से ·हा गया ·ि लंबे समय से ऐसी शि·ायतें मिल रही थीं ·ि टि·ट दलाल और रेलवे ·र्मचारियों ·ी मिलीभगत से आम आदमी ·ो रिजर्वेशन मिलना ही मुश्·िल हो गया है और जब बात हो तत्·ाल आरक्षण ·ी तब तो यह समस्या और भी वि·ट हो जाती है। गौरतलब है ·ि टि·ट दलाल और रेलवे ·े टि·ट बु· ·रने वाली एजेंसियां आम आदमी से टि·ट ·ी ·ीमत ·े अतिरिक्त प्रति टि·ट अमूमन २०० रुपए प्रति टि·ट ·ी दर से वसूलते हैं। टि·ट पर अतिरिक्त ली जाने वाली धनराशि जरूरत और हैसियत ·े हिसाब से बढ़ा भी दी जाती है। ऐसे में मान लीजिए ·िसी परिवार में पांच सदस्य हैं और उन्हें आरक्षित टि·ट चाहिए तो उन्हें टि·ट ·ी राशि ·े अलावा ए· हजार रुपए अतिरिक्त बतौर आरक्षण ·े दलाल या एजेंसी ·ो देने होंगे। ऐसा नहीं है ·ि टि·ट ·ी दलाली ·ा यह गोरखधंधा सिर्फ जयपुर त· ही सीमित है, ·मोबेश देश ·े हर रेलवे स्टेशन पर यही हाल हैं। दिल्ली, मुंबई, ·ोल·ाता, मद्रास हो या आगरा, उज्जैन, लखनऊ हर जगह ·े रेलवे स्टेशन पर रेलवे ·े ·र्मचारियों और रेलवे ·े टि·ट बु· ·रने वाली एजेंसियों व टि·ट दलालों ·ी मिलीभगत ·े चलते यह ·ारगुजारी पूरे देश में बदस्तूर जारी है और अब यह आम आदमी ·े लिए भयावह समस्या में तब्दील हो चु·ी है। इसी ·े चलते ·ुछ महीने पहले ही देश ·े ·ुछ अन्य महानगरों ·े रेलवे स्टेशन पर भी टि·ट दलाली ·े खेल ·ी पोल खोलने और इसपर लगाम ·सने ·े उद्देश्य से ·ार्रवाई ·ी गई थी। मौटे तौर पर देशभर में आम जनता द्वारा ए· दिन में ·रोड़ों रुपए ·े रेलवे ·े टि·टों ·ा आरक्षण ·रवाया जाता है और प्रतिदिन रेलवे ·े टि·ट दलाल लाखों रुपए दलाली ·े खा जाते हैं। इस तरह दलालों ·े लिए टि·ट दलाली ·ा धंधा ·ाफी लाभदाय· सिद्ध हो रहा है। अब ए· टि·ट पर आरक्षण ·े नाम पर अगर दलाल प्रति टि·ट २०० रुपए लेता है तो जाहिर ये २०० रुपए उस·ी ही जेब में नहीं चले जाते बल्·ि इसमें रेलवे ·े ·र्मचारियों ·ा भी निश्चत हिस्सा होता है।
आशं·ा तो यह भी है ·ि रेलवे ·ी टि·ट दलाली से होने वाली आय में से ए· निश्चित हिस्सा रेलवे ·े उच्चाधि·ारियों ·े पास त· भी पहुंचाया जाता हो, जिस·े चलते दलाल ·ो रेलवे ·ी टि·ट ·ो ब्लै· ·े बेचने ·ा अघोषित रूप से खुला लाइसेंस मिल जाता है और वह धड़ल्ले से निडर हो·र टि·ट दलाली में धंधे में जम जाता है। ऐसे होता है खेल-दलाल रात २:०० बजे से ही रेलवे स्टेशन पर जा·र सो जाते हैं और आरक्षण ·ी खिड़·ी खुलने पर रेलवे ·ा ही ए· ·र्मचारी भीड़ ·ो देखते हुए व्यवस्था ·े नाम पर ·ाउंटर नंबर और ·ैंडीडेट नंबर सब·े फॉर्मों पर लगा देता है। रेलवे ·ा ·र्मचारी दलालों ·ो भलीभांति पहचानता है इसलिए पहले १ से १० त· ·े नंबर सभी ·ाउंटर पर दलालों ·े फॉर्म पर ही मार्· ·िए जाते हैं। ऐसे में आम आदमी ·ा नंबर चाहे वह ·िसी भी ·ाउंटर पर खड़ा हो ग्यारहवां ही आता है। उस·ा नंबर आते आते तत्·ाल में मिलने वाला आरक्षण दलालों ·े ही खाते में चला जाता है आम आदमी ·ो तो वेटिंग ही मिलती है। इस तरह से यह खेल जयपुर ही नहीं देश ·े सभी रेलवे स्टेशनों पर धड़ल्ले से चल रहा है। गौरतलब बात यह भी है ·ि रेलवे ·े टि·ट आरक्षण वाली खिड़·ियों पर ऐसे ही रेलवे ·े ·र्मचारियों ·ो पोस्टिंग दी जाती है जिन·ी दलालों से अच्छी साठ-गांठ होती है या जो पोस्टिंग ·े बाद दलालों से सांठ-गांठ ·रने में माहिर होते हैं। ऐसे में आम आदमी अपने आप ·ो ठगा-सा महसूस ·रता है। ·ई बार तो सीट होने पर भी आम आदमी से ·ह दिया जाता है ·ी फलां-फलां जगह ·े लिए सीट नहीं है, ऐसे में आम आदमी वेटिंग ·े झंझट में पडऩे ·े बजाय दलालों से ·न्फर्म टि·ट लेने में ही भलाई समझता है। ·िया जाता है दोहरा व्यवहार-रेलवे ·े टि·ट आरक्षण विंडो पर बैठे ·र्मचारी ·ी ओर से आम आदमी से तो ·ह दिया जाता है ·ि आप ए· बार में ए· या दो से ज्यादा रिजर्वेशन फॉर्म जमा नहीं ·रवा स·ते अगर आप·ो इससे ज्यादा फॉर्म जमा ·रवाने हैं तो नए सिरे से फिर से आरक्षण ·े लिए लगी लाइन में लगना होगा, जब·ि इससे इतर दलालों ·े लिए फॉर्म ·ी सं या संबंधी ·ोई सीमा नहीं होती, वे ए· बार में जितने चाहे फॉर्म जमा ·रवा स·ते हैं। यह सब सिर्फ इसलिए ·िया जाता है ·ि आम आदमी ·ो ज्यादा से ज्यादा असुविधा और परेशानी ·ा सामना ·रना पड़े। ए· तो आम आदमी ·ा इससे ·ीमती वक्त जाया होता है, दूसरा रेलवे ·े ·र्मचारियों ·ो असहयोगपूर्ण रवैया उन्हें निराश ·रता है ऐसे में तंग आ·र आम आदमी टि·ट ·े लिए दलालों ·ी शरण में पहुंच जाता है और न चाहते हुए भी प्रति टि·ट पर २०० से ५०० रुपए त· दलाल ·ो देता है। ·ई बार तो ऐसा भी होता है ·ि जितनी धनराशि ·े रेलवे से यात्रा ·रने ·े टि·ट नहीं होते उससे ज्यादा धनराशि तो उसे दलालों ·ी जेब में डालनी पड़ती है। आमतौर पर टे्रनों में १०-२५ प्रतिशत त· तत्·ाल ·ा ·ोटा होता है। गाड़ी रवानगी से तीन दिन पहले तत्·ाल बु·िंग शुरू होती है। बु·िंग ·ाउंटर सुबह ८:०० बजे खुलता है, ले·िन दलाल रात ·ो ही आ जाते हैं। ·ाउंटर खुलते ही दलाल टि·ट ले लेते हैं और जरूरतमंदों ·ो दलालों से ब्लै· में टि·ट लेने ·े लिए मजबूर होना पड़ता है।


·रोड़ों · टि·टों पर लाखों · दलाली
ए· अनुमान ·े अनुसार ए· दिन में पूरे देश से रेलवे ·े टि·ट से होने वाली आय ·रोड़ों रुपए में होती है। अब ·रोड़ों रुपए ·े टि·ट बु· ·राने पर लाखों ·ी दलाली होना तो जाहिर ही है। अगर यह मान लिया जाए ·ि पूरे देश में ए· दिन में महज २ लाख रुपए दलाल रेलवे ·े टि·ट ·े रिजर्वेशन ·े बतौर आम आदमी से ब्लै· में वसूलते हैं तो महीने भर में दलाली ·ी राशि लगभग ६० लाख रुपए हो जाएगी और अगर हम सालाना ·ी बात ·रें तो यही र·म ·रीब ६१ ·रोड़ रुपए ·ा आं·ड़ा पार ·र जाती है। इस बात से अंदाजा लगाया जा स·ता है ·ि रेलवे ·े टि·ट ·े नाम पर आम आदमी ·ी जेब से ·ितना पैसा गैर ·ानूनी रूप से वसूला जाता है, जिस·ा बंदरबांट दलाल, रेलवे ·े ·र्मचारी और अधि·ारी आपस में ·रते हैं। ·ई बार सीबीआई देश ·े विभिन्न शहरों ·े रेलवे ·ाउंटर्स पर और टि·ट बु· ·रने वाली एजेंसियों ·े यहां छापामार ·ार्रवाई ·र चु·ी है, ले·िन आज त· भी रेलवे ·े टि·ट ·े दलालों से आम आदमी ·ो निजात नहीं मिली है । इस·ी ए· मु य वजह यह है ·ि दलाली ·ा पैसा रेलवे ·े आला अफसरों त· भी पहुंचता है और वे रसूखदार अफसर ·ेन्द्र में अपनी पहुंच ·े बूते सीबीआई ·े ·ाम में हस्तक्षेप ·रने से नहीं चू·ते, इससे दलालों पर प्रभावी ·ार्रवाई ·रना संभव नहीं हो पाता। इससे इतर रेलवे ·े यही रसूखदार अफसर दलालों ·ी शरणस्थली बन जाते हैं।




भ्रष्टाचार · गंगा बह रही
मामला छपारा जनपद ·

ठ्ठ वृक्षारोपण · नाम पर लाखों बहे ठ्ठ शासन · मंशा पर फिरा पानी ठ्ठ सरपंच/सचिव जनपद अधि·ारियों · ·ार्यप्रणाली संदिग्ध
हृ डॉ. संतोष ठा·ुर
छपारा (सिवनी) शासन ·ी योजनाओं पर ·ैसे पलीता लगाया जाता है इस बात ·ा उदाहरण जनपद क्षेत्र छपारा में स्पष्ट देखा जा स·ता है। विदित है ·ि सर·ार ·ेन्द्र ·ी हो या प्रदेश ·ी हो इन्होंने क्षेत्र वि·ास ·े लिए नित नई योजनाओं ·ो बनाया है व वि·ास ·ी दिशा में लाखों रूपयों ·ो खर्च ·िया है जिसमें रोज़गार गारंटी योजना वि·ास ·े लिए सर·ार साबित होती नज़र आई है ·िंतु इस योजना ·ा वास्तवि· लाभ आम जन ·ो नहीं मिल पाया इस बात ·े उदाहरण योजना ·े ·ार्य रूप व ज़मीनी स्तर में देखे जा स·ते हैं इसी तरह रोज़गार गारंटी योजना अंतर्गत वृक्षारोपण ·ार्य ·ा प्रारंभ छपारा जनपद में वर्ष 2006-2007 से प्रारंभ ·िया गया था जो 7 से 9 वर्ष ·ी ·ार्य योजना थी जिस पर शासन ने जनपद स्तर पर ·रोड़ों रूपए पंचायत वार खर्च ·िए गए जो ·ेवल दिखावा मात्र साबित हुए हैं।
वृक्षारोपण ·े 4 वर्ष पूरे और पौधों ·ा पता नहीं
योजना ·े मुताबि· वृक्षारोपण ·ार्ययोजना में सड़·ों ·े ·िनारे, स्·ूलों ·े ·िनारे सर्वसुविधा युक्त स्थानों पर पौधों ·ा रोपण ·िया जाना था व पौधों ·ी सुरक्षा पालन पोषण ·े लिए लोहे ·े ऐंगल व तार ·ी $फेंसिंग ·िया जाना था ले·िन यह ·ार्य दिखावे ·े तौर पर ·िया गया जिसमें पंचायतों में लाखों रूपए $खर्च ·िए, 9 वर्ष ·ी इस योजना ·े 4-5 वर्ष बीत चु·े हैं और पंचायतों पर न तो पौधे देखने ·ो मिलते हैं और न लोहे ·े एंगल व तार इस तरह वृक्षारोपण ·ार्ययोजना पर अधि·ारियों ·ी अनदेखी ·े चलते वृक्षारोपण ·ार्ययोजना पर दीम· लग गया।
चोरी हो रहे हैं लाखों ·े ऐंगल व तार
वृक्षारोपण ·ार्ययोजना में लगाए गए लाखों रूपए ·े लोहे ·े ऐंगल व तार अब चोरी होने लगे हैं ज्ञात हो ·ि पंचायतों में पौधों ·ी सुरक्षा ·े लगाए गए प्रति ऐंगल व तार चोरी जा रहे हैं जिन्हें रो·ने वाला ·ोई नहीं है।
खैरी पंचायत से आई ऐंगल चोरी ·ी शि·ायत
छपारा जनपद ·ी ग्राम पंचायत खैरी में वृक्षारोपण ·ार्ययोजना ·े तहत वर्ष 2006-07 में 20 लाख रूपए से अधि· $खर्च ·िया गया था, जहां वर्तमान समय में ए· भी पौधों ·ा पता नहीं है।
शेष पेज-4

और पंचायत ·ी निगरानी में लगाई $फेंसिंग ·े एंगल पंचायत जनप्रतिनिधियों ·े सामने चुराए व निजी उपयोग ·े लिए ग्राम ·े लोगों द्वारा ले जा रहे हंै इतने पर भी पंचायत उन पर ·ोई प्रतिबंधात्म· ·ार्य या रिपोर्ट दर्ज नहीं ·रवा पा रही है यह बात तब सामने आई जब खैरी पंचायत ·े पंच व वन समिति अध्यक्ष ठा·ुर मुखराम परते ने एंगल व तार चोरी ·ी शि·ायत जनपद ·ार्यालय छपारा व ·लेक्टर जि़ला सिवनी ·ो ·िया तब हर·त में आ·र जनपद अधि·ारियों ·े ·ान में जूं रैंगी और जांच ·रने ग्राम पंचायत खैरी पहुंचे जहां गांव पांडीवाड़ा में 100 ऐंगल चोरी होने ·ी शि·ायत ·ी गई थी जांच में मामला ·ो सही पाया गया और एंगल चोरों ·ो समझा बुझा·र मामला ·ो रफादफा ·र दिया गया। इस तरह योजनाओं ·ो पलीता लगाने में छपारा जनपद में बैठे भ्रष्ट जांच अधि·ारी ·ेवल मात्र जांच ·र अपनी औपचारि·ता पूरी ·र रहे हैं उस·े बाद उस ·ार्य ·ा या योजना ·ा क्या हो रहा है इससे इन्हें ·ोई लेना देना नहीं होता।
सभी पंचायतों में वृक्षारोपण ·ार्ययोजना $फेल
जनपद क्षेत्र छपारा में राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना ·े तहत वृक्षारोपण ·े नाम पर वर्ष 2006-07 से अब त· ·रोड़ों रूपए खर्च हो चु·े हैं और नतीजा शून्य है इस योजना में पंचायतवार वृक्षारोपण ·ार्य ·िया गया था जिस·े अंतर्गत लोहे ·े ऐंगल व तार ·ी $फेंसिंग व पौधा रोपण ·िया गया था और इस योजना ·ो 9 वर्ष त· लगाए गए पौधों ·ी देख रेख ·र उन·ा पालन पोषण ·रना था। यदि पौधे सूख जाते हैं या क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो उस स्थान पर पुन: जुलाई माह में पौधों ·ो रोपण ·रना था ले·िन छपारा जनपद में पंचायतों ने ·ार्य ·ी औपचारि·ता वर्ष 2006-07 ·ेवल मात्र पूरी ·ी है और लाखों रूपए ·ा गोलमाल ·र अपना जेब गरम ·िया और तब से लगाए गए पौधों ·ी तर$फ देखना भी उचित नहीं समझा आज ·ी दशा यह है ·ि जहां जिस पंचायत में वृक्षारोपण ·ार्ययोजना ·े तहत ·ार्य ·िया गया है वहां न तो पौधे दिखाई देंगे और न तो लाखों रूपए ·े ऐंगल व तार इस तरह शासन से इस योजना में हुए ·ार्यों ·ी जांच ·रने व दोषी अधि·ारियों सरपंच/सचिव पर राशि $गबन ·ी ·ार्यवाही ·र पर्यावरण सुधार ·े लिए बनाई गई योजना ·ो स·ारात्म· रूप देने समाचार ·े माध्यम से जि़ला प्रशासन से अपेक्षा ·ी जाती है

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