आतं·वाद ·ा $खात्मा शुरू
आईएसआई ·ी मजबूरी
सौंपा ओबामा ·ो ओसामा
हृ संजीव पांडेय
नई दिल्ली। जब पा·िस्तानी समय ·े अनुसार देर रात दो बजे ओबामा ·ो ओसामा ·ी मौत ·ी $खबर मिली तो उन्हें निश्चित रूप से भारी सु·ून भरा अहसास मिला होगा। पिछले ·ुछ दिनों से परेशान ओबामा ·ो आईएसआई ·ी तर$फ से इससे बेहतर ·ोई गि$फ्ट नहीं हो स·ता है। मीडिया पर जो बरा· ओबामा ·ी वीरता ·ा बखान हो रहा है, वास्तव में वो वीरता न हो, आईएसआई और अमेरि·ी एजेंसियों ·ा ए· ज्वाइंट खेल था, जिस·ा शि·ार ओसामा-बिन-लादेन हुआ। पिछले ·ुछ दिनों अपनी जन्मभूमि और धर्म ·ो ले·र अमेरि·ा में झेल रहे आलोचना ·ो दबाने ·े लिए आ$िखर बरा· ओबामा ने आईएसआई ·ा सहयोग लिया और ओसामा बिन लादेन ·ो ढेर ·र दिया।
इस ·ड़ी ·ो समझने में ·ुछ ज़्यादा दिमा$ग लगाने ·ी ज़रूरत नहीं है। ओसामा बिन लादेन पा·िस्तान ·े एबोटाबाद में रह रहा था। जिस म·ान में रह रहा था, उस म·ान ·े निर्माण ·ो देख ·ोई भी समझ स·ता है, ·ि यह निर्माण सेना ·ा है। साथ ही सेना ·ी ए· यूनिट भी थी। यह जगह इस्लामाबाद से ·ा$फी दूर नहीं है, और पा·िस्तान ·ी सेना ·े लिए यह महत्व इसलिए भी रखता है ·ि पूर्व तानाशाह अयूब $खान भी यहीं ·े रहने वाले थे। हज़ारा जनजाति ·े बाहुल्य वाले इस इला·े में पश्तूनों और हज़ारा जनजाति ·े बीच संघर्ष भी होता है। मिली जान·ारी ·े अनुसार ओसामा बिन लादेन आ$िखर·ार पा·िस्तानी सेना और $खु$िफया एजेंसी आईएसआई ·े उस राजनीति ·ा शि·ार हो गई जिस·े आधार पर ही आईएसआई ने अपने पूर्व में रहे बॉसों ·ो भी नहीं ब$ख्शा।
वास्तव में लादेन ·ा$फी लंबे समय से आईएसआई ·े संरक्षण में ही सीमांत इला·े में था, जो सहूलियत ·े हिसाब से सारा ·ुछ ·रता था। लादेन ·ी सारी एक्टिविटी सेना और आईएसआई ·ो पता था। बस सही अमेरि·ी दबाव ·ा इंतज़ार था। इस दबाव ·ो आईएसआई सह नहीं स·ी और लादेन मारा गया।
इस पूरे खेल ·ी शुरूआत तो छ महीनें पहले हो गई थी। अमेरि·ा ·ो यह पता था ·ि आईएसआई ·े संरक्षण में ही लादेन है। अप्रैल महीनें में इस खेल ·ी पूरी प्लांटिग ·र दी गई। इस महीनें ही अमेरि·ा ·े दौरे पर शुजा पाशा पहुंचे। साथ ही परवेज़ ·यानी भी निरंतर अमेरि·ा अथॉरिटी ·े संपर्· में रहे। शुजा पाशा ·े अमेरि·ी दौरे ·े दौरान ·ुछ तल्$ख बातचीत सीआईए और आईएसआई ची$फ ·े बीच हुई थी। इस दौरे में पा·िस्तान में बिना वीजा रहने वाले अमेरि·ी एजेंटों ·ो ले·र विवाद हुआ था। यह मामला मीडिया में भी आया था। ले·िन इससे अलग ए· गंभीर बातचीत लादेन ·ो ले·र आईएसआई ची$फऔर सीआईए ची$फ ·े बीच हुई थी। इस दौरान अमेरि·ा ने सा$फतौर पर लादेन ·ो $खत्म ·रने संबंधी प्रस्ताव आईएसआई ·े सामने रखा। उधर आईएसआई पर यह प्रेशर और तब आ गया जब वि·ीलीक्स ·े खुलासे में आईएसआई संबंधी ए· $खबर सामने आई, जिस·े मुताबि· अमेरि·ी सूची में आईएसआई आतं·ी संगठन है। पा·िस्तान ·े अब्बोटाबाद में वह घर जहां ·थित तौर पर ओसामा बिन लादेन ·ो अमेरि·ी एजंसियों ने मार गिराया में मिली जान·ारी ·े अनुसार शुजा पाशा अपने $खास सैन्य प्रमुखों से सलाह ·े बाद ओसामा बिन लादेन ·ी बलि देने ·ो तैयार हो गए थे। इस·े पीछे आईएसआई ·े बड़े लोगों और पा·िस्तानी सेना ·ी अपनी आर्थि· मजबूरी थी। यहीं से आपरेशन लादेन ·ी शुरूआत हो गई थी। अप्रैल माह में ही ए· पा·िस्तानी प्रतिनिधिमंडल ·ाबुल पहुंच गया था। इस प्रतिनिधमंडल ·े हेड प्रधानमंत्री युसू$फ रज़ा गिलानी थे। ले·िन उन·े साथ ही सेना ची$फ परवेज़ ·यानी और आईएसआई ची$फ शुजा पाशा भी थे। वास्तव में जिलानी तो मुखौटा थे। वास्तव में यह दौरा ·यानी और पाशा ·ा था, जिन्होंने अपने दौरे ·े दौरान विभिन्न अ$फ$गान जनजातियों और पीस ·ाउंसिल ·े सदस्यों ·ी राय ली। साथ ही यह भी आं·लन ·िया ·ि आ$िखर लादेन ·ो अमेरि·ा ·े हवाले ·र दिया जाएगा तो उस·ा क्या प्रभाव प$ख्तून जनजातियों और तालिबान जैसे संगठनों पर पड़ेगा। इस·े बाद ही अप्रैल ·े अंतिम सप्ताह में पेशावर में पख्तो पीस ·ाउंसिल ·ी तर$फ से विश्व पश्तो ·ांग्रेस ·ा आयोजन ·िया गयाथा। इसमें पूरी तरह से प$ख्तूनों ·ो शांतिप्रिय जनजाति बताया गया और अरबों ·ो गाली दी गई। इस ·ांफ्रेंस में शामिल लोगों ने ·हा था ·ि प$ख्तूनों पर अरब ·ल्चर ·ो डाला जा रहा है, और अरब ·ल्चर वाले प$ख्तूनों ·ो हथियार दे·र शांतिप्रिय जनजाति ·ो हिंसा ·ी तर$फ ढ·ेल रहे है। इस पूरे अध्ययन ·े बाद आ$िखर·ार ओबामा ·े हाथ में ओसामा ·ो सौंप दिया गया। जिस तरह से अमेरि·ी एजेंसियों ने देर रात आपरेशन ·िया है, उसमें पा·िस्तान ·ी भागीदारी न हो, यह मूर्खता भरी बात है। पा·िस्तान ·ी पूरी भागीदारी ·े साथ ही यह आपरेशन हुआ और ओसामा मारा गया। इस मामले में अन्य आतं·ी संगठन जिसमें तालिबान ·े जलादुद्दीन हक्कानी नेटवर्· ·े लोग भी शामिल है, विश्वास में लिया गया है, बताया जा रहा है। वास्तव में पा·िस्तान सेना और आईएसआई ·े उपर हाल में जो अमरि·ा ने खुले आरोप लगाए उससे आईएसआई ·ो भारी मुश्·िलों ·ा सामना ·रना पड़ रहा था। दूसरा आईएसआई और सेना · पता है ·ि आ$िखर·ार पा·िस्तान ·ो अमेरि·ी डालरों ·े बिना चलाना मुश्·िल है। सेना ·ी भी ·माई अमेरि·ी सहायता राशि से आ रही है। उधर अमेरि·ी दबाव और इधर पा·िस्तानी अर्थव्यवस्था ·ी चरमराहट पा·िस्तान ·ो परेशान ·िए हुए थे। पा·िस्तान ·ो ·ुल जीडीपी ·ा मात्र दस प्रतिशत ही टैक्स से आ रहा है। हालत यह है ·ि देश ·ी सि$र्फ ए· प्रतिशत जनता ही टैक्स दे रही है। इन परिस्थितियों में अमेरि·ी प्रतिरोध ·ो पा·िस्तान सेना और आईएसआई झेलने ·ो तैयार नहीं है। आ$िखर जो वि·ास ·े लिए पैसा आता है, उसमें भी भारी हाथ सेना ही मार जाती है। इसलिए ·ई मजबूरियां थी, जिस·े ·ारण लादेन ओबामा ·े हवाले ·र दिए गए।
उमा भारती आएं तो बात बन जाए..
नई दिल्ली। बुधवार ·ो नई दिल्ली में भाजपा ·े आला नेताओं ·ी ए· बैठ· हुई। बैठ· पार्टी अध्यक्ष नितिन गड·री ·े आवास पर हुई। हालां·ि बैठ· ·े मुद्दे और भी थे, ले·िन इस बात पर भी विचार होना था, ·ि उमा भारती ·ी भाजपा में वापसी ·ैसे सुनिश्चित ·ी जाए। हालां·ि बैठ· ·े बाद अरुण जेटली ने पत्र·ारों द्वारा पूछे जाने पर बड़े टाल मटोल वाले अंदाज़ में यह बात ·ही ·ि इस बारे में भी बात हुई थी। क्या बात हुई यह नहीं बताया। ले·िन बताया जाता है ·ि उमा भारती ·े वापसी ·े आसार इसलिए बन रहे हैं, क्यों·ि उत्तर प्रदेश ·े स्थानीय ·ार्य·र्ताओं ·ा पार्टी ·े आला नेताओं पर बहुत दबाव है।
उत्तर प्रदेश ·े स्थानीय नेता चाहते हैं, ·ि उमा भारती उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान ·ी ·मान संभाले। प्रदेश ·े वे स्थानीय नेता और ·ार्य·र्ता जो ·िसी नेता ·े अभाव में घायल हो·र घर पर बैठे हैं, उन·ो मैदान में उतारने ·े लिए ·िसी $फारयब्राण्ड नेता ·ी ज़रूरत है। उत्तर प्रदेश में रैलियों ·ो संबोधित ·र रहे पार्टी अध्यक्ष नितिन गड·री भी महसूस ·र रहे हैं ·ि उत्तर प्रदेश में अगर ·िसी बात ·ी ·मी है तो वह ए· $फायरब्राण्ड नेता ·ी, जिसे उमा भारती पूरी ·र स·ती हैं।
ले·िन जैसा ·ि सब जानते हैं, भाजपा न तो नेताओं ·ी पार्टी है और न ही ·ार्य·र्ताओं ·ी। यह इन दोनों ·े बीचवालों ·ी पार्टी है, जो ·भी ·भार नेता बने मिल जाते हैं, तो ·भी ·भार टाई लगा·र दलाली ·ा धंधा भी ·र लेते हैं। ऐसे ही नेताओं ·ी पूरी $फौज भाजपा ·ो ·माण्ड ·रती है। यही $फौज उमा भारती ·ो भाजपा से दूर रखने में अपनी भलाई समझ रही है। जिसमें हाल $िफलहाल में अब राजनाथ सिंह और ·लराज मिश्र भी शामिल हो गये हैं। राजनाथ सिंह ने चुप·े से ·लराज मिश्र ·ो मुख्यमंत्री हो जाने ·ी टोपी पहना दी है, और उन्हें समझा दिया है, ·ि वे तो ब्राह्मणों ·े सबसे बड़े नेता हैं। अब भाई ·लराज मिश्र ·े हर·ारे देश प्रदेश में डोल डोल·र सब·ो समझा रहे हैं, ·ि ·ैसे ·लराज मिश्र उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों ·े नेता हो गये हैं, और ·ैसे वे संगठन पर भारी भर·म प·ड़ रखते हैं।
ले·िन ·लराज मिश्र ·ा ·ष्ट यह है ·ि वे न तो ब्राह्मणों ·े नेता हैं, और न ही उन·ी संगठन पर वैसी ·ोई प·ड़ है, जैसा ·ि दावा ·िया जाता है। फिर भी राजनाथ सिंह ·ा हित इसी में सधता है ·ि ·लराज मिश्र उमा भारती ·ो प्रदेश में न घुसने दे, भले ही भाजपा ·ी स्थिति में ·ोई बदलाव हो न हो। ले·िन हाल में ·ुछ सर्वे जो सामने आ रहे हैं वे भाजपा ·े आला नेताओं ·ो परेशान ·र रहे हैं। ये सर्वे बता रहे हैं, ·ि प्रदेश में भाजपा ·ी स्थिति तेज़ी से सुधर रही है और उस·ा मत प्रतिशत वहां त· पहुंच चु·ा है जितना पिछले विधानसभा चुनाव में हासिल हुआ था। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ·ो 17 प्रतिशत मत हासिल हुआ था। सर्वेक्षण एजंसियों ·ा आं·लन है ·ि अगर उमा भारती जैसी ·ोई $फारब्राण्ड नेता भाजपा ·ी ·मान संभाल लेती है तो भाजपा ·े मत प्रतिशत में चार से पांच प्रतिशत ·ा इज़ा$फा हो स·ता है जो प्रदेश में भाजपा ·ो तीसरे से दूसरे नंबर ·ी पार्टी बना स·ता है।
उमा भारती ·े पक्ष में ऐसे ·ई ·ारण हैं जो इस लक्ष्य ·ो सुगमता से हासिल ·रने ·ा सं·ेत देते हैं। ए· तो उमा भारती ओबीसी हैं, दूसरे महिला हैं और तीसरे भ्रष्टाचार ·े आरोपों से मुक्त हैं। प्रदेश में भाजपा में आज ·ोई नेता ऐसा नहीं है जो ·ल्याण सिंह ·े बाद मुलायम या मायावती ·ा मु·ाबला ·र स·े। उमा भारती इन नेताओं ·ा सटी· इलाज नज़र आती हैं। बहरहाल, इस सूरतेहाल में शुक्रवार 6 मई ·ो ·ोई बड़ा डेवलपमेन्ट हो स·ता है। बुधवार ·ो पार्टी ·े से·ेण्ड क्लास नेताओं से मंत्रणा ·े बाद शुक्रवार ·ो गड·री आला नेताओं से बात ·रेंगे। पार्टी आला·मान तो पहले से चाहता है ·ि उमा ·ो उत्तर प्रदेश में उतार दिया जाए, ले·िन अब सवाल है ·ि उमा भारती दरवाज़े पर दस्त· दे·र बैठी हैं। वे अंदर ·ैसे आयेंगी, इस·ा ·ोई रास्ता नि·ालने ·े बाद हो स·ता है जल्द से जल्द ·ोई ऐसी घोषणा ·र दी जाए। उत्तर प्रदेश में उमा भारती ·ी वापसी ·ो ले·र बे·रारी ·िस हद त· है इस·ा प्रमाण इससे मिलता है, ·ि राजनाथ सिंह ·े ए· बेहद ·रीबी नेता भी भी यही ·हते हैं ·ि -उमा भारती आ जाए तो बात बन जाए....।
दो रसू$खदार मामाओं ·ी ·ुश्ती
हृ लिमटी खरे
नई दिल्ली। देश ·ी राजनैति· राजधानी दिल्ली में इन दिनों देश ·े हृदय प्रदेश ·े ‘मामा’ चर्चा में हैं। ए· तर$फ प्रदेश ·े मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान $खुद ·ो सूबे ·े बच्चों ·ा मामा बताते आए हैं, तो अब प्रदेश ·ांग्रेस ·मेटी ·े नवनियुक्त अध्यक्ष ·ांतिलाल भूरिया ने $खुद ·ो असली मामा बता दिया है।
बीते दिनों भूरिया ·े पदभार ग्रहण ·रने ·े दौरान ·ांग्रेस ·ी ·थित ए·ता रेली में मामाओं पर ·ी गई टी·ा टिप्पणी ·ी दिल्ली में जम·र चर्चाएं हो रही हैं। इसी दौरान सांसद सज्जन सिंह वर्मा द्वारा यह बात भी ·ह दी गई ·ि इतिहास में दो ही मामाओं ·ा उल्लेख मिलता है, ए· ·ंस मामा और दूसरे श·ुनि मामा। वर्मा शायद बचपन ·े ‘चंदा मामा’ ·ो भूल गए। पांव पांव वाले भईया ·े नाम से चर्चित शिवराज सिंह चौहान द्वारा बच्चों और महिलाओं ·े हितों ·ो ध्यान में रख·र आरंभ ·ी गई योजनाओं ·े ·ारण सूबे में उन्हें लोग मामा ·े नाम से जानने लगे हैं, उधर आदिवासियों ·े बीच ·ांतिलाल भूरिया ·ो भी मामा ·े रूप में पहचाना जाता है। $खबरों ·े अनुसार ·ांतिलाल भूरिया ·े हाथों मध्य प्रदेश ·ांग्रेस ·ी ·मान सौंपे जाने ·े उपरांत सूबे में सुस्सुप्तावस्था में पड़ी ·ांग्रेस में ·ुछ हलचल अवश्य ही महसूस ·ी जा रही है। ए·ता रैली में ·मल नाथ,दिग्जिवय सिंह, सुरेश पचौरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरूण यादव जैसे क्षत्रपों ·ा ए· मंच पर आना भी ·ांग्रेस ·े लिए सुखद संयोग से ·म नहीं था, ·िन्तु समारोह में सिंधिया ·ा महज़ शक्ल दिखा·र लौट जाना और ·मल नाथ तथा प्रदेश प्रभारी महासचिव बी.·े.हरिप्रसाद ·ा वहां न पहुंचना भी चर्चाओं और चट$खारों ·ा ·ेंद्र बना हुआ है। आने वाला समय बताएगा ·ि जातिगत मामा भारी पड़ते हैं या जाति लाभ हेतु बनाए गए मामा।

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