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Saturday, March 5, 2011




पीएम देंगे इस्ती$फा ?
सुप्रीम कोर्ट ने दिया ज़ोर का झटका

नई दिल्ली।
भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद विवादों में रहे केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) पी जे थॉमस की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने $गैरकानूनी ठहराया है। कोर्ट ने मार्च 3 को इस मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि थॉमस को तत्काल सीवीसी का पद छोड़ देना चाहिए। सीवीसी के पद पर थॉमस की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया है। शीर्ष अदालत के इस $फैसले के बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से नैतिक आधार पर इस्ती$फेकी मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा $फैसले के बाद थॉमस ने सीवीसी के पद से इस्ती$फा दे दिया है। इससे पहले थॉमस ने पद छोडऩे से लगातार इनकार किया था। उन्होंने यह दलील दी थी कि जब दा$गी नेता सांसद बने रह सकते हैं, तो वह क्यों नहीं? लेकिन सुप्रीम कोर्ट के $फैसले के बाद उनके पास कोई चारा नहीं रह गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ओर से 3 सितंबर 2010 को की गई थॉमस की नियुक्ति को दरकिनार करते हुए भविष्य में सीवीसी के पद पर होने वाली नियुक्ति के लिए कड़े मानक भी तय कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सीवीसी को नियुक्त करने वाली कमेटी की सि$फारिश का कानून में कोई वजूद ही नहीं है। अदालत ने सवालिया लहजे में कहा कि आ$िखर थॉमस के $िखला$फ आरोपों पर इस कमेटी ने $गौर क्यों नहीं किया? पीएम देंगे इस्ती$फा?
सीवीसी का काम भ्रष्टाचार पर नज़र रखना और उसे रोकना है, लेकिन सरकार ने यह जि़म्मेदारी भ्रष्टाचार के एक आरोपी व्यक्ति को ही सौंप दी। इसी आधार पर थॉमस की नियुक्ति का विरोध हुआ। पर सरकार यह कह कर उन्हें बचाती रही, कि उसे थॉमस पर लगे आरोपों की जानकारी नहीं थी।
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने पॉमोलीन घोटाले में थॉमस के $िखला$फ मुकदमा चलाने पर लगाई गई रोक हटा ली थी। 1991 में केरल में हुए पॉमोलीन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरन और पीजे थॉमस समेत नौ लोगों पर मुकदमा चल रहा था। लेकिन 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। पॉमोलीन घोटाले के दौरान पी जे थॉमस केरल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सचिव थे।
सुप्रीम कोर्ट के $फैसले की $खास बातें
1. पीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा सीवीसी की नियुक्ति कानूनन आधार पर $गलत।
2. सीवीसी एक्ट 2003 के तहत थॉमस की नियुक्ति $गलत।
3. सि$र्फ बायोडाटा के आधार पर नियुक्ति $गलत।
4. सरकार को संस्थान की गरिमा और लोगों के हित का ध्यान रखना चाहिए था।
ची$फजस्टिस एसएच कपाडिय़ा जस्टिस केएस राधाकृष्णन और स्वतंत्र कुमार ने गत 10 $फरवरी को $फैसला बाद में सुनाने की घोषणा की थी। थॉमस पिछले साल 7 सितंबर को सीवीसी पद पर नियुक्त हुए थे। उनके $िखला$फ केरल में भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है। एनजीओ सेंटर $फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन और कुछ अन्य ने थॉमस की सीवीसी पद पर नियुक्ति को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाओं में केरल में पॉमोलीन ऑयल घोटाले के मामले को भी आधार बनाया गया था। इसके अलावा यह भी कहा गया कि वे दूरसंचार सचिव रह चुके हैं। आरोप है कि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को भी दबाने की कोशिश की।
दा$गी अ$फसर को कैसे बनाया सीवीसी?
सीवीसी पूरे देश में भ्रष्टाचार की किसी भी शिकायत की जांच कराने वाली सर्वोच्च एजेंसी है। इसके मुखिया पीजे थॉमस की नियुक्ति की प्रक्रिया अपने आप में कई राज़ खोलती है। थॉमस केरल के पामोलीन आयात घोटाले में फंसे थे। केंद्र सरकार में सचिव बनने के लिए ज़रूरी केंद्र में दो साल की प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) का अनुभव तक उनके पास नहीं था। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने उन्हें सचिव बनाया। उनकी नियुक्ति पर ज्य़ादा लोगों का ध्यान न जाए, इसलिए उन्हें कम महत्वपूर्ण माने जाने वाले संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव बनाया गया। फिर एक आम तबादले की तरह उन्हें हाई प्रो$फाइल टेलीकॉम विभाग में सचिव की कुर्सी मिली। उनकी तर$फलोगों का ध्यान तब गया, जब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी ने उन्हें सीवीसी नियुक्त किया। इस कमेटी में गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने तो प्रधानमंत्री का समर्थन किया, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कड़ी आपत्ति जताई।
इस मामले में एक याचिकाकर्ता और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंग्दोह ने कहा कि आज के सुप्रीम कोर्ट के $फैसले का असर देश में किसी भी संवैधानिक संस्था की नियुक्ति पर पड़ेगा और इन पदों पर पाक-सा$फ लोगों के नियुक्त होने की संभावना मज़बूत होगी। सुप्रीम कोर्ट के $फैसले का राजनीतिक असर भी पडऩा तय है। विपक्ष सरकार को यह कहते हुए घेरेगी कि उसने एक दा$गी शख़्स को किन परिस्थितियों में भ्रष्टाचार की निगरानी करने वाली संवैधानिक संस्था का अगुआ बना दिया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के इस $फैसले का स्वागत किया है। भाजपा नेता राजीव प्रताप रुढ़ी ने कहा कि यह $फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने ट्विटर के ज़रिये कहा कि कोर्ट के $फैसले से सीवीसी पद की गरीमा बहाल हुई। भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि अब नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री को जि़म्मेदारी लेते हुए इस्ती$फा दे देना चाहिए।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सीवीसी मामले पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जवाब दें। जनता दल अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि नैतिक आधार पर पी चिदंबरम को इस्ती$फा देना चाहिए। सीपीआई नेता डी राजा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का $फैसले यूपीए सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बड़ा झटका है। केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने सुप्रीम कोर्ट के $फैसलेे का स्वागत करते हुए कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने थॉमस की नियुक्ति को अवैध करार दिया है, तो नियुक्ति अवैध है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा $फैसले के मद्देनज़र भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों की कोर कमेटीटियों की आपात बैठकें 3 मार्च को ही दिल्ली में हो हुईं।
सीवीसी पद से पीजे थॉमस का इस्ती$फा
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के रूप में पीजे थॉमस की नियुक्ति को $गैरकानूनी करार देने के कुछ समय बाद ही पीजे थॉमस ने अपना इस्ती$फा प्रधानमंत्री को भेज दिया। उनकी नियुक्ति के $िखला$फ दायर याचिकाओं पर गुरुवार मार्च 3 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उनकी नियुक्ति को $गैरकानूनी करार दिया। $फैसले के बाद कानून मंत्री ने सीधे प्रधानमंत्री से जाकर मुलाकात की। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अगर नियुक्ति को अवैध कहा है तो इसे अवैध ही माना जाना चाहिए। सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दोपहर कैबिनेट की आपातकालिन बैठक बुलाई है। $फैसले के बाद संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और प्रधानमंत्री से जवाब मांगा। प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने इसे प्रधानमंत्री को करारा जवाब करार देते हुए उनसे इस मामले में सदन में जवाब देने की मांग की।





30 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति गठन की प्रक्रिया पूरी
नई दिल्ली।
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने के सिलसिले में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने मंगलवार मार्च 1 को राज्यसभा में प्रस्ताव पेश किया। तीस सदस्यीय जेपीसी में 20 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे। लोकसभा सदस्यों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।
इस संबंध में प्रस्ताव पेश करते हुए सिब्बल ने कहा कि 30 सदस्यीय जेपीसी वर्ष 1998 से 2009 की अवधि के दौरान दूरसंचार लाइसेंसों और स्पेक्ट्रम आवंटन में यदि कोई अनियमितता बरती गई तो उसकी जांच करेगी। समिति सरकार के निर्णयों और दूरसंचार नीतियों को लागू करने पर प्राप्त परिणामों को भी देखेगी।
इस समिति में राज्यसभा से कांग्रेस के पी.जे. कुरियन, जयंती नटराजन और प्रवीण राष्ट्रपाल, द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (डीएमके) के तिरुचि सिवा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के योगेन्द्र पी. त्रिवेदी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एस. एस. अहलूवालिया और रविशंकर प्रसाद, जनता दल (युनाइटेड) के रामचंद्र प्रसाद सिंह, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सतीश चंद्र मिश्रा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सीताराम येचुरी होंगे।
कांग्रेस की ओर से इस सूची में अभिषेक मनु सिंघवी का नाम शामिल किया गया था लेकिन उन्होंने एक दूरसंचार कम्पनी के लिए बतौर वकील वकालत करने का हवाला देते हुए अंतिम समय में अपना नाम वापस ले लिया। उनकी जगह जयंती नटराजन को कांग्रेस की ओर से नामित किया गया।समिति में कांग्रेस के लोकसभा से आठ सदस्य हैं। इनमें पी.सी. चाको, मनीष तिवारी, जयप्रकाश अग्रवाल, अधीर रंजन चौधरी, वी. किशोरचंद्र देव, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, निर्मल खत्री और प्रबण सिंह घाटोवर शामिल हैं। समिति में भाजपा के लोकसभा सदस्य जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, हरीन पाठक और गोपीनाथ मुंडे शामिल हैं।
लोकसभा से अन्य सदस्यों में डीएमके के टी.आर. बालू, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, जनता दल (युनाइटेड) के शरद यादव, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दारा सिंह चौहान, समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के गुरुदास दासगुप्ता, बीजू जनता दल (बीजद) के अर्जुन चरण सेठी और ऑल इंडिया अन्ना द्रमुक मुनेत्र कडग़म (एआईएडीएमके) के एम. थम्बी दुरई शामिल हैं।
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इन सदस्यों में से किसी एक सदस्य को समिति का अध्यक्ष मनोनीत करेंगी।



बाबा रामदेव की ऐतिहासिक रैली
योग गुरू की राजनीतिक महत्वाकांक्षा

हृ गुरूबचन सिंह बग्गा सोच

भोपाल।
दिल्ली के रामलीला मैदान में काले धन के $िखला$फ आयोजित बाबा रामदेव की रैली में जहां एक ओर बाबा रामदेव ने उनके विरोधियों, $खासकर कांग्रेस के नष्ट होने की धमकी दी, वहीं अपनी जान को $खतरा भी बताया। रैली को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने आशंका व्यक्त की कि उनकी जान को $खतरा है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह बात भी कहा कि यह बाबा डेथ प्रू$$$फ है, इसलिए वे लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। बाबा रामदेव ने रैली में अपने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा, कि रामदेव को नहीं मार सकते, क्योंकि यह बाबा तुम्हारी मौत बनकर आया है।
27 $फरवरी रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में करीब एक लाख लोगों की रैली आयोजित की गयी थी। इस रैली में हालांकि $खुद बाबा रामदेव तीन घण्टे देर से आये और जब तक बाबा रामदेव आये, तब तक एक चौथाई जनता जा चुकी थी। लेकिन आने के बाद बाबा रामदेव ने कांग्रेस पर ज़ोरदार हमला बोला और न केवल नेहरू गांधी परिवार पर जमकर हमला बोला, बल्कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने नेहरू गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा कि आ$िखर क्या कारण है कि देश की आधे से अधिक योजनाएं एक ही परिवार के व्यक्तियों के नाम पर चलायी जा रही हैं। महात्मा गांधी के नाम पर तो सि$र्फ एक योजना है मनरेगा, जबकि नेहरू $खानदान के नाम ही देश की अधिकांश योजनाएं संचालित की जाती हैं। बाबा रामदेव ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों पर उठाये जा रहे सवाल पर चुटकी लेते हुए कहा, कि जो लोग मेरी राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें मालूम होना चाहिए कि सन्यास धर्म के साथ राजधर्म का निर्वहन भी ज़रूरी है। बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बेचारा प्रधानमंत्री बताते हुए कहा, कि वे अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार के ईमानदार प्रधानमंत्री हैं।
इस अवसर पर अन्ना हज़ारे ने बोलते हुए कहा कि लोकपाल विधेयक को पारित करवाने के लिए वे आगामी पांच अप्रैल से दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठने जा रहे हैं, जबकि किरण बेदी ने कहा कि किसी भी सूरत में लोकपाल विधेयक कानून पारित होना चाहिए, और कानून में दोषी पाये गये लोगों के लिए फांसी की सज़ा निर्धारित होनी चाहिए। रैली को संबोधित करते हुए काले धन के $िखला$$फ कानूनी रूप से अभियान शुरू करनेवाले राम जेठमलानी ने कहा कि स्विटज़रलैण्ड का एक अ$खबार आज से बीस साल पहले इस बारे में $खबर छाप चुका है, कि राजीव गांधी का स्विस बैंक में काला धन जमा है। राजीव गांधी के मरने के बाद उसका संरक्षक आज भी नेहरू गांधी $खानदान है। रैली को अरविन्द केजरीवाल, गोविन्दाचार्य आदि ने भी संबोधित किया।
रोड रोलर की तरह राजनीति में आगे बढ़ेंगे। इसके लिए जितना आर्थिक, सांगठनिक और सामाजिक ज़मीन उन्हें चाहिए वे वह तैयार कर चुके हैं। अपनी इस राजनीितक यात्रा में उन्हें कांग्रेस जैसा शाश्वत राजनीतिक दुश्मन भी मिल गया है, जिसके विरोध के नाम पर ही भारत में राजनीतिक ज़मीन पैदा हुई है। यह रामदेव के लिए सुखद संयोग है। इसलिए अब वे गांव गांव जाने और तहसील तहसील अलख जगाने की घोषणा कर रहे हैं। उनकी घोषणा में दम इसलिए भी है, क्योंकि रामदेव अपनी बात आम आदमी तक पहुंचाने की कला जानते हैं। रामदेव में आक्रामिकता भी है और आम आदमी से संवाद स्थापित कर लेने की क्षमता भी। इसलिए उन्होंने महज़ पंद्रह सालों में देश में ऐसा समर्थक वर्ग पैदा कर लिया है, जो अब सि$र्फ बाबा रामदेव को देखता है, उनके कर्मों को नहीं। यह रामदेव की संवाद कला का ही कमाल है, कि वे अपने सामने मौजूद समूह को वह समझा पाते हैं, जो वह समझाना चाहते हैं। शायद इसी वजह से उन्हें वह राजनीतिक ज़मीन सा$फ दिखाई दे रही है, जो उन्हें देश का प्रधानमंत्री भी बना सकती है। रामदेव के समर्थक वैसे भी अब नारा लगाने लगे हैं ''देश का प्रधानमंत्री कैसा होÓÓ बाबा रामदेव जैसा हो। उनके समर्थकों द्वारा लगाया यह नारा रामदेव की महत्वाकांक्षा को पूर्ण करेगा या फिर उन्हें धराशायी कर देगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा, कि रामदेव अपनी संवाद क्षमता बरकरार रख पाते हैं, या नहीं। क्योंकि आ$िखरकार राजा वही है, जो प्रजा से संवाद करना जानता है।
भारत के हरियाणा राज्य (जि़ला महेन्द्रगढ़ के अलीपुर में 1965 में) जन्मे रामकिशन यादव स्कूली शिक्षा केवल आठवीं तक ही प्राप्त कर पाये। खानपुर ग्राम में संस्कृतिक एवं योग अध्ययन हेतु गुरूकुल में भरर्ती हो गये। समाज से लगभग विरक्त हो कर सन्यास धारण करने के पश्चात वे कल्वा गुरूकुल में योग के शिक्षक बन गये। योग,ध्यान, एवं पुरातन गन्थों के अध्ययन से उन्हें सन्तुष्टि प्राप्त हुई।
मगर गत कुछ वर्षों से (करीब दो ढाई दशकों के अन्तराल से) उनकी गतिविधियां बहुपक्षीय हो गईं। सन्यास, योग, आयुर्वेदिक औषधियां एवं इलाज आदि क्षेत्रों में ट्रस्र्ट ,कैम्प, केन्द्र चलाते हुये उनकी मुलाकातें भारत के विभिन्न प्रान्तों के मुख्य मंत्रीयों ,व अन्य बड़े बड़े राजनैतिक, उद्योग पति, धन्ना सेठों, भूस्वामियों और अनेक प्रकार के विभिन्न लोगों से हुईं। श्री राम किशन यादव अब तक स्वामी योगी राम देव बन चुके थे, जिन को श्रद्धा पूर्वक लोग सम्मान देने लगे और स्वामी जी इन अवसरों को अजाईं गंवाना उच्चित नहीं समझते थे । स्वामी जी ने इन अवसरों का भरपूर लाभ उठाया और जिस किसी यजमान का जितना दोहन कर सके किया।
1970-80 के दशक मेें साईकिल से गुरूकुलों में आते जाते अब निजी हैलीकाप्टर से स्काटलैंड में अपने स्वामित्व के जज़ीरे में ही उन्हें राहत मिलती है। लगभग हर प्रान्त के बड़े बड़े राजाओं (मंत्रीओं मुख्य मंत्रीयों और धन्ना सेठों ) ने उन्हें किसी न किसी तरह से उपकृत किया। कहीं योग केन्द्र अथवा आयुर्वेदिक दवाओं के कारखानों हेतु कीमती भूमि, तो कहीं करोड़ों लाखों की अकूत सम्पत्ति एकत्र की । मध्यप्रदेश राज्य, जहां भूखे नंगे परेशान किसान बेचारे हालात से मजबूर $खुदकुशी को मजबूर हैं, भी इस वख्शीश से वंचित नहीं।
जानकार लोग अब पूछने लग गये हैं, कि केवल दो दशकों के अन्तराल में कोई व्यक्ति अरबों की सम्पत्ति का मालिक बन गया, आ$खर उस धन का रंग काला था या स$फेद और बाबा के पास यह जो अकूत धन सम्पत्ति है, देश में और विदेशों में उसका रंग कितना स$फेद है ? आश्चर्य तो यह होता है कि अब बाबा की नज़रों में और ज़हन में नेतागिरी और राजनैतिक महत्वकांक्षा हिलोरे ले रही है, और देश के सर्वोच्च पद के दावेदार बन रहे हैं।

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