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Friday, March 25, 2011






भाजपाई स्टिंग
नोट फॉर वोट

यह भी कहा जाता है कि इस मामले के तार भोपाल से भी जुड़े हैं, जहां से ले जाकर नोटों की गडिढ़यां संसद में उछाली गई थीं। एक भाजपाई कालोनाईज़र ठेकेदार के सहयोग से भाजपाई राज्य सरकार के कुछ $खास मंत्रियों द्वारा ऐसा प्रबंध किया गया था। मामले की वास्तविकता और उसकी तह तक पहुंचने हेतु, इस की गहराई तक जांच करना ज़रूरी होगा।
जानी-मानी पत्रिका तहलका मेंं छपी एक रिपोर्ट बता रही है, कि कैश $फार वोट का पूरा मामला बीजेपी ने सरकार को फंसाने के लिए $खु़द खड़ा किया। लोकसभा में बहस के दौरान कपिल सिब्बल और पवन कुमार बंसल ने भी यही आरोप लगाये। 22 जुलाई, 2008 की शाम संसद में इस शर्मनाक नज़ारे के पीछे की हकीकत क्या है। क्या बीजेपी के इन तीन सांसदों-अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा को यूपीए ने $खरीदने की कोशिश की या $खुद बीजेपी ने इन तीनों के ज़रिए जाल बिछाकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को वोट के लिए नोट के मामले में फंसाया और एक चैनल की मदद से स्टिंग ऑपरेशन की कोशिश की। तहलका का कहना है कि स्टिंग का ये जाल बीजेपी ने बिछाया, समाजवादी पार्टी इसमें फंस गई, और कांग्रेस ने इसे र$फाद$फा करने की कोशिश की। तहलकाडॉटकॉम पर आए ताज़ा खुलासे यही बता रहे हैं। इन खु़लासों के मुताबिक इस ङ्क्षस्टग ऑपरेशन में अरूण जेटली और सुधींद्र कुलकर्णी जैसे बड़े नेताओं की भूमिका रही। 21 जुलाई की रात एक दलाल के मा$र्फत बीजेपी के इन सांसदों ने अहमद पटेल से मिलने की कोशिश की। नाकाम रहने पर वो अपने लिए $खरीददार खोजते रहे। तहलका के पास इन सांसदों के $फोन कॉल के टेप भी हैं। ङ्क्षस्टग ऑपरेशन के बाद जेटली और आडवाणी जैसे नेताओं ने रिपोर्टर को बधाई दी। संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने लोकसभा में विपक्ष के हमलों से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बचाव करते हुए एक मैगज़ीन के हवाले से कहा कि सांसद की $खरीद $फरोख्त संबंधी स्टिंग ऑपरेशन में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुधीन्द्र कुलकर्णी और अरूण जेटली का हाथ था। इनकी सहमति से ही एक न्यूज़ चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। बंसल ने कहा कि भाजपा नेताओं ने यूपीए सरकार को बदनाम करने के लिए यह स्टिंग करवाया था। $गौरतलब है कि सांसदों की $खरीद $फरोख़्त पर स्टिंग करने वाले चैनल ने हालांकि कुछ कारणों से यह स्टिंग नहीं दिखाया था, जिसके बाद भाजपा के सांसद कथित रूप से रिश्वत की राशि लेकर संसद चले गए थे। तहलका मैगज़ीन ने खुलासा किया है, कि केवल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ही सांसदों को खरीदने की कोशिश में नहीं थी, बल्कि भाजपा ने ही यह साजि़श रची थी, कि तीन भाजपा सांसदों को या तो कांग्रेस या समाजवादी पार्टी $खरीद ले, और वह इस स्ंिटग के ज़रिए राजनीतिक $फायदा उठा ले। 2008 में स्ंिटग करने वाले एक रिपोर्टर ने तहलका को बताया।
यह भी कहा जाता है कि इस मामले के तार भोपाल से भी जुड़े हैं, जहां से ले जाकर नोटों की गडिढ़यां संसद में उछाली गई थीं। एक भाजपाई कालोनाईज़र ठेकेदार के सहयोग से भाजपाई राज्य सरकार के कुछ $खास मंत्रियों द्वारा ऐसा प्रबंध किया गया था। मामले की वास्तविकता और उसकी तह तक पहुंचने हेतु, इस की गहराई तक जांच करना ज़रूरी होगा।


भोपाल पंजाबी समाज के अध्यक्ष बने जसबीर सिंह
भोपाल।
भोपाल पंजाबी समाज क आगामी दो वर्ष की अवधि 2011-12 व 2012-13 हेतु निर्वाचन गत बुधवार मार्च 23 को हुये, जिस में जसबीर सिंह भिमराह को सर्वसमित से अध्यक्ष चुन लिया गया। बुधवार 23 मार्च को सब्ज़ी मण्डी स्थित राम मंन्दिर परिसर में समाज की आम सभा की बैठक हुई, जिस में समाज के वरिष्ठ सदस्य पूर्व पुलिस अधीक्षक श्री गुरूबीर सिंह नन्दा चुनाव अधिकारी की देख रेख में निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ हुई। अध्यक्ष पद हेतु दो नामों का प्रस्ताव आने पर, इस पद के एक दावेदार कैप्टिन के.के. अहूजा द्वारा अपना नाम वापिस ले लिया गया और इस तरह दूसरे दावेदार श्री जसबीर सिंह भिमराह को सर्वसमिति से अध्यक्ष पद हेतु चुन लिजया गया।
भोपाल पंजाबी समाज की स्थापना भोपाल में पंजाबी समाज के वरिष्ठ समाज सेवी वृद्ध सज्जन पुरूष ईश्वर दास ग्रोवर ने वर्ष 1990 में की थी। वे अब 78 वर्ष आयु के हैं और इसके बावजूद भी सामाजिक दायत्वों के निर्वहन हेतु अपना अमूल्य मार्गदर्शन व आशीर्वाद बनाये रखते हैं। तब से अब तक इस संस्थान के अध्यक्ष पद पर ईश्वर दास ग्रोवर, जगन्नाथ डंग, कुलदीप सिंह गुलाटी, वी.के. ग्रोवर, एवं दीपक कुमार कपूर रहे।
मध्यप्रदेश में विशेषत: भोपाल में पंजाबी समाज के लोगों की हर तरह के सामाजिक कार्यों में परस्पर सहयोग, दिन त्यौहारों को मनाने में आपसी भाईचारे के माध्यम से लोगों में प्रेम भाव व सौहार्द बनाये रखने में इस संस्था की बड़ी महती भूमिका रहती है। इस संस्था द्वारा पंजाबी त्यौहार लोहड़ी व बैसाखी बड़े पैमाने पर बड़ी धूमधाम से प्राय: हर वर्ष ही मनाये जाते हैं। इस संस्था की एक विशेष शाखा मैरिज ब्यौरो है जिस के माध्यम से पंजाबी समाज के सभी वर्गों को (सिक्ख एवं $गैर सिक्ख) शादी विवाह योग्य बच्चे बच्चियों के रिश्ते संबंध करने में पूर्ण सहयोग दिया जाता है। इस संस्था के इस प्रकार के कल्याण कारी कार्यों को देखते हुये केवल मध्यप्रदेश या छत्तीसगढ़ के पंजाबी ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र एवं राजस्थान के पंजाबी लोग भी इस से लाभांवित होते हैं।

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