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Friday, February 11, 2011










नोट उगलती तिजोरियां और जान देते किसान

प्रदेश के किसान कजऱ् से लदे हुए हैं, और पाले से $खराब हुई $फसल को देखकर उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। लगभग रोज़ दो चार किसान ज़हर पीकर अथवा $फांसी लगाकर आत्महत्या कर रहे हैं। नोट गिनने की मशीनों से चिपके नेताओं को इन किसानों के अंासू पोंछने की $फुर्सत नहीं है। आ$िखर यह कब तक चलेगा?
हृ
रवीन्द्र जैन

मप्र में किसान पुत्र की सरकार में यह क्या हो रहा है? कजऱ् से लदे किसान आत्महत्या कर रहे हैं और नेताओं अ$फसरों और उनके रिश्तेदारों की तिजोरियां नोट और सोना उगल रहीं हैं। राम के आदर्श और पं.दीनदयाल उपाध्याय के संदेश को लेकर सत्ता में आई भाजपा के शासनकाल में भ्रष्टाचार की सभी हदें पार हो चुकी हैं। मप्र में आयकर विभाग के ताज़े छापों से संकेत मिल रहा है कि संवैधानिक पद पर बैंठे व्यक्ति और इंदौर की अति ईमानदार सांसद की छत्रछाया में पले नेता भी कंबल ओढ़कर घी पीने में पीछे नहीं हैं। भ्रष्टाचार की इस गंगोत्री में अ$फसर भी जमकर डुबकी लगा रहे हैं।
गुरूवार $फरवरी 3 को तड़के पहली $खबर जबलपुर से आई, जहां एक साथ कई स्थानों पर आयकर के छापे पड़े हैं। जिनके यहां छापे पड़े वे कौन हैं, और पिछले छह सालों में किस नेता के संरक्षण में फले फूले हैं, यह किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। मप्र विधानसभा के स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने स्वीकार किया है, कि उनके पुत्र अशोक रोहाणी वर्ष 2008 में शुभम मोटर्स में पार्टनर थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण तीन महिने बाद ही यह पार्टनरशिप टूट गई। रोहाणी संवैधानिक पद पर हैं और उनकी बात पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है, लेकिन इस बात पर किसी को यकीन नहीं है, कि बिना राजनीतिक संरक्षण के जबलपुर में दवाईयों के यह व्यापारी रातों रात तीन सौ करोड़ से अधिक की सम्पत्ति के मालिक कैसे बन गए? आयकर विभाग के अधिकारी इशारों इशारों में संकेत कर रहे हैं, कि इन छापों में उन्हें जो दस्तावेज़ मिले हैं, वे आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनेता के चेहरे से नकाब उठा दे, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
जबलुपर में इससे पहले तत्कालीन स्वास्थ मंत्री अजय विशनोई के भाई के घर पड़े छापे के बाद उनका मंत्री पद छीन लिया गया था। मज़ेदार बात यह है कि आयकर विभाग ने विश्नोई के बारे में सप्रमाण लिखा है कि यह मंत्री कमीशन$खोर है, फिर भी विश्रोई शिवराज केबिनेट में बने हुए हैं। आयकर विभाग पिछले दो दिनों से इंदौर में भाजपा नेता चंदू माखीजा का घर खंगालने में लगा है। इंदौर सांसद के अति करीबी माखीजा का एक परिचय यह भी है कि वे प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की निवृत्तमान अध्यक्ष अंजू माखीजा के पति हैं। भाजपा के सात साल के कार्यकाल में चंदू माखीजा की आर्थिक स्थिति में तेज़ी से सुधार किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने आयकर विभाग के सामने डेढ़ करोड़ सरेन्डर करने का प्रस्ताव भी रखा है। लेकिन $िफलहाल आयकर विभाग उनके घर से कई बोरे भरकर का$गजात ले गया है। गुरूवार $फरवरी 3 को ही लोकायुक्त ने दो सरकारी इंजीनियरों के घरों में छापा मारकर करोड़ों की अनुपातहीन सम्पत्ति का पता लगाया है। मप्र का यह एक चेहरा है। लेकिन दूसरा चेहरा भोलेभाले $गरीब किसानों का भी है, जिसकी सेवा का संदेश पं. दीनदयाल उपाध्याय ने दिया था और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाषणों में भी इनके कल्याण की बात सुनाई देती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश के किसान कजऱ् से लदे हुए हैं, और पाले से $खराब हुई $फसल को देखकर उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। लगभग रोज़ दो चार किसान ज़हर पीकर अथवा $फांसी लगाकर आत्महत्या कर रहे हैं। नोट गिनने की मशीनों से चिपके नेताओं को इन किसानों के अंासू पोंछने की $फुर्सत नहीं है। आ$िखर यह कब तक चलेगा? किसान पुत्र मुख्यमंत्री शिव भ्रष्टाचार के $िखला$फ अपना तीसरा नेत्र कब खोलेंगे? क्या मप्र में भ्रष्टाचार मिटाने की बात केवल भाषणों में होगी।

क्या हैं तलवार दंपती को फंसाने वाले सवाल?
हृ
जैनेन्द्र कुमार

नोएडा।
आरुषि हत्याकांड में शक की सूई पूरा चक्कर लगाते हुए एक बार फिर तलवार दंपती के सामने आकर रुक गई है। सवाल है कि आ$िखर ऐसी कौन सी बातें हैं जिसकी वजह से अदालत ने तलवार दंपती पर हत्या का मुकदमा चलाने का आदेश दे दिया। यहां हम पेश कर रहे हैं वे सवाल जिनकी वजह से तलवार दंपती शक के घेरे में हैं।
आरुषि के कमरे का दरवाज़ा कैसे खुला ?
- ए$फएसएल गांधीनगर में साइंटि$िफक टेस्ट से पहले तलवार दंपती ने अपने बयान में कहा था कि रात को सोते समय वह आरुषि का कमरा लॉक करते थे। इस कमरे को बाहर से लॉक करने के बाद चाबी $खुद नूपुर तलवार अपने पास रखती थीं। आरुषि का कमरा बाहर से चाबी से खुल सकता था, या आरुषि अंदर से बिना चाबी के खोल सकती थी। लेकिन घटना के बाद चाबी लॉबी के पास मिली थी। आरुषि का दरवाज़ा सुबह खुला हुआ था। आरुषि के शरीर को सा$फ कर दिया गया था। सीबीआई के इस सवाल पर भी तलवार दंपती के पास जवाब नहीं था कि आरुषि का दरवाज़ा कैसे खुला? सीबीआई का कहना है कि या तो कमरा पैरंट्स ने खोला, या आरुषि ने $खुद खोला था।
आरुषि के मोबाइल रिकॉर्ड किसने डिलीट किए?
- आरुषि के मोबाइल से तमाम डेटा डिलीट किया जा चुका था। सीबीआई के इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं मिल सका है, कि यह काम किसने किया? ऐसा कोई आम अपराधी नहीं कर सकता।
गला काटने वाला शख़्स उतना स्किल्ड कैसे?
- आरुषि का गला तेज़धार वाले हथियार से काटा गया था। जिस सधे अंदाज में यह काम किया गया, उससे लगता है कि गला काटने वाले शख़्स बेहद स्किल्ड था। सवाल है कि अगर नौकरों में से किसी ने यह काम किया, तो सर्जन जैसी स्किल उसके पास कैसे आई?
रेप का जि़क्र क्यों हटवाना चाहते थे तलवार?
- राजेश तलवार के भाई ने डॉक्टर से कहा कि वह पोस्टमॉर्टम में रेप का जि़क्र न करें। शुरुआत में $गायब गोल्$फ स्टिक मिलने के बाद तलवार ने इस बारे में सीबीआई को नहीं बताया। सीबीआई के मुताबिक आरुषि और हेमराज को गोल्$फ स्टिक से मारा गया और फिर गले को काटा गया। गोल्$फ स्टिक से दोनों को मारा गया। इससे ज़ाहिर होता है कि यह कृत्य एकाएक गुस्से और उत्तेजना में हुआ होगा।
हेमराज पर ही क्यों जताया शक?
- सुबह जब नौकरानी घर आई तो दरवाज़ा बाहर से लॉक था। तब तक नूपुर तलवार नॉर्मल थीं। उन्होंने घर की चाबी बालकनी से बाहर फेंकी। इसके बाद नौकरानी घर में दा$िखल हुई। तभी तलवार दंपती को पता चला कि आरुषि की हत्या कर दी गई है, और हेमराज $गायब है। उन दोनों ने नौकरों से कहा, देखो हेमराज क्या कर गया? इसके बाद तलवार दंपती ने अपने दोस्त को $फोन किया और फिर पुलिस को इत्तला दी गई।
कानूनी जानकार डी.बी. गोस्वामी का कहना है, कि एविडेंस एक्ट-8 में घटना के पहले और घटना के बाद आरोपी के आचरण को देखा जाता है। इस घटना के बारे में जब तलवार दंपती को नौकरानी के आने के बाद पता चला तो, नूपुर ने कहा कि देखो हेमराज क्या कर गया? ऐसे में यह सवाल उठता है कि नूपुर को कैसे पता चला, कि हेमराज ने ही मर्डर किया है?
उन्हें कैसे नहीं पता घटना के बारे में?
- एविडेंस एक्ट के तहत यह प्रावधान है कि अगर किसी का मर्डर होता है, तो उसके साथ रहने वाले शख़्स की जि़म्मेदारी बनती है कि वह बताए कि उसे कैसे नहीं पता चला। इस मामले में दूसरे तमाम साक्ष्य हैं जिनसे तलवार दंपती की संलिप्तता सामने आ रही है।
छत की तर$ से क्यों हटाना चाहते थे पुलिस का ध्यान?
- सुबह 7.15 बजे पुलिस मौके पर पहुंची। इसी दौरान डॉ. राजेश तलवार ने बताया कि हेमराज ने हत्या की है, और वह $गायब है। पुलिस ने आरुषि की बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। तभी तलवार के दोस्तों ने कहा कि सीढिय़ों पर $खून के धब्बे हैं, लेकिन छत का दरवाज़ा लॉक है। तलवार को छत की चाबी देने को कहा गया, लेकिन उन्होंने बात अनसुनी कर दी। पुलिस ने भी देखा कि $खून के धब्बे हैं, लेकिन उन्होंने दरवाज़ा नहीं खोला। तभी तलवार ने पुलिस से कहा कि वह अपना समय बर्बाद न करें और हेमराज की तलाश करें।
हेमराज को पहचाना क्यों नहीं?
- आरुषि की लाश पोस्टमॉर्टम के बाद वापस लाई गई, और फिर उसका अंतिम संस्कार हुआ। उसके बाद तलवार के नौकरों ने घर को सा$फ किया और साथ ही तमाम दीवारों को भी सा$फ किया गया। अगले दिन तलवार दंपती आरुषि की अस्थियां लेकर जब हरिद्वार गए तब वहां रिटायर्ड डीएसपी मौके पर पहुंचे और उन्होंने सीढिय़ों पर लगे $खून के निशान के आधार पर शक ज़ाहिर किया। फिर नोएडा पुलिस ने छत का दरवाज़ा तोड़ा और हेमराज का शव बरामद किया गया। लेकिन डॉ. राजेश तलवार ने हेमराज के शव को पहचानने तक से इनकार किया। सीबीआई का कहना है कि ये तमाम $फैक्ट्स इस मामले में राजेश तलवार की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।

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