
कांग्रेस, भ्रष्टाचार और मनमोहन
एक ईमानदार प्रधानमंत्री के कार्यकाल में आज तक के सबसे बड़े २ जी स्पैट्रम घोटाले के उजागर होने के बाद, उन्हीं की सरकार के पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए.राजा ने संसद में खड़े होकर इस आशय की बात कही थी कि ''मैंने जो कुछ भी किया प्रधानमंत्री की जानकारी में लाकर किया।ÓÓ इसके बाद भी उनका मौन भंग नहीं हुआ। इससे डॉ.सिंह की ईमानदारी का संदेह के घेरे में आ जाना लाजिमी है। इसके अलावा कॉमनवैल्थ घोटाला, आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला भी डॉ. सिंह के कार्यकाल में ही हुए। हालांकि, इससे यह सिद्ध नहीं होता कि इह्व तीनों घोटालों में डॉ. सिंह की कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका रही होगी, लेकिन कार्यपालिका के शीर्ष पर होने से वे इस बात से तो नहीं बच सकते कि वे भ्रष्टाचार पर नकेल डालने में नाकाम रहे।
जैनेन्द्र कुमार
जयपुर। इन दिनों तीन बातों की सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है। काँग्रेस पार्टी का 83 वाँ महाधिवेशन, डॉ. मनमोहन सिंह की ईमानदारी और 2जी स्पैक्ट्रम घोटाला। सबसे पहले बात काँग्रेस पार्टी की। काँग्रेस पार्टी के 125 साल पूरे होने पर इसके इतिहास पर भी नज़र डालना लाजि़मी हो जाता है। स्वतंत्रता के साथ ही काँग्रेस पार्टी ने प्रशासनिक कुशलता, निरंतरता, शहरी-ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संतुलन, उत्पादन में वृद्धि वाली राजनीतिक व्यवस्था कायम करने का $फैसला लिया था। पार्टी का उद्देश्य तब न्याय पर आधारित सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व्यवस्था की स्थापना और अहिंसात्मक एवं शांतिपूर्ण तरीके से वर्गविहीन लोकतंत्रीय समाज की स्थापना करना था। संसदीय जनतंत्र पर आधारित व्यवस्था में अधिकारों की समानता और विश्वशांति एंव विश्व-बंधुत्व स्थापित करना था। इससे इतर काँगे्रस पार्टी के 83वें तीन दिवसीय महाधिवेशन के अंतिम दिन सोमवार दिसंबर 20 को कई महत्वपूर्ण बातें समाने आईं। मसलन भ्रष्टाचार महामारी की तरह समाज के हर स्तर पर फैल चुका है। साम्प्रदायिकता बहुसंख्य और अल्पसंख्यक आतंकवाद दोनों ही देश के लिए $खतरा हैं। दृढ़-संकल्प में शक की गुंजाइश न होने के बावजूद सीमापार आतंकवाद जारी है। जम्मू-कश्मीर मसले पर कई द$फा वार्ता होने के बाद भी समस्या जस की तस है। पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति के लिए समझौते का विकल्प खुला रखना ज़रूरी है। नक्सलवाद देश के लिए गंभीर समस्या बन गया है। पार्टी को चिंतन समूह गठित कर उनकी सलाह माननी होगी। इससे सा$फ हो जाता है, कि आ$िखर पार्टी अपने उद्देश्यों को पूरा करने में कितना सफल हो पाई। उसे आगे कहाँ सुधार करने व कितनी मेहनत करने की दरकार और है।
अब डॉ. मनमोहन सिंह के मुद्दे पर आते हैं। देश के प्रधानमंत्री और ख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हाल ही काँग्रेस पार्टी के 83 वें महाधिवेशन में कहा-मेरा यही मानना है कि जूलियस सीज़र की पत्नी की भांति प्रधानमंत्री को भी संदेह से परे रहना चाहिए। यही कारण है कि मैं पीएसी के समक्ष उपस्थित होने को तैयार हूँ।
यह बात अलग है कि इससे पहले इस तरह का कोई वाकया नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, इस महान देश के प्रधानमंत्री के तौर पर साढ़े छह वर्षों के अपने कार्यकाल के दौरान हो सकता है कि मैंने गलतियां की हों। हालांकि, मैंने अपनी काबिलियत के अनुरूप इस देश की सेवा करने की भरसक कोशिश की है।
मेरे पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है। कार्यपालिका के सर्वोच्च शिखर पर आसीन व्यक्ति के लिए स्वयं को सवाल-जवाब के लिए प्रस्तुत करना आसान नहीं होता। उनका यह कहना कि हो सकता है कि मैंने $गलतियां की हों... उनकी प्रशंसनीय विनम्रता और ईमानदारी का अद्वितीय उदाहरण माना जा सकता है।
इसमें कोई दो राय नहीं, कि वे जितने अच्छे अर्थशास्त्री हैं, उतने ही अच्छे इंसान भी हैं। उनकी सा$फगोई की जितनी तारी$फ की जाए उतनी कम है, लेकिन 1 लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए के 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले पर उनकी लंबे समय तक जारी रही चुप्पी को क्या समझा जाए। एक ईमानदार प्रधानमंत्री के कार्यकाल में आज तक के सबसे बड़े 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले के उजागर होने के बाद उन्हीं की सरकार के पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए.राजा ने संसद में खड़े होकर इस आशय की बात कही थी, कि मैंने जो कुछ भी किया प्रधानमंत्री की जानकारी में लाकर किया। इसके बाद भी उनका मौन भंग नहीं हुआ। इससे डॉ. सिंह की ईमानदारी का संदेह के घेरे में आ जाना लाज़मी है। इसके अलावा कॉमनवैल्थ घोटाला, आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला भी डॉ. सिंह के कार्यकाल में ही हुए। हालांकि, इससे यह सिद्ध नहीं होता, कि इन तीनों घोटालों में डॉ. सिंह की कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका रही होगी, लेकिन कार्यपालिका के शीर्ष पर होने से वे इस बात से तो नहीं बच सकते, कि वे भ्रष्टाचार पर नकेल कसने में नाकाम रहे। उनकी शालीनता, सौम्यता और गंभीरता को उनकी ही सरकार के लोगों ने उनकी कमज़ोरी समझा और जो मन में आया वही किया, इस बात पर विचार किए ब$गैर कि वो जो कर रहे हैं, वह भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है, और इसके लिए देर-सवेर उन्हें तो सजा मिलेगी ही, उनके साथ ही पूरी पार्टी को इसके दुष्परिणाम झेलने होंगे अथवा पूरे संगठन के लोगों की ईमानदारी पर उंगलियाँ उठ सकती हैं।
इसके अलावा एक बात और जो आम जनता के मन को लगातार मथ रही है, वह है, उनका संयुक्त संसदीय समिति यानी जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी-जेपीसी के लिए स्वीकृति ना देना। डॉ. सिंह लोक लेखा समिति, पीएसी के सामने पेश होने को तैयार हैं, लेकिन संयुक्त संसदीय समिति, जेपीसी की माँग को उन्होंने ठुकरा दिया। हालांकि, लोक लेखा समिति के अध्यक्ष संसदीय प्रणाली में प्रमुख विपक्षी दल के नेता होते हैं, और $िफलवक्त भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी इसके अध्यक्ष हैं। इस समिति में संसद के लगभग सभी प्रमुख दलों के चुने हुए सांसदों को शामिल किया जाता है। इसका अधिकार क्षेत्र सरकार के $खर्च और प्राप्ति के बहीखातों की तकनीकी जाँच करना है। 2 जी स्पैक्ट्रम करीब-करीब इसके अधिकार क्षेत्र में आता है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, कि लाइसैंस देने में गड़बड़ी होने से सरकार को एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है। इसके बाद देश की राजनीति और विशेषतौर से भारतीय संसद में तू$फान सा उठ खड़ा हुआ। जिस संसद की कार्यवाही पर लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं, वही संसद विपक्षी पार्टी के सांसदों ने यह कहकर नहीं चलने दी, कि 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले की जाँच जेपीसी से कराई जाए, लेकिन सरकार नहीं मानी और गतिरोध दूर न हो सका।
इसका नतीजा यह निकला कि संसद के शीतकालीन सत्र में कोई उल्लेखनीय कार्रवाई ही नहीं हो पाई। इतना सब होने के बावजूद डॉ. सिंह जेपीसी की जाँच के लिए सहमत नहीं हैं। जब सिंह पीएसी के हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं, तो जेपीसी को हरी झंडी देने में क्या अड़चन आ रही है, यह आम जनता की समझ से परे है। बहरहाल सरकार के शीर्ष पर बैठे मुखिया के पास सबसे ज़्यादा अधिकार होते हैं, तो सबसे ज़्यादा जि़म्मेदारियां भी, और उनकी मजबूरियों को भी हर कोई समझ ले, ऐसा नहीं हो सकता। आज के परिदृश्य में भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी का विश्लेषण किया जाए, तो दोनों ही तमाम दुविधाओं और समस्याओं से घिरी नज़र आती हैं। रही बात डॉ. सिंह की, तो जनता उनसे यही उम्मीद करती है कि वे शांत और चुप्पी साधने की अपनी सामान्य छवि के विपरीत, अब आक्रामक तेवर दिखाएंगे, और भ्रष्टाचारियों-दोषियों को कठोर दंड देने के लिए हर संभव कदम उठाएँगे।
मैं प्रभात झा से बेहतर हिन्दू हूं
भोपाल। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वह मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष प्रभात झा से कहीं बेहतर हिन्दू हैं। अपने निवास पर मंगलवार दिसंबर 21 को उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वे झा से बेहतर हिन्दू हैं, और इसके लिए उनको झा से किसी भी प्रमाण-पत्र की ज़रूरत नहींं हैं।
जब उनसे यह कहा गया कि विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने उन्हें 'पा$गलÓ करार दिया है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा आरोप लगाने के पहले सिंघल को $खुद अपने दिमा$ग की जांच करानी चाहिये। यह पूछे जाने पर कि उनके संघ के बारे में क्या विचार हैं, तो उन्होंने कहा कि वह संघ के बारे में इतना कह चुके हैं, कि उन्हें उसके बारे में कुछ भी और कहने की ज़रूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि संघ ऐसी संस्था है, जो चोरों से चोरी करने के लिए कहती है, और कोतवाल से उन्हें पकडऩे की बात करती है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने मांग की है, कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस्ती$फा दे देना चाहिए, क्योंकि वह यहां पर किसानों के आंदोलन को रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं। कांग्रेस महासचिव ने अपने निवास पर पत्रकारों से चर्चा में कहा कि चौहान झूठ बोलते हैं, ये बात वह $खुद नहींं, बल्कि वे किसान कह रहे हैं, जो भाजपा द्वारा चलाये गये संगठन का हिस्सा हैं। सिंह ने कहा कि वह दस साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे लेकिन उस दौरान इस तरह का कोई भी आंदोलन प्रदेश में कहीं पर भी नहींं हुआ। उन्होंने कहा कि भाजपा के पिछले सात सालों के शासन में खाद की कालाबाज़ारी बढ़ी है और किसानों के $िखला$फ कठोर कदम उठाये गये हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि अगर चौहान में वाकई दम है तो उन्हें उन लोगों के $िखला$फ कदम उठाने चाहिए, जो लोग खाद जैसी चीज़ों की कालाबाज़ारी में लगे हुये हैं।

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