
तलाक के बाद हनीमून
आलोक तोमर
रांची। दो बार तलाक के बाद भाजपा और शिबू सोरेन फिर साथ आ गए हैं। मुख्यमंत्री दो बार शपथ ले चुके अर्जुन मुंडा बनेंगे और तीन बार शपथ ले चुके शिबू सोरेन उन्हें समर्थन देंगे। सोरेन पर दया भी आती है, मगर वे शायद इसी लायक थे। झारखंड में भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा और ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। पार्टी के विधायक दल के नेता चुने गए अर्जुन मुंडा ने राज्यपाल एम.ओ.एच. फ़ारूक से मिलकर उन्हें 45 विधायकों के समर्थन की चि_ी दी। झामुमो, आजसू, जनता दल (युनाइटेड) के नेता और दो निर्दलीय विधायक भी उनके साथ थे।
इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री मुंडा को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष रघुबर दास ने बताया कि अर्जुन मुंडा को विधायक दल का नेता चुना गया है। ग़ौरतलब है कि बीते 30 मई को शिबू सोरेन के इस्तीफ़ा देने के बाद से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। इससे पहले सोमवार सितंबर 6 को जेएमएम विधायक दल के सचेतक शशांक शेखर भोक्ता ने कहा था, कि राज्य में लोकप्रिय सरकार बनाने के लिये जल्द दावा पेश किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जेएमएम बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिये तैयार है और अब बीजेपी को आगे पहल करना है।
झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिये 41 विधायकों की आवश्यकता है और बीजेपी के 18, जेएमएम के 18 और आजसू के पांच विधायकों के ठोस समर्थन से यह जादुई आंकड़ा प्राप्त हो जाएगा। राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाये रखने की परंपरा के कारण बीजेपी में एक बार फिर मुंडा का नाम मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सबसे ऊपर चल रहा है। मुंडा दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। झारखंड में अर्जुन मुंडा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है, और वह जेएमएम और एजेएसयू के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। राज्य में तीन महीने से जारी राजनीति गतिरोध टूटा। जेएमएम ने कहा, बिना शर्त समर्थन दिया।
मौजूदा विधायक दल के नेता रघुवर दास के इस्तीफे़ के बाद मुंडा को नया नेता चुना गया है। सोमवार की रात दास को फोन कर बीजेपी के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने विधायक दल की बैठक बुलाने को कहा। मंगलवार सितंबर को बैठक के बाद रघुवर दास ने कहा, निर्देश के मुताबिक मैंने अपना पद छोड़ दिया है और पार्टी विधायक दल की बैठक में अर्जुन मुंडा को नेता चुना गया है।
इससे पहले बीजेपी ने झारखंड में जेएमएम और एजेएसयू के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करने का फ़ैसला किया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता अजय मारू ने कहा, पार्टी ने नई सरकार बनाने का फ़ैसला किया है। तीन महीने पहले बीजेपी और जेएमएम की गठबंधन सरकार उस वक्त बिखर गई, जब बजट सत्र के दौरान लोकसभा में कटौती प्रस्ताव पर जेएमएम प्रमुख शिबू सोरेन ने यूपीए सरकार के पक्ष में मतदान किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, जेएमएम ने सरकार बनाने की बीजेपी की पहल को बिना शर्त समर्थन देने का फ़ैसला किया है। इससे पहले शिबू सोरेन के बेटे और जेएमएम विधायक दल के नेता हेमंत सोरेने ने कहा कि वह समान विचारधारा वाली पार्टियों को समर्थन देने के विकल्प खुले रखे हुए हैं, क्योंकि फिर से चुनाव कराने पर भी खंडित जनादेश ही आएगा। एजेएसयू के उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने भी कहा है कि उनके पांच विधायक बीजेपी की पहल का समर्थन करेंगे। बीजेपी संसदीय बोर्ड ने 28 अप्रैल को सोरेन सरकार से समर्थन वापस लेने का फ़ैसला किया, क्योंकि शिबू सोरेन ने पार्टी की तरफ़ से लोकसभा में लाए गए कटौती प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया। बाद में हेमंत सोरेन की तरफ़ से बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी को पत्र लिखे जाने पर बीजेपी ने समर्थन वापसी के फै़सले को रोक दिया। इस पत्र में जेएमएम ने कहा कि वह बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार है। लेकिन जेएमएम अपनी बात से पीछे हट गई और बारी बारी से सरकार का नेतृत्व करने की मांग करने लगी। इस बात पर सहमित बनी कि 25 मई को सोरेन मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे, जिसके बाद मुंडा अगली गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे।
लेकिन जब जेएमएम सत्ता साझेदारी की डील से भी पीछे हट गई, तो हताश होकर बीजेपी को 23 मई को शिबू सोरेन सरकार से समर्थन वापस लेना पड़ा। इसके बाद सोरेन सरकार गिर गई और राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। यह बात सब जानते हैं कि राजनीति में कोई लंबे समय तक दोस्त और दुश्मन नहीं रहता जी हां, इस बात का उदाहरण दे रही हैं भारतीय जनता पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा। ये दोनों पार्टी एकबार फिर साथ-साथ दिख रही हैं। ऐसा माना जा रहा है, कि ये दोनों एक बार फिर झारखंड में मिल-जुलकर अपनी सरकार बनाने वाले हैं। इन दोनों पार्टियों की बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है हालांकि खुले तौर पर ये वार्ता नहीं हो रही थी। बातचीत के बाद भाजपा एक बार फिर सरकार बनाने की तैयारियों में जुटी है। वह जल्द ही सरकार बनाने का दावा करेगी। भाजपा का दावा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा फिर बिना शर्त समर्थन देगी।
सूत्रों के अनुसार रांची में मंगलवार सुबह भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई। इसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता रघुवर दास ने नेता पद से इस्तीफा दे दिया, तथा अर्जुन मुंडा को विधायक दल का नया नेता चुन लिया गया। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुंडा अब राज्यपाल से मुलाकात करने जाएंगे तथा सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
इससे पहले रविवार सितंबर 5 को झामुमो की बैठक हुई थी। इसमें झामुमो नेता शिबू सोरेन को सारे फैसले लेने के अधिकार सौंप दिए गए थे। इस बीच, भाजपा की भी बैठक हुई थी, जिसमें अर्जुन मुंडा को सारे अधिकार सौंपे गए थे।
झारखंड में जम कर चली रकम की राजनीति
हृ कृष्णमोहन सिंह
नई दिल्ली। शिबू सोरेन ने अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनाने के लिए समर्थन यों ही नहीं दे दिया है। राजनैतिक तौर पर भले ही मोर्चा को कोई ख़ास लाभ नहीं हुआ हो, मगर गुरुजी और उनकी पार्टी अच्छी ख़ासी रईस हो गई है। एक बड़े उद्योग समूह ने भाजपा के लिए इस काम में दिल खोल कर सहयोग किया है, और ज़ाहिर है, कि इस सहयोग की पूरी कीमत यह कंपनी वसूल करेगी। टूटने से बचने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा( झामुमो) ने उद्योगपति एस्सार के तथाकथित यसमैन अर्जुन मुंडा को मजबूरी में समर्थन दे दिया। अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनवाने के लिए एस्सार का दिल्ली में कारपोरेट चीफ़ यानी लाइज़निंग चीफ़ रहा निशीकांत दूबे लगभग पांच माह से रात दिन एक किये हुए हैं।
कहा जाता है कि दूबे आज भी अघोषित रूप से रूइया के लिए तथाकथित लाइज़निंग का काम कर रहा है। रूइया की रूची झारखंड के खादानों में है। सो एक बार उसका यसमैन मुख्यमंत्री बन गया तो कर्नाटक के रेव्ी ब्रदर्स की तरह रूइया भी झारखंड में मालामाल हो जायेगा। उसका अघोषित लाइजनर भी और मालामाल हो जायेगा। अघोषित लाइजऩर का तो घोषित लाइजनिंग के समय का ही रूइया की कई कम्पनियों में करोड़ों रूपये के शेयर हैं। इस लाइजऩर के चलते सुषमा स्वराज भी रूइया की तथाकथित शुभचिंतक हो गई हैं और अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनवाने के लिए पूरा ज़ोर लगा दी है।
सूत्रों के मुताबिक राजनाथ सिंह को भी तथाकथित लाइजनर के अलावा खुद अर्जुन मुंडा ने पहले से ही पटा रखा है। अर्जुन मुंडा जब मुख्यमंत्री थे तो राजनाथ भाजपा अध्यक्ष थे। कहा जाता है कि उस समय अर्जुन मुंडा राजनाथ और वेंकैया नायडू को हर माह सलामी देने जाते थे। सो ये लोग भी अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनवाने के लिए जी जान से लगे हुए हैं। सुषमा,राजनाथ ही हैं जिनने रघुवर दास पर दबाव डालकर झारखंड भाजपा विधायक दल के नेता पद से इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया और अर्जुन मुंडा को नेता भाजपा विधायक दल बनवाया। भाजपा अध्यक्ष नीतिन गडकरी इस समय रूस भ्रमण कर रहे हैं। वह 6 अगस्त को गये थे। उनपर भी सुषमा स्वराज और राजनाथ का भारी दबाव था कि अर्जुन मुंडा को ही मुख्यमंत्री बनाने के लिए हामी भरिये। गडकरी इन दोनों के दबाव में आ गये। नागपुर के तीन व्यापारी भी इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, जो रांची में डेरा डाले हुए हैं।
कहा जाता है कि ये भी कुछ अपने पावर प्रोजेक्ट के धंधे और कुछ अन्य लाभ के लिए अन्दर -अन्दर एस्सार लाबी के तथाकथित अंग हो गये हैं। सूत्रों के मुताबिक अर्जुन मुंडा अपने चहेते एस्सार के तथाकथित लाइजऩर के सहयोग से 30 जून 2010 से ही झामुमो,आजसू,जदयू व कुछ निर्दलियों को साम-दाम-दंड-भेद से पटाने में लगे रहे। झामुमो के हेमंत सोरेन तो पहले किसी भी हालत में अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन देने के लिए राज़ी नहीं हो रहे थे। क्योंकि वह अर्जुन मुंडा के रग़-रग़ से वाकिफ़ हैं। अर्जुन मुंडा ने उनके पिता शिबु सोरेन को कई बार दग़ा दिया है। अर्जुन मुंडा मूल रूप से तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के हैं। वह संघ से दीक्षित होकर भाजपा में नहीं आये हैं। इसलिए भी उनको तरह-तरह के करम करने से कोई गुरेज़ नहीं रहा है। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने जो किया वह उतना उजागर नहीं हो पाया, वरना दुनिया जानती कि वह भी किसी से कम नहीं। इस बार मुख्यमंत्री बन गये तो पुरानी आदत तो रहेगी ही। लेकिन इसबार उनकी हर फ़ाइल पर कांग्रेस और उसके चहेते अफ़सरों की निगाह रहनी है। सो ऐसे अर्जुन मुंडा को समर्थन देकर मुख्यमंत्री बनवाने से अच्छा सरकार नहीं बने तो ही ठीक।
हेमंत सोरेन ने भाजपा नेताओं से कहा कि आप लोग भाजपा के किसी वरिष्ठ आदिवासी विधायक को मुख्यमंत्री बनवाइये, झामुमो उसका समर्थन करेगी। हेमंत ने इसके लिए खूंटी विधान सभा के भाजपा विधायक और तीन बार मंत्री रहे संघ से दीक्षित, नीलकंठ मुंडा को समर्थन देने का संकेत किया। नीलकंठ को भाजपा के वरिष्ठ सांसद व लोकसभा उपसभापति करिया मुंडा तथा पूर्व विदेश-वित्ता मंत्री यशवंत सिन्हा भी मुख्यमंत्री बनवाना चाहते थे। लेकिन सुषमा एवं राजनाथ को तो अर्जुन मुंडा के अलावा कोई और इस पद पर चाहिए ही नहीं। ये दोनों अर्जुन मुंडा के नाम पर अड़े रहे, और इधर अर्जुन मुंडा व एस्सार के तथाकथित लाइजऩर ने मिलकर झामुमो के विधायकों को साम-दाम-दंड-भेद से पटाने का अभियान तेज़ कर दिया। झामुमो के विधायकों एवं सांसदों का तो अपनी बोली लगाने का इतिहास ही रहा है।
सो कहा जाता है, कि लगभग दो तिहाई विधायक मेढ़की भूमिका में अर्जुन मुंडा व उसकी तथाकथित एस्सारी पलड़े में छलांग लगा दिये। यह सब कर्म हुआ चुनाव कराने से रोकने के सुचिता के नाम पर। कितने में क्या हुआ इसका खुलासा भी कुछ दिन में हो जायेगा। यह हो जाने की पक्की सूचना मिलने के बाद शिबू सोरेन- हेमंत सोरेन ने पार्टी बचाने के लिए मजबूरी में अर्जुन मुंडा को समर्थन किया।
मास्को में गडकरी आखिर किसके मेहमान
हृ सुप्रिया रॉय
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी विदेश यात्राओं के मामले में पार्टी के सबसे बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी को भी मात देने में जुटे हुए हंै। इस समय वे मास्को में हैं और उनकी इस पांच दिन की यात्रा को ले कर अच्छा ख़ासा विवाद छिड़ गया है। तकनीकी तौर पर गडकरी पेयजल के क्षेत्र में रूस के सहकारी आंदोलन की भूमिका का अध्ययन करने गए हैं। भाजपा की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वॉटर फ्रीडम रिवोल्यूशन संस्था के निमंत्रण पर गडकरी मास्को गए हैं, और यह संस्था पूरे विश्व को शुद्व पानी उपलब्ध करवाने के प्रति समर्पित है। इस संस्था के संयोजक प्रोफ़ेसर विक्टर पैट्रिक हैं, जिन्होंने पानी शुद्व करने का एक नया फ़ॉर्मूला, गोल्डन फ़ॉर्मूला ईजाद किया है। भाजपा की ओर से इस संस्था की बहुत तारीफ़ की गई है, लेकिन रूस से मिली ख़बरों के अनुसार पेट्रिक काफ़ी विवादास्पद व्यक्ति हैं और एटमी तकनीक और कार्बनशीट के अविष्कार का जो उनका दावा है, वह भी तथ्यों पर खरा नहीं उतरता। ख़ास तौर पर एटमी तरीके से शुद्व किया हुआ पानी तो लोगों को नुकसान भी पहुंचा सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने पुष्टि की है कि यह आपत्तियां भी उनकी जानकारी में हैं, मगर पार्टी अध्यक्ष मास्को में कोई वचन देने नहीं गए थे।

सब इस गंदे राजनीती का खेल है ,जनता तो मूक दर्शक है और जबतक वो मूक रहेगी तब-तक ऐसी ही स्थिति रहेगी ....
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