
नकली खाद व कीटनाशक कारखानों पर छापे
छींटे मध्यप्रदेश मंत्री पर
प्रकरण के प्रमुख आरोपी जैन और भादुपोते राईट-लेफ़्ट हैंड कहे जाते थे सहकारिता मंत्री श्री बिसेन के। बालाघाट के प्रत्येक कार्यक्रम में मंत्री के पीछे दिखते थे। भाजपा कार्यकर्ता इनको मजबूरी में भाव देते रहे, मगर मंत्री के नकचढ़े स्टाफ़ बसंत रहांगडाले से तो कार्यकर्ता असंतुष्ट ही हैं। पप्पू भादुपोते की पहचान मंत्री के किचन मेम्बर के रूप में होने लगी थी। आरोपी जैन और भादुपोते के खि़लाफ़ गोंदिया रावणवाड़ी एवं गंगाझरी में मामला धारा 13, 3, 4 के 17 (1), 18 (1) कीटनाशक एक्ट के साथ ही धारा 418, 420, 468, 447, 483, 201, 34 भारतीय दण्ड विधान के तहत दर्ज किया गया है। खाद में सी.जी. बायोएक्टिवा, जादूजाईम, श्रीजी-ट्राई, कोडर्म पाउडर, उसमें मिश्रित किये जाने वाला टेलकम पाउडर, पैकिंग के स्टीकर व डिब्बे बरामद हुए। नकली कीटनाशक रूपये 1.25 करोड़ के ज़प्त किये गये। आरोपी मादुपोते से संबंधों को लेकर मंत्री जी का बयान मात्र एक औपचारिता है। छग-मप्र के कई जि़लों में नकली कीटनाशक सप्लाई किये जाते थे। गोंदिया में अक्रोशित जनता द्वारा आरोपियों के पुतले जलाये गए।
हृ रहीम खान गोंदिया (महाराष्ट्र)। विदर्भ क्षेत्र के गोंदिया, नागपुर एवं वर्धा में आईबी द्वारा पुलिस के सहयोग से छापामार कार्यवाही करके जिस तरह से असली कीटनाशकों व खाद में मिलावट कर नकली माल बनाकर कृषकों व आमजनों से धोखाधड़ी कर की जा रही लूटपाट का पर्दा$फाश किया है, यह कृत्य वास्तव में ही सराहनीय है।
मध्यप्रदेश के बालाघाट से केवल 45 किलोमीटर स्थित महाराष्ट्र के नगर गोंदिया में सिविल लाईन स्थित सुधीर हुकुमचंद जैन के मकान में पुलिस द्वारा इंटेलीजेंस ब्यूरो एवं आईबी के पहल पर कृषि उपयोग में लाये जाने वाले कीटनाशकों को मिलावट करके बड़े पैमाने पर नकली कीटनाशक बनाने वाले अड्डों पर छापा मारकर करोड़ों रूपये का माल ज़प्त किया गया। रि-पैकिंग की जा रही बोतलें प्राप्त हुई, जिसमें सच्चाई सामने आयी, कि श्रीजी-बायोटेक एग्रीकल्चर एण्ड ईक्वीपमेंट के एग्डीरेस्टिनीम 1500 पीपीएम नामक कीटनाशक की असली दवा की एक बोतल के माध्यम से अधिक बोतलों में मिलावटी कीटनाशक भरने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा बोतलों के खोले गये ढक्कन व दूसरी बोतलें तैयार करने के लिए स्टीकर, ढक्कन व खाली बोतलें बरामद हुईं। उल्लेखित है कि कृषि विभाग एवं ड्रग एण्ड फुड विभाग, क्वालिटी कन्ट्रोल के तहत यह जि़म्मेदारी आती है कि बाज़ार में बिकने वाली कीटनाशकों का समय समय पर नमूना एकत्रित कर प्रयोग शाला में उनकी शुद्धता की जांच करायी जाये, लेकिन इन विभागों की मिलीभगत के कारण इस तरह के मिलावटी केन्द्र संचालित हो रहे हैं। इसलिए आईबी ने पुलिस विभाग के माध्यम से कार्यवाही करायी। इस गोरख धंधे में मध्यप्रदेश के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन के ख़ासम ख़ास या नाक के बाल कहे जाने वाले पप्पू भादुपोते की भी प्रमुख भूमिका रही है। पुलिस ने छापे के बाद हल्बीटोला में एक गोदाम में पकड़े गये कीटनाशक के मामले में रावणवाड़ी पुलिस थाने में पप्पु भादुपोते, अज्जू भादुपोते, कमलेश बनोटे व सुधीर जैन के खि़लाफ़ धारा 13, 3, 4 के 17 (1), 18 (1) कीटनाशक एक्ट के साथ ही धारा 418, 420, 468, 447, 483, 201, 34 भारतीय दण्ड विधान के तहत मामला दर्ज किया। आरोपी सुधीर जैन को 19 अगस्त को ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उसके खि़लाफ़ फिर लगातार कार्यवाही की जा रही है। पर अन्य आरोपी राजनीतिक संरक्षण के कारण बचते फिर रहे हैं। इस पूरे मामले में बालाघाट जि़ले के निवासी मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन की भूमिका भी संदिग्ध दिखायी पड़ रही है, क्योंकि प्रमुख आरोपी पप्पू भादुपोते जैसे ही बिसेन मंत्री बने, उनके आगे पीछे हमेशा बालाघाट में देखे जाते थे। यह अचानक रातों रात बालाघाट में इनका प्रेम अनेक लोगों को समझ नहीं आ रहा था। परन्तु जब सम्पूर्ण मामले का पर्दाफ़ाश हुआ तो स्पष्ट हो रहा है, कि इन्होंने सहकारिता मंत्री के संरक्षण में यह कारनामा किया है, जिस की आग में मंत्री जी भी झुलसे बिना नहीं रह सकते। न्यायालय द्वारा प्रमुख आरोपी सुधीर जैन को ज़मानत नही दी गयी। स्मरणीय है कि पप्पू भादुपोते को सहकारिता मंत्री ने हैसियत से अधिक जिस प्रकार से महत्व दिया था और बालाघाट जि़ले में भी किसानों के द्वारा नकली खाद प्राप्ति की शिकायतें लगातार की जाती रही हैं, जिसका $फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह सब घटनाक्रम इस बात को सोचने के लिए मजबूर कर देता है कि गोंदिया और बालाघाट में 45 किलोमीटर की दूरी है और नकली खाद के प्रमुख आरोपी पूंछ की तरह मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन से चिपके रहते थे, तो यह स्पष्ट है कि यदि पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आती, तो इस प्रकरण के छींटे सहकारिता मंत्री के दामन को भी दाग़दार कर देंगे। बताया जाता है कि बालाघाट में खुलने वाला शक्कर कारखाने में भी पप्पू भादुकोते कहीं न कहीं अपनी भूमिका निभा रहे थे।
गोंदिया से जुड़े हमारे सूत्रों ने बताया कि पप्पू भादुपोते का काम प्रभाव में रहने वाले राजनेताओं से जुड़कर अपनी दुकान को चलाना रहा है और यही काम सहकारिता मंत्री के साथ भी वह कर रहे थे। हमारे सूत्रों ने जानकारी दी है कि सहकारिता मंत्री के दबाव के कारण ही पप्पू भादुपोते के $िखला$फ पुलिस कार्यवाही नहीं कर पा रही है। परन्तु लोकतंत्र में कानून सबसे बड़ा है।
मंत्री का बयान
नकली कीटनाशक प्रकरण में अपने नाम घसीटे जाने पर सहकारिता मंत्री बिसेन ने राजनीति का औपचारिकता प्रदर्शित करने वाला यह बयान दिया कि कीटनाशक की पूर्ति खंरीदी का कार्य कृषि विभाग के अंतर्गत होता है। सहकारिता विभाग से उसका कोई संबंध नहीं है, गोंदिया में उनका ससुराल है। वर्षों से यहां उनका आना जाना है। अनेक लोग उनके सम्पर्क में आते हैं। कौन कैसा है? उससे उनका कोई सरोकार नहीं है। दूर दूर तक उनको इस मामले की जानकारी नहीं है।
जबकि वास्तविकता यह है कि भादुपोते उनके मंत्री बनने के बाद ही उनके साथ लगातार चिपककर चल रहे थे। यह बात बालाघाट का प्रत्येक कार्यकर्ता अच्छी तरह से जानता हैं। उल्लेखित बिन्दु यह है कि भादुपोते ने सहकारिता मंत्री के साथ चिपककर मध्यप्रदेश के अनेक प्रभावशाली राजनेताओं से अपनी घुसपैठ बना ली थी, और उसके माध्यम से वह बड़ा गेम खेल रहे थे। जानकार बताते हैं, कि सुधीर जैन का बालाघाट में इतना दबदबा रहा कि उनके बिल आसानी से विभाग द्वारा पास कर दिये जाते थे।
जनता का आक्रोश
गोंदिया में विभिन्न संगठनों द्वारा नकली कीटनाशक निर्माण करने वाले प्रमुख आरोपी सुधीर जैन और पप्पू भादुपोते के सार्वजनिक रूप से पुतले जलाकर अपना विरोध प्रकट किया गया।
भादुपोते अभी भी $फरार
राजनैतिक संरक्षण में व्यवसाय करने वाले प्रमुख आरोपी पप्पु भादुपोते पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं, जिनको पकडऩे के लिए पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों पर छापे भी मारे गये, पर असफलता ही हाथ लगी।
सरकार के $खुफिय़ा विभाग द्वारा एक व्यवस्थित रूप से पुलिस के माध्यम से छापा मार कार्यवाही करके नकली कीटनाशक प्रकरण में साहस का परिचय देते हुए प्रभावशाली आरोपियों पर हाथ डालकर उनका असली चेहरा बेनकाब किया गया है, मगर संकट के समय राजनीतिक संरक्षण से वंचित प्रमुख आरोपी कब तक पुलिस को चकमा देकर अपने आप को बचाते रहेंगे। दुर्भाग्य पूर्ण विषय तो यह है कि किसानों के नेता कहलाने वाले प्रभावी लोग ही किसानों का गला घोटने वाले आरोपियों को संरक्षण दे रहे हैं।
मैच फिक्सिंग में दाऊद इब्राहिम?
हृ निरंजन परिहार
मुम्बई। अभी यह पता नहीं चला है कि मैच फि़क्सिंग के मामले में भारत का कौन सा गिरोह सक्रिय है? लंदन में पकड़े गए सुपर फि़क्सर मजीद ने भारत की ओर इशारा किया हंै और भारत में गुप्तचर एजेंसियों से ले कर छोटे बड़े सटोरिए तक इस बात पर सहमत हैं, कि इतना बड़ा ऑपरेशन दाऊद इब्राहीम के बिना नहीं हो सकता।
अब एजेंसियों को दाऊद इब्राहीम के क्रिकेट फि़क्सिंग में दिलचस्पी लेने के बारे में पता लगाना है। आखिऱ दाऊद इब्राहीम बहुत दिनों से भारत में सिफऱ् वसूली कर रहा है और उसमें भी छोटा शकील और उसके दूसरे चेले सामने आते हैं। दाऊद इब्राहीम के बारे में तो फि़लहाल यह भी पता नहीं है कि वह पाकिस्तान में मौजूद भी है या नहीं?
ऑपरेशन फि़क्सिंग कितना बड़ा रहा होगा यह इसी बात से ज़ाहिर है कि आईसीसी की कमेटी पाकिस्तान के पिछले अस्सी मैच समीक्षा की सूची में डालने के लिए तैयार हैं और अस्सी मैचों में अगर औसत के हिसाब से प्रति मैच एक अरब रुपए के भी दांव लगे, तो यह खेल 80 अरब रुपए का है। सही बात यह भी है कि इतनी बड़ी रकम में से खिलाडिय़ों को अगर मिला है, तो पांच से दस प्रतिशत मुनाफ़े से ज्य़ादा कुछ नहीं मिला होगा।
इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच लॉर्डस में हुई मैच फिक्सिंग के पीछे डी कंपनी का भी हाथ था। मुंबई के सटोरियों की मानें, तो इस फि़क्सिंग की मास्टर माइंड दाउद की डी कंपनी है। पाकिस्तानियों की मैच फि़क्सिंग के कारण भारतीय सट्टा बाज़ार को एक हज़ार करोड़ से ज्य़ादा की चपत लगी है। जबकि पाकिस्तान और इंगलैंड के बुकीज़ ने 20 मिलियन पाउंड कमा लिए हैं। स्टिंग ऑपरेशन में जब फि़क्सिंग का खुलासा हुआ तो भारतीय सटोरियों ने पैसे देने से मना कर दिया। लेकिन मुंबई के सटोरियों को अब पाकिस्तान से डी कंपनी के फ़ोन आ रहे हैं। पैसा देने के लिए उन पर जबरन दबाव बनाया जा रहा है। दाउद के नाम का हवाला देकर उन्हें नतीजा भुगतने की चेतावनी दी जा रही है। सटोरिए हैं कि वो सुरक्षा के लिए पुलिस से गुहार भी नहीं लगा पा रहे हैं।

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