VISITORS

Friday, July 16, 2010






भंवर में भाजपा

चन्द्र
शेखर
सिंह
भोपाल।
जैसा कि हम $खबरयार के तारीख 18 जून 2010 के अंक में ही बता चुके हैं, कि उमा भारती की भाजपा में वापसी तय होती देख मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ गया है, वो अब सच होता सामने आ रहा है। शिवराज उमा से इतना भयभीत है, कि यदि कोई उमा का नाम भी लेता है तो इस भीषण गर्मी में भी उन्हें कंपकपी छूट जाती है। जैसा कि हमने पहले भी लिखा है कि उमा भारती का एक अपना महिमा मंडल है। भाजपा छोडऩे के बाद भी भाजपा में कई नेता उनके समर्थक हैं, जो पार्टी अनुशासन की तलवार से डरकर अब तक चुप बैठै थे, पर अब, जबकि पार्टी हाईकमान स्तर पर उमा की वापसी की सुगबुगाहट शुरू हो गई है, तो उनके समर्थकों में जोश आना व जोश में बयानबाज़ी करना लाजि़मी है।
उमा समर्थकों की इस बयानबाज़ीयों से शिवराज सक्ते में आ गए हैं। उन्होंने मंत्री नरोत्तम मिश्रा के ज़रिए पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल सहित कई दिग्गजों को मुंह बंद रखने की नसीहत दिलवाई। बाबूलाल गौर का इससे $खफा होना जायज़ है। नसीहत देने वाले नरोत्तम मिश्रा ही नहीं, नसीहत दिलवाने वाले $खुद शिवराज सिंह चौहान भी अनुभव, लियाकत और उम्र के लिहाज़ से बाबूलाल गौर के मुकाबले दूध पीते बच्चे हैं।
उमा को लेकर शिवराज के माथे पर चिंता की जो लम्बी-लम्बी लकीरें खींची हुई नज़र आ रही हैं, उसका कारण है कि शिवराज $खुद में जानते हैं, कि उनके शासनकाल में जनता ही नहीं, $खुद भाजपा के शीर्ष नेता भी $खुश नहीं हैं। भाजपा के शासनकाल में शिवराज काल ही ऐसा है जब भ्रष्टाचार की गंगा पूरे वेग से बह रही है। शिवराज के कितने भ्रष्ट मंत्री इस गंगा में अठखेलियां लगा रहे हैं, उनकी गिनती उंगलियों पर करना मुश्किल है। किसी सरकार में किसी मंत्री का भ्रष्ट होना बड़ी बात नहीं है, पर जिस तरह मुख्यमंत्री $खुद अपने भ्रष्ट मंत्रियों को बचा रहे हैं, उससे कई सवाल खड़े होते हैं।
क्या इन दा$गी मंत्रियों के भ्रष्टाचार में उनकी भी पार्टनरशिप है?
क्या वे $खुद भी सीधे तौर पर किसी घपले घोटाले में इनवाल्व हैं, जैसे कि उन पर जे.पी. व डम्पर घोटाले आदि के आरोप लगे हुए हैं।
आ$िखर दा$गी साथी मंत्रियों को बचाने में मुख्यमंत्री इतनी शिद्दत से क्यों जुटे हैं?
शिवराज शासन के इस भ्रष्टाचार काल से भाजपा हाईकमान भी अनभिज्ञ नहीं है। दैनिक अ$खबार पत्रिका ने जब भूमि घोटाले का मामला उठाया, तो इन्दौर में पत्रिका पर ज़मीन घोटाले से जुड़े कैलाश विजयवर्गीय ने अपने गुंडई भाजपाई साथियों की मदद से जो ज़ुल्म ढाया, उसकी आवाज़ संसद तक पहुंची थी। मीडिया संबंधी सरकारी विभाग भी इन भ्रष्ट मंत्रियों की शह पर राष्ट्रीय विचारधारा वाले निष्पक्ष अ$खबारों, पत्र-पत्रिकाओं को सताने में लगे हैं। भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी के लिए ये शर्म की बात है। इतना कुछ होने के बाद भी यदि शिवराज दा$िगयों को बचा रहे हैं, तो मौसेरे भाई होने की रिश्तेदारी स्पष्ट नज़र आती है।
दूसरी तर$फ उमा भारती का कार्यकाल देखें तो उसमें कोई दा$ग दिखाई नहीं देता। उमा भारती मुंह फट है, जो दिल में आता है, स्पष्ट बोल देती हैं, लेकिन भ्रष्ट नहीं है। उनको भाजपा से हटाया गया तो, उसका कारण उनका बेलाग सच बोलना ही था, जो किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड शिवराज शासन में ही टूटे हैं। कुल मिलाकर भाजपा हाईकमान के नथुनों में भी इस भ्रष्टाचार की दुर्गंध पहुंचना शुरू हो गई है, और वो इस कचरे को सा$फ करने के लिए कोई सख़्त कदम शीघ्र उठाने को तत्पर लगता है। जैसा कि कहा जा रहा है, उमा भारती को यूपी चुनाव की कमान सौंपी जा सकती है। ऐसे में म.प्र. से 'कचराÓ सा$फ किए जाने की स्थिति में उमा भारती एक बार फिर म.प्र. की बागडोर अनुभवी वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूलाल गौर को दिलवा सकती हैं। उमा ने अपनी कुर्सी छोड़ी थी, तब भी उन्होंने बाबूलाल गौर पर भरोसा किया था। गौर ने अपने मुख्यमंत्री काल में काम भी अच्छा किया। उनका शासनकाल भी बेदा$ग ही रहा।
सारी परिस्थिति से अवगत शिवराज इसीलिए उनका भ्रष्टशासन अब और ज्य़ादा दूर नहीं चल सकता है। उमा भारती की भाजपा में 'वापसीÓ के साथ ही शिवराज की 6-श्यामला हिल्स से विदाई तय है। बस सबसे बड़ा सवाल ये है, कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा:-उमा भारती या बाबूलाल गौर।








गडकरी दिग्विजय से मा$फी मांगें : लक्ष्मण

भाजपा नेता और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी द्वारा दिग्विजय सिंह पर की गई टिप्प्णी से क्षुब्ध होकर भाजपा से त्यागपत्र देने का इरादा बना लिया है। श्री सिंह ने कहा कि गडकरी ने मा$फी नहीं मांगी तो वे भाजपा से त्यागपत्र दे देंगे। मा$फी का दो दिन तक इंतज़ार करेंगे। सिंह ने त्यागपत्र तैयार कर लिया है।
यह विवाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के एक बयान से उपजा है। श्री गडकरी ने 4 जुलाई को एक अंग्रेज़ी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह यह बताएं कि वे बार-बार आज़मगढ़ क्यों जाते हैं। क्या वे औरंगज़ेब की औलाद हैं। कांग्रेस महासचिव शिवाजी की औलाद तो नहीं हो सकते। इसी बयान पर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने गडकरी पर तीखी नाराज़गी ज़ाहिर की है। इससे क्षुब्ध होकर भाजपा के पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने भाजपा पर तीखे प्रहार किए हैं।
भाजपा नेता और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने भास्कर से मोबाइल पर चर्चा करते हुए कहा कि गडकरी ने हमारे परिवार पर टिप्पणी की है। ऐसी स्थिति में पार्टी के साथ काम करना नामुमकिन है। गडकरी विवेकहीन हो गए हैं। जब सांसद था, तब मेरा परिवार पार्टी को अच्छा लगता था। अब अचानक मेरे परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां की जा रही हैं, जो क्षुब्ध करने वाली हैं।

गडकरी और जेठमलानी के बीच क्या संबंध, स्पष्ट करे भाजपा : दिग्विजय
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह ने कहा है कि भाजपा को वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी के साथ अपने रिश्तों का खुलासा करना चाहिये, जो न्यायालय में अ$फज़ल गुरू को बचाने के लिए उनका मुकदमा लड़ रहे हंै। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के अ$फज़ल गुरू और कांग्रेस के संबध में दिये गये बयान पर पलटवार करते हुये कहा कि राम जेठमलानी को गडकरी के दस्तखत से ही राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया था। भाजपा अध्यक्ष गडकरी के बयान पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए श्री सिंह ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष नीतिन गडकरी कभी जीवन में चुनाव नहीं लड़े, लेकिन संघ प्रमुख मोहन भागवत के शहर में रहने के कारण उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बना दिया गया है। इसीलिये विभिन्न दलों के नेताओं के बारे में उनके इस तरह के बयान आ रहे है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल में छह साल तक लालकृष्ण आडवाणी गृह मंत्री रहे, लेकिन इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को सज़ा नहीं दी जा सकी। ऐसे में भाजपा यह बताये कि राजीव गांधी के हत्यारे आडवाणी और गडकरी के क्या लगते है। इसके अलावा श्री सिंह ने इलाहाबाद में माया सरकार के मंत्री नन्द गोपल नन्दी पर हुये जानलेवा हमले की निंदा करते हुये कहा कि यूपी में कानून-व्यवस्था चिंता का विषय बन गया है।

अपनी हद में रहें गडकरी : प्रणब
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के द्वारा कांग्रेस के बारे में की गई अनुचित टिप्पणी के राजनैतिक क्षेत्र में दिवालियेपन के संकेत मिले हंै। लोगों मे यह धारणा बन रही है कि नेताओं का कोई वैचारिक स्तर नहीं है। अ$फज़ल गुरू को कांग्रेस का दामाद बताने की अपनी टिप्पणी को वापस लेने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन गडकरी के इनकार करने पर केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि राजनीतिक नेताओं से बयानबाज़ी में कुछ शालीनता की उम्मीद की ही जाती है। उनको बोलते समय मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। मुखर्जी ने कहा कि किसी मुद्दे पर बयान देते समय राजनीतिक नेताओं को कुछ शालीनता बरतनी चाहिए। हालांकि उन्होंने गडकरी का नाम नहीं लिया। गडकरी इससे पहले भी कई बार अनावश्यक बयान देते रहे हैं। गडकरी ने आठ जुलाई को देहरादून में भाजपा की एक रैली में कहा था कि क्या संसद हमले का अभियुक्त कांग्रेस का दामाद है। गडकरी ने फिर यह टिप्पणी दोहराई थी।


आलोचना में सही एवं सभ्य शब्दों का इस्तेमाल करें: जोशी

नितिन गडकरी को अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी नसीहत मिल रही है। पूर्व भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने भी गडकरी के बयानों को $गलत बताया और सिरे से नकार दिया। वाराणासी में जोशी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आलोचना में सही एवं सभ्य शब्दों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

गडकरी को थूक कर चाटने की बीमारी: अजय
कांग्रेस नेता अजय सिंह ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को कुछ भी कह देने और फिर माफी मांगने की आदत सी हो गई है। ऐसा लगता है कि उन्हें थूककर चाटने की बीमारी है, जिसका उन्हें इलाज कराना चाहिए। सिंह ने यहां कहा कि गडकरी को यह पूछने के पहले कि 'अ$फज़ल गुरु क्या कांग्रेस के जमाई हैंÓ, यह जान लेना चाहिए था कि इस आतंकवादी के वकील राम जेठमलानी रह चुके हैं, जो भाजपा के समर्थन से सांसद बने हैं। कांग्रेसी विधायक ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब गडकरी ने ऐसे बयान दिए हैं, जो किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर गडकरी इसी तरह के बयान देते रहे, तो इससे आने वाले दिनों में न तो $खुद गडकरी का और न ही भाजपा का कोई फायदा होगा।
सिंह ने कहा कि कुछ समय पहले भाजपा अध्यक्ष ने लालू यादव और मुलायम सिंह यादव के $िखला$फ चंडीगढ़ में अभद्र बयान दिया था, जिसे बाद में उन्हें वापस लेना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि गडकरी एक छोटे स्तर के नेता रहे है, जिन्हें अचानक राष्ट्रीय स्तर का काम सौंप दिया गया है, लेकिन लगता है कि अभी तक उनको यह समझ में नहीं आया है, कि उन्हें अपने पद की गरिमा के अनुरूप कब और क्या कहना है।

No comments:

Post a Comment

KHABARYAAR HINDI WEEKLY

खबरयार

खबरयार हिन्दी साप्ताहिक भोपाल
रंगीन पृष्ठ 16 रूपये 8 फी प्रति
शुल्क : वार्षिक रूपये 400/-
विज्ञापन दर प्रति वर्ग से. मी. : रूपये 20/- रंगीन रूपये 24/-

चिट्ठाजगत

चिट्ठाजगत

Followers