
दिगिव्जय सिंह पीएम इन वेटिंग
लिमटी खरे
नई दिल्ली। सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस में आने वाले दो वर्षों में नेतृत्व परिवर्तन का रोडमेप तैयार होने लगा है। देश पर आधी सदी से ज्य़ादा शासन करने वाली कांग्रेस में इन दिनों भविष्य में सत्ता की मलाई खाने की गलाकाट स्पर्धा मची हुई है। कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग जहां अब सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (श्रीमति सोनिया गांधी का सरकारी आवास) को 12 तु$गलक लेन (राहुल गांधी का सरकारी आवास) ले जाना चाह रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के कुछ प्रबंधक चाह रहे हैं, कि 2014 में होने वाले आम चुनावों में भी राहुल गांधी को बतौर प्रधानमंत्री न प्रोजेक्ट किया जाए। इस रोड मेप में 2012 को बहुत ही अहम माना जा रहा है। 10 जनपथ के सूत्रों का कहना है कि 2014 में संपन्न होने वाले आम चुनावों में वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को पार्टी का नेतृत्व नहीं करने देने के मसले पर सोनिया गांधी ने अपनी मुहर लगा दी है। सोनिया के इस तरह के संकेत के साथ ही कांग्रेस के अंदर अब 2012 के सन् को महात्वपूर्ण माना जाने लगा है। 2012 में देश के महामहिम राष्ट्रपति का चुनाव होना है। कांग्रेस के प्रबंधकों का एक धड़ा इस प्रयास में लगा हुआ है कि वज़ीरे आज़म डॉ. मनमोहन सिंह को या तो राष्ट्रपति बना दिया जाए, या फिर उन्हें स्वास्थ्य कारणों से घर ही बिठा दिया जाए। कांग्रेस के प्रबंधकों ने सोनिया गांधी को यह मशविरा भी दे दिया है, कि अगर 2014 में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत लाने में कामयाब न हो सकी, तो राहुल गांधी को पार्टी का नेतृत्व नहीं करना चाहिए। इन परिस्थितियों में भगवान राम के स्थान पर जिस तरह भरत ने खड़ांउं रखकर राज किया था, उसी तरह खड़ांउं प्रधानमंत्री की दरकार होगी। 2012 में 7, रेसकोर्स रोड (भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) को आशियाना बनाने की इच्छाएं अब कांग्रेस के अनेक नेताओं के मन मस्तिष्क में कुलाचें भरने लगी हैं। इस दौड़ में प्रणव मुखर्जी, पलनिअप्पम चिदम्बरम, सुशील कुमार शिंदे के नाम सामने आ रहे हैं।
कांग्रेस की इंटरनल केमिस्ट्री को अच्छी तरह समझने वालों की नज़रें इन सारे नेताओं के बजाए इक्कीसवीं सदी में कांग्रेस के अघोषित चाणक्य राजा दिग्विजय सिंह पर आकर टिक गईं हैं। मध्य प्रदेश में दस साल तक निष्कंटक राज करने वाले राजा दिग्विजय सिंह ने संयुक्त मध्य प्रदेश में तत्कालीन क्षत्रप विद्याचरण शुक्ल, श्यामा चरण शुक्ल, अजीत जोगी, माधव राव सिंधिया, कुंवर अर्जुन सिंह और कमल नाथ जैसे धाकड़ और धुरंधर नेताओं को जिस कदर धूल चटाई थी, वह बात अभी लोगों की स्मृति से विस्मृत नहीं हुई है।
राजा दिग्विजय सिंह ने गांधी परिवार को वर्तमान में जिस तरह से भरोसे में लेकर नक्सलवाद के मसले पर वर्तमान गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम पर हमले किए हैं, उसे राजा की प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने की सीढ़ी के तौर पर देखा जा रहा है। राजा के कदम ताल देखकर लगने लगा है कि वे राजपूत नेताओं को लामबंद करने के साथ ही साथ अपनी ठाकुर की छवि को उकेर कर उदारवादी नेताओं का समर्थन भी हासिल करने का जतन कर रहे हैं। चिदम्बरम पर एक ज़हर बुझा तीर दागकर हाल ही में राजा दिग्विजय सिंह ने कहा था कि पलनिअप्पम चिदम्बरम अगर प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो उन्हें और अधिक उदार बनने की दरकार होगी। वैसे कांग्रेस की नज़र में देश के भावी प्रधानमंत्री राहुल गांधी के अघोषित राजनैतिक गुरू तथा कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी को राह दिखाने के लिए एक हाथ में लाठी और दूसरे हाथ में लालटेन लेकर चलने वाले राजा दिग्विजय सिंह एक बात शायद भूल रहे हैं कि कांग्रेस की परंपरा कुछ उलट ही रही है। नेहरू गांधी परिवार की मंशा से इतर जब भी किसी कांग्रेसी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी को देखा है, उसे राजनैतिक बियावान में सन्यासी जीवन बिताने बलात ढकेल दिया जाता रहा है।
राजा दिग्विजय सिंह को इसके लिए कांग्रेस का बहुत पुराना नहीं बल्कि सत्तर के दशक के उपरांत का इतिहास ही पलटाना होगा। बाबू जगजीवन राम से बरास्ता हेमवती नंदन बहुगुणा, नारायणदत्त तिवारी और कुंवर अर्जुन सिंह के मन की बातें सामने आने और मंशा स्पष्ट होने के उपरांत, उनके साथ कांग्रेस ने किस कदर अछूत के मानिंद व्यवहार किया है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। कल तक कुंवर अर्जुन सिंह के दिखाए पथ पर चलने वाली कांग्रेस ने आज उन्हें दूध की मख्खी के मानिंद निकालकर बाहर फेंक दिया है।
देख तेरे प्रदेश की हालत क्या हो गयी चौहान, कदम-कदम पर नारी का यहां होता अपमान
अश्लील विज्ञापनों पर शिव का तीसरा नेत्र खुलना ज़रूरी
अनूप सक्सेना
राजगढ़। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान प्रदेश है, यहां अधिकांश जनता गांवों में निवास करती है। यहां की जनता न केवल अशिक्षित है, अपितु निर्धन भी है। यही कारण है कि गांवों में अधिकांश रोगों का इलाज देवी-देवताओं के यहां झाड़ेफूंकों, ताबीज़ों, मंत्रों, टोने टोटके से कराने में विश्वास रखते हैं। दुख की बात यह है कि बढ़ते अंधविश्वास के चलते, मध्यम स्तर के शहरों में पढ़े लिखे तबके का भी कुछ प्रतिशत वर्ग भी इन पूर्वाग्रहों से जुड़ गया है, और इनका प्रतिशत वर्ग भी बढ़ रहा है। इसका $खामियज़ा जन साधारण को विशेष कर नारी को औषधि और चमत्कारी उपचारों के बढ़ते विज्ञापनों, इन्द्री वर्धक यंत्रों की अश्लील भाषा, को पढऩे देखने व शर्मिंदा होते रहने के रूप में चुकाना पढ़ रहा है। अपने अंधविश्वास के चलते रोगी इस प्रकार के अश्लील भ्रामक विज्ञापनों की आड़ लेकर रोगमुक्त होने के स्थान पर अधिक संकट में पड़ जाते हैं, या उनकी अकाल मृत्यु हो जाती है।
इस प्रकार की समास्याएं बढऩे के पीछे औषधि और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम 1954 का शन: शन: निष्प्रभावी होते जाना है। यह अधिनियम ऐसे $खतरनाक विज्ञापनों को नियंत्रित करने के लिये संवैधानिक प्रावधानों के तहत अस्तित्व में लाया गया था। इसमें शब्द चमत्कारिक उपचार के अंतरर्गत तिलिस्म मंत्र या अन्य किसी प्रकार का ताबिज़ जो चमत्कारिक शक्तियां रखने या मनुष्य के किसी रोग के निदान, रोग मुक्ति, शमन या निवारण के लिये अथवा मनुष्य के शरीर के किसी कार्बनिक कृत्य या संरचना पर किसी तरह से असार या प्रभाव डालने को अभिकथित हो, शामिल हैं।
उक्त अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत कतिपय औषधियों एवं चमत्कारिक उपचारों के विज्ञापनों को प्रतिसेछित किया गया है।
1. महिलाओं के गर्भपात संबंधी विज्ञापन।
2. महिलाओं के गर्भाधान संबंधी विज्ञापन।
3. सहवास सुख में अभिवृद्धि करने वाले विज्ञापन।
4. स्त्रियों के मासिक धर्म की अनियमितताओं को ठीक करने वाले विज्ञापन।
इसी प्रकार धारा 4 में औषधियों और चमत्कारिक उपचारों के बारे मे भ्रम पैदा करने वाले विज्ञापनों को भी प्रतिसेछित किया गया है। इसके अंतर्गत किसी भी औषधि के बारे में मिथ्या भ्रम पैदा करना, मिथ्या क्लेम करना शामिल हो गया है। धारा 5 में इसी प्रकार चमत्कारिक विज्ञपनों (उपचार संबंधी) को प्रतिबंधित किया गया है।
धारा 6 में ऐसे विज्ञापनों के आयात निर्यात को भी निषेधित किया गया है। अधिनियम की धारा 7 अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहा धारा दण्ड और शास्तियों को प्रावधानित करती है। इसके अतंर्गत प्रथम बार दोष सिद्धि पर 6 माह की अवधि के कारावास अथवा जुर्माने अथवा दोनों से दण्डित किये जाने का प्रावधान है। यदि कोई दोषी व्यक्ति ऐसे अपराध की पुनरावृत्ति करता है तो उसके लिये एक वर्ष तक की अवधि के लिये कारवास अथवा जुर्माने का अथवा दोनों से दण्डित किये जाने का प्रावधान है, तथा ऐसे अपराधों को संज्ञेय अपराध माना गया है। इस प्रकार यह अधिनियम औषधियों एवं चमत्कारिक उपचारों के आक्षेपणीय विज्ञपानों का निवारण करने वाली एक महत्वपूर्ण विधि है। नारी के सम्मान स्वाभिमान को सर्वोपरि महत्व प्रदान करते हुये प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चाहिये कि इस औषधि एवं चमत्कारिक उपचार अधिनियम (आक्षेपणीय विज्ञापन) 1954 के तहत कुकरमुत्तों की तरह उग रहे लिंग वर्धक यंत्रों, सहवास सुख में वृद्धि करने वाले विज्ञापनों, नारी देह की मसाज करने तथा हज़ारों रूपयों की दैनिक कमाई का न्यौता देते विज्ञापनों को सख़्ती से बंद कराये, तथा इसके लिये जवाबदेह व्यक्तियों को अधिनियम के प्रावधानों के तहत दण्डित कराये।

No comments:
Post a Comment