
बड़ा लुटेरा कौन?
नेता या बाबा
नेताओं, अधिकारियों और धनियों के द्वारा महिमा मंडित इन बाबाओं ने ईश्वर को तो पर्दे के पीछे कर दिया और स्वयं भगवान बन कर पुजने लगे। आम आदमी की यह प्रवृत्ति रही है कि जिसे बड़े आदमी पूजते हैं, उसे महान मानकर उस पर अंध विश्वास करने लगता है। अगर मीडिया या पुलिस उनकी काली करतूतों को उजागर कर भी दे, तो उन पर सहज ही विश्वास नहीं करता है।
जी.डी.गोयल
नई दिल्ली। हमारे देश में नेता उसे कहा जाता था जो अवाम की रहनुमाई करता था, देश और देशवासियों की भलाई के लिए संघर्ष करता था, बलिदान करता था और उसे सही रास्ता दिखाता था। नेता का धर्म हुआ करता था, सेवा और त्याग। आज़ादी के पहले भारत में उसी प्रकार के हुआ करते थे, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और समाज की भलाई के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया था। जिनमें से महात्मा गांधी, सुभाचन्द्र बोस, शहीद भगत सिंह ,चन्द्रशेखर आज़ाद जैसे अनगिनत नाम आज भी लोगों के ज़हन में रहते हैं।
ठीक उसी तरह से सदियों से धर्म गुरूओं, साधुओं और संतों की भी बलिदान की गाथा थी। महावीर और बुद्ध जैसे त्यागी महात्माओंं ने हिंसा, असत्य लोभ ,मोह, और पाप के विरूद्ध मनुष्यों को शिक्षा दी और सत्कर्मों के लिए प्रेरित किया और हर प्रकार से देश और समाज की भलाई के लिए काम किया।
ऐसे नेताओं और संतों के प्रयासों से जब एक लम्बी लडा़ई के बाद गुलामी की ज़ंजीरों में पिस रहे नागरिकों ने आज़ादी की सांस ली, तो उनके मन इनके प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा थी। लेकिन स्वतंत्रता के बाद जैसे-जैसे देश का विकास होता गया, न त्याग नेताओं के उत्तराधिकारी नेता जिनके हाथ में भारत की जनता ने देश की बागडोर और अपना भाग्य सौंपा था सत्ता और धन के मोह की दलदल में धंसते चले गए। परिणाम यह हुआ कि सड़क से संसद तक देश की सम्पूर्ण व्यवस्था भ्रटाचार की गर्त में समा गई। नेतागीरी जो कभी सेवा और बलिदान का मार्ग थी, आज़ाद भारत में मोटी कमाई का धंधा बन गई। इन नेताओं के काले कारनामों की वजह से देश भर मेें असुरक्षा और अनिश्चितता का माहोल बन गया। कानून पुलिस और सरकार से निराश देश के हर वर्ग का आदमी अपने भविष्य और वर्तमान की सुरक्षा के लिए भगवान की 'शरण में जाने लगा । और देश की इस स्थिति का $फायदा उठाने के लिए अवसरवादी, चालाक और अपराधी प्रवृति के लोग साघु, संतों और बाबाओं का वेश बदलकर अपनी दुकानें खोलकर बैठ गए ।
क्योंकि बेइमान नेताओं का राजनैतिक जीवन, भ्रष्ट अघिकारियों के दिल में व्याप्त पकड़े जाने का भय व काले धंधों के रास्ते धन कमाने वाले धंधेबाज़ों के दिल में अधिक से अधिक धन कमाने की चाह ने इस वर्ग को भी संतों का वेश धारी बाबाओं की शरण में पहुंचा दिया, जिससे इनको भारी धन राजनैतिक और प्रशासकीय संरक्षण और ख्याति प्राप्त होती गई। हमारे देश में ऐसे बाबा कानून से भी ऊपर हो गए, तो इनकी सम्पत्ति का कोई हिसाब मांगा गया और ना उन पर कोई नियंत्रण ही रखा गया, नतीजा यह हुआ कि दुनियां को माया मोह और भोग विलास का उपदेश देने वाले ये बाबा स्वयं भोग और विलास की गंदगी में लिपट गए। सोने के सिंघासनों पर विराज कर सभी प्रकार की भोग विलास की वस्तुओं का उपयोग करने वाले ये बाबा वासना की गोद में भी जा बैठे। महिलाओं के साथ बलात्कार या बहला फुसला कर उनका देहिक शोषण तो किया ही साथ ही, साथ देह व्यापार में भी लिप्त हो गए। पिछले कुछ ही दिनों में दक्षिण से लगा कर उत्तर तक ऐसे कई बाबाओं का पर्दा $फाश हुआ है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण चित्रकूट के इच्छाधारी बाबा से दिया जा सकता है।
नेताओं, अधिकारियों और धनियों के द्वारा महिमा मंडित इन बाबाओं ने ईश्वर को तो पर्दे के पीछे कर दिया और स्वयं भगवान बन कर पुजने लगे। आम आदमी की यह प्रवृत्ति रही है कि जिसे बड़े आदमी पूजते हैं, उसे महान मानकर उस पर अंध विश्वास करने लगता है। अगर मीडिया या पुलिस उनकी काली करतूतों को उजागर कर भी दे, तो उन पर सहज ही विश्वास नहीं करता है। अक्सर होता यह है, कि कुछ दिन तक तो इन बाबाओं की छीछालेदार होती है। लेकिन कुछ ही दिनों में अपने धन, राजनैतिक सम्पर्कों और इनकी कृपा चाहने वाले अधिकारियों की मदद से या तो ये बरी हो जाते हैं, या इनकी $फाईलें सरकारी आलमारियों में बंद हो जाती हैं। और कुछ दिन के बाद वे पहिले से भी अधिक प्रष्ठिता के साथ पुजने लगते हैं। हमारे देश में जो बाबा या नेता ज्य़ादा भीड़ इक_ा कर सकता है, वही बड़ा माना जाता है, जैसे कि लालू प्रसाद यादव और मायावती, दोनों पर ही आर्थिक मामलों को लेकर कई तरह की जांच और मुकदमें चल रहे हैं, लेकिन भीड़ जुटाने की कला के कारण ही वे आज भी बड़े नेता बने हुए हैं। मायावती ने तो हाल ही में लखनऊ में लाखों की भीड़ जुटा कर सरेआम करोड़ों रूपयों की माला पहन कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया ही है। यही हाल बाबाओं का भी है। कृपालु महाराज, आशाराम बापू जैसे बाबा केवल भीड़ जुटाने के कारण ही कई अपराधिक मामलों में फंसे होने के बाद भी पूजे जा रहे हैं। किसी ज़माने में जबलपुर के इग, बनारस के बटमार, और चंबल के डाकू ही जनता को लूूटते थे। लेकिन नेताओं बाबाओं नेे पीछे उन्हें छोड़ दिया है। अब तो यह तय करना मुश्किल हो गया है, कि इस देश की जनता को नेता अधिक लूट रहे हैं, या बाबा।
मालिक मकबूज़ा के नाम पर दलाल मालामाल
मो.बशीर खां
बैहर (बालाघाट)। मध्यप्रदेश में वनमंत्री सरताज सिंह वनों को बचाने वनों को बढ़ाने चाहे जितनी बयानबाज़ी करें वास्तविकता इसके विपरीत है। मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह रहे हों या वर्तमान में शिवराज सिंह हो आदिवासी अंचल क्षेत्र बैहर तहसील के वनों की कटाई मालिक मकबूज़ा के नाम पर बदस्तूर जारी है। अब तो यहां तक हो रहा है कि मालिक मकबूज़ा के अंतर्गत काटे गये वृक्षों को बिना अनुमति, बिना टी.पी., बिना हेम्बर के ही बाला बाला माल10 चक्का में ढोया जा रहा है और किसी को कानों कान $खबर तक नहीं, टी.पी. कहीं ओर की और माल कहीं और का उठाया जा रहा है। हेम्बर टी.पी. ज़ारी नहीं हुई और जलाऊ चट्टे उठा लिये जाते हैं। वन विभाग, राजस्व विभाग की जि़म्मेदारी बताकर पल्लाझाड़ रहा है तो राजस्व विभाग, वन विभाग की जि़म्मेदारी बताकर पल्लाझाड़ कर मामले को र$फा-द$फा करने में लगा है। मालिक मकबूज़ा के नाम पर आदिवासियों की निजि भूमि पर लगे बेशकीमती बीजा साल प्रजाति के वृक्षों को औने पौने दाम किसानों को देकर दलालों, बिचौलियों के द्वारा संबंधित विभागों से बिना अनुमति प्राप्त किये ही धड़ल्ले से अधिकारियों से सांठगांठ कर कटवाया जा रहा है, जिसका ज्वलंत प्रमाण धरमसिंग मेरावी पिता दुल्लमसिंग मेरावी ग्राम रोढाटोला वार्ड क्रमांक 2 नगर पंचायत क्षेत्र बैहर प.ह.नम्बर 17/1 की निजि भूमि पर लगे बीजा प्रजाति के 41, 42 वृक्षों को कटवा दिया गया। शासन के द्वारा बनाये गये नियम जिसके तहत धार्मिक स्थलों, गौठानो, मरघट पर लगे वृक्षों को नहीं कटवाया जा सकता, नदी, नालों, पगडंडी के किनारे लगे वृक्षों को काटना शासकीय वन क्षेत्र में बनाये गये वन सीमा के मुनारो से कितनी दूरी के वृक्षों को नहीं कटवाया जा सकता के नियमों कायदों के बावजूद धरमसिंग की भूमि से सभी बीजा वृक्षों को नाला के अंदर नाला के किनारे काटा गया है। काटे गये लठ्ठों का मौके पर ही हाथ आरा से नियम विरूद्ध चिरान कराया जा रहा है जो शासन द्वारा बनाये गये नियम का खुला उलंघन है। राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों को इस गोरखधंधे की पूर्ण जानकारी होने के बाद भी सभी की मूक स्वीकृति बिचौलियों को प्राप्त है क्योंकि सभी को उनके पद और कद के अनुसार हिस्सा उन्हें मिल जाता है।
एक तर$फ पर्यावरण का बखान कर वृक्षों को बचाने की बात बढ़चढ़ कर की जाती है तो दूसरी तर$फ ऐसे खोखले बयान बाज़ी करने वाले नेता अधिकारी इस गोरखधंधे में बराबर के हिस्सेदार बने हुये हैं। एक वृक्ष तो लगा नहीं रहे हैं यदि लगा और लगवा भी रहे है तो उन्हें बचा नहीं पा रहे हैं, किंतु प्राकृतिक धरोहर को जड़ मूल से नष्ट करने में सभी लगे हुये हैं। कुछ वर्षों पूर्व जिस स्थान पर बड़े बड़े वृक्षों का घना जंगल हुआ करता था आज वहां पर मैदान नज़र आता है। इन सबके लिये वन एवं राजस्व के अधिकारी पूर्ण रूपेण जि़म्मेदार हैं। यहां तो यह हाल है कि रेंजर के अधिकारी जो बैहर नगर के ही रहने वाले हैं यही पर रेंजर जैसे जि़म्मेदार पद पर पदस्थ होकर नाते रिश्तेदारी निभाकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं, जिसका परिणाम ही है कि अनुमति बिना टी.पी. बिना हेम्बर लगे ही बीजा जैसे बेश कीमती लकडिय़ों को बिचौलिये ट्रकों पर लादकर जाने में कामयाब हो रहे हैं। 'सांप निकल गया ढ़ोसर को पीटने वाली कहावत को अधिकारी, कर्मचारी चरितार्थ करने में लगे हैं। सब कुछ जानते हुये भी आला अधिकारी मौन साधे हुये हैं क्यों?
वैसे देखा यह जाता है कि वन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता वनों की कटाई से कुछ ज्य़ादा ही जि़म्मेदार है, उन्हें तो अपनी जेबों की चिंता ज्य़ादा है। यदि वृक्षों का विनाश हो तो उनका भला और वनों को विकास हो तो उनका भला याने वृक्ष लगाये जायें तो उसमें गोलमाल और कटवाये जाये तो उसमें गोलमाल याने कुछ भी हो माल उनकी जेबों में आना ही है।
जिंदल समेत 8 उद्योगों ने किये अवैध कब्ज़े: अमर
संजय शर्मा
रायपुर (छग)। राजस्व मंत्री अमर अग्रवाल ने बताया कि जिंदल स्टील पावर लिमिटेड समेत 8 उद्योग समूहों ने छोटे झाड़ के जंगल समेत सड़क रास्ते जैसे शासकीय भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। इनके विरूद्ध छ.ग. भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत कार्यवाही की जा रही है।
कांग्रेस विधायक डॉ. शकाजीत नायक के प्रश्नों के लिखित उत्तर में श्री अग्रवाल ने बताया कि सालासार स्पंज-पॉवर लिमिटेड गेरवानी ने 0.049 हेक्टेयर छोटे-झाड़ की जंगल भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इंड एग्रो सिनर्जी ने कोटमार में 1.532 हेक्टेयर एवं महापल्ली में 0.263 हेक्टेयर छोटे झाड़ कही जंगल भूमि पर कब्ज़ा किया है। शिवशक्ति स्टील लिमिटेड चक्रधरपुर ने कुल पौने 11 हेक्टेयर छोटे झाड़ के जंगल पर एमएसपी स्टील-पॉवर लिमिटेड जामगांव में पौने दो हेक्टेयर, जिंदल स्टील-पॉवर लिमिटेड ने पतरापाली में 1 एकड़ 129 डिसमिल सड़क भूमि पर तथा रामेश्वर स्टील झाड़ की जंगल भूमि पर कब्ज़ा किया है।
दो साल में मिलावट के 139 प्रकरण, 9 में चालान पेश अमर स्वास्थ्य मंत्री, अमर अग्रवाल ने विधानसभा में बताया कि विगत दो वर्षों के दौरान प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के कुल 139 प्रकरण बनाये गये। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष के 90 प्रकरणों में से 9 मामलों में अदालत में चालान पेश किया गया है। शेष 81 प्रकरणों की विवेचना जारी है कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह के प्रश्नों के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य में खाद्य निरीक्षकों को 38 पद स्वीकृत हंै, जिनमें से 37 रिक्त व एक पद संविदा के तहत भरा गया है, इसके अतिरिक्त 2 लैब टेक्निशियन, खाद्य निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। जि़ला स्तर पर निरीक्षक के पद नहीं हैं। बाकी पदों को भरने लगातार प्रयास किये जा रहे हैं, पीएससी को भी प्रस्ताव भेजा गया है।

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