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Saturday, March 6, 2010

यारों का यार



बाबागिरी की आड़ में अय्याशी के धंधे

दरअसल भारत में ऐसे बाबाओं को पनपने में सबसे अहम भूमिका हमारे नेताओं ने निभाई है। चूंकि नेतागिरी बहुत मुना$फे का होने के साथ ही साथ बहुत ही अनिश्चितताओं का धंधा है, पार्टी का टिकिट ही नहीं, चुनाव जीतेंगे या नहीं, जीत भी गए तो मंत्री, मुंख्यमंत्री बनेंगे या नहीं सब कुछ अनिश्चित होता है। इसे सुनिचित करने के लिए नेता लोग बाबाओं का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
जी.डी.गोयल
नई दिल्ली। डाके डालने हो, मादक पदार्थ बेचने हो, राजनैतिक दलाली करनी हो वैश्यावृति का रैकेट चलाना हो या कोई और अपराध करना हो, तो उसके लिए आज कल सबसे सुरक्षित रास्ता है बाबागिरी का। एक बार बाबा बन कर पुज गए, तो बस सारे अपराधों पर पर्दा पड़ गया। अब जब इन बाबाओं का चरणामृत पीने के लिए भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और प्रदेशों के मुख्यमंत्री पहुंचेंगे तो अपराध खोजने वाले अधिकारियों की भला क्या हिम्मत कि उनके गिरेबानों में झांक सकें। अव्वल तो ऐसे बाबा पकड़े ही नहीं जाते। अगर कभी किसी वजह से पकड़े भी जाते हैं तो कुछ दिन के तमाशे के बाद बा-ईज्ज़त बरी हो जाते हैं, या उनकी $फाईलें आलमारियों में द$फन हो जाती हैं। कुछ मामले जो अदालत पंहुच भी जाते हैं और कानून उन पर हाथ डालने की कोशिश करता है, तो इनका निजी सुरक्षा तंत्र इनके भक्तों को भड़का कर ऐसी हिंसा फैलाता है, कि कानून को भी पीछे हटना पड़ता है। इसके सबसे ताज़ा उदाहरण हैं, पंजाब का डेरा सच्चा सौदा के बाबा की एक हत्या के प्रकरण में गिरफ़्तारी, जिसके विरोध में पंजाब के कई शहरों में दंगे भड़क गए और दूसरा उदाहरण है, आशाराम बापू की गिरफ़्तारी का, जिन पर मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करने का साहस नहीं कर पा रही है। जबकि वे खुले आम चुनौती देते हैं, कि हिम्मत है तो पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करने का साहस करके देखे। इनके अलावा कुछ ऐसे बाबा भी हैं, जिनको बलात्कार जैसे मामलों में पुलिस ने गिरफ़्तार कर भी लिया, लेकिन जब उनकी बाबागिरी परवान चढ़ी, तो उनके मामले $फाईलों में द$फन हो गए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, वृंदावन के कृपालू महाराज, जिन्हें का$फी समय पूर्व नागपुर पुलिस ने गिरफ़्तार भी किया था, और उन पर मुकदमा भी चला, लेकिन बाद में वह सारा मामला र$फा द$फा हो गया और कृपालू महाराज आज भी पुज रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने आर.के.पुरम के एक मंदिर के बाबा इच्छाधारी संत स्वामी भीमानन्द जी महाराज चित्रकूट वाले को जिस्मफरोशी का धंधा करवाने के आरोप में गिरफ़्तार किया है। उसके साथ छ: लड़कियां भी पकड़ी गई हैं, जिनमें चार एयर होस्टेस हैं, और दो स्थानीय गार्गी कॉलेज की पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की छात्रायें हैं। दिल्ली पुलिस के डी. सी. पी. साउथ एस. जीत्रण्सत्रधालीवाल के बताये अनुसार, इस बाबा को पहले भी एक बार 1997 दिल्ली के जपत नगर में वैश्यावृति के मामले में गिरफ़्तार किया गया था। उसके बाद दिल्ली के ही बदरपुर थाने में सन 1998 में डकैती के मामले में गिरफ़्तार किया गया था। उस केस में उसे पांच साल की सज़ा भी सुनाई गई थी। उसके अलावा सन 2003 में नोएडा उत्तर प्रदेश के सैक्टर 24 के थाने मे वैश्यावृति और गैंगस्टर के दो मामले दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार यह बाबा वैश्याओं की आउट सोर्सिंग भी करता है, भारत के किसी भी शहर में अपने ग्राहकों के लिए लड़कियां उपलब्ध करवा देता था। पुलिस के अनुसार इस बाबा ने इसी धंधे में करीब 100 करोड़ की सम्पत्ति अर्जित कर ली है, जिसकी मदद से वह चित्रकुट के चमरोहा गांव में साईं बाबा का एक भव्य मंदिर और अस्पताल बनवा रहा है। वहां इसे शिव पूरन वेदी महाराज के नाम से जाना जाता है। वहीं से इसने अपना रायफल का लायसेंस भी बनवा लिया है। मज़े की बात यह है, कि बाकायदा सज़ा या$फता होने के बाद और कई मामलों में अपराधी होने के बावजूद भी वहां से इसका राय$फल का लायसेंस भी बना दिया गया। ये बाबागिरी का ही परिणाम है। इन पक्तियों के लिखे जाने के ही बीच टी.वी.पर एक समाचार आना शुरू हो गया, जिसमें बताया जा रहा है कि दक्षिण भारत के एक बाबा स्वामी नित्यानंद की एक सीडी सामने आई है, जिसमें बाबा जी अपने कक्ष में एक अभिनेत्री के साथ अश्लील नृत्य करते दिखाई दे रहे हैं।
दरअसल भारत में ऐसे बाबाओं को पनपने में सबसे अहम भूमिका हमारे नेताओं ने निभाई है। चूंकि नेतागिरी बहुत मुनाफे का होने के साथ ही साथ बहुत ही अनिश्चितताओं का धंधा है, पार्टी का टिकिट ही नहीं, चुनाव जीतेंगे या नहीं, जीत भी गए तो मंत्री, मुंख्यमंत्री बनेंगे या नहीं सब कुछ अनिश्चित होता है। इसे सुनिचित करने के लिए नेता लोग बाबाओं का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं और जब उनके आशीर्वाद के बाद वे अपना स्वार्थ साध लेते हैं तो उनके चरणों में लौट जाते हैं, और उसे चमत्कार मानकर नेताओं की दुकान-दारी चल पड़ती है, और उन पर हर तर$फ से धन की वर्षा होने लगती है। उसका सबसे अच्छा उदाहरण मध्यप्रदेश के ही रावतपुरा सरकार का दिया जा सकता है। एक सत्र पूरा करने के बाद जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दोबारा चुनाव मैदान में उतरे तो मीडिया और राजनेता मान रहे थे कि इस बार वे चुनाव हार जायेंगे। लेकिन कहा जाता है कि किसी की सलाह पर वे रावतपुरा सरकार के दरबार में पहुंचे तो बाबा ने आशीर्वाद दिया कि ना केवल वे चुनाव जीतेंगे, वरण पुन: मुख्यमंत्री भी बनेंगे। लेकिन उसके बाद उन्हें इसी दरबार में अपना सर मुंड़वाना पड़ेगा। चुनाव के बाद बाबा की वांणी सत्य हुई और न केवल मुख्यमंत्री, बल्कि उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों $खास-$खास चाटुकारों और कुछ अधिकारियों ने सामूहिक रूप से बाबा के सामने अपना मुंडन करवाया। स्वाभाविक था कि उसके बाद बाबा चमत्कारिक मान लिए गए। उसके बाद नया राज्य बनने के बाद जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने भी बाबा के आशीर्वाद के बदले में वहां भारी मात्रा में भूमि प्रदान कर दी। इस तरह प्रभाव इतना बढ़ गया कि क्या थे और कोई अपराध करते हैं या नहीं इस बात की जांच करने का साहस पुलिस या कोई जांच अधिकारी करने का साहस कर सकेगा। हालांेिक अभी तक उनके $िखला$फ कोई बात सामने भी नहीं आई है। उनका उदाहरण तो केवल यह बताने के लिए दिया गया है कि नेता किस तरह बाबाओं को रातों रात पुजवा देते हैं। अब अगर कोई बाबा अपराधी पृवत्ति का हो, तो इसी प्रभाव का दुरूपयोग $गलत तरीकों से धन कमाने के लिए भी कर सकता है। आये दिन दिखाई पड़ रहा है।



वाणिज्य कर विभाग में मंत्री के जांच निर्देश भी बेअसर
अनूप सक्सेना
राजगढ़।
जि़ले में वाणिज्यक कर विभाग के अधिकारी की शासन निर्देशों में लापरवाही व बढ़े बकायादारों की सम्पत्ति कुर्क कर के नीलामी के ज़रिये शासन को हो रही आर्थिक क्षति की पूर्ति कर राजस्व वसूली में गंभीर उदासीनता बरतने से 3.50 करोड़ रूपये की राजस्व वसूली लंबित है। राजगढ़ जि़ले के ब्यावरा जैसे उद्योग प्रधान नगर में बकायादारों की सम्पत्ति को $खरीदने वाला कोई न मिलने का वाणिज्यिक कर विभाग के नुमांंइदों का बार-बार दस्तावेज़ों में किया उल्लेख स्वयं ही विभागीय कार्यप्रणाली को शंकास्पद व भ्रष्टाचार को सरंक्षण देने व दोषी बकायादारों को कड़ी कार्यवाही से बचाने वाला साबित कर रहा है वहां दूसरी ओर वाणिज्य कर चोरी में लिप्त व्यवसायी वर्ग दूसरे नामों से पंजीयन करवाकर अपनी व्यवसायिक गतिविधियों को बेखौफ विभाग के सरंक्षण में चला रहा है। वाणिज्यक कर विभाग में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं को ठीक करवा कर शासन हित में 3.50 करोड़ की वसूली सुनिश्चित करवाने के उद्देश्य से समाजवादी पार्टी के जि़लाध्यक्ष इश्तियाक नबी खान ने दस्तावेज़ी प्रमाणों के साथ 10/7/2009 को वाणिज्य कर मंत्री श्री राघवजी से भेंट कर अवगत कराया मंत्री जी ने आयुक्त वाणिज्यिक कर विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। आयुक्त महोदय के निर्देश पर शाजापुर के सहायक आयुक्त वाणिज्यिक कर आर.के. तिवारी को राजगढ़ के वाणिज्यिक कर अधिकारी राजेन्द्र सिंह बास्केल की कार्यप्रणाली की जांच का जि़म्मा सौंपा गया। सहायक आयुक्त आर.के.तिवारी द्वारा पत्र लिखकर शिकायतकर्ता श्री खान को 14/10/2009 को आवश्यक प्रमाणों के साथ शाजापुर बुलाये जाने पर सपा जि़लाध्यक्ष श्री खान द्वारा 14/10/2009 को श्री तिवारी से भेंट कर कुछ और जांच कार्य में आवश्यक दस्तावेज़ सहायक आयुक्त को सौंपे। सहायक आयुक्त आर.के. तिवारी ने भेंट के दौरान शीघ्र राजगढ़ आकर बिंदूवार नीलामी प्रक्रिया का सूक्ष्म अध्ययन कर सभी बकायादारों की सम्पत्ति राजसात कर नीलामी के ज़रिये वसूली सुनिश्चित की जाने का तथा दोषी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही का आश्वासन श्री खान को दिया, इसके बाद लगभग पांच माह का समय निकल जाने के बाद भी जि़ला वाणिज्यिक कर अधिकारी की जांच करने सहायक आयुक्त श्री तिवारी राजगढ़ नहीं आये हैं। दूरभाष पर श्री तिवारी से इस अवधि में तीन चार बार चर्चा की गयी हर बार श्री तिवारी दो चार दिन में राजगढ़ आने का आश्वासन देते रहे। शिकायत की जाने के दौरान वाणिज्यक कर विभाग के राजगढ़ जि़ले के बकायादारों की स्थिति निम्न प्रकार थी (1) पूनम ट्रेडर्स ब्यावरा 82.63 लाख (2) भोपाल पेपर बोर्ड लि. पचोर 68.34 लाख (3) अंजलि साल्वेंट इंडिया लिमिटेड कचबादिया 29.99 लाख (4) शंकर टे्रडर्स ब्यावरा 23.33 लाख (5) भंडारी ट्रेडर्स नरसिंहगढ़ 16.89 लाख (6) मे. अजय टे्रडर्स ब्यावरा 12.74 लाख (7) मे. श्याम टे्रडर्स पचोर 9.91 लाख (8) मे. विपणन सहकारी समिति जीरापुर 9.45 लाख (9) काकाणी ब्रदर्स पचोर 9.45 लाख (10) में.रामगोपाल राजेन्द्र कुमार पचोर 8.83 लाख (11) में.मॉ कल्याणी ट्रेडर्स ब्यावरा 8.58 लाख (12) में. विश्वनाथ ट्रेडर्स पचोर 8.40 लाख (13) में. धनराज रमणलाल खुजनेर 8.28 लाख (14) में. गणेश टे्रडिंग कम्पनी खुजनेर 8.05 लाख (15) में. एकता टे्रडर्स ब्यावरा 7.52 लाख (16) में. श्रीनाथ टे्रडर्स नरसिंहगढ़ 7.27 लाख (17) फलोदी ब्रदर्स बोडा 6.59 लाख (18) मनोज टे्रडर्स ब्यावरा 5.64 लाख (19) कृष्णा आईल एक्स लि. पचोर 5.37 लाख (20) फूलचंद हरीकिशन जीरापुर 5.27 लाख (21) शक्ति टे्रडर्स सुठालिया 5.21 लाख (22) मोहनलाल गोपीलाल जीरापुर 5.18 लाख (23) अनिल शर्मा ठेकेदार ब्यावरा 4.18 लाख (24) हनुमान ट्रेडिंग कं. छापीहेडा 4.12 लाख (25) रामेश्वर मुंशीलाल बोडा 4.05 लाख (26) विजयराक डीलर्स पचोर 4.02 लाख।
करोड़ों रूपयों की शासन हित में राजस्व वसूली सुनिश्चित करने में सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी के द्वारा जांच कार्य से परहेज कर भ्रष्टाचार को प्रश्रय देने से जहां विभाग में गहराई से पेठ जमा चुका अनियमितताओं को संरक्षण देने का वरिष्ठ अधिकारियों का यह अंतहीन सिलसिला परिलक्षित होता है। वहां प्रदेश के मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के जगह-जगह किये जा रहे दावे भी खोखले साबित होते हैं।

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