VISITORS

Thursday, February 11, 2010

यारों का यार


नेता, अफ़सर और ठेकेदार
सब खाने में मस्त

पकड़े गए तो शिवराज ने पिलाई डांट

जी.डी.गोयल

नई दिल्ली।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कई आई.ए.एस. अधिकारियों के यहां छाप-मारी में सैंकड़ों करोड़ रूपयों की अवैध सम्पत्ति ज़प्त की गई व उनके पिता सेवा निवृत्त पुलिस महानिरीक्षक एच.एम.जोशी है। भोपाल में सबसे अधिक धन आई.ए.एस. दम्पत्ति अरविंद जोशी और उनकी पत्नि टीना जोशी के यहां से बरामद की गई हैं। उनके यहां से तो लगभग 25 लाख रूपयों की विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई है। इनके अलावा लोक निर्माण विभाग के प्रभारी मुख्य अभियंता दीपक असाई और इसी विभाग के कार्यपालन यंत्री रामदास चौधरी तथा पूर्व आई.एस. अधिकारी एम.ए.$खान के यहां भी भारी मात्रा में अवैध सम्पत्ति ज़प्त की गई है। इन अधिकारियों के साथ ही साथ भोपाल के एक व्यापारी पवन अग्रवाल के यहां से भी 500 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति मिलने के समाचार आ रहे हैं। इन अधिकारियों के बैंक लॉकरों से कई किलोग्राम सोना व चांदी के आभूषण व अकूल सम्पत्ति के दस्तावेज़ एवं नकदी भी ज़प्त की गई है।
काली कमाई को स$फेद करने के नायाब तरीके से इन अधिकारियों द्वारा आई.सी.आई.सी.आई पू्रडैंश्यिल की शाखा प्रबंधक सीमा जायसवाल को भी अपने वर्ग के मिला लिया। बीमा एजेंट से एक दम शाखा प्रबंधक बनी सीमा जायसवाल का लॉकर खुलवाया गया, तो उसमें से साढ़े 14 लाख नकद ज़ब्त किये गये।
छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि सचिव ने तो भ्रष्टाचार काली कमाई को छुपाने के कीर्तिमान ही स्थापित कर दिए। अग्रवाल ने एक ही बैंक, यूनियन बैंक में 250 खाते खोल लिए और वो खाते खोले खरोड़ा के उन $गरीब किसानों के नाम, जिनके पास ढंग से दो जून की रोटी खने का इंतज़ाम भीनहीं था। अग्रवाल ने अपने एक चार्टेड अकाउंटेंट मित्र की मदद से उन ग्रामीणों के पैन कार्ड भी बनवाये और उनके नाम से खाते खोल कर दस-दस, पंाच लाख रूपए जमा करवा कर काली कमाई के करोड़ों रूपये इकठ्े कर लिए। मध्यप्रदेश में ही कटनी के एक बोक्साईट खदानों के मालिक मित्तल ने मध्यप्रदेश खनिज निगम के अधिकारियों की सांठ-गांठ से निगम के करोड़ों रूपयों के शेयर बाज़ार में बेच कर और पुन: $खरीद कर करोड़ों की हेरा फेरी कर डाली। छापों की इन कार्यवाहियों से समाचार पत्रों के मुख पृष्ठ रंग गए। टेलीवीज़न के समाचार चैनलों ने अपनी बे्रकिंग न्यज़ में इन समाचाारों को प्रमुखताओं से दिखाया। चौराहों और चौपालों में इनकी चट$खारे लेकर चर्चाएं भी हुईं, जिनका समापन यहीं आकर हुआ, कि देखाना, कुछ नहीं होगा इन लोगों को थोड़ा से धन का नुकसान होगा और कुछ दिन पूछतांछ की परेशानी होगी। ये लोग जो आज भ्रष्टाचार के आरोप मेें पकड़े गए हैं, कल भ्रष्टाचार की मदद से ही छूट भी जायेंगे और यही हमारे देश में होता भी आ रहा है। ऐसा नहीं है कि ये कोई पहली बार हो रहा है। आज़ाद भारत के इतिहास में अब तक सैंकड़ों नेता अधिकारी और दो नम्बरिए धंधेबाज़ ठेकेदार भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े जा चुके हैं, और यह सिलसिला आज भी जारी है।
कुछ ही महीने पहले झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के यहा इतनी समपत्ति बरामद हुई कि सारा देश अचम्भित रह गया। वे आज कल जेल में हैं। लेकिन कब तक रहेंगे? इससे पहले भी बिहार के ही पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हज़ारों करोड़ के चारा घोटाले में पकड़े गए थे। उन्हें मुख्यमंत्री पद से भी हटा दिया गया था, और वे जेल भी गए थे। लेकिन उसके बाद उनका क्या हुआ। यह सबके सामने है। एक बार जेल से ज़मानत होने के बाद उन्होंने राजनीति की ऊंचाई छुईं और आज भी वे देश के प्रतिष्ठित नेता हैं। मध्यप्रदेश के ही एक आई.ए.एस. अधिकारी अजीत जोगी जब इंदौर के कलेक्टर थे, तब कोलार बांध के भ्रष्टाचारों के आरोप में फंसे थे। लेकिन उन्होंने तुरंत सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और राजनीति में प्रवेश कर गए। सब जानते हैं, कि उनकी इन्क्वायरी की फाईलें धूल खाती रह गईं और वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने और आज भी कांग्रेस के सम्माननीय नेता हैं।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई बड़े शराब मा$िफयाओं और ठेकेदारों के $िखला$फ काला धन जमा करने और टैक्स चोरी करने के मामले पकड़े गए। कुछ दिन तक उनकी चर्चा भी रही। बाद में सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया। इस बार भी कुछ ऐसा ही होने की संभावना है।
उधर सी.बी.आई. ने भ्रष्ट ठेकेदारों को नकेल डालते हुए भोपाल और इंदौर मेें छापामारी करके सेन्ट्रल बैंक ऑ$फ इण्डिया से $फजऱ्ी गृह ऋण के प्रकरण पकड़े, जिनमें तीस से अधिक $फजऱ्ी नामों से $गह ऋण दिये गये थे। यह करीब ढाई करोड़ का $फज़ीवाड़ा किया गया था।
आंध्रप्रदेश विधानसभा के सचिव द्वारा करोड़ों की काली कमाई एकत्र कर के एक रिकार्ड बनाया गया और उसके ठिकानों से भी करोड़ों रूपये बरामद हुये।
आजादी के बाद जिन जन प्रतिनिधियों के हवाले देशवासियों की किस्मत सौंपी गई थी, और जिन्हें जनगणमन का भाग्य विधाता कहा गया था, उनसे उम्मीद की गई थी, कि आज़ादी दिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सैनिकों की तरह, वे भी देशवासियों की भलाई के लिए सेवा भाव से काम करेंगे और देश को विकास के मार्ग पर ले जा कर उन्हें सुख और सर्मद्धि प्रदान करेंगे। जनता की इस सेवा के कारण उन्हें स्वयं के परिवार के पालन के लिए कहीं और नौकरियां या व्यापार ना करना पड़े इसकी जि़म्मेदारी देशवासियों पर डाली गई, जिसके तहत उन्हें रहने को मकान, मोटी तन$खाह और कई प्रकार की विशेष सुविधायें प्रदान की गईं। भले ही उनका चुनाव केवल पांच वर्षों के लिए किया जाता हो, लेकिन एक बार अगर जनता ने उनको चुन लिया, तो आजीवन तन$खाह दिए जाने की भी व्यवस्था प्रदान की गई। उन्हें इतने अधिकार प्रदान किए गए, कि अंग्रेज़ी शासन से विरासत में मिली अ$फसर शाही पर नियंत्रण रख सकें।
लेकिन इन सारी सुविधाओं के बाद जब उन्हें सत्ता के अधिकार भी मिले तो बहुत जल्दी वे अपने पथ से भटकने लगे। चालाक अ$फसर शाही और बेईमान व्यापारियों ने उन्हें भ्रष्टाचार का ऐसा स्वाद चखाया, कि वे देश भक्ति और जन सेवा जैसे शब्दों को किताबों में बंद करके इनके साथ मिल कर भ्रष्टाचार के गंदे नाले में $गोते लगाने लगे। नतीजा यह हुआ कि देखते ही देखते सारा देश भ्रष्टाचार के $गर्त में समा गया। इन तीनों ने मिल कर देश की सारी व्यवस्था इस तरह की बना दी कि बिना रिश्वत के कोई काम हो ही ना पाये। भ्रष्टाचार के माध्यम से इन लोगों ने देश को इतना लूटा है, कि देश की पूरी सम्पत्ति का 40 प्रतिशत हिस्सा इनकी तिजोरियों मेें समा चुका है।
पिछले साठ सालों में भ्रष्टाचारियों का यह गिरोह इतना मज़बूत हो चुका है, कि अगर उनमें से किसी के भी $िखला$फ कोई कार्यवाही होती है, तो अंदर ही अंदर एक दूसरे की मदद करके उसे सा$फ बचा ले जाते हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार करने वाले, उसे पकडऩे वाले और उसे बचाने वाले सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। रही बात आम जनता की, तो वह अब ऐसी $खबरों को सुन कर ना तो चकित होती है, ना प्रसन्न, क्योंकि वह अब इस बात को अच्छी तरह समझ चुकी है, कि उसका हश्र क्या होना है।

कुछ शर्म करो
अभी हाल ही में आयकर विभाग के द्वारा भ्रष्टाचारियों के अड्डों पर छापामारी में मध्यप्रदेश के करीब दर्जन भर आई.ए.एस. अ$फसर अकूत सम्पत्ति व काली कमाई के दोषी पाये गये, जिनकी क्लास प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने लेते हुये कहा ''कुछ शर्म करोÓ।


सट्टा फिर अपने शबाब पर
संजय शर्मा

रायगढ़ (छ.ग.)।
एक ओर जहां पुलिस चुनावी ड्यूटी में व्यस्त है, तो दूसरी ओर इसका भरपूर $फायदा शहर के सट्टा व्यवसाय से जुड़े लोग उठा रहे हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि पुलिस महकमे के अधिकारी- कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी के अलावा अन्य दीगर जगहों पर तैनाती हो जाने से एक बार फिर शहर का सट्टा बाज़ार सरगर्म हो गया है। जगह-जगह सट्टे के कारोबारी फिर खड़े होने लगे हैं। शहर के तमाम चौक- चौराहों में ओपन-क्लोज़ शुरू हो गया है।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जि़ले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के कारण पुलिस विभाग के तमाम थानों में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लग जाने से इसका भरपूर $फायदा सट्टा खाईबाज़ उठा रहे हैं। सट्टे पर अभी तक ऐसा कोई लगाम भी नहीं लगाया जा सका है। इस धंधे से जुड़े लोगों के आदमी एक बार फिर पेन, डायरी, मोबाईल लेकर शहर के तमाम चौक-चौराहों में खड़े होकर निडरता के साथ मुंबई, कल्याण, भूतनाथ के साथ सट्टे को कारोबार कर रहे हैं। ऊपर से क्रिकेट के शुरू हो जाने के बाद सट्टा खाईवालों के पो-बारह हो गये हैं। सट्टे में रोज़ाना शहर में 20 से 30 लाख रूपये की खाईवाली की $खबर हमारे अपने सूत्रों ने दी है।
इस बेलगाम व्यवसाय से जहां कई लोग रातों-रात लाखों रूपये कमा रहे हैं, तो कई घर बर्बाद भी हो रहे हैं। जि़ले के युवा, तेज़ तर्रार एस.पी. राहुल शर्मा को चाहिये इस बेलगाम धंधे पर जल्द से जल्द अपना शिकांजा कसें, ताकि इसके कारण बर्बाद हो चुके तथा बर्बादी के कगार पर खड़े परिवारों को बचाया जा सके।



जाब कार्ड बनाने में फजऱ्ीवाड़ा
केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ का फर्जी जाब कार्ड
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के खरगौन में एक केन्द्रीय मंत्री के रिश्तेदारों के नाम रोज़गार गारंटी योजना (नरेगा) के लिए जाब कार्ड में पाए जाने के बाद अब छिंदवाड़ा में भी केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री नानाभाऊ मोहोड़ और दो विधायकों के नाम से जाब कार्ड जारी होने का मामला प्रकाश में आया है। जि़ले में नरेगा के लिए बनाए गए जाब कार्ड संबंधी दस्तावज़ों को खगालने से पता लगा है, कि जि़ले में उपरोक्त के अलावा ऐसे 82 जनप्रतिनिधियों के नाम से जाब कार्ड बने हैं, जो जि़ला व जनपद पंचायत के वर्तमान और पूर्व सदस्य हैं। हालांकि यह बात दूसरी है कि अधिकांश जनप्रतिनिधियों को यह भी नहीं पता है कि उनके नाम से जाब कार्ड बनाए गए हैं। कमलनाथ और नाना मोहोड़ ही नहीं, बल्कि विधायक दीपक सक्सेना एवं मेरसिंह, जि़ला पंचायत अध्यक्ष नवोदिता ढोबले, पूर्व मंत्री रेवनाथ चैरे की पत्नी कमला बाई, पूर्व विधायक अजय चैरे, निगम अध्यक्ष नारायण सिंह बंजारा, जि़ला पंचायत अध्यक्ष विश्वनाथ अङ्क्षक्टे जैसे जाने माने जनप्रतिनिधियों के नाम से भी जाब कार्ड जारी किए गए हैं। जिले के अधिकारी इस $गलती से पल्ला झाड़कर इसका दोष जाब कार्ड बनाने वाली एजेंसी पर डाल रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत से जाब कार्ड बनाने के लिए एजेंसी तय की गई थी और उस एजेंसी ने लक्ष्य पूरा करने के लिए गांव की वोटर लिस्ट और राशन कार्ड के आधार पर जाब कार्ड बना दिये।
प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री नाना भाउ मोहोड ने अपने नाम से जाब कार्ड जारी किए जाने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपने नाम से जाब कार्ड जारी होने की कोई सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि न तो स्वयं उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने जाब कार्ड बनाने के लिए आवेदन दिया है। उधर कांग्रेस विधायक दीपक सक्सेना ने उनके नाम से जाब कार्ड बनाए जाने को $फजऱ्ीवाडा बताते हुए कहा कि जाब कार्ड बनाए जाने के मामले की बारीकी से जांच होनी चाहिये।
इस सबंध में पूछे जाने पर छिंदवाड़ा जि़ला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीनिवास शर्मा ने कहा कि गांव में रहने वाले किसी भी व्यक्ति का जाब कार्ड बनाया जा सकता है, लेकिन जहां तक केन्द्रीय मंत्री, विधायक या किसी अन्य जनप्रतिनिधि के नाम से जाब कार्ड जारी होने की बात है, तो उसकी जांच कराई जायेगी। जि़ला पंचायत के सीईओ एवं नरेगा प्रभारी आईएस ठाकुर ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन के दौरान सबसे पहले गांव में कार्ड बनाने के लिए एजेंसी की नियुक्ति की गई थी, और प्रारंभिक तौर पर ऐसा लगता है कि मतदाता सूची के आधार पर कार्ड बना दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद दोषियों की जवाबदेही तय की जायेगी।

No comments:

Post a Comment

KHABARYAAR HINDI WEEKLY

खबरयार

खबरयार हिन्दी साप्ताहिक भोपाल
रंगीन पृष्ठ 16 रूपये 8 फी प्रति
शुल्क : वार्षिक रूपये 400/-
विज्ञापन दर प्रति वर्ग से. मी. : रूपये 20/- रंगीन रूपये 24/-

चिट्ठाजगत

चिट्ठाजगत

Followers