मीडिया बना मज़लूम का मददगार पृष्ठ 1 का शेष
पहले तो उनके $िखला$फ कार्यवाही होती ही नहीं हैं, और अगरकुछ हाती भी है, तो उसके बदले उन्हें मामूली ज़ुर्माना अथवा दण्ड मिल कर रह जाता है। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण हिसार हरियाणा की छात्रा रूचिका का मामला है। लगभग 19 साल पहले इस छात्रा के साथ एक बड़े पुलिस अधिकारी राठौर ने पहले तो छेड़छाड़ की और जब उसने इस मामले की शिकायत की तो उसे और उसके परिवार को इतना प्रताडि़त किया कि उसे आत्म हत्या करने पर मजबूर कर दिया। रूचिका की आत्म हत्या के बाद राठौर के $िखला$फ 18 साल तक मुकदमा चला और उसके बाद उसे केवल छ: महीने की सज़ा हुई। लेकिन जब मीडिया ने इस ना-इंसा$फी के $िखला$फ आवाज़ बुलंद की, तो सरकार हिल गई और अब सरकारी तथा न्यायलीन स्तर पर राठौर के $िखला$फ कड़ी कार्यवाहियां शुरू हो चुकी हैं और यह लगभग तय माना जा रहा है, कि अब राठौर को उसके किए की भरपूर सज़ा मिलेगी। ऐसे एक नहीं कई उदाहरण मौजूद हैं, जो यह बताते हैं कि जब धन और सत्ता के प्रभाव के कारण सम्पन्न लोगों ने मज़लूमों पर अत्याचार कर काननू से बच निकलने की कामयाब कोशिश की, मीडिया ने उनके $िखला$फ आवाज़ बुलंद की और उन्हें पुन: कटघरे में खड़ा करवा कर उनके अंजाम तक पहुचाने में कानून और $फरयादियों की मदद की। जैसे कि मुम्बई का संजीव नंदा कांण्ड, नशे में धुत इस व्यक्ति ने फुटपाथ पर सो रहे $गरीबों को अपनी मंहगी बी.एम.डब्लू कार से कुचल दिया था, और पुलिस की मिली भगत से वह इस केस से सा$फ बच कर निकल भी गया था, लेकिन मीडिया ने $गरीबों के हक में आवाज़ उठााई और सारे काण्ड की हक्ी$कत दुनिया के सामने रखी, तब कहीं जा कर यह मामला पुन: खुला और आरोपी को सज़ा तथा $गरीबों को मुआवज़ा मिला। इसी तरीके से दिल्ली का जेसिका लाल हत्याकाण्ड, जिसमें देश के बड़े राजनैतिक परिवार का पुत्र मनु शर्मा आरोपी था, दिल्ली की पत्रकार शिवानी हत्या काण्ड, जिसमें पुलिस अधिकारी आर.के.शर्मा आरोपी था, मासूम बालिकाओं की हत्या का निठारी काण्ड, जिसमे महेन्द्र पंढेर और उसका नौकर कोली आरोपी थे, गुजरात का सोहराबुद्दीन एनकाउंटर काण्ड और कुछ ही महीने पहले देहरादून में हुआ $गाजि़याबाद के एक इंजीनियरिंग के छात्र का एनकाउटर काण्ड, जैसे अनेकों ऐसे मामले हैं, जिनमें मीडिया की पहल और दबाव के कारण ही न्याय मिला, अन्यथा लगभग हर काण्ड में आरोपी न्यायपालिका की आंख में धूल झोंक कर बच निकलने में कामयाब हो चुके थे। इनके अलावा एक और मामला है सन 84 के अमानवीय दंगों के आरोपी कांगे्रस के एक शक्तिशाली नेता सज्जन कुमार का, जिसे सरकारी तौर पर जांच ऐजंसियां क्लीन चिट दे चुकी थीं, लेकिन मीडिया ने जब इस मामले को तूल दिया तो उसमें इंसा$फ मिलने की संभावना बनी है। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता, कि आर्थिक आवश्यकताओं के कारण मीडिया जगत में पनपी व्यवसायिकता के कारण मीडिया में कुछ ऐसी बातों का प्रसार प्रचार भी देखने में आ रहा है, जिससे समाज मेंचारित्रक प्रदूषण फैल रहा है, और कई बार $गलत तत्वों को बढ़ावा भी मिल रहा है। कई बार कुछ मीडियावालों को अपने निजी स्वार्थों के कारण मर्यादालांघते भी देखा गया है, लेकिल केवल इन कारणों से प्रजातंत्र में मीडिया की अहम भूमिका और उसके द्वारा की गई सेवाओं को कम करके नहीं आंका जा सकता। जिस तरह लाख बुराईयां होने के बावजूद बिना पुलिस के सुरक्षित नागरिकों की कल्पना नहीं की जा सकती है, ठीक उसी प्रकार से बिना स्वतंत्र मीडिया के सुरक्षित प्रजातंत्र की बात भी नहीं की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने हटवाए अश्लील होर्डिंग्स
अश्लील होर्डिंग्स दिखने और इसको लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा नाराज़गी जताने के बाद राज्य शासन ने होर्डिंग्स के लिए नीति बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत निकायों के लिए मॉडल उपविधि तय की जाएगी। बुधवार जनवरी 13 को मंत्रालय में हुई बैठक में सीएम ने नगरीय क्षेत्रों में होर्डिग्स, पोस्टर और अन्य माध्यमों के संबंध में मॉडल उपविधि तैयार करने के निर्देश नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को दिए। उन्होंने कहा कि यह काम एक सप्ताह में हो जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऐसे प्रावधान किए जाएं, जिसके तहत स्कूल, कॉलेज, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के परिसरों के आसपास होर्डिंग्स नहीं लगाए जा सकें तथा शहरों का सौंदर्यीकरण भी प्रभावित नहीं हो। इसमें सुरक्षा मानकों का ध्यान रखने से लेकर प्रदर्शित किए जाने वाले चित्रों आदि के बारे में गाइड लाइन तय की जाएंगी। बैठक में इस बात पर भी विचार हुआ कि निकाय $खुद होर्डिंग्स स्थापित करें और उन्हें किराए पर उपलब्ध कराएं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग नीति का मसौदा तैयार करेगा। विधि विभाग के परामर्श के बाद इसे मंत्रिपरिषद की अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। नीति के आधार पर उपविधि बनाई जाएगी।
अभियान चलेगा : मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उपविधि बनाकर लागू करने से पहले प्रदेश में अभियान चलाकर अश्लील और आपत्तिजनक होर्डिंग्स हटाने की कार्रवाई की जाए। यह कार्रवाई भारतीय दंड संहिता की धारा 292 और नगर निगमों में वर्तमान में इस संबंध में प्रचलित उपविधियों के अंतर्गत की जाए। बैठक में प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास राघव चंद्रा, प्रमुख सचिव गृह राजन एस कटोच सहित अन्य अ$फसर मौजूद थे।
नियम बनाएं तो बने काम : दरअसल होर्डिंग्स को लेकर अभी कड़े प्रावधान नहीं हैं। विभाग समय-समय पर सामान्य दिशा-निर्देश जारी करता रहता है। कुछ निकायों ने अपनी उपविधियां बना रखी हैं। भोपाल नगर निगम ने वर्ष 2007 में उपविधियां बनाईं थी, जिसे अब तक परिषद की मंज़ूरी नहीं मिली है। जानकारों का कहना है कि इस संबंध में शासन नियम बनाए तो वह निकायों के लिए बाध्यकारी होंगे जिससे कार्रवाई भी हो सकेगी।
सक्रियता की वजह : जनवरी 11 नूतन कॉलेज के सामने से गुज़रते वक्त मुख्यमंत्री की नज़र वहां स्थित चाकलेट बॉडी स्पा के अश्लील होर्डिंग्स पर पड़ी थी। उन्होंने तुरंत निगमायुक्त से इस संबंध में बात कर नाराजगी जताई, जिसके बाद निगम का अमला सक्रिय हुआ शहर भर से इस तरह के होर्डिंग्स हटाए गए। होर्डिंग पर जिस ब्यूटी पार्लर का विज्ञापन था, उसकी संचालक के विरुद्ध मामला भी दर्ज कराया गया। इसके बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भी सक्रिय हुआ।
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Monday, January 18, 2010
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ReplyDeleteहिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें
ReplyDeleteइस नए ब्लॉग के साथ आपका हिन्दी ब्लॉग जगत में स्वागत है .. आपसे बहुत उम्मीद रहेगी हमें .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
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